पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-13
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
पायल दीदी मेरे सामने बिस्तर पर आकर लेट गई थी। वो बिल्कुल सीधी पीठ के बल लेटी थी, और उनकी नज़रें मुझ पर टिकी हुई थी। हर बार जब वो सांस लेती थी, उनका सीना धीरे-धीरे ऊपर उठता था और फिर नीचे आता था। इस हल्की मूवमेंट के साथ उनके स्तन भी बहुत धीरे-धीरे हिलते थे। उन पर लिखे हुए इंग्लिश के शब्द भी उसी रिदम में ऊपर-नीचे होते दिख रहे थे, जैसे हर सांस के साथ वो शब्द खुद हिल रहे हों।
फिर उन्होंने अपने दोनों हाथ धीरे-धीरे फैलाए, जैसे मुझे अपने पास आने का इशारा कर रही हों। उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए कहा, “गोलू… इधर आओ… पास आकर पढ़ो।”
मैं कुछ सेकंड तक वहीं बैठा रहा, फिर धीरे-धीरे उनके पास गया। अब मैं उनके बिल्कुल करीब था। मेरी नज़र उनके स्तनों पर लिखे हुए शब्दों पर टिक गई। जब मैं उन्हें पढ़ने की कोशिश करता, उसी समय उनकी सांस चलती और शब्द हल्के से हिलते—जिससे मेरा ध्यान बार-बार टूटता और फिर वापस उन्हीं शब्दों पर आ जाता।
उन्होंने फिर कहा, “ध्यान से पढ़ो… सब यहीं लिखा है…”
मैं झुक कर और करीब आ गया, और इस बार मैंने सच में पढ़ना शुरू किया। एक-एक शब्द, एक-एक लाइन… और पहली बार मुझे लग रहा था कि मैं जो देख रहा हूँ, वो मेरे दिमाग में रुक रहा है।
कुछ शब्द उनके स्तनों के किनारों की तरफ लिखे हुए थे, जिन्हें साफ पढ़ने के लिए मुझे और झुकना पड़ रहा था। मैं थोड़ा एंगल बदल कर देखने की कोशिश करता, कभी बाई तरफ से, कभी दाई तरफ से, ताकि हर शब्द साफ दिखाई दे।
उन्होंने हल्की आवाज़ में कहा, “और पास आओ… ध्यान से पढ़ो… तभी याद रहेगा।”
मैं और करीब गया, अब लगभग उनके ऊपर झुक कर पढ़ रहा था। मेरी नज़र अब सिर्फ उन शब्दों पर थी। एक-एक लाइन को समझते हुए मैं धीरे-धीरे पढ़ने लगा।
जैसे-जैसे ऊपर लिखे हुए शब्द खत्म होने लगे, मैं धीरे-धीरे नीचे सरकता गया। पहले मैं उनके पेट पर लिखे शब्द पढ़ रहा था, फिर और नीचे झुक गया ताकि आगे का हिस्सा भी देख सकूं।
फिर मैं उनके पैरों के बीच आकर बैठ गया। मेरी नज़र नीचे लिखे शब्दों पर थी, लेकिन उन्होंने अपने पैरों को थोड़ा सा बंद कर लिया, जैसे हल्की सी झिझक हो। उस वजह से मुझे नीचे लिखा हुआ साफ दिखाई नहीं दे रहा था, और उनका चूत वाला हिस्सा भी मेरी नज़र से छुप गया था।
तभी उन्होंने मुझे देखते हुए कहा, “गोलू… तुम बहुत जल्दी पढ़ रहे हो… ऐसे चूत के पास लिखे शब्द साफ नहीं समझेंगे।”
मैंने बिना सोचे कहा, “मुझे ये वाला हिस्सा पहले पढ़ना है दीदी… मुझे चूत के पास वाला हिस्सा ज्यादा इंटरेस्टिंग लग रहा है।”
मैं अपने घुटनों के सहारे उनके पैरों के बीच बैठा हुआ था। मैंने धीरे से उनके पैरों को खोलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपने पैरों को हल्का सा और कस कर बंद कर लिया, जैसे अभी भी थोड़ी झिझक हो।
मैंने फिर से कोशिश की। इस बार मैं थोड़ा और पास गया और नीचे ध्यान से देखने लगा। कुछ सेकंड बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने पैरों को ढीला किया… और फिर बहुत धीरे-धीरे उन्हें खोलना शुरू किया। अब मुझे नीचे लिखा हुआ साफ दिखने लगा। शब्द सीधे एक लाइन में लिखे हुए थे—ऊपर से शुरू होकर नीचे तक जाते हुए। मेरी नज़र उसी लाइन पर टिक गई, क्योंकि वही पढ़ना बाकी था।
मैं थोड़ा और झुक गया और ध्यान से देखने लगा। फिर हल्की हिचक के साथ मैंने धीरे से कहा, “पायल दीदी… क्या मैं इन शब्दों को छूकर पढ़ सकता हूँ?”
