हेलो दोस्तों, मेरा नाम रोहन है और मैं 19 साल का हूं, कोलकाता के करीब एक शहर से। तो ये मेरी गे सेक्स कहानी है कुछ महीने पहले की, जब मैंने एक अंजान आदमी के साथ गे सेक्स किया।
तो कहानी ऐसी है कि मैं ट्यूशन से घर आ रहा था, अचानक मुझे ज़ोर से सुसु आ गई। तब मैं एक शॉर्टकट से जा रहा था। वो ब्रिज के पास से एक छोटा सा रास्ता था, और वो रास्ता थोड़ा अँधेरे वाला था।
मैं सड़क के किनारे एक झाड़ी में मूत रहा था। तभी अचानक वहां एक और आदमी मूतने आया। उसकी उमर लगभग 26-27 की थी, और बॉडी थोड़ी एथलेटिक टाइप थी। उस आधे अँधेरे में उसके लंड को देख कर मैं हैरान हो गया। वो करीब 6 इंच लंबा, काला, और बहुत बालों वाला था। मैं उसके लंड को देखता रह गया, और ये देख कर वो उसका लंड हिलाने लगा। उसका लंड अब आधा इंच और भी बड़ा हो गया।
अचानक उस आदमी ने बोला: छूना है तो छू कर देख सकते हो इसको।
ये सुन कर मैं हैरान हो गया। फिर मैं जाने ही वाला था कि वो आदमी ने अचानक मेरे पास आ कर मेरा हाथ पकड़ लिया, और अपने लंड के ऊपर रख दिया। उसके ऐसा करते ही मानों मेरे तन से करंट बह गया। वो मेरे हाथों से उसके लंड को सहलाने लगा। उसका लंड अब काफी गरम था।
वो बोला: क्या बाबू, इसका स्वाद लेना है तुम्हें?
मैं ये सुन कर थोड़ा चौक गया, और हाथ हटाने वाला था, कि उसने मेरे हाथ को पकड़ा, और थोड़ी झाड़ियों के अंदर अँधेरे में ले गया। फिर वो मेरी गर्दन को चूमने लगा और मेरी छाती और गांड को दबाने लगा।
फिर वो मेरा सिर पकड़ कर घुटनों के बल बिठा दिया, और बोला: अरे बाबू, अब गरम किये हो तो ठंडा भी तो करना पड़ेगा ना। अब मैं यहां रंडी कहां से लाऊँगा?
मैंने ऊपर देखा और आधे अँधेरे में पहली बार उसके चेहरे की तरफ देखा। पर अँधेरे में उसका चेहरा साफ़ नहीं था। मुंह देख कर लगा कि उसकी उमर 26-27 की होगी, और आस-पास का कोई बस्ती में रहने वाला होगा। मुँह पर दाढ़ी नहीं थी, और बहुत सुंदर जॉलाइन थी।
अँधेरे में उसकी कामुक आँखें मानो जल रही थी। मैं उसकी तरफ देखता हुआ मुस्कुराया और लंड को हिलाने लगा। फ़िर मैंने जल्दी नज़र नीचे की, और उसके लंड की तरफ देखा।
उसका लौड़ा काफी बड़ा और काला था, और बहुत जंगली था। पर उसकी गेंदों में कोई बाल नहीं थे। मैंने अब उसके लंड के टोपे को अपनी जीभ की टिप से टच किया। उसके लंड से टॉयलेट वाला स्वाद आ रहा था। वो मुँह से एक हल्की सी आवाज निकाला और बोला-
वो: अरे बाबू, जल्दी शुरू करो। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
अब मैं उसके लंड को एक हाथ से पकड़ कर धीरे-धीरे चूसने लगा। उसके मुँह से गालियों के साथ प्रसन्नता की आवाज़ आने लगी।
वो: मेरी जीएफ भी मेरा लौड़ा ऐसे नहीं चूसती। तुम तो मुझे चर्मसुख दे रहे हो।
वो मानो अब ख़ुशी से पागल हो चुका था। अब वो मेरा सर पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर मेरे मुँह में उसका लौड़ा हिलाने लगा। मैं बैलेंस के लिए कस के उसकी कमर और गांड को पकड़े हुए था।
उसका लंड मेरे गले की दीवार को छूने लगा, और मेरी आँखों से पानी निकलने लगा। वो कुछ देर बाद उसने लंड बाहर निकाला और बोला-
वो: तकलीफ़ हो रही है बाबू? ठीक है, तुम धीरे से करो।
मैं फिर उसके लंड और गेंदों को चूसने लगा। वो अब मेरे बालों को हाथ से सहलाने लगा। करीब 5 मिनट बाद उसने पूछा-
वो: क्या पहली बार है तुम्हारा?
मैंने हां में सर हिलाया।
फिर मैंने कहा: दूसरी बार।
वो: तो पहली बार कौन था?
