पिछला भाग पढ़े:- समाधान मोरे की तीन बहनें-1
भाई बहन सेक्स कहानी अब आगे-
चाँदनी रात में उस अकेली जगह पर, संजना दीदी ने मेरा हाथ पकड़ रखा था। उनकी आँखों में चमक थी जब उन्होंने कहा कि वह काजल दीदी के पास जाने में मेरी मदद करेंगी। मेरे मन में एक तरफ दोस्त के साथ धोखा करने का डर था, लेकिन संजना दीदी की बातों ने मुझे रोक लिया।
काजल दीदी का ख्याल आते ही मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। उनका चेहरा और उनके भरे हुए स्तन, जो मुझे हमेशा से अपनी तरफ खींचते थे, अब मेरे लिए सबसे जरूरी हो गए थे। संजना दीदी ने मेरी चुप्पी को समझ लिया; उन्होंने जान लिया था कि मैं काजल दीदी के साथ होने के लिए कुछ भी करने को तैयार था।
उन्होंने अपना हाथ थोड़ा और कस दिया और बहुत धीमी आवाज़ में बोली, “मुझे पता है तुम क्या चाहते हो? काजल और उसके भारी स्तन। अगर मेरा साथ दोगे, तो वह दिन दूर नहीं जब तुम उसके इतने करीब होगे जितना तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा।”
मैंने संजना दीदी की ओर देखा और सीधे पूछा, “क्या आप वादा कर सकती हैं कि अगर मैं आपको यहीं अभी चोदूँ, तो आप काजल दीदी को पाने में मेरी मदद करेंगी?”
मेरी बात सुन कर संजना दीदी के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। उन्होंने अपना हाथ मेरे चेहरे पर रखा और धीरे से मेरे पास आकर बोली, “अगर तुम मुझे मज़ा दे सको, तो मैं वो सब करूँगी जो तुम चाहते हो। काजल तक जाने का रास्ता मैं ही बनाऊँगी, पर पहले तुम्हें दिखाना होगा कि तुम मुझे पूरी तरह से खुश कर सकते हो।”
मैंने कहा, “ठीक है दीदी, मैं ऐसा ही करूँगा।”
मैं उनके और करीब गया और उनकी पतली कमर से साड़ी का पल्लू खोलने की कोशिश की। अचानक उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक दिया और बोली, “गोलू, मेरी साड़ी मत खोलो। इसे पहनने में बहुत समय लगता है।”
मैंने उनसे पूछा, “तो फिर मैं आपको कैसे चोदूँगा, दीदी?”
यह सुन कर संजना दीदी के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस धीरे से पलटी और पास के एक पेड़ के पास चली गई।
वहाँ जाकर उन्होंने एक हाथ से पेड़ को पकड़ा और थोड़ा सा झुक गई। इसके बाद, उन्होंने अपने एक हाथ से अपनी साड़ी को पैरों से ऊपर की तरफ उठाया, जिससे उनकी जांघें साफ़ दिखाई देने लगी।
उनकी साड़ी जैसे ही थोड़ी ऊपर हुई, चाँद की रोशनी में उनका निचला हिस्सा पूरी तरह सामने था। उन्होंने लाल रंग की एक बहुत टाइट पैंटी पहन रखी थी, जो उनके नाज़ुक हिस्से पर इतनी फिट थी कि सब कुछ साफ़ उभर कर दिख रहा था। पैंटी के बीच का हिस्सा हल्का सा गीला और गहरा था, जिसे देखकर साफ लग रहा था कि वह इस वक्त बेहद गरम हो रही थी और पूरी तरह तैयार थी।