उन्होंने कुछ पल मेरी तरफ देखा, फिर शांत आवाज़ में बोली, “हाँ गोलू… पढ़ने के लिए छू सकते हो… लेकिन नीचे वाले हिस्से को मत छूना, बस शब्द पढ़ो।”
मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ नीचे ले जाकर उन शब्दों को छूना शुरू किया जो उनके नाजुक हिस्से के पास लिखे थे। मेरी उंगलियाँ बहुत धीरे चल रही थी, जैसे मैं हर शब्द को महसूस करते हुए पढ़ रहा हूँ। उनकी त्वचा नरम और गर्म थी, और पहली बार इतना पास आकर छूने का एहसास अलग ही था।
मैं थोड़ा और झुका और ध्यान से पढ़ने लगा। मेरा हाथ कभी शब्दों के ऊपर रुकता, कभी थोड़ा आगे बढ़ता, लेकिन हर बार मैं ऐसा दिखाता कि मैं सिर्फ पढ़ रहा हूँ।
मेरी सांसें थोड़ी तेज हो गई थी, लेकिन मैंने खुद को संभाला और धीरे से कहा, “यहाँ भी शब्द लिखे हैं दीदी… मैं बस उन्हें पढ़ रहा हूँ…”
जब भी वो मेरी तरफ देखती, मैं तुरंत अपनी उंगली किसी शब्द पर रख देता, जैसे मैं वही पढ़ रहा हूँ। लेकिन अंदर से मुझे पता था कि मैं जान-बूझ कर उस जगह को छू रहा हूँ। मैं एक-एक लाइन को धीरे-धीरे पढ़ता रहा, अपनी उंगलियों को शब्दों के साथ चलाते हुए, ताकि कुछ भी छूट ना जाए।
वो कुछ देर तक मुझे देखती रही… फिर हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “गोलू… मैंने वहाँ सिर्फ कुछ ही लाइन्स लिखी हैं… तुम उन्हें पढ़ने में इतना टाइम क्यों ले रहे हो?”
