पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-10
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
अगली सुबह का माहौल थोड़ा अलग था। होटल के कमरे में हल्की सी रोशनी परदों के बीच से अंदर आ रही थी। आज नेहा दीदी और पायल दीदी का बर्थडे था, और मेरे मन में एक अजीब सी हल-चल चल रही थी जैसे कुछ खास होने वाला हो।
मैं धीरे-धीरे उठ कर सबसे पहले नेहा दीदी के कमरे की तरफ गया। दरवाजा आधा खुला था, और अंदर हल्की सी ठंडक थी। नेहा दीदी अभी भी बिस्तर पर लेटी हुई थी, बाल थोड़ा बिखरे हुए, चेहरा नींद से भरा हुआ।
मैं चुप-चाप उनके पास गया और बिस्तर के किनारे बैठ गया। कुछ पल मैं बस उन्हें देखता रहा। उनकी सांसों की धीमी रफ्तार, उनके चेहरे की मासूमियत। फिर मैंने हल्के से उनके सिर पर हाथ रख कर उन्हें उठाने की कोशिश की। एक-दो बार धीरे से टैप किया।
उन्होंने हल्का सा करवट ली… फिर धीरे-धीरे अपनी आँखें खोली। उनकी आँखें पूरी तरह खुली भी नहीं थी, लेकिन जैसे ही उन्होंने मेरा चेहरा देखा, उनके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई।
“गुड मॉर्निंग…” उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, जो अभी भी नींद से भरी हुई थी।
मैंने मुस्कुरा कर कहा, “हैप्पी बर्थडे नेहा दीदी…”
उन्होंने कहा, “थैंक यू गोलू…” वह थोड़ा रुकी और फिर बोली, “गिफ्ट मत लाना क्योंकि मुझे मेरा गिफ्ट कल रात ही मिल गया था।”
यह कहते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपने ऊपर पड़ी चादर को एक तरफ सरका दिया। उनका शरीर अब आधा खुला था और वह आराम से बैठ गई। कुछ सेकंड तक वह बस मुझे देखती रहीं। फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपना हाथ नीचे ले जाना शुरू किया। उनका हाथ उनके कपड़ों के ऊपर जाकर रुका। ठीक वहीं, जहाँ उनका नाज़ुक हिस्सा था।
मैं उनके और करीब गया और उन्हें अपनी बाहों में कस कर भर लिया। जैसे ही मैंने उन्हें पकड़ा, उनका पूरा शरीर मेरे साथ सट गया। उनकी गर्माहट साफ महसूस हो रही थी। उनका सीना मेरे सीने से दब रहा था, और हर सांस के साथ उनका शरीर हल्का-हल्का हिल रहा था, जो मुझे और भी ज्यादा उनके करीब खींच रहा था।
वो पीछे नहीं हटी, बल्कि उसी तरह मेरी बाहों में रही जैसे उन्हें भी ये नज़दीकी चाहिए थी। उनके बाल मेरे चेहरे को छू रहे थे, और उनकी सांसें मेरे गले के पास महसूस हो रही थी।
मैंने धीरे से उनका चेहरा अपनी तरफ किया और बहुत हल्के से उनके होंठों को चूमा। फिर मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “क्या तुम्हारी चूत में दर्द हो रहा है दीदी क्योंकि मैंने तुम्हें कल रात जोर से चोदा था?”
