पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-12
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
मेरे पहले एग्जाम में अब सिर्फ एक महीना बचा था। हर दिन ऐसा लग रहा था जैसे टाइम तेज़ भाग रहा है और मैं अभी भी पीछे हूं। ऐसे में नेहा दीदी और पायल दीदी दोनों ने मुझे संभाल लिया। उन्होंने खुद ही जिम्मेदारी लेली कि मैं अच्छे से तैयार हो जाऊं। सुबह से लेकर रात तक, वो दोनों मेरे साथ ही रहती थी। कभी मुझे पढ़ाती, कभी खुद पढ़ कर समझाती, और कभी अचानक से सवाल पूछ कर चेक करती कि मुझे याद है या नहीं।
नेहा दीदी का तरीका बहुत अलग था। वो सीधे पढ़ाने नहीं लगती थी, पहले मुझे थोड़ा कंफर्टेबल बनाती थी। फिर धीरे-धीरे टॉपिक शुरू करती थी। वो हमेशा आसान चीज़ों से शुरू करती थी, ताकि मैं पहले समझूं, फिर आगे बढ़ूं। जब वो समझाती थी, तो हर लाइन को ऐसे तोड़ कर बताती थी कि दिमाग पर ज्यादा जोर ना पड़े। कई बार मैं अटक जाता था, लेकिन वो रुक कर मुझे देखती थी और फिर वही चीज़ और आसान तरीके से समझा देती थी।
लेकिन पायल दीदी… उनका तरीका बिल्कुल अलग था। वो बैठते ही सीधे मुश्किल टॉपिक खोल देती थी। ऐसा लगता था जैसे वो चाहती हों कि मैं जल्दी से सब समझ जाऊं, लेकिन मेरा दिमाग उतनी तेजी से पकड़ नहीं पाता था। उनके साथ पढ़ते हुए मुझे थोड़ा प्रेशर भी महसूस होता था, क्योंकि मैं समझ नहीं पा रहा था लेकिन बोल भी नहीं पाता था। फिर भी, मैं वहां से उठता नहीं था… क्योंकि उनके साथ बैठने में कुछ अलग ही फील आता था।
फिर धीरे-धीरे टाइम निकलता गया… और अब एग्जाम में सिर्फ एक हफ्ता बचा था। इस एक हफ्ते तक आते-आते नेहा दीदी ने अपने सारे सब्जेक्ट मुझे अच्छे से कवर करवा दिए थे। जो भी मुझे पास होने के लिए चाहिए था, वो उन्होंने पूरा करा दिया था। अब वो उतना इंटरफेयर नहीं करती थी। वो ज्यादातर अपने कमरे में ही रहती थी, कभी-कभी बस पूछ लेती थी कि सब ठीक चल रहा है या नहीं।
लेकिन पायल दीदी अभी शेड्यूल से पीछे थी। उनके कुछ टॉपिक अभी भी बाकी थे। इसलिए अब हमारा ज्यादातर टाइम साथ में ही बीतने लगा। सुबह से लेकर रात तक हम दोनों मेरे कमरे में ही रहते थे। किताबें खुली रहती थी, नोट्स इधर-उधर पड़े रहते थे, और हम लगातार पढ़ने की कोशिश करते रहते थे।
दिन गुजरते जा रहे थे, लेकिन उनका सिलेबस पूरा नहीं हो पा रहा था। धीरे-धीरे उनके चेहरे पर फ्रस्ट्रेशन दिखने लगा था। वो पहले जैसी हल्की-फुल्की नहीं रहीं, अब बार-बार कहती थी कि टाइम कम है और हमें जल्दी करना है।
लेकिन सच ये था कि मैं खुद भी पूरा फोकस नहीं कर पा रहा था… और उसकी वजह वही थी। जब वो मेरे पास बैठ कर पढ़ाती थी, तो बहुत पास बैठती थी। कभी थोड़ा झुक कर किताब दिखाती थी, कभी मेरी कॉपी अपने हाथ में लेकर समझाने लगती थी। उनका शर्ट थोड़ा ढीला था, और जब वो झुकती थी तो उनके गले के पास से हल्का सा क्लीवेज दिखने लगता था।
मैं पहले तो खुद को रोकने की कोशिश करता था… लेकिन फिर भी मेरी नज़र बार-बार वहीं चली जाती थी। ऐसा नहीं था कि मैं जान-बूझ कर हर बार देखना चाहता था, लेकिन जितना पास वो बैठती थी, उतना ही मेरा ध्यान भटक जाता था।
कभी-कभी जब वो बिल्कुल पास आकर समझाती थी, तो उनके स्तन हल्के से मूव होते दिखते थे, और मैं कुछ सेकंड के लिए वहीं अटक जाता था।
एक दिन जब मैं फिर से पढ़ाई छोड़ कर उनकी तरफ देख रहा था… वो अचानक रुक गई। इस बार उन्होंने सीधे मेरी आंखों में देखा। उनकी नज़र थोड़ी सख्त थी।
“पढ़ाई पर ध्यान दे…” उन्होंने थोड़े गुस्से में कहा।
उसके बाद माहौल थोड़ा बदल गया। वो अब पहले की तरह आराम से नहीं पढ़ाती थी। हर चीज़ जल्दी-जल्दी करवाना चाहती थी। और मैं… अब हर बार खुद को रोकने की कोशिश करता था, लेकिन जितना रोकता था, उतना ही ध्यान भटक जाता था।
उधर, नेहा दीदी भी अब थोड़ी अलग लगने लगी थी। पहले वो हमेशा हमारे साथ बैठती थी, लेकिन अब वो ज़्यादातर अपने कमरे में ही रहती थी। शायद उन्हें ये महसूस होने लगा था कि मैं अब ज़्यादा टाइम पायल दीदी के साथ ही बिताता हूं। धीरे-धीरे उनके बिहेवियर में थोड़ा बदलाव दिखने लगा। वो पहले जैसी नॉर्मल नहीं थी। जब भी मैं उनके कमरे के पास से गुजरता, वो बस एक बार मुझे देखती और फिर चुप हो जाती। कुछ कहना चाहती थी, लेकिन कह नहीं रही थी।
एक दिन ऐसा हुआ कि पायल दीदी वॉशरूम चली गई। मैं अपने कमरे में कुर्सी पर बैठा हुआ था, किताब खोल कर पढ़ने की कोशिश कर रहा था… लेकिन दिमाग कहीं और ही था।
तभी दरवाज़ा हल्के से खुला… और नेहा दीदी अंदर आई। मैंने सिर उठा कर उनकी तरफ देखा। वो कुछ सेकंड तक बस मुझे देखती रही, जैसे सोच रही हों कि क्या कहें। फिर वो धीरे से मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। उनकी आवाज़ पहले से थोड़ी धीमी और अलग थी— “मुझसे बात करनी है… गोलू?”
वो सीधे मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और बस एक ही लाइन में बोली— “तुम हमेशा पायल दीदी के साथ रहते हो… मुझे लगता है तुम उसे भी मेरे जैसे चोदना चाहते हो।”
उनकी ये बात सुनते ही मैं सन्न रह गया। लेकिन इस बार कुछ और अलग था—उनकी आंखों में नमी थी। वो मुझे देख रही थी, लेकिन उनकी आंखें धीरे-धीरे भर रही थी, जैसे वो खुद भी अपने शब्दों से हिल गई हों।
मैं तुरंत कुर्सी से उठ गया। बिना कुछ सोचे मैं उनके पास गया और हल्के से उन्हें अपनी तरफ खींच कर गले लगा लिया। जैसे ही मैंने उन्हें पकड़ा, वो पूरी तरह मेरे करीब आ गई। उनके शरीर का दबाव सीधे मेरे सीने से लगा। उनके स्तन मेरे सीने के बीच हल्के से दब गए, क्योंकि हम दोनों बहुत पास खड़े थे। वो पहले थोड़ा सख्त खड़ी थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने भी खुद को छोड़ दिया और मेरे सीने पर हल्के से टिक गई।
कुछ सेकंड तक हम दोनों वैसे ही खड़े रहे… फिर मैंने धीरे से कहा— “पायल दीदी बस मेरी बहन है… और कुछ नहीं।”
उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए धीरे से कहा—”मैं भी तो तुम्हारी बहन हूं… फिर भी तुमने मुझे चोदा है।”
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए धीरे से कहा—”मुझ पर भरोसा करो दीदी… मेरे और पायल दीदी के बीच कुछ नहीं है। मुझे सिर्फ आप पसंद हो… और कोई नहीं।”
दिन गुजरते रहे… और आखिर वो दिन आ गया जब एग्जाम अगले दिन था। पूरे दिन हम लोग पढ़ते रहे, लेकिन असली प्रेशर रात में महसूस हो रहा था। उस रात मैं और पायल दीदी फिर से मेरे कमरे में थे। हम दोनों ने तय किया कि आज जितना हो सके उतना पढ़ना है। घड़ी आगे बढ़ती जा रही थी, लेकिन हम दोनों रुके नहीं। आधी रात तक हम लगातार पढ़ते रहे।