उनकी आवाज़ में हल्की सी मुस्कान थी, जैसे वो समझ चुकी हों कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैंने नज़र उठा कर उनकी तरफ देखा, फिर वापस शब्दों की तरफ देखते हुए धीरे से कहा, “मैं ध्यान से पढ़ रहा हूँ दीदी… ताकि कुछ भी मिस ना हो…”
मैंने पढ़ना जारी रखा। धीरे-धीरे, बिना जल्दी किए, एक-एक शब्द, एक-एक लाइन। समय कैसे बीत गया, मुझे पता ही नहीं चला। करीब एक घंटे बाद, मैं आखिर तक पहुँच गया। जो कुछ भी उन्होंने लिखा था, मैंने सब पढ़ लिया था।
मैं सीधा हुआ, हल्की सी सांस लेकर उनकी तरफ देखा और धीरे से कहा, “हो गया दीदी… मैंने सब पढ़ लिया।”
वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही, फिर हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “वेल डन गोलू… अब ऊपर आओ… और मेरे पेट पर घुटनों के सहारे बैठो।”
मैंने उनसे कोई सवाल नहीं किया। उन्होंने जो कहा, मैंने बस वही किया। मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ा और उनके पेट के पास आकर अपने घुटनों के सहारे बैठ गया। अब मैं उनके बहुत करीब था। उनके स्तन मेरे सामने थे, बस थोड़ा सा दूरी पर। मैं कुछ सेकंड तक उन्हें देखता रहा, लेकिन कुछ बोला नहीं।
वो मेरी तरफ देखते हुए हल्का सा मुस्कुराई, जैसे उन्हें सब समझ आ रहा हो। फिर उन्होंने सीधे मेरी आंखों में देखते हुए कहा, “गोलू… तुम्हारा लंड सख्त है ना… निकाल लो उसे।”
मैंने उनकी बात सुनी और कुछ सेकंड तक चुप रहा। फिर थोड़ा झुक कर उनकी तरफ देखते हुए धीरे से कहा, “सच में दीदी… आप मुझे चोदने की परमीशन दे रही हो?”
वो हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “बेवकूफ मत बनो गोलू… तुम मुझे तभी चोद सकते हो जब तुम अपना एग्जाम क्लियर करोगे… अभी नहीं।” उन्होंने थोड़ा रुक कर मेरी तरफ देखा और फिर कहा, “अभी मुझे बस ये इंक अपने शरीर से साफ करनी है… ये स्पेशल इंक है… ये तभी साफ होगी जब… कोई लड़का इस पर अपना पानी छोड़ेगा।…”
मैं चुप-चाप उन्हें देखता रहा। उन्होंने फिर धीमी आवाज़ में कहा, “तो… क्या तुम मेरी मदद करोगे…?”
मैंने बिना सोचे तुरंत कहा, “हाँ दीदी… मैं आपकी मदद करूँगा।”
मैंने धीरे-धीरे अपनी पैंट और अंडरवियर नीचे खिसका कर घुटनों तक कर दिए। मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था। मैं थोड़ा हिचकिचा रहा था, लेकिन रुक नहीं रहा था। मैं उनकी तरफ झुका, जैसे मैं और करीब जाना चाहता हूँ। मेरा लंड पहले से ही सख्त था, और मैं उसे लेकर थोड़ा असहज भी महसूस कर रहा था।
मैंने आगे बढ़ कर उसे उनकी तरफ ले जाने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही मैं करीब गया, उन्होंने तुरंत मुझे रोक दिया।
उन्होंने हाथ से इशारा करते हुए कहा, “रुको गोलू… ऐसे नहीं…” मैं वहीं रुक गया और उनकी तरफ देखने लगा। फिर वो हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “मुँह में नहीं… इधर…”