जैसे ही उन्होंने ये शब्द सुने, उनके चेहरे पर अचानक शर्म की लाली छा गई। उनकी आँखें एक पल के लिए झुक गई और उन्होंने हल्के से अपने होंठ दबा लिए। उन्होंने धीरे से मेरे हाथ पर मारा। ज्यादा जोर से नहीं, बस एक हल्की सी नाराज़गी जताने के लिए।
“ऐसे गंदे शब्द मत बोलो।” उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, जिसमें शर्म और झिझक साफ महसूस हो रही थी, “अजीब लगता है।”
कुछ देर तक हम दोनों के बीच एक अजीब सी चुप्पी रही। फिर मैंने धीरे से खुद को उनसे अलग किया। उनके चेहरे पर अभी भी हल्की सी लाली थी, और आँखों में वो झिझक बाकी थी।
मैं कुछ देर उनके साथ और बैठा रहा, फिर धीरे-धीरे उठ कर कमरे से बाहर आ गया। दिल में अभी भी वही गर्माहट थी, लेकिन अब मेरा ध्यान पायल दीदी की तरफ चला गया।
मैं उनके कमरे की तरफ बढ़ा और दरवाजा खोल कर अंदर गया। लेकिन वो बिस्तर पर नहीं थी। कमरा खाली था, और चादर भी थोड़ी बिखरी हुई थी जैसे वो अभी कुछ देर पहले ही उठी हो। मैंने सोचा शायद वो नीचे ब्रेकफास्ट के लिए गई होंगी।
मैं जाकर उनके बिस्तर पर बैठ गया और कुछ मिनट तक उनका इंतजार करने लगा। कमरे में हल्की सी खामोशी थी, सिर्फ ए.सी. की आवाज़ सुनाई दे रही थी। लेकिन जब वो जल्दी वापस नहीं आई, तो मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस होने लगा। नींद अभी पूरी तरह गई नहीं थी, और मुंह के अंदर एक अजीब सी बदबू महसूस हो रही थी। आंखों में भी अभी भारीपन था। मैंने हल्का सा चेहरा रगड़ा और सोचा कि पहले जाकर मुंह धो लूं। शायद फ्रेश होने से थोड़ा अच्छा लगे।
मैं धीरे-धीरे उठ कर बाथरूम की तरफ बढ़ा। कदम थोड़े भारी थे, लेकिन दिमाग बस एक ही चीज़ सोच रहा था, फ्रेश होना। जैसे ही मैंने बाथरूम का दरवाज़ा पकड़ा और उसे खोला। मैं एक पल के लिए वहीं रुक गया।
मेरी सांस जैसे अटक गई। अंदर पायल दीदी थी। वो शॉवर से अभी-अभी बाहर आई थी। उनके शरीर पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थी, जैसे हर बूंद रोशनी को पकड़ कर चमक रही हो। उनके बाल गीले थे और कंधों से नीचे चिपके हुए थे। उनका ऊपरी बदन पूरी तरह खुला था। उनके स्तन हल्की रोशनी में और उभरे हुए लग रहे थे, और उन पर टिकती पानी की बूंदें धीरे-धीरे नीचे खिसक रही थी। हर सांस के साथ उनका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था।
नीचे की ओर पानी की पतली लकीरें उनकी कमर से होकर जांघों तक जा रही थी। उनका नाज़ुक हिस्सा भी गीलेपन से भरा था, जहां पानी की बूंदें ठहर कर हल्की चमक पैदा कर रही थी। उस हिस्से के आस-पास की त्वचा मुलायम और कोमल दिख रही थी, जैसे हर हल्की सी हवा भी उसे महसूस हो रही हो। वहां की नमी और गर्माहट एक अलग ही एहसास बना रही थी, जो नजर हटाने नहीं दे रहा था। हल्का सा उनका शरीर सिमटना और पैरों का थोड़ा पास आ जाना उस पल की झिझक और अचानक आए एहसास को और गहरा कर रहा था।