यह नज़ारा देखते ही मेरा दिमाग काम करना बंद कर गया। मेरी सांसें तेज़ हो गई और दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। मैं एक पल भी रुके बिना उनके बिल्कुल करीब गया। मुझे उनके बदन की गर्माहट महसूस हो रही थी। मैंने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और उनके बड़े, भरे हुए पिछवाड़े को जोर से पकड़ लिया। मेरे हाथों का स्पर्श महसूस होते ही संजना दीदी के मुंह से एक आह निकल गई।
मैंने अपनी उंगलियों से उनकी टाइट पैंटी को धीरे-धीरे नीचे की तरफ खींच दिया। जैसे ही पैंटी नीचे हुई, उनके नाज़ुक हिस्से की लाइन्स से निकलता हुआ वो चिपचिपा गीलापन साफ़ दिखने लगा। उनकी गर्मी की वजह से मेरी उंगलियां भी उस गीलेपन से भीग गई। मैंने बिना डरे अपनी वो गीली उंगलियां उनके चेहरे के पास की और उनसे कहा, “इसे चाटो।”
संजना दीदी ने बिना किसी झिझक के अपना मुंह खोला और मेरी उंगलियों को अंदर ले लिया, और बड़े चाव से उन्हें चाटने लगी। उनकी जीभ की गर्माहट और हरकत ने मुझे पूरी तरह बेकाबू कर दिया। उसी वक्त, मैंने अपने दूसरे हाथ से अपनी पैंट का बटन खोला और उसे नीचे खींच दिया। मैंने अपनी अंडरवियर को भी नीचे सरका दिया, जिससे मेरा लंड पूरी तरह से बाहर आ गया और हवा में लहराने लगा। अब मेरा पूरी तरह खड़ा लंड उनके नाज़ुक हिस्से के बिल्कुल करीब था, जो उनके गीलेपन और मेरी मौजूदगी को साफ़ महसूस कर रहा था।
मैंने अपने दोनों हाथ उनके भरे हुए पिछवाड़े पर मजबूती से टिका दिए। मैं बस तैयार ही था कि अपने लंड को उनके नाज़ुक हिस्से में अंदर डाल सकूँ, कि तभी संजना दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “गोलू, क्या तुम अपना लंड मेरी गांड में डाल सकते हो? मुझे वैसे ही पसंद है।”
उनकी यह बात सुन कर मेरा एक्साइटमेंट और बढ़ गया, मेरा लंड और ज़्यादा कड़क हो गया था और मैं उनकी मांग पूरी करने के लिए बेताब हो गया। मैंने उनके पिछवाड़े पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली और उनके बदन को अपनी ओर खींचते हुए मैं पूरी तरह तैयार हो गया।
मैंने अपने लंड के सिरे को उनकी गांड के तंग छेद पर रखा और धीरे-धीरे उसे अंदर धकेलना शुरू किया। वह जगह इतनी छोटी और टाइट थी कि उसे अंदर जाते महसूस करते ही संजना दीदी के मुंह से एक हल्की सी दर्द भरी आह निकली। लेकिन मैं रुका नहीं; मैंने अपनी पकड़ उनके पिछवाड़े पर और मज़बूत की और एक ही झटके में थोड़ा और जोर लगा कर अपना पूरा लंड उनकी गांड के अंदर तक समा दिया।
संजना दीदी ने दर्द भरी आवाज़ में सिसकते हुए कहा, “गोलू, तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है।” उनके बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई थी। उनकी बात सुनते ही मैंने अपनी कमर को आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया, जिससे रगड़ और बढ़ गई।