पायल दीदी ने उस दिन सफेद रंग की टी-शर्ट और नीले रंग का शॉर्ट पहना हुआ था। कपड़ा थोड़ा पतला था, और जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, वो थोड़ा रिलैक्स होकर बैठने लगी—कभी पैर मोड़ कर, कभी थोड़ा झुक कर किताब देखने लगती।
मैं सामने बैठा था, लेकिन मेरा ध्यान बार-बार उनकी तरफ चला जाता था। उनकी सफेद टी-शर्ट उनके शरीर से पूरी तरह चिपकी हुई थी, जिससे उनके स्तनों का शेप साफ दिखाई दे रहा था। कपड़ा इतना पतला था कि हल्की रोशनी में उनके स्तनों का उभार और ज्यादा निखर रहा था। जब वो थोड़ा झुकती थी, तो टी-शर्ट और कस जाती थी और उनके स्तनों का पूरा फॉर्म और ज्यादा उभर कर सामने आता था।
उनके स्तनों के बीच का हल्का गैप भी कपड़े के नीचे से दिख रहा था, और जहां कपड़ा सबसे ज्यादा टाइट था, वहां उनके निप्पल्स के हल्के पॉइंट्स उभरते हुए नज़र आ रहे थे। वो बहुत ज्यादा साफ नहीं थे, लेकिन इतने थे कि ध्यान बार-बार वहीं चला जाए। जब वो सांस लेती थी या थोड़ा हिलती थी, तो वो हल्का सा उभार और भी नोटिस होने लगता था।
शायद मेरी नजरें ज़्यादा देर तक वहीं रुकी रहीं, क्योंकि अचानक उन्होंने मेरी तरफ देखा। कुछ सेकंड तक वो मुझे देखती रही, फिर थोड़ा सा सख्त होकर बोली, “गोलू, मेरे बूब्स की तरफ मत देखो… पढ़ाई पर ध्यान दो।”
मैं कुछ सेकंड चुप रहा, फिर धीरे से उनकी तरफ देखते हुए बोल दिया ” लेकिन दीदी… आपके बूब्स अच्छे लग रहे हैं… क्या मैं एक बार उन्हें छू सकता हूँ?”
मेरी बात सुनते ही उनका चेहरा एक-दम बदल गया। वो तुरंत सीधी होकर खड़ी हो गईं और तेज़ आवाज़ में बोली “नहीं गोलू! बिल्कुल नहीं… ऐसी बात भी मत सोचो, पढ़ाई पर ध्यान दो!”
उस रात उसके बाद कुछ भी नहीं हुआ। हम दोनों चुप-चाप बैठ कर पढ़ने की कोशिश करते रहे, लेकिन माहौल पूरी तरह बदल चुका था। ना वो पहले जैसा नॉर्मल था, ना मैं पहले जैसा फोकस कर पा रहा था।
अगले दिन मैं एग्जाम देने गया। मैं पेपर लेकर बैठा, लेकिन जैसे ही सवाल पढ़ना शुरू किया, मुझे समझ आ गया कि दिमाग सही से काम नहीं कर रहा है। मैं याद करना चाहता था कि पायल दीदी ने मुझे क्या पढ़ाया था, कौन से टॉपिक समझाए थे… लेकिन कुछ भी क्लियर नहीं आ रहा था।
उसकी जगह बार-बार वही चीज़ याद आ रही थी—वो रात, उनका मेरे सामने बैठना, उनका झुकना, और उनकी टी-शर्ट के नीचे दिखता हुआ उनका शरीर। मुझे साफ याद था कि कैसे उनका टी-शर्ट उनके स्तनों पर फिट हो रहा था, कैसे हर हल्की मूवमेंट में उनका शेप बदल रहा था, और कैसे उनके निप्पल्स के हल्के पॉइंट्स कपड़े के नीचे से दिख रहे थे।
मैं पेपर पर ध्यान लगाने की कोशिश करता, लेकिन हर कुछ सेकंड में वही इमेज दिमाग में वापस आ जाती। मैं खुद को रोकने की कोशिश करता, लेकिन जितना रोकता, उतना ही वो चीज़ और क्लियर होती जाती। मुझे याद करना था कि उन्होंने क्या पढ़ाया… लेकिन मुझे याद आ रहा था सिर्फ ये कि वो कैसी लग रही थी।
किसी तरह पेपर खत्म करके मैं घर वापस आया। जैसे ही मैंने दरवाज़ा खटखटाया, नेहा दीदी ने दरवाज़ा खोला। उन्होंने मुझे देखते ही पूछा, “कैसा गया एग्जाम?”
