पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-9
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
मैं और नेहा दीदी स्विमिंग पूल से वापस मेरे होटल के कमरे में आए। हमारे शरीर अभी भी गीले थे, पानी की बूंदें हमारी त्वचा से धीरे-धीरे टपक रही थी जब हम कॉरिडोर से होकर गुज़र रहे थे। उन्होंने अपने शरीर को हल्के कपड़ों से ढक रखा था, बस इतना कि अगर कोई हमें देख भी ले तो ज्यादा अजीब ना लगे, लेकिन फिर भी उन कपड़ों का उनके शरीर से चिपकना मुझे बार-बार उनकी तरफ देखने पर मजबूर कर रहा था।
उनके बाल गीले थे, कंधों पर फैले हुए, और पानी की छोटी-छोटी बूंदें उनकी गर्दन से नीचे की तरफ बह रही थी। हमारे बीच एक अजीब सी खामोशी थी जैसे हम दोनों को एहसास था कि कुछ बदल गया है, लेकिन कोई भी उसे शब्दों में नहीं कह रहा था।
जैसे ही हम कमरे तक पहुंचे, मैंने दरवाजा खोला और हम अंदर आ गए। दरवाजा बंद होते ही बाहर की दुनिया जैसे दूर हो गई। बस कमरे की शांति, हमारी सांसों की आवाज, और पानी की हल्की सी खुशबू हमारे आस-पास थी।
उन्होंने मेरी तरफ एक पल के लिए देखा और अपने शरीर पर लिपटे कपड़े को थोड़ा ठीक किया, जैसे उन्हें मेरे देखने का एहसास हो लेकिन वो उसे नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही हों। मैं आम रहने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरी नजरें बार-बार उनकी तरफ चली जाती थी।उनकी चमकती हुई त्वचा, उनका खड़ा होने का अंदाज, हल्की झिझक और फिर भी एक अजीब सा आराम।
“तुम पहले खुद को सुखा लो,” उन्होंने धीरे से कहा, उस खामोशी को तोड़ते हुए।
मैं हल्का सा मुस्कुराया और उनकी तरफ देखते हुए बोला, “मुझे खुद को सुखाना नहीं है, नेहा दीदी।” मेरी आवाज धीमी थी, लेकिन उसमें एक अलग सा भाव था। मैं धीरे-धीरे उनके पास गया। हमारे बीच की दूरी कम होती गई, और वो बस वहीं खड़ी रहीं जैसे समझ नहीं पा रही हों कि क्या होने वाला है, या शायद सब समझ कर भी चुप हों।
मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उनके शरीर पर लिपटे उस हल्के कपड़े को पकड़ लिया। एक पल के लिए हमारी नजरें मिली— उनकी आंखों में झिझक थी, लेकिन वो पीछे नहीं हटी। मैंने धीरे से वो कपड़ा हटा दिया और उसे नीचे फर्श पर गिरा दिया।
अब वो मेरे सामने खड़ी थी, उनका गीला शरीर हल्की रोशनी में चमक रहा था। उनके कंधों से लेकर नीचे तक पानी की बूंदें धीरे-धीरे फिसल रही थी। उनके स्तन का उठना-गिरना साफ दिखाई दे रहा था, जैसे उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई हों।
मेरी नजरें धीरे-धीरे नीचे की तरफ गई। उनके शरीर का निचला हिस्सा भी उसी तरह भीगा हुआ था, और वहां की हल्की सी झिझक साफ महसूस हो रही थी। उनका नाज़ुक हिस्सा हल्के से सिमटा हुआ, भीगा हुआ और उनकी सांसों के साथ हल्का-हल्का हिलता हुआ सा लग रहा था जैसे वो खुद भी इस पल को लेकर असहज और जागरूक दोनों हों।
उन्होंने हल्का सा अपने पैर पास कर लिए, जैसे खुद को संभालने की कोशिश कर रही हों, लेकिन फिर भी वो वहीं खड़ी रही —चेहरा लाल, आंखें झुकी हुई, और माहौल पहले से कहीं ज्यादा गहरा हो चुका था।
मैं धीरे-धीरे झुक गया और उनके सामने घुटनों के बल बैठ गया। अब मैं उनके बिल्कुल करीब था, उनके पैरों के बीच।
