पिछला भाग पढ़े:- ट्रेन में मिली 2 अंजान बहनों की चुदास-1
हिंदी सेक्स कहानी में अब तक आपने पढ़ा था कि ट्रेन के सफर में रिया के साथ ऊपर-ऊपर से मज़े लेने के बाद उसकी दीदी उसकी जगह खड़ी हो गई थी। वो मेरी तरफ अपनी गांड करके खड़ी हुई थी, जिसकी वजह से मेरा एक-दम खड़ा हुआ लंड उनकी गांड से टकरा रहा था। अब आगे-
रिया की दीदी जिनका नाम अनिता था। जो मैंने आपको अपनी कहानी के पहले भाग में बताया था। वो अब मेरे सामने अपनी बड़ी गांड कर के खड़ी हुई थी।
मैं अनिता दीदी से पीछे हटने की कोशिश कर रहा था। लेकिन पीछे जगह ना होने की वजह से मैं कुछ नहीं कर सकता था। मुझे ये सब अच्छा नहीं लग रहा था। मैं सोच रहा था कि रिया की दीदी क्या सोचेगी मैं क्या कर रहा था। और अगर रिया ने मुझे दीदी के साथ ऐसे करते हुए देख लिया तो वो क्या सोचेगी?
इसी सोच से मैं परेशान हो रहा था। मेरा लंड अनिता दीदी की गांड से टकराने की वजह से पैंट के अंदर ही फड़फड़ा रहा था। मुझसे भी अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं हो रहा था, तो मैंने सोचा जो होगा देख जाएगा। यह सोच कर मैं अपने लंड को अनिता दीदी की गांड पर रगड़ने लगा।
कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए। पहले-पहले अनिता दीदी मुझसे दूर होने की कोशिश कर रही थी। पर जगह ना होने की वजह से वो आगे नहीं जा पाई। पर कुछ ही देर बाद वो थोड़ा पीछे हुई जिससे मेरा लंड और अच्छे से गांड से टकराने लगा।
अब शायद अनिता दीदी भी पूरी तरह से गर्म होने लगी थी। इसलिए वो भी अंधेरे का फ़ायदा उठा कर अपनी गांड को मेरे लंड से रगड़ रही थी। वो अपनी गांड को अच्छे से हिला-हिला के मेरे लंड से रगड़ रही थी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। इतने में रिया ने सीट पर रखा मेरा हाथ उठाया और अनिता दीदी की गांड पर रखते हुए मेरे हाथ को अनिता दीदी की गांड पर फिराने लगी।
मैं हैरान हो गया कि रिया ने मुझे अनिता दीदी के साथ ऐसा करते हुए कब देखा। मुझे तो यह सब अजीब लग रहा था। पर फिर रिया ने मेरे हाथ को नीचे खींचा जैसे वो मुझसे कुछ बोलना चाहती हो। मैं नीचे को झुका और रिया के मुंह के पास मुंह किया। रिया ने जल्दी से मुझे एक लिप किस्स की उम्म्हाअ उम्म्ह्छाअ, और फिर बोली-
रिया: लगता है मेरी दीदी की गांड पसंद आ गई तुमको।
मैं (घबराते हुए बोला): नहीं-नहीं ऐसा नहीं है। वो इस भीड़ की वजह से हुआ, सच में।
रिया: अरे कोई बात नहीं। मेरी दीदी की गांड है ही इतनी मस्त कोई भी दीवाना हो जाए। और देखो दीदी को भी तुम्हारा लंड पसंद आ गया है। तभी तो अपनी गांड को ऐसे रगड़ रही है तुम्हारे लंड पर। आज दीदी को अच्छे से मजे देना।
यह बोल के उसने मुझे पीछे को हटाया। मैं फिर से अच्छे से खड़ा हो गया। अनिता दीदी अपनी गांड को अच्छे से हिला-हिला कर मेरे लंड पर रगड़ रही थी। अब मुझे किसी बात की चिंता भी नहीं थी, क्योंकि रिया भी चाहती थी कि मैं उसकी दीदी को मजे दूं।
यह ही सोच के मैंने अपने दोनों हाथों को अनिता दीदी की गांड पर रखा और तेज़-तेज़ गांड को मसलने लगा। अनिता दीदी भी अपनी गांड को हिला-हिला कर मेरा साथ दे रही थी। कुछ ही देर बाद रिया ने मेरे पैंट की चेन खोली। चेन खुलते ही अंदर से मेरा लंड एक-दम बाहर निकल गया। पूरा तना हुआ लोड़ा सीधा अनिता दीदी की गांड से टकराया।
(जब अनिता दीदी खड़ी हुई थी, तो मैं जल्दी-जल्दी में चड्ढी को ऊपर उठाना भूल गया था। इसलिए चेन खुलते ही लंड बाहर आ गया)।
मेरा लंड अनिता दीदी की गांड से जैसे ही टकराया, उनको महसूस हुआ कि मैंने लंड बाहर निकाल लिया है। तो वो थोड़ा और पीछे हुई और मेरे नंगे लंड पर अपनी गांड को जोर-जोर से रगड़ने लगी। कुछ ही देर बाद रिया थोड़ी खड़ी हुई और उसने झटके से अनिता दीदी की कुर्ती ऊपर करके उसकी सलवार को एक ही झटके में नीचे कर दिया।