मैंने अपनी कमर हिलाना शुरू की, तो संजना दीदी के गले से एक लंबी और गहरी आवाज़ निकलने लगी। वह सिसकारी सीधे उनके गले से बाहर आ रही थी, जैसे उनका सारा सब्र टूट गया हो। वे मजबूती से पेड़ के तने को पकड़ कर खड़ी थी और उनका पूरा बदन कांप रहा था।
“आह… गोलू… और ज़ोर से,” वे हाँफते हुए बोली। उनकी आवाज़ में एक अजीब सी तड़प थी। हर झटके के साथ उनकी साँसें और तेज़ होती जा रही थी और उनके गले से निकलती वो दबी हुई आवाज़ खामोश फिज़ा में गूंज रही थी। मैं बस उनकी उस आवाज़ को सुन रहा था और उनकी हर एक सिसकारी मुझे और पागल कर रही थी। मैंने उनके बदन को अपनी ओर खींच कर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली और पूरी ताकत के साथ धक्के लगाने लगा। संजना दीदी ने अपना सिर आगे की तरफ झुका लिया और उनकी आँखें बंद हो गई, वे पूरी तरह मेरे साथ बह रही थी।
जैसे ही मैं अपनी कमर के झटकों की रफ्तार बढ़ा रहा था, हर धक्के के साथ उनके पिछवाड़े और मेरे लंड के बीच से एक हल्की सी गीली आवाज आ रही थी। वो आवाज़ उस सन्नाटे में बिल्कुल साफ़ सुनाई दे रही थी, और उसे सुन कर मेरी एक्साइटमेंट और बढ़ रही थी। हर बार जब मेरा लंड उनके पिछवाड़े के अंदर पूरा समाता और फिर बाहर आता, तो वो ‘चप-चप’ की आवाज़ मेरे कानों में घुल रही थी, जो सुनने में किसी म्यूजिक जैसी लग रही थी। संजना दीदी भी उस आवाज़ को महसूस कर पा रही थी, उनकी सिसकियाँ अब और भी गहरी और बेताब होती जा रही थी।
संजना दीदी ने पीछे मुड़ कर मुझे देखा, उनकी आंखें नशे में डूबी हुई थी और पसीने से भीगा उनका चेहरा और भी कातिल लग रहा था। उन्होंने ज़ोर से सांस लेते हुए कहा, “गोलू, आज तो तुमने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया है, ऐसा लग रहा है जैसे आज मेरी जान ही निकल जाएगी।”
उनकी बात सुन कर मैंने उनके पिछवाड़े को कस कर दबाया और उनके कान के पास झुक कर फुसफुसाया, “जान तो अभी और निकलेगी दीदी, अभी तो मैंने बस शुरुआत की है।” मेरी बात सुनते ही वह पूरी तरह से झूम उठी और पेड़ को और मजबूती से पकड़ लिया।
मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। हर धक्के के साथ संजना दीदी के गले से निकलती आहें अब चिल्लाहट में बदलने लगी थी। उनकी उंगलियाँ पेड़ की छाल को बुरी तरह खरोंच रही थी।
“आह… हाँ… और ज़ोर से मारो गोलू!” उन्होंने अपनी कमर को मेरे धक्कों के साथ पीछे की तरफ जोर से झटका देते हुए कहा।
मैं भी बेकाबू हो रहा था। मैंने अपना एक हाथ उनके पिछवाड़े के नीचे से होते हुए उनके आगे के हिस्से पर ले जाकर उसे जोर से मसला। यह अचानक हुआ स्पर्श उनके लिए बर्दाश्त से बाहर था। उन्होंने अपना सिर पीछे की तरफ पटक दिया और उनके मुंह से एक लंबी, तड़पती हुई चीख निकल गई। मैं अब अपनी पूरी ताकत के साथ उनके पिछवाड़े पर झटके दे रहा था, और वह हर धक्के के साथ पूरी तरह मेरी बाहों में समाती जा रही थी।
मैंने उनके पिछवाड़े पर जोर का झटका दिया और हाँफते हुए बोला, “दीदी… मैं बस आने वाला हूँ!”