मेरी आंखें वहीं टिक गई, उनके नाज़ुक हिस्से पर। पास से देखने पर उसकी बनावट और साफ नज़र आ रही थी। बीच में हल्की सी लाइन, किनारों पर कोमल त्वचा, और पानी की बूंदें उस पर रुक कर चमक रही थी। वो पूरी तरह खुला नहीं था, बल्कि थोड़ा सा सिमटा हुआ था, जैसे उनकी झिझक उसी में दिख रही हो।
उनकी सांसों के साथ उस जगह में हल्की सी हरकत हो रही थी। कभी थोड़ा सा सिकुड़ना, कभी ढीला पड़ना सब कुछ बहुत करीब से महसूस हो रहा था। मैंने हल्के से उनके पैरों को पकड़ कर थोड़ा पास किया। वो हल्का सा सिहर गई। जैसे ही मैं और करीब हुआ, उन्होंने तुरंत मेरे सिर पर हाथ रख दिया।
“क्या कर रहे हो गोलू…” उन्होंने धीरे से कहा। उनका चेहरा लाल था, और आवाज में साफ झिझक थी।
मैंने ऊपर उनकी तरफ देखा। उनकी आंखें मुझसे बच रही थी, लेकिन वो पूरी तरह पीछे भी नहीं हट रही थी।
मैं धीमे से बोला, “मैं तुम्हें चखना चाहता हूं, नेहा दीदी…”
कुछ पल तक वो चुप रही। फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपना हाथ मेरे सिर से हटा लिया जैसे वो अब खुद भी इस पल को रोकना नहीं चाहती थी। मानो उन्होंने मुझे इजाज़त दी हो कि जो भी चाहूं उनके साथ कर सकता हूं।
इसके बाद मैंने उनके जांघों को पकड़ कर अपने और करीब खींचा। उनका नाजुक हिस्सा अब बिल्कुल मेरे आंखों के सामने था। उसकी खुबसूरती, उसकी महक मेरे बदन में बिजली सी दौड़ा रही थी। मैंने मुंह से जीभ बाहर निकाल कर धीरे से उनके पंखुड़ी जैसी दरार को छूआ। उस मिठास से एक-दम मेरा मुंह भर गया। उसकी मिठास मेरे खून को उबलने लगे। धीरे-धीरे मैंने अपनी जीभ को उनके दरार के अंदर सरकाना शुरू कर दिया।
मैं खुद भी समझ नहीं पा रहा था कि मैं क्या कर रहा हूं। ये पहली बार था जब मैं किसी लड़की के इतने करीब आया था। दिल बहुत तेज धड़क रहा था, और हाथ हल्के-हल्के कांप रहे थे। लेकिन अंदर से एक अजीब सा खिंचाव था, जो मुझे रुकने नहीं दे रहा था।
नेहा दीदी ने हल्के से कराहते हुए मेरा सिर पकड़ लिया। उनकी उंगलियां मेरे बालों में उलझ गई और वो धीरे-धीरे मेरी हरकतों पर आवाज देने लगी। उनकी सांसें तेज हो रही थी और उनका शरीर बार-बार सिहर रहा था।
मैंने उनकी तरफ देखा तो उनके होंठ हल्के खुले हुए थे, आंखें बंद थी, और चेहरा पूरी तरह भावनाओं में डूबा हुआ था। उस पल मुझे समझ आ गया कि मैं जो कर रहा हूं, उसका असर उन पर साफ दिख रहा है।
मैंने हिम्मत करके अपनी हरकतों को थोड़ा और तेज किया, और दीदी की पकड़ मेरे बालों पर और मजबूत हो गई। उनकी हल्की-हल्की आवाजें कमरे में गूंजने लगी, और हर आवाज मेरे अंदर और हिम्मत भर रही थी।
तभी उन्होंने धीमी आवाज में कहा, “गोलू… तुम्हारी जीभ जैसे पूरे बदन में आग सी लगा रही है…”
उनके शब्द सुन कर मैं कुछ पल के लिए रुक गया, लेकिन फिर उनकी पकड़ और कस गई जैसे वो मुझे रुकने नहीं देना चाहती थी।
मैंने ऊपर उनकी तरफ देखा। उनके होंठ हल्के खुले हुए थे, आंखें बंद थी, और चेहरा पूरी तरह एहसास में डूबा हुआ था। उनकी हर सांस मेरे अंदर एक नई हिम्मत भर रही थी।
मैंने धीरे-धीरे अपनी हरकतों को और बढ़ाया। अब वो पूरी तरह इस पल में खो चुकी थी। उनके हाथ मेरे बालों में कसते जा रहे थे, और उनकी सांसों की रफ्तार और तेज हो रही थी।
“गोलू… रुकना मत…” उन्होंने टूटती हुई आवाज में कहा।
उनकी आवाज सुन कर मेरे अंदर एक अलग ही जोश आ गया। मैं लगातार उन्हें महसूस करता रहा, और उनका हर रिएक्शन मुझे और आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रहा था।
