लेकिन मेरी उसको कुछ बोलने की हिम्मत नहीं थी। फिर सब लोग जाने लगे, लेकिन मैंने और मेरे एक दोस्त ने 2-3 पैग और लगा लिये। फिर हमने भी घर जाने का सोचा, और मैं पूरा टाइट होके वहां से निकला।
जब मैं घर पहुंचा तो निर्मला ने दरवाजा खोला। उसने मैरून रंग की साड़ी पहनी थी। मेरी पत्नी निर्मला भारी शरीर की औरत है, और उसका रंग गोरा है। गांड उसकी काफी बड़ी है।
मेरे अंदर आने के बाद उसने दरवाजा बंद किया, और कमरे की तरफ जाने लगी। मेरी नज़र उसकी गांड पर पड़ी, और मुझे अपने हमारे सहकर्मी की गांड याद आ गई। मेरा लंड खड़ा होने लगा, तो मैंने सोचा निर्मला को चोद ही सकता हूँ।
फिर मैंने कमरे में जाते ही निर्मला को पीछे से पकड़ लिया। वो थोड़ी हैरान हो गई, क्योंकि काफी समय बाद मैंने उसे ऐसे पकड़ा था। मैं ब्लाउज के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा, और नीचे से उसकी गांड पर अपना लंड रगड़ने लगा।
फिर मैंने उसको घुमाया, और उसके होठों को चूमने लगा। निर्मला भी हमेशा की तरह मेरा साथ देने लगी। जल्दी ही मैंने उसकी साड़ी खोल दी, और ब्लाउज, पेटीकोट, पैंटी, और ब्रा निकाल कर उसको नंगा कर दिया। मैं खुद भी नंगा हो गया।
फिर मैं उसके ऊपर आया, और मिशनरी पोजीशन में उसकी चुदाई करने लगा। मेरा लंड तेजी से उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। वो आह आह कर रही थी, और मैं उसके स्तन चूसते हुए उसकी चुदाई करता जा रहा था। कमरे में थप-थप की आवाज आ रही थी।
कुछ देर उसी पोजीशन में चुदाई के बाद मैंने उसको घोड़ी बना लिया, और पीछे से लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब फिर से मैंने तेज़ धक्के लगाने शुरू किये, और थप-थप की आवाज़ के साथ उसकी चुदाई करने लगा। तभी मेरी नज़र सामने लगे शीशे पर गयी। मैंने देखा मेरी बेटी हमारे दरवाजे पर छुप कर हमें देख रही थी।
ये देख कर मैं हैरान हो गया, और रुकने लगा। लेकिन तभी मेरे मन में पता नहीं क्या आया, और मैंने और ज़ोर से निर्मला की चुदाई शुरू कर दी। शायद मैं अपनी बेटी को अपने लंड की ताकत दिखाना चाहता था।
फिर 15 मिनट बाद मैंने अपना माल निर्मला की चूत में ही निकाल दिया। वो थक कर वहीं लेटी रही, और मैं भी उसके साथ ही लेट गया। कुछ देर में मैंने देखा कि निर्मला सो गई थी। लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। मुझे पता नहीं क्यों अपनी बेटी तानिया का ही ख्याल आ रहा था।
फ़िर मैं सुसु करने के लिए उठा। मैंने सिर्फ पायजामा पहना बिना अंडरवियर के, और बाथरूम की तरफ चल पड़ा। जब मैं बाथरूम के बाहर पहुंचा, तो बाथरूम की लाइट जल रही थी, लेकिन दरवाजा खुला था। मुझे अंदर से हल्की-हल्की आह आह आह की आवाज आ रही थी।
फिर मैंने थोड़ा दरवाजा खोला, तो अंदर का नजारा देख मैं हैरान हो गया। अंदर मेरी बेटी आधी नंगा खड़ी थी। उसका एक पैर टॉयलेट सीट पर था, और दूसरा फ्लोर पर। उसके हाथ में एक डिल्डो था, जिसको वो अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी।
मेरी बेटी तान्या एक खूबसूरत लड़की है। उसका फिगर 34-30-34 के आस-पास होगा। रंग उसका गोरा है, और बॉडी टाइट है। जब मैंने उसको इस हालत में देखा, तो मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने जरा भी देर नहीं की, और अंदर चला गया।
फिर मैंने तानिया को पीछे से पकड़ लिया। तानिया एक-दम से घबरा गई, और उसने पीछे देखा। मैंने उसको कहा-
मैं: बेटी तेरी जवानी प्यासी है। आजा मैं तेरी प्यास बुझा दूं। इस डिल्डो से कुछ नहीं होने वाला है।
ये बोल कर मैंने अपना पायजामा नीचे करके लंड बाहर निकाला। दूसरे हाथ से मैंने बेटी के हाथ से डिल्डो पकड़ कर साइड में फेंक दिया। फिर मैंने लंड चूत पर सेट करके धक्का मार दिया।
बेटी की आह निकली, और मेरा लंड उसकी चूत में समा गया। साली ने डिल्डो ले-ले कर अपनी चूत खोल रखी थी। हां क्या पता बाहर भी किसी से चुदती हो।
फिर मैंने उसकी चूत में धक्के मार कर उसकी चुदाई शुरू कर दी। वो आह्ह आह्ह करने लग गयी। वो पहले से ही गरम थी, इसलिए सब कुछ आसान से ही हो गया।
बड़ा मजा आ रहा था अपनी बेटी की चुदाई करके। उसकी चूत धड़ा-धड़ पानी छोड़ रही थी, जिससे चप-चप की आवाज आ रही थी। उसने टी-शर्ट पहन रखी थी। चुदाई के दौरान उसने वो भी उतार दी, और मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने बूब पर रख दिया। इससे पता चल रहा था कि वो कितनी बड़ी रंडी बन चुकी थी।
फिर मैं उसके स्तन मसलते हुए उसको चोदता रहा, और वो मुझे फ़क मी डैडी – फ़क मी डैडी बोलने लगी। 20 मिनट मैंने उसकी खूब चुदाई की। अब हम दोनों हांफ रहे थे। फिर जब मेरा निकलने वाला हुआ, तो वो जल्दी से घुटनो पर बैठ कर लंड चूसने लगी। मैंने अपना सारा माल उसको पिला दिया।
उसके बाद अक्सर मैं अपनी सेक्सी बेटी की चूत की प्यास बुझाता हूँ। आपको ये हॉट सेक्स कहानी कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताएं।