गर्मी का जून महीना, पटना। दिन भर 42 डिग्री तापमान और रात को भी हवा गर्म थी। उस रात अचानक पूरे मोहल्ले में बिजली चली गई। घर में सिर्फ मैं (राज, 22 साल) और मेरी माँ राधिका (42 साल) थे। पापा पिछले हफ्ते दिल्ली चले गए थे।
माँ राधिका सच में बहुत आकर्षक थी। गोरी, मोटी-मोटी चूचियां (38D), पतली कमर और भारी-भारी गोल गांड। उस रात उन्होंने हल्की नीली स्लीवलेस नाइटी पहनी हुई थी, जो उनके घुटनों से काफी ऊपर थी। पसीने की वजह से नाइटी उनके शरीर से चिपक गई थी।
मैं सोने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गर्मी में नींद नहीं आ रही थी। माँ भी बेचैन थी। उन्होंने कहा, “राज बेटा, इतनी गर्मी है… चल, छत पर चटाई बिछा कर लेटते हैं। थोड़ी हवा तो लगेगी।”
हम दोनों छत पर गए। मैंने चटाई बिछाई। माँ मेरे ठीक बगल में लेट गई। चांदनी में उनका चेहरा, गले तक का पसीना और नाइटी से उभरी हुई उनकी भारी छातियां साफ दिख रही थी।
कुछ देर चुप्पी रही। फिर माँ ने बात शुरू की।
“राज… तू अब बहुत बड़ा हो गया है। 22 साल का जवान लड़का। मम्मी से कुछ भी शर्माने की जरूरत नहीं है।”
मैंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ मम्मी… लेकिन आप भी तो अभी भी बहुत जवान और खूबसूरत लगती हो।”
माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
“सच कह रहा है बेटा? मम्मी अभी भी सुंदर लगती है?”
“बहुत मम्मी। खास कर जब आप नाइटी में होती हो… तो…” मैं जान-बूझ कर अधूरा छोड़ दिया।
माँ थोड़ा शरमाई, लेकिन मुस्कुराई भी। उन्होंने अपना एक पैर हल्का सा मोड़ा, जिससे नाइटी और ऊपर सरक गई और उनकी मोटी, गोरी जांघ लगभग आधी दिखने लगी।
“गर्मी बहुत है ना बेटा…” उन्होंने धीरे से कहा और अपना हाथ मेरी बांह पर रख दिया। “तुम्हारा शरीर भी कितना गर्म हो रहा है।”
उनके हाथ की गर्माहट मुझे और उत्तेजित कर रही थी। मैंने हिम्मत करके कहा,
“मम्मी… आपकी नाइटी भी पसीने से पूरी भीग गई है।”
माँ ने नीचे देखा। नाइटी उनके बड़े स्तनों से चिपकी हुई थी, ब्रा की काली लाइन साफ दिख रही थी। उन्होंने हल्के से हंसते हुए कहा, “हाँ बेटा… ब्रा भी बहुत टाइट लग रही है आज। गर्मी में दम घुट रहा है।”
फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा और धीरे से पूछा, “राज… अगर मम्मी ब्रा उतार दे तो… तुझे बुरा तो नहीं लगेगा?”
मेरा दिल जोर से धड़का। मैंने सर हिलाया, “नहीं मम्मी… बिल्कुल नहीं।”
माँ ने पीछे हाथ डाल कर ब्रा का हुक खोला और ब्रा को नाइटी के अंदर से निकाल दिया। अब उनकी नाइटी और भी ढीली हो गई थी। दोनों बड़े स्तन पूरी तरह आजाद थे। निप्पल नाइटी के कपड़े से साफ उभरे हुए दिख रहे थे।
मैं चुपके से उन्हें घूर रहा था। माँ ने नोटिस कर लिया।
“क्या देख रहा है बेटा?” उन्होंने बहुत ही नरम और सेक्सी आवाज में पूछा।
“मम्मी… आपकी छातियां… बहुत सुंदर हैं,” मैंने साहस करके कहा।
माँ ने मेरे हाथ को पकड़ कर धीरे-धीरे अपनी छाती पर रख दिया। नाइटी के ऊपर से भी उनकी छाती बहुत नरम और गर्म लग रही थी।
“छू बेटा… मम्मी को अच्छा लग रहा है। बहुत दिनों से किसी ने इन्हें प्यार नहीं किया।”
मैंने धीरे-धीरे उनकी छाती को दबाना शुरू किया। माँ की सांसें तेज हो गई। उन्होंने आँखें बंद कर ली और हल्के से कराहने लगी, “म्म्म्ह्ह… राज… और प्यार से… मम्मी की चूचियां बहुत संवेदनशील हैं…”
मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था और पैंट में तनाव हो रहा था। माँ ने नीचे हाथ रख कर मेरे लंड पर हल्का सा दबाव डाला।
“बेटा… तेरा ये… बहुत बड़ा और सख्त हो गया है। मम्मी की वजह से?”
मैंने शर्माते हुए हाँ कहा।
माँ ने मुस्कुराते हुए मेरी पैंट का नाड़ा खोल दिया और हाथ अंदर डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया।
“वाह बेटा… इतना मोटा… मम्मी की चूत आज बहुत प्यासी हो रही है।”
उन्होंने मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया। मैंने उनकी नाइटी को कमर तक ऊपर कर दिया। अब उनकी पूरी जांघें और चूत मेरे सामने थी। माँ ने पैंटी नहीं पहनी थी। उनकी चूत थोड़ी-थोड़ी बालों वाली, गुलाबी और पहले से ही चमक रही थी।
मैंने उंगली से उनकी चूत को छुआ। बहुत गर्म और गीली थी।
“आह्ह्ह… बेटा… उंगली अंदर डाल… मम्मी की चूत में उंगली कर…” माँ फुसफुसाई।
मैंने दो उंगलियां अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। माँ की कमर उठने लगी।
“हाँ बेटा… इसी तरह… मम्मी को तैयार कर अपने लंड के लिए… बहुत दिनों से प्यासी हूँ…”
कुछ देर उंगलियों से चुदाई के बाद माँ ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें पूरी तरह भूखी हो चुकी थी।
“राज… अब मम्मी को चोद दे बेटा। अपनी माँ की चूत में अपना लंड डाल दे। आज बिजली नहीं है… अंधेरा है… कोई नहीं देख रहा। मम्मी की चूत तेरा लंड मांग रही है।”
मैंने अपनी पैंट पूरी उतार दी। मेरा मोटा, खड़ा लंड बाहर आ गया। माँ ने उसे देख कर होंठ चाटे।
मैंने उनकी नाइटी कमर तक ऊपर की। उनकी चूत गीली और चमक रही थी। दो उंगलियों से कुछ देर चूत में हिलाया, जिससे माँ कराहने लगी।
“आह्ह्ह… बेटा… और तेज… मम्मी को तैयार कर दे…”
मैंने माँ की दोनों टांगें अपने कंधों पर रखी और लंड का सिरा उनकी चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाव डाला। लंड का सिरा अंदर घुसा तो माँ ने आँखें बंद करके जोर से सांस ली।
“आआह्ह्ह… बेटा… धीरे… तेरा लंड बहुत मोटा है… मम्मी की चूत फट रही है…”
मैंने एक और जोरदार धक्का मारा। पूरा 7 इंच का मोटा लंड एक ही झटके में माँ की चूत के अंदर चला गया।
“आआआआह्ह्ह! बेटा… फाड़ दी मम्मी की चूत… आह्ह्ह… पूरा अंदर चला गया…” माँ ने चीखते हुए कहा। उनकी उंगलियां मेरी पीठ पर गड़ गई।
मैं रुक गया, लंड पूरी तरह अंदर डाले हुए। माँ की चूत मेरे लंड को कस कर पकड़े हुए थी। गर्म, गीली और बहुत टाइट। मैंने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया।
“हाँ बेटा… धीरे-धीरे… मम्मी को आदत डालने दे… आह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा लंड…”
धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। अब हर धक्के के साथ “पच-पच-पच” की आवाज छत पर गूंज रही थी। माँ की भारी छातियां हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रही थी।
मैंने दोनों हाथों से उनकी छातियों को जोर से दबाया और निप्पल्स को उंगलियों से मसलने लगा।
“आह्ह्ह… हाँ बेटा… मम्मी की चूचियां भी मसल… चूस ले इन्हें… मम्मी तेरी रंडी बन गई है आज…”
मैंने झुक कर एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, साथ ही कमर तेज कर दी। अब मैं पूरी ताकत से चोद रहा था।
माँ की चीखें बढ़ गई –
“हाँ बेटा… जोर से… और जोर से चोद… मम्मी की चूत को फाड़ डाल… आह्ह्ह… गहरा… और गहरा मार… तू ही अब मेरा असली मर्द है… पापा नहीं… तू!”
मैंने माँ को मिशनरी पोजीशन में 10-12 मिनट तक जोर-जोर से चोदा। फिर बोला, “मम्मी, घुटनों के बल हो जाओ।”
माँ तुरंत डॉगी स्टाइल में हो गई। उनकी भारी गांड मेरे सामने थी। मैंने दोनों हाथों से उनकी गांड के मोटे-मोटे फूलों को फैलाया और फिर से लंड अंदर ठेल दिया।
“उफ्फ्फ्फ… आह्ह्ह… बेटा… इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है… मम्मी की रसोली तक पहुंच रहा है तेरा लंड…”
मैंने उनकी कमर पकड़ कर तेज-तेज धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर माँ की गांड मेरे पेट से टकरा रही थी– “थप-थप-थप-थप”। उनकी गांड लाल हो गई थी थप्पड़ों और टकराहट से।
मैंने एक हाथ से उनकी चूत के ऊपर वाले क्लिटोरिस को रगड़ना शुरू किया। माँ पागल हो गई।
“आआह्ह्ह… बेटा… मत मार… मैं झड़ जाऊंगी… आह्ह्ह… मम्मी झड़ रही है… हाँ… हाँ… आ गया… आ गया बेटा!”
माँ का पहला ऑर्गेज्म आ गया। उनकी चूत मेरे लंड को कस-कस कर दबाने लगी। गर्म चूत का रस मेरे लंड पर बहने लगा। लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। स्पीड और बढ़ा दी।
“नहीं मम्मी… अभी नहीं रुकना… मम्मी को और चोदना है।”
मैंने उन्हें डॉगी में ही 8-10 मिनट और चोदा। फिर पोजीशन बदली। मैं लेट गया और माँ को ऊपर बिठा लिया (काउगर्ल)।
माँ ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ा, अपनी चूत पर सेट किया और धीरे-धीरे बैठ गई। पूरा लंड फिर से अंदर चला गया।
“वाह बेटा… इस पोजीशन में तेरा लंड और भी मोटा लग रहा है…” माँ ने कहा और खुद हिलने लगी।
अब माँ ऊपर-नीचे कूद रही थी। उनकी भारी छातियां जोर-जोर से उछल रही थी। मैंने नीचे से दोनों छातियों को पकड़ रखा था और निप्पल्स को खींच रहा था।
माँ डर्टी टॉक करने लगी –
“देख बेटा… मम्मी तेरे लंड पर कैसे कूद रही है… तेरी माँ अब तेरी पर्सनल रंडी है… जितनी बार चाहे चोद… मम्मी की चूत हमेशा तेरे लिए खुली रहेगी… आह्ह्ह… और तेज… मम्मी को दूसरा ऑर्गेज्म दे दे…”
मैंने नीचे से कमर उठा-उठा कर जोर के धक्के देने शुरू किए। माँ चीख रही थी, “हाँ… हाँ… इसी तरह… फाड़ दे… मम्मी की चूत फाड़ दे बेटा!”
लगभग 7-8 मिनट बाद माँ दूसरी बार झड़ गई। उनकी चूत से बहुत सारा पानी निकला। अब मैं ऊपर आ गया। माँ को मिशनरी में लिटाया और उनकी दोनों टांगें कंधों पर रख कर फुल स्पीड से चोदने लगा। अब हर धक्का बहुत तेज और गहरा था।
“मम्मी… मैं झड़ने वाला हूँ…” मैंने कहा।
माँ ने मेरी पीठ पर नाखून गाड़ दिए और चिल्लाई, “अंदर झड़ बेटा… मम्मी की चूत के अंदर ही झड़… अपनी माँ को गर्म वीर्य से भर दे… आह्ह्ह… दे दे… भर दे मम्मी की कोख…!”
मैंने आखिरी 10-12 जोरदार धक्के मारे और माँ की चूत के सबसे गहरे हिस्से में गरम-गरम वीर्य छोड़ दिया। बहुत सारा वीर्य उनकी चूत में भर गया। कुछ बाहर भी निकल कर उनकी जांघों पर बह गया।
माँ कांप रही थी। उन्होंने मुझे जोर से गले लगा लिया और बोली, “बेटा… मम्मी की बहुत दिनों की प्यास बुझ गई। तूने मम्मी को आज इतना मजा दिया कि कभी भूल नहीं पाऊंगी।”
हम दोनों पसीने से तर छत पर लेटे रहे।