वह जल्दी-जल्दी तौलिया उठा कर खुद को ढकने की कोशिश करने लगी। लेकिन उसके हाथों की घबराहट साफ दिख रही थी। जैसे वह खुद भी समझ नहीं पा रही हो कि इस अचानक बने पल को कैसे संभाले। लेकिन मैं, मैं बिल्कुल भी नहीं मुड़ा। मैंने एक बार भी अपनी नज़रें नहीं हटाई। मैं बस उसे देखता रहा। क्योंकि वो कोई और नहीं, मेरी पायल दीदी थी।
वही लड़की, जिसे मैं अंदर ही अंदर चोदना चाहता था। वही जिसके बारे में मैं सोचता रहता था। और आज, वो मेरे सामने थी। उसका शरीर इतना नाज़ुक लग रहा था कि सच में ऐसा महसूस हो रहा था जैसे अगर मैं उसे छू लूँ तो वो आइसक्रीम की तरह पिघल जाएगी।
वो तौलिया से खुद को ढकने की कोशिश कर रही थी। लेकिन उसकी हर हरकत मेरे दिमाग में और ज्यादा चीज़ें भर रही थी। उसकी आँखें मुझसे बचने की कोशिश कर रही थी, और मैं जान-बूझ कर उसे देखना बंद नहीं कर रहा था। तभी उन्होंने हल्की-सी घबराई हुई आवाज़ में कहा “गोलू… तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”
मैंने हल्की-सी सांस ली और बिना नज़रें हटाए कहा “पायल दीदी… मैं बस आपको हैप्पी बर्थडे बोलने आया था…”
मेरी बात सुन कर उन्होंने तौलिया को और कस कर पकड़ लिया। उनकी नजरें अब सीधे मेरे चेहरे पर टिक गई, जैसे वो समझने की कोशिश कर रही हो कि ये सच में बस एक गलती थी या मैं जान-बूझ कर यहाँ आया था। वो कुछ सेकंड तक मुझे बस देखती रही, बिना कुछ बोले। कमरे की खामोशी और भी भारी हो गई थी। मैंने बस उन्हें देखते हुए हल्की-सी स्माइल दी, जैसे सब कुछ नॉर्मल हो। लेकिन अंदर से मैं खुद जानता था कि ये पल बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं था।
कुछ पल बाद उन्होंने हल्की-सी सांस छोड़ते हुए कहा, “थैंक यू… बर्थडे विश के लिए… लेकिन अगली बार प्लीज नॉक करके आना।”
मैंने हल्का सा सिर हिलाया। लेकिन अंदर से मैं कुछ और ही सोच रहा था। मैं तो उन्हें विश करते वक्त गले लगाना चाहता था। बस एक बार उन्हें अपने करीब महसूस करना चाहता था। लेकिन उस वक्त वो सब करना और भी अजीब हो जाता। इसलिए मैंने कुछ नहीं किया। बस हल्की-सी स्माइल दी और बिना कुछ बोले कमरे से बाहर आ गया।
उसके बाद पूरा दिन मेरे लिए नॉर्मल नहीं रहा। मैं खुद को शांत करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन हर थोड़ी देर में वही सुबह वाला पल याद आ जाता। करीब दो घंटे बाद दरवाजा खुला और नेहा दीदी और पायल दीदी दोनों मेरे कमरे में आ गई। माहौल अब थोड़ा नॉर्मल था, जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
“चलो… नीचे चलते हैं, खाना खाते हैं,” नेहा दीदी ने कहा। हम तीनों साथ में होटल लॉबी में गए। वहां बैठ कर खाना खाया, बातें की, और सब कुछ बाहर से बिल्कुल आम लग रहा था। लेकिन अंदर से मैं बार-बार पायल दीदी की तरफ खिंच रहा था।
खाना खत्म करने के बाद हमने तय किया कि मूवी देखने चलते हैं। हमने टैक्सी बुक की और बाहर खड़े होकर उसका इंतज़ार करने लगे। टैक्सी आई… और हम तीनों अंदर बैठे। जगह थोड़ी कम थी, इसलिए हम बहुत पास-पास बैठे हुए थे। नेहा दीदी एक साइड थी, और मैं पायल दीदी के बिल्कुल पास।
टैक्सी चलने लगी। रास्ता थोड़ा ऊबड़-खाबड़ था, जिससे गाड़ी बार-बार हल्का झटका दे रही थी। हर झटके पर हमारे कंधे और हाथ आपस में टकरा रहे थे। मैं पहले तो खुद को थोड़ा संभाल कर बैठा था, लेकिन अंदर से मेरा ध्यान बार-बार उन्हीं पर जा रहा था।
फिर एक तेज ब्रेक लगा। मेरा संतुलन बिगड़ा और इस बार मेरा हाथ सीधा पायल दीदी के स्तन से जा लगा। ये बस एक टकराव नहीं था। मेरी हथेली पूरी तरह से उनके स्तन पर टिक गई थी। कपड़ों के ऊपर से भी उनकी नरमी और गर्माहट साफ महसूस हो रही थी, जैसे हल्का दबाव पड़ते ही आकार बदलने वाली कोई मुलायम चीज़। उस एक पल में मुझे उनके शरीर की गोलाई और बनावट साफ महसूस हुई, और उसी के साथ एक तेज झटका मेरे अंदर दौड़ गया।
मेरे अंदर एक अजीब-सी सनसनी फैल गई। दिल जोर से धड़कने लगा। सांस अटक गई। वो एहसास इतना अचानक और इतना असली था कि मैं कुछ सेकंड के लिए वहीं रुक गया। तभी उन्होंने हल्का सा झटका लिया और अपने शरीर को थोड़ा पीछे किया। उसी पल मुझे होश आया और मैंने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया, जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
पायल दीदी ने तुरंत अपने दुपट्टे को ठीक किया और एक सेकंड के लिए मेरी तरफ देखा। उस नज़र में साफ एहसास था कि उन्होंने सब महसूस किया है और समझ भी लिया है कि क्या हुआ। मैंने तुरंत नज़रें हटा ली खिड़की के बाहर देखने लगा। लेकिन अंदर से मेरा ध्यान उसी एक पल में अटका हुआ था। टैक्सी के अंदर अब एक अलग ही खामोशी थी। नेहा दीदी अभी भी फोन में लगी थी। लेकिन हम दोनों के बीच अब वो एक पल आ चुका था, जिसे दोनों ने महसूस किया।
उसी खामोशी के बीच, पायल दीदी थोड़ा सा मेरी तरफ झुकी। इतनी करीब कि उनकी सांस मेरे कान को छू रही थी। उनकी आवाज बहुत धीमी थी, लेकिन हर शब्द साफ सुनाई दे रहा था। “वो मेरे कान में फुसफुसाई, “गोलू अपने हाथों को कंट्रोल करो, वो मेरे बूब्स को छू रहे हैं।”
मैं थोड़ा घबरा गया और धीमी आवाज में कहा, “दीदी… वो बस एक एक्सीडेंट था।”
लेकिन अंदर ही अंदर मैं जानता था कि ये सच नहीं था। मेरे दिल में साफ था कि मैं उनके स्तनों को छूना चाहता था। सिर्फ ऐसे ही नहीं, बल्कि जान-बूझ कर। वो नरमी जो मैंने महसूस की थी, वही एहसास मैं फिर से महसूस करना चाहता था।
मैं चाहता था कि मैं उन्हें पकड़ूं। अपनी उंगलियों में उनकी गोलाई को महसूस करूं और उस नरमी को दबा कर महसूस करूं। मेरे दिमाग में बार-बार वही ख्याल आ रहा था कि मैं उनके स्तनों को अपने हाथों में लेकर कस कर दबाऊं और उस मुलायम एहसास को पूरी तरह महसूस करूं। लेकिन बाहर से मैं चुप था, जैसे कुछ हुआ ही ना हो। मेरे हाथ अब भी कस कर जकड़े हुए थे और मैं खुद को रोक रहा था।
पायल दीदी फिर सीधी बैठ गई, जैसे कुछ हुआ ही ना हो। लेकिन मेरे अंदर जो चल रहा था, वो अब रुकने वाला नहीं था।
कुछ देर बाद हम थिएटर पहुंच गए। मैंने काउंटर पर जाकर तीन टिकट ली। हॉलीवुड मूवी चल रही थी, इसलिए थिएटर लगभग खाली था। हम अंदर गए और हमें सबसे पीछे वाली लाइन की सीट मिली। मैं बीच वाली सीट पर बैठा और नेहा दीदी और पायल दीदी मेरे दोनों साइड में बैठ गई।
थिएटर के अंदर हल्की-हल्की रोशनी थी। स्क्रीन पर ट्रेलर चल रहे थे। आस-पास बहुत कम लोग थे, इसलिए माहौल काफी शांत था। कुछ ही देर में मूवी शुरू हुई और धीरे-धीरे सारी लाइट्स बंद हो गई। अब पूरा हॉल अंधेरे में डूब चुका था। सिर्फ स्क्रीन की रोशनी हमारे चेहरों पर पड़ रही थी। मैं बीच में बैठा था। दोनों तरफ उनकी मौजूदगी साफ महसूस हो रही थी। अंधेरे में हर छोटी हरकत, हर हल्का सा स्पर्श पहले से ज्यादा महसूस हो रहा था।
मूवी चल रही थी। लेकिन मेरा ध्यान स्क्रीन पर टिक नहीं पा रहा था। दिमाग बार-बार उसी एहसास में जा रहा था, जो अभी टैक्सी में हुआ था। मेरी हथेली जैसे अभी भी उस स्पर्श को याद कर रही थी।
मैं खुद को रोकने की कोशिश कर रहा था। लेकिन अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। मैंने धीरे से अपना हाथ नीचे किया और बहुत ही आम तरीके से पायल दीदी की टांग के पास रख दिया, जैसे बस ऐसे ही हल्का सा स्पर्श हो गया हो। मेरी आंखें स्क्रीन पर थी, लेकिन मेरा पूरा ध्यान उस स्पर्श पर था। मैं ऐसा दिखा रहा था जैसे मैं मूवी देख रहा हूं। लेकिन अंदर से मैं पूरी तरह उसी एहसास में उलझा हुआ था।
कुछ पल बीत गए लेकिन पायल दीदी ने मेरा हाथ हटाने को नहीं कहा। उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया… जैसे उन्हें फर्क ही नहीं पड़ा। यही बात मेरे अंदर कुछ बदल गई। मैंने धीरे से अपना हाथ उठाया और इस बार और भी संभल कर उनकी जांघ पर रख दिया।
जैसे ही मेरा हाथ उनकी जांघ पर टिका, इस बार उन्होंने महसूस कर लिया। वो हल्का सा मेरी तरफ झुकी और बहुत धीमी आवाज में मेरे कान के पास फुसफुसाई — “गोलू… तुम्हारा हाथ मेरी जांघ पर है।”
जब मैंने उनका चेहरा देखा, उनकी आंखें अभी भी स्क्रीन पर ही थी। वो आराम से अपनी सीट पर टिक गई, जैसे उन्हें पूरा यकीन था कि मैं अपना हाथ हटा लूंगा। लेकिन मैंने हाथ नहीं हटाया।
मैंने धीरे से अपना हाथ थोड़ा और ऊपर उठाया, उनकी जांघ पर थोड़ा और ऊपर, और फिर उसे वहीं ले गया जहां उनकी टांग खत्म होकर उनका नाज़ुक हिस्सा शुरू होता है, बिल्कुल साइड लाइन पर।
तभी वो फिर से थोड़ा झुकी और बहुत धीमी आवाज में बोली, “गोलू… क्या कर रहे हो?”
मैंने भी उतनी ही धीमी आवाज में जवाब दिया, “अगर अभी आपने आवाज की ना दीदी, तो नेहा दीदी को पता चल जाएगा।”
मैंने एक हिम्मत की और धीरे-धीरे उनके पायजामे की डोरी को ढीला करने लगा। उनके चेहरे पर साफ था कि वो मेरे हाथ को रोकना चाहती थी। लेकिन कुछ कर नहीं पा रहीं। उनकी सांस थोड़ी तेज हो गई थी, लेकिन वो चुप थी। फिर उन्होंने धीरे से अपना दुपट्टा निकाला और उसे अपनी जांघों पर फैला दिया, जैसे वो सब कुछ छिपाना चाहती हों। अब अंधेरे में वो दुपट्टा मेरे हाथ को पूरी तरह छिपा रहा था। मेरी आंखें स्क्रीन पर थी, लेकिन मेरा पूरा ध्यान उसी जगह पर था। दिल जोर से धड़क रहा था और हर सेकंड भारी लग रहा था।
मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उनके पायजामे के अंदर सरकाया। शुरुआत में सिर्फ कपड़े के ऊपर से ही महसूस कर रहा था। मेरी उंगलियों को उनकी पैंटी की हल्की गर्माहट महसूस हुई, जैसे अंदर का तापमान बाहर से अलग हो और वही एहसास मेरे अंदर और बेचैनी बढ़ा रहा था।
कुछ सेकंड तक मैं वहीं रुका रहा। बस उसी गर्माहट को महसूस करता हुआ। फिर मैंने धीरे से अपनी उंगलियों को और अंदर ले जाना शुरू किया, पैंटी के किनारे को हल्का सा हटाते हुए।
जैसे ही मेरी उंगलियां अंदर पहुंचीं, मेरी सांस खुद-ब-खुद धीमी हो गई। वहां का एहसास अलग था, नरम, गर्म और थोड़ा सा धड़कता हुआ सा। मैंने बहुत हल्के से अपनी उंगलियों को आगे बढ़ाया और उनका नाज़ुक हिस्सा मेरी उंगलियों के नीचे आ गया।
वो जगह बहुत ही मुलायम थी, जैसे उंगलियां खुद-ब-खुद उसमें ढल रही हो। उसकी बनावट साफ महसूस हो रही थी। ऊपर से हल्की सी गोलाई और नीचे जाते ही और भी नरम-पन। वहां की गर्माहट लगातार बढ़ती सी लग रही थी और हर हल्की हरकत पर उनका शरीर हल्का सा कांप जाता था।
मैंने अपनी उंगलियों को वहीं बहुत धीरे-धीरे हिलाया, संभल कर, जैसे हर छोटी चीज महसूस करना चाहता हूं। उस नाज़ुक हिस्से की गर्माहट, उसकी बनावट, सब कुछ मेरी उंगलियों में रह-रह कर महसूस हो रहा था और उसी के साथ मेरा दिल और तेजी से धड़क रहा था।
मैं और आगे बढ़ना चाहता था। मेरे दिमाग में बस एक ही ख्याल घूम रहा था कि मैं अपनी उंगलियां और अंदर ले जाऊं। उस एहसास को और करीब से महसूस करूं।
मैंने हल्का सा दबाव बनाते हुए अपनी उंगलियों को आगे बढ़ाना शुरू ही किया था, तभी अचानक दूसरी तरफ से नेहा दीदी की आवाज आई, “अरे तुम दोनों पॉपकॉर्न खाओगे क्या? मैं बाहर जा रही हूं लेने।”
उस एक आवाज ने जैसे सब कुछ तोड़ दिया। मैं एक-दम से रुक गया। मेरी उंगलियां वहीं थम गई। पायल दीदी भी तुरंत सीधी बैठ गई, जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
उन्होंने जल्दी से अपना दुपट्टा ठीक किया और स्क्रीन की तरफ देखने लगी। मैंने भी धीरे से अपना हाथ वापस खींच लिया और ऐसे बैठ गया जैसे मैं सच में मूवी में ही खोया हुआ हूं। लेकिन अंदर जो चल रहा था, वो रुकने वाला नहीं था। दिल अभी भी तेज धड़क रहा था और वो अधूरा सा पल बार-बार दिमाग में घूम रहा था।
तभी पायल दीदी ने हल्का सा सिर घुमाया और आम आवाज में बोली, “रुको नेहा… मैं भी तुम्हारे साथ आती हूं।”
एक पल के लिए मेरे मन में आया शायद वो इसलिए जा रही थी, क्योंकि वो मेरे साथ इस अंधेरे में अकेले रहने से थोड़ा घबरा गई थी। या फिर जो अभी हुआ, वो उनके लिए ज्यादा हो गया था। वो धीरे से अपनी सीट से उठी और नेहा दीदी के पीछे-पीछे चलने लगी। चलते हुए उन्होंने हल्के से अपने पायजामे की डोरी को कस लिया, जैसे सब कुछ आम दिखाना चाहती हों।
मैं उन्हें जाते हुए देखता रहा। फिर जैसे ही वो थोड़ी दूर गई, मैंने धीरे से अपनी उंगलियों को अपनी तरफ लाया। मैंने अपनी उंगलियों को सूंघा। ये पहली बार था जब मैंने पायल दीदी के नाज़ुक हिस्से को छुआ था और उस एहसास की खुशबू अभी भी मेरी उंगलियों में थी। मैं सीट पर बैठा था, लेकिन मेरा दिमाग पूरी तरह उसी पल में अटका हुआ था और अब बस इंतजार था कि जब वो वापस आएंगी, तो आगे क्या होगा।
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