समाधान मोरे की तीन बहनें-1

ये मेरी असली कहानी है जो कई साल पहले हुई थी। बहुत समय से मैं सोच रहा था कि इस कहानी को लिखूं, लेकिन हर बार रुक जाता था क्योंकि मुझे समझ नहीं आता था कि उन पुरानी यादों को सही तरीके से कैसे लिखूं। लेकिन आज मैंने सोचा कि जो भी हुआ था उसे वैसे ही लिखता हूं जैसे वो मेरी जिंदगी में हुआ था।

मेरा नाम गोलू है और उस समय मैं पुणे के पास एक छोटे से गांव में रहता था। वो कोई बड़ा शहर नहीं था जहां लोग अपने काम में बिजी रहते हैं। हमारा इलाका बहुत छोटा था और वहां लगभग हर आदमी एक-दूसरे को जानता था। अगर सुबह किसी के घर कुछ नया आता था तो शाम तक पूरे गांव को पता चल जाता था। बच्चे साथ में खेलते थे, लोग रोज एक-दूसरे से बात करते थे और त्योहारों में पूरा गांव एक परिवार जैसा लगता था।

मेरे स्कूल के दिनों में मेरे कुछ ही अच्छे दोस्त थे लेकिन उनमें सबसे ज्यादा करीब मेरे दिल के जो था उसका नाम समाधान मोरे था। मैं और समाधान लगभग हर दिन साथ रहते थे। हम एक ही स्कूल में पढ़ते थे, साथ में क्रिकेट खेलते थे, गांव में घूमते थे और कभी-कभी त्योहार या छुट्टियों में एक-दूसरे के घर भी रुक जाते थे। इसी वजह से धीरे-धीरे मैं उसके पूरे परिवार के बहुत करीब हो गया था।

असल में समाधान के घर में उसकी मां, वो खुद और उसकी तीन बहनें थी। उसकी तीनों बहनें मुझसे उम्र में बड़ी थी और बचपन से ही मुझे छोटे भाई जैसा मानती थी। सबसे छोटी बहन का नाम काजल था। वो मुझसे कुछ साल बड़ी थी और हमेशा मजाक करने वाली थी। जब भी मैं उनके घर जाता था तो सबसे ज्यादा वही मुझे छेड़ती थी। कभी मेरे बाल खींच देती थी, कभी हंस कर मुझे छोटू बोलती थी और कभी मेरे साथ बैठ कर गांव की बातें करती रहती थी।