अनिता दीदी ने पैंटी नहीं पहनी थी यह मुझे तभी पता पड़ा। रिया अपनी सीट पर बैठ गई और आगे का खेल देखने लगी। अब मेरा लंड लोहे जैसा कड़क हो गया था और अनिता दीदी की नंगी गांड से टकरा रहा था।
तभी अनिता दीदी थोड़ा आगे हुई और अपनी गांड को थोड़ा हिल कर पीछे ली। इससे मेरा लंड अनिता दीदी की गांड के बीच की दरार में गीली हुई चूत को ठोकर मारने लगा। मेरा लंड जैसे ही उनकी चूत से टकराया, मानो मेरे भीतर एक हल्की सी कंपकंपी दौड़ गई। अब अनिता दीदी अपनी गांड को हिला-हिला के मेरे लंड को अपनी चूत में रगड़ रही थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। कुछ देर तक ऐसे ही सब चलता रहा और फिर शायद अनिता दीदी अब ये सब बर्दाश्त नहीं कर पा रहीं थी।
उन्होंने एक बार पीछे देखा और फिर अनिता दीदी आगे को झुक गई, जिससे कि मेरा लंड उनकी चूत पर अच्छे से लग सके। फिर वो अपनी चूत को मेरे लंड के टोपे पर रगड़ने लगी। मैं भी अब उसकी कमर को पकड़ के धक्के देने लगा, पर मेरा लंड फिसल रहा था।
अनिता दीदी ने अपना एक हाथ पीछे किया और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी गीली चूत के मुँह पर रगड़ने लगी। मैंने इस मौके का फायदा उठाया और जोर से धक्का मार दिया। आधा लंड अनिता दीदी की चूत को फाड़ते हुए अंदर घुस गया।
मेरा धक्का अनिता दीदी सह नहीं पाई तो उसने अपने दोनों हाथों को पीछे करके मुझे रोका।
मैं रुक गया और उनके ऊपर झुक कर अपने दोनों हाथों को उसकी कुर्ती के अंदर डाल दिया। फिर ब्रा के ऊपर से ही उसके दोनों स्तनों को मसलने लगा। अनिता दीदी अपने दोनों हाथों को कुर्ती के ऊपर से ही मेरे हाथों पर रख कर दबाने लगी। कुछ देर मैं ऐसे ही करता रहा।
मेरा आधा लंड अनिता दीदी की चूत में था। उसकी चूत अन्दर से बहुत गरम थी। अब अनिता दीदी भी अपनी कमर को आगे-पीछे करने लगी। शायद उनका दर्द थोड़ा कम हो गया था और अब वो मेरे लंड को अपनी चूत में पूरा अंदर तक लेना चाहती थी।
मैं भी अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था, तो मैंने अनिता दीदी की चूचियों को जोर से दबाया। फिर अपने दोनों हाथों को पीछे लाते हुए उसकी गांड पर रखा और जोर से धक्का मारा। इस बार पूरा लंड अनिता दीदी की चूत में उतार दिया। अनिता दीदी कसमसा कर अपने मुँह को हाथ से दबाते हुए हल्की सी सिसकियां लेने लगी। भीड़ की वजह से वो चिल्ला भी नहीं सकती थी।
जैसा ही मेरा पूरा लंड उसकी चूत में अंदर तक गया, तो उसकी गरम चूत ने पूरा रस मेरे लंड पर छोड़ना शुरु कर दिया। मेरा मोटा लंड का अपनी चूत में एहसास होते ही वो झड़ गई थी। अनिता दीदी मेरे लंड पर पूरी तरह सेे झड़ गई थी। मेरा पूरा लंड उनकी चूत के पानी से गीला हो चुका था।
इधर रिया भी सब कुछ देख कर गरम हो गई थी, तो उसने मेरे एक हाथ को पकड़ के अपनी जांघों पर रख के सहलाती हुई मेरे टेस्टीकल को मसलने लगी।
इससे मैं और ज्यादा जोश में आ गया था। मैं अनिता दीदी की गांड को एक हाथ से ही कस कर पकड़ के धक्के मारने लगा। अब अनिता दीदी भी मेरा साथ देने लगी थी।साथ ही में दीदी हल्की-हल्की सिसकियां भी ले रही थी आआहह आहहहह आहहहा।
मेरा लंड पूरा तरह से गीला हो गया था, इसलिए आराम से अनिता दीदी की कसी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था और अनिता दीदी के झड़ने की वजह से हर एक धक्के के साथ ट्रेन में हल्की पच-पच की आवाज़ आ रही थी।
इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में। अगर कहानी अच्छी लगे तो फीडबैक जरूर दे, और किसी लड़की को संपर्क करना है तो वो मेरी मेल पे रिप्लाई दे। मेरी मेल आईडी है-
[email protected]