उन्होंने अपने स्तनों की तरफ इशारा किया, जैसे वो साफ-साफ समझा रही हों कि मुझे क्या करना था। मैं कुछ सेकंड तक उन्हें देखता रहा, फिर धीरे-धीरे उनकी बात मानते हुए अपनी पोज़िशन बदली और वहीं ध्यान देने लगा जहाँ उन्होंने कहा था।
मैंने उनकी बात मानते हुए खुद को उनके सीने के पास सेट किया। उनके स्तन मेरे सामने थे, और मैं वहीं रुक कर एक पल के लिए उन्हें देखने लगा। मेरा लंड पहले से ही सख्त था, और मैं धीरे-धीरे उसे उनके स्तनों के बीच लाने लगा।
उन्होंने अपने हाथों से हल्का सा इशारा किया, जैसे मुझे सही जगह समझा रही हों। फिर उन्होंने अपने हाथों से अपने स्तनों को थोड़ा पास लाया, और धीरे-धीरे उन्हें आपस में दबाया ताकि मेरा लंड उनके बीच ठीक से आ सके।
मैंने धीरे-धीरे अपनी पोज़िशन ठीक की और वहीं रुक गया। शुरुआत में थोड़ा अजीब लगा, लेकिन फिर मैंने खुद को संभाला और उनकी तरफ देखने लगा। वो अपने हाथों से अपने स्तनों को और कस कर दबा रही थी, जिससे मेरा लंड उनके बीच फंस गया।
“धीरे गोलू…” उन्होंने फिर कहा, “आराम से…”
मैंने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को मूव करना शुरू किया। मेरा लंड उनके स्तनों के बीच आगे-पीछे होने लगा। हर बार जब मैं मूव करता, वो अपने स्तनों को और कस कर दबाती, जिससे मुझे और ज्यादा प्रेशर महसूस होता।
उनकी सांसें भी अब थोड़ी तेज हो गई थी, लेकिन वो खुद को कंट्रोल में रखे हुए थी। उनका चेहरा थोड़ा टाइट हो रहा था, जैसे वो भी उस प्रेशर को महसूस कर रही हों, लेकिन फिर भी वो मुझे गाइड कर रही थी।
मैंने अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ाई। अब मेरा लंड उनके स्तनों के बीच स्मूथ तरीके से मूव हो रहा था। हर मूवमेंट के साथ उनका दबाव बदलता और उसी के साथ मेरे शरीर में एक अजीब सा एहसास फैल रहा था।
“धीरे गोलू… कंट्रोल में…” उन्होंने फिर कहा, लेकिन इस बार उनकी आवाज़ थोड़ी भारी थी।
मैंने उनकी बात सुन कर अपनी मूवमेंट को फिर से कंट्रोल किया, लेकिन रुक नहीं रहा था। अब मैं हर मूवमेंट को महसूस कर रहा था। उनके स्तनों का दबाव, उनकी गर्माहट, और मेरा लंड उनके बीच फिसलता हुआ। मैंने उनकी आँखों में देखा। अब वो मुझे सीधे देख रही थी। उनके चेहरे पर हल्की सी टाइटनेस थी, होंठ थोड़ा दबे हुए थे, और सांसें कंट्रोल में होते हुए भी गहरी हो रही थी।
मैं उनके ऊपर झुका हुआ था, मेरे घुटने उनके दोनों तरफ टिके हुए थे। दिल तेज़ धड़क रहा था, लेकिन इस बार मैं रुक नहीं रहा था बस वही कर रहा था जो वो कह रही थी। मैं लगातार मूव करता रहा, और वो अपने हाथों से हल्का दबाव बना कर मेरी मदद करती रही। हर बार जब मैं थोड़ा आगे बढ़ता, वो उसी के हिसाब से अपने स्तनों को एडजस्ट करतीं, जिससे मुझे साफ महसूस होता कि क्या हो रहा था।
फिर उन्होंने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “गोलू… तुम्हारा लंड बहुत स्मूद है…”
मैंने उनकी तरफ देखा, मेरी सांसें अभी भी तेज़ चल रही थी। उनकी बात सुन कर मेरे अंदर एक अलग ही एहसास आया। मैं कुछ सेकंड के लिए रुका, फिर हल्की आवाज़ में बोला, “आपको मेरा लंड पसंद है पायल दीदी…?”
वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही, फिर हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “मुझे उम्मीद है गोलू… तुम इस बार अपना एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करोगे… ताकि मैं तुम्हारा लंड मेरी चुत के अंदर महसूस कर सकूं …”
उनकी बात सुनते ही मेरे अंदर का कंट्रोल टूटने लगा। मेरी सांसें बहुत तेज़ हो गई और मैं तेजी से अपने कूल्हे हिलाने लगा। हर मूवमेंट के साथ उनका दबाव और बढ़ रहा था। वो अपने स्तनों को और कस कर दबा रही थी, जिससे मेरा लंड उनके बीच और गहराई से फंस रहा था।
मेरी सांसें अब बेकाबू हो चुकी थी। मेरा पूरा शरीर उस दबाव में आ चुका था। अचानक मेरे अंदर एक तेज़ झटका सा महसूस हुआ और मैं खुद को रोक नहीं पाया। गर्म सफेद पानी तेज़ी से बाहर निकलने लगा। शुरुआत में कुछ बूंदें उछल कर ऊपर की तरफ उनके चेहरे के पास तक पहुँच गई। उनकी आँखें एक पल के लिए झपकीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।
फिर धीरे-धीरे सफेद पानी उनके स्तनों पर गिरने लगा। वो फैलता हुआ नीचे की तरफ बहने लगा—उनकी त्वचा पर एक पतली लाइन बनाता हुआ। कुछ बूंदें किनारों से नीचे फिसल रही थी, कुछ वहीं जमा हो रही थी।
मैं हांफ रहा था। मेरा शरीर अभी भी हल्का कांप रहा था। मैंने धीरे से अपना लंड उठाया और जो सफेद पानी उनके स्तनों और शरीर पर फैला था, उसे धीरे-धीरे फैलाने लगा। वो चुप-चाप मुझे देख रही थी, उनके चेहरे पर अब एक अलग ही शांत एक्सप्रेशन था। कुछ बूंदें उनके चेहरे के पास थी—उनके होंठों के पास रुक कर चमक रही थी। उन्होंने धीरे से अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखा, जैसे वो पूरा पल अपने अंदर महसूस कर रही हों।
फिर मैं धीरे से पीछे हटा और उनके पास ही बिस्तर पर लेट गया। मेरा शरीर अभी भी गर्म था और सांसें गहरी चल रही थी। वो कुछ सेकंड तक चुप रही, फिर अपने हाथों को नीचे ले गई और मेरे सफेद पानी को अपनी उंगलियों से धीरे-धीरे अपने शरीर पर फैलाने लगी। जहाँ-जहाँ स्याही लिखी हुई थी, वो उसे उसी के साथ रगड़ने लगी।
मैं चुप-चाप उन्हें देख रहा था। उनकी उंगलियाँ धीरे-धीरे चल रही थी—कभी एक लाइन पर, कभी दूसरी जगह जैसे वो हर शब्द को मिटा रही हों। धीरे-धीरे स्याही हल्की होने लगी। जहाँ वो अपने हाथ ले जाती, वहाँ लिखे हुए निशान फीके पड़ने लगते।
उन्होंने थोड़ा सा सफेद पानी अपनी उंगलियों पर लिया और फिर उसे अपने शरीर पर फैलाया, जैसे वो जानती हों कि कैसे उसे इस्तेमाल करना है। कुछ ही देर में कई जगहों से स्याही लगभग गायब हो चुकी थी। उनकी त्वचा फिर से साफ दिखने लगी थी, बस हल्के-हल्के निशान रह गए थे।
मैंने उन्हें देखते हुए धीरे से कहा, “मैं खुश हूँ पायल दीदी… कि मुझे आप जैसी बहन मिली…”
उस रात के बाद अगला दिन जल्दी ही आ गया। सुबह मैं उठा, बिना ज्यादा सोचे सीधे एग्जाम देने चला गया। इस बार मेरे अंदर कुछ अलग था, ध्यान भटक नहीं रहा था, जो पढ़ा था वही याद आ रहा था।
एक-एक करके मैंने बाकी पाँच पेपर भी दिए। हर पेपर में मैं पहले से ज्यादा फोकस में था। जहाँ पहले मैं घबरा जाता था, अब मैं शांत था।
कुछ दिनों बाद रिजल्ट आया। मैं पास तो नहीं हुआ… लेकिन सिर्फ एक सब्जेक्ट में फेल हुआ—पहले पेपर में। बाकी सब में मेरे मार्क्स अच्छे थे। सबसे ज्यादा मार्क्स मुझे उसी सब्जेक्ट में मिले थे जो पायल दीदी ने मुझे पढ़ाए थे। नेहा दीदी रिजल्ट देखकर हैरान रह गई। वो बार-बार मार्कशीट देख रही थी।
उन्होंने मुझे देखते हुए कहा, “ये कैसे हुआ…? तूने मेरे सब्जेक्ट में कम मार्क्स लिए… और पायल दीदी के सब्जेक्ट में सबसे ज्यादा…?”