मैंने बिना ज्यादा सोचे बस इतना कहा, “ठीक था…”
उन्होंने मुझे ध्यान से देखा, जैसे वो समझने की कोशिश कर रही हों कि मैं सच बोल रहा था या नहीं, लेकिन मैंने उनसे नज़रें मिलाए बिना सीधे अपने कमरे की तरफ चल दिया। कमरे में जाकर मैं सीधे बिस्तर पर लेट गया। मैंने आंखें बंद कर ली, जैसे बस सो जाना चाहता हूं… लेकिन असल में मैं जानता था कि क्या हुआ है।
करीब आधे घंटे बाद दरवाज़ा हल्के से खुला। पायल दीदी अंदर आई। वो धीरे-धीरे मेरे पास आईं और बोली, “नेहा दीदी कह रही थी कि तुम्हारा एग्जाम अच्छा गया…”
मैंने आंखें खोली और सीधा छत की तरफ देखते हुए कहा, “मैंने उन्हें झूठ बोला था…” मैंने धीरे से आगे कहा, “मेरा एग्जाम अच्छा नहीं गया… मुझे पता है मैं फेल होने वाला हूं।”
वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही, फिर थोड़ा सा झुक कर बोली, “क्यों गोलू… क्या हुआ? तुम्हें जवाब याद नहीं आए?”
मैं धीरे से उठ कर बिस्तर पर बैठ गया और उनकी तरफ देखने लगा। वो अभी भी वही सफेद टी-शर्ट पहने हुए थी। कुछ सेकंड तक मैं बस उन्हें देखता रहा, फिर बिना रुके बोल दिया, “मुझे कुछ भी याद नहीं रहा दीदी… मुझे सिर्फ तुम्हारे बूब्स याद रहे थे। मुझे बस यही याद रहा कि वो कैसे दिख रहे थे।”
मेरी बात सुनते ही उनका चेहरा बदल गया। उन्होंने कुछ भी जवाब नहीं दिया। बस एक सेकंड के लिए मुझे देखा… फिर अचानक मुड़ी और बिना कुछ बोले कमरे से बाहर चली गईं।
मुझे समझ आ गया था कि वो फिर से मुझसे नाराज़ हो गई हैं। कमरे में फिर वही साइलेंस रह गया, और मैं वापस बिस्तर पर लेट गया। छत को देखते हुए बस यही सोच रहा था कि मैंने क्या कर दिया।
शाम को हम सब साथ में डिनर के लिए बैठे। नेहा दीदी भी थी, पायल दीदी भी… लेकिन माहौल बिल्कुल अलग था। पायल दीदी ने पूरे टाइम मुझसे एक भी शब्द नहीं बोला। वो बस चुप-चाप खाना खाती रही, जैसे मैं वहां था ही नहीं। मैं भी चुप था। बीच-बीच में नज़र उठती, लेकिन वो मेरी तरफ देखती भी नहीं थी। उस डिनर में सिर्फ प्लेटों की आवाज़ थी… कोई बात-चीत नहीं।
खाना खत्म करके मैं सीधे अपने कमरे में वापस आ गया और बिस्तर पर लेट गया। आंखें बंद कर ली, लेकिन नींद जल्दी नहीं आई। दिमाग में दिन भर की बातें घूम रही थी।
करीब एक घंटे बाद, रात थोड़ी और गहरी हो चुकी थी… तभी दरवाज़ा हल्के से खुला। मैंने आंखें खोली। पायल दीदी फिर से मेरे कमरे में खड़ी थी। इस बार उन्होंने नीले रंग का नाइट गाउन पहना हुआ था। वो दरवाज़े के पास कुछ सेकंड तक खड़ी रहीं… जैसे सोच रही हों कि अंदर आएं या नहीं।
मैंने उन्हें देख कर पूछा, “आप यहाँ क्यों आई हो दीदी?”