मैं: एक दूर के रिश्ते के मामा।
वो: तुम सब कुछ करोगे?
मैंने ऊपर-नीचे सारा हिलाया।
वो: अरे गांडू, तुम तो बड़े खिलाड़ी निकले। मुझे भी तो चखने दो तुम्हारी गांड।
मैंने कहा: यहाँ? कोई देख लेगा तो?
उसने बोला: कुछ नहीं होगा।
पर मैंने इंकार किया।
वो थोड़ा सोच के बोला: ठीक है, ब्रिज के नीचे एक छोटी सी दुकान है मेरे दोस्त की। आज सोमवार है, तो वहां की सारी दुकानें बंद हैं। उसकी दुकान में पीछे से घुसने कि एक चाबी है मेरे पास। वहां कोई नहीं आएगा।
आख़िरकार मैं सहमत हो गया। वो दुकान उन झाड़ियों के विपरीत में ही थी, पर बहुत छोटी थी। इतनी छोटी की चार लोगों से ज़्यादा अंदर जाना मुश्किल था। वो लाइट जलाने की कोशिश किया, पर कुछ कनेक्शन की समस्या हो रही थी। पर बाहर गली से थोड़ी रोशनी आ रही थी। अब वो फिर से शुरू हो गया। 5 मिनट चूमने के बाद वो मुझे गांड दिखाने बोला। फिर एक छोटी सी टॉर्च की रोशनी जला कर मेरी गांड को देखने लगा।
वो: क्या मस्त गांड है रे रंडी!
वो मेरी गांड की छेद में उसकी उंगली डालने लगा। करीब 1 साल बाद कोई मेरी गांड चोदने वाला था आज। फिर वो मेरी गांड में बहुत सारी थूक लगा कर, और खुद के लंड में थूक लगा कर, मेरे छेद में उसका लंड सेट किया। उसके बाद अचानक से पूरा अंदर डाल दिया। मैं दर्द से कांप उठा, और गांड हटा ली। मेरे मुँह से आउच जैसी आवाज़ निकल आई।
वो: दर्द हो रहा है?
मैंने हां में सर हिलाया।
मुख्य: थूक से नहीं होगा, कुछ और ढूंढते हैं।
ये बोल कर वो एक शेल्फ में कुछ ढूंढने लगा। कुछ देर बाद वो एक डब्बा ले आया।
वो: ये बोरोलीन है, और कुछ तकलीफ़ नहीं होगी।
खुद ही मेरी गांड में अच्छे से बोरोलीन लगा कर फिर से वो कोशिश करने लगा। अब आसान से अंदर चला गया। मेरे मुँह से कामुक आवाज़ निकलने लगी।
वो: क्या मस्त गांड है साली, मेरी जीएफ से भी अच्छी, मन करता है कि इसे चोद के फाड़ दूं।
मेरे बालों को कस के पकड़ कर, और मुँह में टॉर्च लेकर, वो चोदने लगा एक कुत्ते की तरह। कुछ देर बाद वो मुझे पीठ के बल लेट जाने को कहा, और फिर मेरे ऊपर आ कर मुझे पकड़ कर पेलने लगे। अब वो टॉर्च भी बंद थी, और पूरे अँधेरे में एक आदमी मेरे ऊपर लेट कर मुझे पेल रहा था।
मैं उसके बालों को कस के पकड़ता हूँ। कुछ देर बाद वो मेरी टांगों को अपने कंधों पर उठा लिया। अब उसका लंड और भी अंदर जा रहा था। मैं ख़ुशी से चिल्लाने लगा, पर वो मेरे मुँह में उंगली डाल दिया ताकि ज़्यादा आवाज़ ना हो। कुछ देर बाद उसने मेरे कान के पास आके कहा-
वो: मेरा अब निकलने वाला है, कहां झाड़ू, अंदर?
पर मैंने अन्दर झड़ने को मना किया: नहीं, क्लीन करने में प्रॉब्लम होगी। आप मेरे मुँह में झाड़ दो।
वो फिर से मुझे घुटनों की बाल बैठने बोला। थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी, पर मैं बैठ गया। फ़िर से वो मुझे लंड चूसने को कहा। उसकी झांटों के बालों से मर्दों वाली खुशबू आ रही थी। 3 मिनट में चूसने के बाद अचानक वो मेरे मुँह में निकल गया। उसका माल थोड़ा नमकीन था, पर मीठा भी था।
वो: पति का अमृत है ये। पूरा चाट ले साले।
मैंने उसका पूरा माल चाट के साफ कर दिया। फिर वो एक टेबल के नीचे से दारू की बोतल निकाल कर पीने लगा। मैं चुप-चाप कपड़े पहन कर लौट आया।
नोट: इसका दूसरा भाग भी है। आप मेरी गे सेक्स स्टोरी पर कमेंट ज़रूर करे।