मैं चुप रहा। तभी पायल दीदी ने हल्का सा मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “क्योंकि मैंने गोलू को कुछ स्पेशल लेसन दिए थे…”
उसके बाद दोनों के बीच हल्की-हल्की बहस शुरू हो गई। दोनों अपने-अपने तरीके को सही बता रही थी। माहौल थोड़ा गरम होने लगा था, और मैं बीच में खड़ा बस उन्हें देख रहा था। तभी अचानक डोर बेल बजने लगी। आवाज़ पूरे घर में गूंज गई। मैं तुरंत दरवाज़े की तरफ बढ़ा और जाकर दरवाज़ा खोला।
दरवाज़ा खुलते ही मैं एक पल के लिए वहीं रुक गया। सामने मम्मी और पापा खड़े थे। उन्हें देखते ही मेरे चेहरे पर बड़ी मुस्कान आ गई। पूरे छह महीने बाद हम उन्हें अपने सामने देख रहे थे। मैंने तुरंत उनके पैर छुए और फिर दोनों को गले लगा लिया।
जैसे ही मम्मी और पापा घर के अंदर आए, उन्हें देखते ही पायल दीदी और नेहा दीदी अपनी कुर्सियों से उठ गई। दोनों दौड़ कर उनके पास पहुंचीं और बारी-बारी से उन्हें गले लगा लिया। इतने महीनों बाद हम सबको फिर से एक साथ देख कर घर का माहौल खुशियों से भर गया। ऐसा लग रहा था जैसे घर में फिर से रौनक लौट आई हो।
उस रात हम लगभग बारह बजे तक बैठ कर बातें करते रहे। मम्मी और पापा ने बताया कि क्रिसमस में सिर्फ पाँच दिन बाकी हैं और इस बार उन्होंने हम सब के लिए एक खास सरप्राइज प्लान किया है। उन्होंने कहा कि हम सब पाँच दिनों के लिए गोवा घूमने जाएंगे ताकि साथ में अच्छा समय बिता सकें। यह सुनते ही पायल दीदी और नेहा दीदी खुशी से उछल पड़ी। पिछले दो सालों में हम सब को एक साथ कहीं घूमने जाने का मौका नहीं मिला था। इसलिए यह खबर सुन कर सब के चेहरे पर अलग ही चमक आ गई।
रात काफी हो चुकी थी, इसलिए हमने सोने की तैयारी शुरू कर दी। तय हुआ कि मम्मी और पापा पायल दीदी और नेहा दीदी के कमरे में सोएंगे, और हम तीनों मेरे कमरे में सो जाएंगे। मेरा कमरा छोटा था, लेकिन हमने सोचा कि एक रात की बात है, आराम से निकल जाएगी।
बिस्तर पर मैं बीच में लेट गया। मेरी एक तरफ नेहा दीदी थी और दूसरी तरफ पायल दीदी। इतने सालों में पहली बार हम तीनों इस तरह एक ही बिस्तर पर साथ लेटे थे। कमरे की लाइट बंद होते ही चारों तरफ सन्नाटा छा गया, लेकिन मेरी आँखों में नींद नहीं थी।
दोनों मेरे बहुत करीब लेटी थी। बिस्तर छोटा होने की वजह से हमारे बीच बहुत कम जगह थी। जब भी वे हल्का सा करवट बदलती, उनके स्तन मेरे शरीर से छू जाते। उनकी गर्माहट मुझे साफ महसूस हो रही थी। मेरी दोनों बड़ी बहनें मेरे बिल्कुल पास सो रही थी और मैं खुद को शांत नहीं कर पा रहा था। उनके इतने करीब होने से मेरे शरीर में अजीब सी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। मेरा लंड लगातार और सख्त होता जा रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि अगर मैंने कुछ नहीं किया तो मैं पूरी रात इसी बेचैनी में तड़पता रहूंगा।