मेरी बात सुनते ही उन्होंने तुरंत पीछे मुड़ कर मुझे देखा। उनकी आँखें प्यास से भरी थी। उन्होंने कहा, “गोलू, इसे बाहर मत निकालना! इसे मेरे मुँह में लो।”
इतना कहते ही वे घुटनों के बल मेरे सामने झुक गई। उन्होंने बड़ी बेताबी से मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। उनकी जीभ की गर्मी और उनके मुँह की पकड़ ने मुझे आखिरी हद तक पहुँचा दिया। मैं अब खुद को रोक नहीं पा रहा था। एक जोरदार झटके के साथ, मैंने अपना सारा सफ़ेद पानी उनके मुँह के अंदर छोड़ दिया। वह उसे बड़े चाव से अंदर लेती रहीं, जैसे वह मेरी हर एक बूंद की प्यासी थी।
सफ़ेद पानी उनके मुँह में गिरते ही संजना दीदी ने उसे बड़ी शिद्दत से अंदर लिया। उन्होंने अपना मुँह पूरी तरह से मेरे लंड के चारों ओर कस लिया था, जैसे वो मेरी एक भी बूँद बाहर नहीं जाने देना चाहती थी। जब उनका मुँह पूरी तरह भर गया, तब उन्होंने धीरे से उसे बाहर निकाला और अपनी जीभ से होंठों को साफ़ किया।
उनकी आँखों में एक अलग ही सुकून और चमक थी। उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए एक धीमी सी मुस्कान दी और अपने हाँफते हुए बदन को संभालते हुए वहीं घास पर बैठ गई। उस पल वहां खामोशी छा गई थी, सिर्फ हम दोनों की तेज़ सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। उन्होंने अपना हाथ मेरे पैर पर रखा और धीरे से बोली, “तुमने तो आज मुझे बिल्कुल बेदम कर दिया, गोलू।” मैं अभी भी उसी नशे में चूर खड़ा था, और हम दोनों उस पल को महसूस कर रहे थे। कुछ देर बाद जब हमारे सांसे आम हुई तो हम दोनों घर लौट आए।
अगली सुबह जब मेरी आँख खुली, तो सब कुछ बिल्कुल बदला-बदला सा लग रहा था। हवा में एक अलग ही ताजगी थी, लेकिन मेरा दिमाग अभी भी कल रात की यादों में खोया हुआ था। यह पहली बार था जब मैंने किसी लड़की के साथ इतनी गहराई से सब कुछ किया था।
संजना दीदी के साथ बिताए वो पल बार-बार मेरी आँखों के सामने आ रहे थे। वो एहसास, जब मैंने अपना लंड उनके पिछवाड़े में अंदर डाला था, और फिर जिस तरह उन्होंने बड़ी चाहत से मेरा सारा सफ़ेद पानी अपने मुँह में लिया था—वो यादें आज भी मेरे बदन में एक सिहरन पैदा कर रही थी।
लेटे-लेटे मैं बस यही सोच रहा था कि जब काजल पूरी तरह तैयार होगी और मुझे अपना समय देगी, तो मैं उसके साथ क्या-क्या करूँगा। मैं सोच रहा था कि कैसे मैं उसके सामने झुकूँगा और अपने लंड को उसके मुँह में डालूँगा। बस यही ख्याल आते ही मेरा लंड फिर से कड़क होने लगा और कल रात का वो पूरा मंजर मेरे दिमाग में ताज़ा हो गया।
नहाने के बाद मैं सीधा समाधान के घर गया। संजना दीदी किचन में काम कर रही थी। समाधान का घर बहुत छोटा सा है, बस एक ही किचन और एक कमरा है। जब मैं दूसरे कमरे में गया, तो देखा कि समाधान, उसकी माँ और काजल दीदी बिस्तर पर बैठे कुछ बात कर रहे थे। मुझे अंदर आते देख काजल दीदी ने मुझे एक छोटी सी मुस्कान दी। उनके होंठ बहुत पतले हैं।
उन्हें देख कर मेरे मन में बस यही ख्याल आया कि जब वो अपने उन पतले होंठों से मेरा लंड चूसेगी, तो कैसा महसूस होगा। मैं बस उन्हें ही देख रहा था और मन ही मन उस पल के बारे में सोच रहा था जब वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर उसे अपने पतले होंठों से दबाएंगी और चूसेगी। वो सब तो अपनी बातों में लगे थे, लेकिन मेरा पूरा ध्यान बस उनके होंठों और उस एहसास पर था जो मुझे आने वाले समय में महसूस होगा।