अचानक उनका शरीर और ज्यादा सख्त हो गया। उन्होंने जोर से मेरा सिर पकड़ा और तेज आवाज में बोली, “गोलू… मैं खुद को अब संभाल नहीं पा रही…”
उनके पैर बेकाबू होकर कांपने लगे। उनका पूरा शरीर बार-बार झटके लेने लगा, जैसे कोई तेज लहर उन्हें अंदर से हिला रही हो। उनकी सांसें टूट-टूट कर बाहर आ रही थी और वो पूरी तरह उस एहसास में डूब चुकी थी।
उसी पल मैंने महसूस किया कि उनके शरीर से एक गरम सा तरल बाहर आने लगा, जो धीरे-धीरे बहता हुआ नीचे फैल रहा था। वो पूरी तरह उस लहर में खो चुकी थी, और उनके चेहरे पर गहरी राहत साफ दिख रही थी।
कुछ ही पलों बाद उनका शरीर धीरे-धीरे ढीला पड़ने लगा। उनकी पकड़ नरम हो गई और उन्होंने गहरी सांस लेते हुए खुद को संभालने की कोशिश की। मैं धीरे से पीछे हुआ और उनकी तरफ देखा। वो आंखें बंद किए बस उस पल को महसूस कर रही थी। उनके चेहरे पर थकान और सुकून दोनों साफ नजर आ रहे थे।
मैं धीरे-धीरे खड़ा हुआ और उनके सामने आ गया। उन्होंने धीरे से अपनी आंखें खोलीं और मेरी तरफ देखा। हमारी नजरें मिलीं तो कुछ पल के लिए सब कुछ शांत हो गया।
मैंने धीरे से अपने दोनों हाथ उनके सीने पर रखे। उनका शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था, और उनकी सांसें अभी तक पूरी तरह आम नहीं हुई थी।
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए धीमी आवाज में कहा, “नेहा दीदी… अगर मैं और चाहूं… तो क्या आप और संभाल पाओगी?”
उन्होंने मेरी तरफ देखा, हल्का सा भौंहें सिकोड़ते हुए बोली, “क्या मतलब है तुम्हारा, गोलू…?”
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए थोड़ा और करीब झुक कर कहा, “मैं… अब तुम्हे चोदना चाहता हूं।”
मेरी बात सुन कर वो कुछ पल चुप रही। फिर उन्होंने मेरी आंखों में देखा। उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई, लेकिन सांसें अभी भी तेज थी। धीरे-धीरे उन्होंने अपना हाथ नीचे ले जाकर खुद को छूना शुरू किया, जैसे वो अभी भी उस एहसास में खोई हुई हों।
उन्होंने हल्की आवाज में कहा, “मैं कर सकती हूं… गोलू… तुमने मुझे खुश किया है… अब मैं भी तुम्हें खुश करना चाहती हूं…”
मैंने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार कर एक तरफ रख दिए। अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े थे। उन्होंने जैसे ही मेरा लंड देखा, उनकी नज़र कुछ पल के लिए वहीं रुक गई। उनके चेहरे का रंग अचानक और गहरा लाल हो गया। वो मेरी तरफ देखती रहीं, फिर हल्का सा नजरें झुका ली। उनकी सांस फिर से तेज होने लगी थी।
मैं उनके थोड़ा और करीब गया। हमारी आंखें फिर से मिलीं—इस बार पहले से ज्यादा खुली हुई, बिना छुपे हुए एहसास के साथ।
वो हल्की मुस्कान के साथ बोलीं, “गोलू… तुम भी ना…”
मैंने धीरे से उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। उनका शरीर मेरे करीब आते ही फिर से हल्का कांप गया। मैंने उन्हें संभालते बांहों में उठाया तो उन्होंने तुरंत अपने हाथ मेरे गले के चारों तरफ डाल दिए।
जैसे ही मैंने उन्हें ऊपर उठाया, उनका सीना मेरे सीने से मजबूती से लग गया। उनके शरीर की गर्माहट साफ महसूस हो रही थी, और वो और भी कस कर मुझसे लिपट गई।
उनकी पकड़ मजबूत थी, जैसे वो खुद को पूरी तरह मेरे हवाले कर रही हों। उनके पैर भी धीरे से मेरे आस-पास लिपट गए ताकि वो संतुलन बनाए रख सकें। मैं उन्हें संभालते हुए दीवार के पास ले गया और धीरे से उनकी पीठ दीवार से लगा दी, ताकि उनका पूरा वज़न मैं आराम से पकड़ सकूं।