वो धीरे-धीरे अंदर आईं और मेरी तरफ देखते हुए बोली, “अभी तुम्हारे पाँच पेपर बाकी हैं… मैं तुम्हें पढ़ाने आई हूँ।”
मैं उन्हें देखता रह गया… समझ नहीं पा रहा था कि ये वही पायल दीदी हैं जो कुछ घंटे पहले मुझसे बात भी नहीं कर रही थी।
वो धीरे-धीरे अंदर आईं… फिर पीछे मुड़ कर दरवाज़ा बंद किया… और अंदर से लॉक कर दिया। वो कुछ कदम और आगे बढ़ीं, फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली, “थोड़ी देर पहले तुम क्या कह रहे थे… तुम्हें सिर्फ मेरे बूब्स याद हैं… बाकी कुछ नहीं, सही?”
मैं कुछ सेकंड तक चुप रहा… फिर धीरे से उनकी आंखों में देखते हुए कहा, “हाँ दीदी…”
वो कुछ पल तक मुझे देखती रही, जैसे मेरे जवाब को समझ रही हो। फिर हल्का सा सांस लेकर धीरे से बोली, “ठीक है… अब मुझे समझ आ गया है कि तुम्हें कैसे पढ़ाना है… ताकि तुम्हें सब याद रहे।”
उन्होंने अपने नाइट गाउन की डोरी ढीली की और उसे नीचे गिरने दिया। मैं एक पल के लिए बिल्कुल रुक गया। वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी, बिना किसी हिचक के, जैसे उन्होंने ये पहले ही सोच लिया हो।
उनके पूरे शरीर पर नीली इंक से जगह-जगह कुछ लिखा हुआ था। उनके स्तन साफ दिख रहे थे—गोल, भरे हुए, और हर लाइन उनके शेप के साथ मुड़ती हुई। जहां-जहां इंक से लिखा था, वो उनके कर्व के साथ फैलता हुआ दिख रहा था। जब वो हल्का सा सांस लेती थी, तो उनका सीना ऊपर-नीचे होता था और उसके साथ वो लिखे हुए शब्द भी हल्के-हल्के हिलते थे।
नीचे की तरफ, पेट और जांघों के पास भी छोटे-छोटे नोट्स लिखे थे। उनके नाजुक हिस्से के आस-पास भी इंक से शब्द लिखे हुए थे। वह हिस्सा साफ दिख रहा था—एक सॉफ्ट सा शेप, बीच में हल्की सी लाइन जो दोनों तरफ को अलग करती थी, और उसके आस-पास की त्वचा स्मूद और हल्की सी टाइट दिख रही थी। हर चीज़ सीधी और क्लियर थी, जिससे नज़र अपने आप वहीं रुक जाती थी। उनका पूरा शरीर जैसे एक नोटबुक बन गया था—हर जगह कुछ लिखा हुआ, हर हिस्से का एक मतलब।
वो धीरे-धीरे मेरे पास आईं और बिस्तर पर मेरी बगल में लेट गईं। उन्होंने अपनी पीठ के बल लेटना चुना। उनके स्तन हर सांस के साथ हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रहे थे, जिससे उन पर लिखे शब्द भी हिलते हुए दिख रहे थे।
उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए धीरे से कहा, “गोलू… तुमने कहा था ना कि तुम्हें एग्जाम में सिर्फ मेरे बूब्स याद थे… बाकी कुछ नहीं…”
मैं चुप-चाप उन्हें देखता रहा।
वो आगे बोली, “तो अब इन्हें ही पढ़ो… जो मैंने यहाँ लिखा है… अगर तुम ध्यान से पढ़ोगे, तो सब याद हो जाएगा।”
मैं चुप-चाप उन्हें देखता रहा, थोड़ा हिचकिचाते हुए। फिर धीरे से बोल दिया, “लेकिन दीदी… आपको ऐसे देख कर मेरा लंड पैंट के अंदर सख्त हो रहा है… मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रहा…”
वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही। उनके चेहरे पर कोई हड़बड़ाहट नहीं थी। फिर वो हल्की सी आवाज़ में बोली, “पहले पढ़ाई करो… जो लिखा है उसे याद करो… उसके बाद जो तुम चाहोगे… वो कर लेना।”