बात-चीत चल ही रही थी कि समाधान ने मेरी तरफ देखा और बोला, “गोलू, काजल दीदी को आज जाना है, क्या तुम उन्हें बस स्टॉप तक छोड़ सकते हो? मुझे और संजना दीदी को मार्केट जाना है।”
मैंने बिना किसी झिझक के कहा, “हाँ समाधान, ठीक है।” यह सुन कर मुझे अंदर ही अंदर खुशी हुई कि मुझे काजल दीदी के साथ अकेले जाने का मौका मिल रहा है।
काजल दीदी तैयार होकर बाहर आई और मेरी बाइक पर बैठ गई। उन्होंने मुझे पीछे से मजबूती से पकड़ रखा था। उनकी कुर्ती के अंदर से मुझे उनके भारी और बड़े स्तनों का साफ अहसास हो रहा था। वो मेरे काफी करीब चिपकी हुई थी। जब भी बाइक किसी स्पीड ब्रेकर पर जाती, तो वो और जोर से मेरे साथ लग जाती और मुझे अपनी पीठ पर उनके निप्पल्स का अहसास होता था।
मेरा मन हुआ कि मैं वहीं बाइक रोक दूँ, उनकी कुर्ती ऊपर उठाऊँ और उनके उन नरम स्तनों को जोर-जोर से दबाने लगूँ। मुझे बहुत ज्यादा गर्मी चढ़ रही थी, लेकिन मैंने किसी तरह खुद को काबू किया और बाइक चलाता रहा। जब हम बस स्टॉप पहुँचे और वो नीचे उतरीं, तो पास से उनका गोरा चेहरा बहुत ज्यादा प्यारा और सुंदर लग रहा था।
उन्होंने एक लंबी सांस ली और सीधे मेरी आंखों में देख कर बोली, “गोलू, सुनो, संजना दीदी ने मुझे तुम्हारे मन की बात बता दी है।”
यह एक-दम अचानक हुआ। मैं पूरी तरह से हैरान रह गया और मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं क्या कहूँ या कैसे रिएक्ट करूँ। मैंने बस हड़बड़ाते हुए उनसे पूछा, “क्या… क्या बताया उन्होंने तुम्हें?”
काजल दीदी ने बात शुरू की। उन्होंने कहा, “दीदी ने मुझे बताया कि तुम शुरुआत से ही मुझे पसंद करते हो। लेकिन सुनो गोलू, मैं हमेशा से तुम्हें अपने छोटे भाई की तरह मानती आई हूँ। और वैसे भी, अब मेरी शादी हो चुकी है, तो हमारे रिश्ते को खराब मत करो।”
काजल दीदी जो कह रही थी, वह सच ही था। मेरे पास उनसे बहस करने या उन्हें अपनी बात समझाने की बिल्कुल हिम्मत नहीं थी। मैं बस चुप-चाप खड़ा होकर बस का इंतज़ार करता रहा। आधे घंटे बाद बस आई और वो उसमें बैठ कर चली गई। मैं घर वापस आ गया और लेटने की कोशिश की, लेकिन काजल दीदी के इस तरह मना करने से मेरा दिमाग बहुत खराब हो रहा था।
बेचैनी के मारे चार घंटे बाद मैं फिर से समाधान के घर पहुँच गया। अच्छी किस्मत थी कि समाधान घर पर नहीं था। संजना दीदी बिस्तर पर लेटी अपना फ़ोन चला रही थी और उनकी माँ बाहर कपड़े धो रही थी। मुझे वहाँ देख संजना दीदी मज़ाक करने लगी, “क्या बात है गोलू, कल रात के बाद से मेरी गांड बहुत दुख रही है, तेरा लंड बहुत बड़ा है ना।” वो ये बोल कर जोर-जोर से हँसने लगी, लेकिन मैं बस गुमसुम खड़ा रहा। मुझे चुप देख कर उन्होंने पूछा, “क्या हुआ गोलू, क्यों चुप खड़ा है?”
मैंने भारी मन से उन्हें सब बता दिया। मैंने कहा, “सुबह काजल दीदी के साथ मेरी बात हुई थी, उन्होंने मुझे साफ मना कर दिया।”
संजना दीदी ने अपना फोन एक तरफ रखा और मेरी तरफ गौर से देखने लगी। उनके चेहरे की हंसी गायब हो गई थी। उन्होंने पूछा, “अच्छा? उसने क्या कहा तुमसे?”