वो कुछ पल तक मेरी आंखों में देखती रही, फिर हल्की सी मुस्कान के साथ शर्माते हुए बोलीं, “गोलू… ये पोजीशन थोड़ी अजीब लग सकती है… हम पहली बार ऐसा कर रहे हैं…”
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए धीरे से जवाब दिया, “पर मुझे… यही करना है दीदी… मैं सच में इसे ऐसे ही महसूस करना चाहता हूं…”
मेरी बात सुन कर उन्होंने एक गहरी सांस ली। उनकी पकड़ मेरे गले के आस-पास थोड़ी और कस गई, जैसे वो खुद को संभालते हुए भी इस पल को छोड़ना नहीं चाहती थी।
फिर आगे बढ़ कर मैंने धीरे से अपने लंड की नोक उनके नाज़ुक हिस्से के दरार पर रख दी। आखिरकार इतने सालों के सपने के बाद मेरा लंड नेहा दीदी की चूत को छू रहा था। वह पल बेहद नाज़ुक और प्यारा था। जिस नेहा दीदी को छूने का सपना मैं बचपन से देख रहा था वह आखिरकार हकीकत में उतर आया था। मेरा लंड सचमुच उनके चुत को छू रहा था। नेहा दीदी हल्के से हंस रही थी। मैं हौले-हौले उनके दरार को छू रहा था और अपने लंड के लिए रास्ता बना रहा था।
उस पल में सब कुछ जैसे थम सा गया था। उनकी सांसें मेरे कंधे के पास गर्म हवा की तरह महसूस हो रही थी। उन्होंने धीरे से अपना माथा मेरे कंधे पर टिका दिया, जैसे खुद को शांत करने की कोशिश कर रही हों। मैंने भी अपनी पकड़ थोड़ी और संभलकर मजबूत की, ताकि वो पूरी तरह सुरक्षित महसूस करें।
“गोलू… धीरे…” उन्होंने बहुत धीमी आवाज में कहा।
मैंने सिर हिलाया और हौले से अपना लंड उनके दरार के अंदर धकेलने लगा। उनकी दरार बहुत छोटी और कसावट भरी थी। मेरा लंड अंदर जाते ही मेरे पूरे बदन में बिजली दौड़ गई। वो एक पल के लिए मेरी तरफ और कसकर लिपट गई, जैसे उस नए एहसास को संभालने की कोशिश कर रही हों। उनकी सांसें और गहरी हो गई थी, और उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली।
मैंने खुद को शांत रखते हुए उनकी बात याद रखी और धीरे-धीरे ही आगे बढ़ता रहा। ।उन्होंने धीरे से मेरी गर्दन के पास चेहरा छुपाते हुए कहा, “मैं ठीक हूँ… बस धीरे…”
मैंने बहुत संभल कर अपनी कमर को हल्का सा हिलाना शुरू किया, बिना जल्द-बाज़ी, सिर्फ उतना ही जितना वो आराम से महसूस कर सकें। हर छोटी सी हरकत के साथ मैं रुक कर उनके चेहरे को देखता, उनकी सांसों को सुनता, और समझने की कोशिश करता कि वो कैसा महसूस कर रही हैं।
उनकी पकड़ कभी थोड़ी ढीली होती, फिर अचानक कस जाती जैसे वो हर एहसास को अपने अंदर समेट रही हों। उन्होंने अपनी आंखें बंद ही रखी, लेकिन उनके चेहरे पर अब पहले जैसी घबराहट कम थी, और उसकी जगह धीरे-धीरे एक नरम सा सुकून आने लगा था।
“ऐसे ही…” उन्होंने बहुत धीमी आवाज में कहा, “जल्दी मत करो…”
मैंने उन्हें और मजबूती से थाम लिया ताकि उन्हें पूरा सहारा मिले। वो मेरे कंधे पर झुकी रहीं, और कभी-कभी हल्के से मेरी पीठ को पकड़कर खुद को संतुलित करतीं।
लेकिन कुछ ही पलों में मेरे अंदर की बेचैनी बढ़ने लगी। उनके नाज़ुक हिस्से की नरम और कसावट भरी पकड़ मुझे और ज़्यादा बेकाबू कर रही थी। मेरी सांसें तेज़ हो गई और मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन अब वो मुश्किल होता जा रहा था।
मैंने धीरे से उनके कान के पास कहा, “दीदी… अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा है… क्या मैं थोड़ा तेज़ कर सकता हूँ?”