मैंने उन्हें वो सब बता दिया जो बस स्टॉप पर काजल दीदी ने मुझसे कहा था। संजना दीदी ने मेरी बात शांति से सुनी और फिर बिस्तर पर थोड़ा और पीछे होकर बैठ गई, जैसे वो मेरी पूरी बात समझने की कोशिश कर रही हों।
कुछ पल की खामोशी के बाद संजना दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “गोलू, अगर तुझे सेक्स करना है तो तू मेरे साथ जब चाहे तब कर सकता है, पर तुझे काजल दीदी ही क्यों चाहिए?”
मैंने उनकी तरफ देखते हुए साफ़ कह दिया, “मुझे आप नहीं चाहिए, मुझे सिर्फ काजल दीदी ही चाहिए। और अगर आपने मेरे लिए कुछ नहीं किया, तो आज के बाद मैं आपको हाथ भी नहीं लगाऊंगा।”
संजना दीदी का अपने पति से तलाक हो चुका था और उनकी अपनी जिस्मानी जरूरतें काफी ज्यादा थी। जैसे ही उन्होंने मेरे मुंह से ये सुना कि मैं उन्हें दोबारा कभी नहीं छुऊंगा, तो उनके चेहरे का रंग उड़ गया और वो बुरी तरह डर गई।
उन्हें बहुत अच्छे से पता था कि हमारे इस छोटे से कस्बे में कोई और मर्द ऐसी चीजें करने के लिए तैयार नहीं होगा। वो जानती थी कि अगर मैंने उनके साथ इस तरह का रिश्ता तोड़ दिया और उन्हें छूना बंद कर दिया, तो उनकी प्यास बुझाने वाला और उनके मजे के लिए कोई दूसरा इंसान नहीं बचेगा।
उन्हें अपनी उस खाली और तड़पती हुई जिंदगी का डर सताने लगा। इसी वजह से वो घबराहट में बिस्तर पर इधर-उधर होने लगी और परेशान होकर मेरी तरफ देखने लगी, क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि उनकी मौज-मस्ती के लिए अब सिर्फ मैं ही एक आखिरी रास्ता बचा था।
संजना दीदी ने मेरी आँखों में देखा और थोड़ी धीमी आवाज़ में बोली, “गोलू, मेरी बात समझने की कोशिश कर। काजल अभी तैयार नहीं है, अगर तू जबरदस्ती करेगा तो सब बिगड़ जाएगा। तुझे थोड़ा सब्र करना होगा। तू बस कुछ दिन रुक जा, मैं कुछ ना कुछ जुगाड़ करती हूँ और उसे मना लूंगी। तब तक के लिए, जब भी तेरा मन करे, तू मेरे साथ मज़े कर सकता है।”
मैंने अपना मन पक्का कर लिया था। मैंने सख्ती से उनकी तरफ देखते हुए कहा, “नहीं, अब और इंतज़ार नहीं। मैंने तय कर लिया है कि जब तक आप काजल दीदी का कोई पक्का इंतजाम नहीं कर देती, मैं आपको हाथ भी नहीं लगाऊंगा। अब यह आपकी ज़िम्मेदारी है।”
संजना दीदी ने मेरी ज़िद देखी तो वो थोड़ी और नज़दीक आई और मुझे मनाने के अंदाज़ में बोली, “देख गोलू, तू थोड़ा सब्र कर ले, मुझे काजल से बात करने और उसे तैयार करने में कुछ दिन का समय तो लगेगा ही। तब तक अगर तुझे बहुत ज़्यादा बेचैनी हो रही है, तो तू आरती दीदी के साथ मज़े कर सकता है। मैं उनसे बात कर लूँगी।”
सच कहूँ तो मैंने कभी आरती दीदी के बारे में इस तरह से नहीं सोचा था। वह बहुत शर्मीली थी और हमेशा अपनी शादी की मुश्किलों में उलझी रहती थी। उनका पति शराबी था और अक्सर उन्हें मारता था, जिस वजह से वह घर की जिम्मेदारियों और दुखों में ही दबी रहती थी। इसी वजह से मेरा ध्यान कभी उन पर नहीं गया।
पर अगर संजना दीदी और आरती दीदी को आमने-सामने देखें, तो आरती दीदी देखने में कहीं ज्यादा सुंदर थी। अगर मुझे उन दोनों में से किसी एक को चुनना हो, तो मैं हमेशा आरती दीदी को ही पसंद करूँगा।
मैंने उन पर शक करते हुए कहा, “आप फिर से झूठ बोल रही हैं। आरती दीदी भला मेरे साथ सोने के लिए तैयार क्यों होंगी?”
संजना दीदी ने तुरंत जवाब दिया, “वो किसी के साथ भी सो सकती हैं।”
मैं उनकी बात का मतलब नहीं समझ पाया, तो वो और साफ़-साफ़ बताते हुए बोली, “गोलू, ये बात मैंने आज तक किसी को नहीं बताई है, सिर्फ तुझे बता रही हूँ। कुछ महीने पहले आरती दीदी के घर में पैसों की बहुत कमी हो गई थी। जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो घर चलाने के लिए उन्होंने पैसे लेकर मर्दों के साथ सोना शुरू कर दिया
ये सुन कर मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न हो गया था। मुझे ये बात पचाने में बहुत मुश्किल हो रही थी कि आरती दीदी, जो हमेशा इतनी शर्मीली बन कर रहती थी, वो पैसों के लिए किसी भी मर्द के साथ सो सकती थी। मुझे उनकी बात पर बिल्कुल यकीन नहीं हो रहा था, इसलिए मैंने गुस्से में उनसे कहा, “नहीं, आप फिर से झूठ बोल रही हैं। आरती दीदी ऐसी बिल्कुल भी नहीं हैं, आप सिर्फ मुझे बहकाने की कोशिश कर रही हैं।”
संजना दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “गोलू, मैं तुमसे झूठ नहीं बोल रही हूँ।” इसके बाद उन्होंने अपना फ़ोन निकाला और एक वेबसाइट खोल कर मुझे दिखाई।
स्क्रीन पर जो दिखा, उसे देख कर मैं बिल्कुल हैरान रह गया। फोटो में एक लड़की बिना कपड़ों के खड़ी थी। उसने चेहरे पर एक काला नकाब पहन रखा था जिससे उसका चेहरा तो नहीं दिख रहा था, लेकिन उसकी आँखें साफ पहचान में आ रही थी—वो आरती दीदी ही थी। उनका नाम वहां ‘सोना’ लिखा हुआ था। वहां उनकी कुछ फोटो थी, जिनमें वो कभी अपने बड़े स्तन दिखा रही थी, तो कभी अपने नाजुक हिस्से की फोटो डाल रखी थी।
फोटो के नीचे उनके रेट लिखे हुए थे: एक घंटे के एक हज़ार रुपये, पूरी रात के छह हज़ार रुपये, और पूरे दिन के लिए दस हज़ार रुपये। उन्होंने वहां साफ़ लिखा था कि अगर कोई उन्हें एक्स्ट्रा पैसे दे, तो वो क्या-क्या करेंगी—जैसे कि मुंह में लंड लेना या पेशाब पीना। ये सब देख कर मेरा दिमाग काम करना बंद हो गया था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस आरती दीदी को मैं जानता था, वो इंटरनेट पर अपना शरीर बेच रही थी।
संजना दीदी ने फोन बंद किया और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली, “अब बता गोलू, जब तक मैं काजल का कुछ इंतजाम करती हूँ, तब तक क्या तू सोना के साथ मज़े कर सकता है?”
उनकी बात सुन कर मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल होने लगी थी। आरती दीदी का वो रूप देख कर मैं दंग तो था, लेकिन अब मेरे मन में उनके लिए एक अलग ही लालच पैदा हो गया था। मैंने एक लंबी सांस ली और पूरी हिम्मत जुटा कर कहा, “हाँ दीदी, मैं सोना दीदी के साथ मज़े करने को तैयार हूँ।”