उन्होंने मेरी तरफ देखा, मेरी आंखों में झांकते हुए हल्की सी मुस्कान दी, लेकिन उनकी आंखों में थोड़ा सा डर और झिझक भी थी। फिर उन्होंने धीरे से कहा, “अगर तुम तेज़ करना चाहते हो… तो कर सकते हो… मैं सह लूंगी।”
उनकी बात सुन कर मैंने गहरी सांस ली और धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की। जैसे-जैसे मेरी हरकतें तेज़ हुई, उनकी पकड़ और कसती गई। उन्होंने अपने होंठ दबा लिए और मेरी पीठ को जोर से पकड़ लिया, उनके शरीर में हर हलचल साफ महसूस हो रही थी।
अब उनके चेहरे के भाव पूरी तरह बदल चुके थे। उनकी आँखें कस कर बंद थी, भौं सिकुड़ी हुई थी, और होंठों से दबे-दबे कराह निकल रही थी। कभी वो हल्का सा सिर पीछे झटका देती, तो कभी मेरे कंधे में अपना चेहरा छुपा लेती।
“आह… गोलू… धीरे…” उनकी आवाज अब कांप रही थी, जिसमें दर्द और अजीब सा एहसास दोनों मिले हुए थे।
मैंने थोड़ा और तेज़ होना शुरू किया तो उन्होंने मेरी पीठ को और कस कर पकड़ लिया। उनके नाखून मेरी त्वचा में हल्के से चुभने लगे। उनकी सांसें अब टूट-टूट कर आ रही थी।
“इतना तेज़… तुम…” वो बीच-बीच में रुक कर बोल रही थी, “मुझे संभालने दो…”
उनके चेहरे पर अब हर पल का असर साफ दिख रहा था, कभी दर्द से सिकुड़ता हुआ, कभी किसी नए एहसास में ढलता हुआ। वो बार-बार मुझे पकड़ कर खुद को संभाल रही थी, लेकिन फिर भी उस पल से हट नहीं रही थी।
उनकी आवाज अब और ऊँची हो गई थी। वो कभी मेरा नाम लेती, कभी सिर्फ कराहती।
“गोलू… बस… थोड़ा संभल कर…” उन्होंने दबी हुई आवाज में कहा।
उसी पल मेरे अंदर का दबाव अपने चरम पर पहुंच गया। मेरी सांसें एक-दम तेज़ हो गई और मैं खुद को और रोक नहीं पाया। मैंने उन्हें और कस कर पकड़ लिया, जैसे उस पल को थाम लेना चाहता हूँ।
मेरे पूरे शरीर में एक तीव्र झटका सा महसूस हुआ, और मैं उसी एहसास में डूब गया। मेरे लंड से निकल कर एक सफेद पानी की गाढ़ी धार नेहा दीदी के नाज़ुक हिस्से के अंदर उमड़ने लगी गई। कुछ बूंदें उनके जांघों से होते हुए निचे की तरफ टपकने लगी।
उसके बाद वो कुछ पल बिल्कुल स्थिर रही, जैसे शरीर अभी भी उस तेज़ एहसास से बाहर आ रहा हो। उनके चेहरे पर थकान और हल्की सी ढीलापन साफ दिख रहा था— आंखें बंद, पलकों पर हल्की कंपकंपी, और होंठ थोड़ा खुले हुए जैसे सांसों को संभाल रही हो। उनके गालों पर नर्मी और गर्माहट की चमक थी, और माथे पर पसीने की महीन बूंदें चमक रही थी। उनकी जांघों के पास हल्की नमी चमक रही थी, जो धीरे-धीरे नीचे की ओर सरकती हुई पतली लकीरों में बदल रही थी।
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