पिछला भाग पढ़े:- नेहा दीदी और मेरा सिक्रेट अफेयर-10
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
मम्मी-पापा ने नेहा दीदी की शादी की बात उस लड़के से पक्की कर दी थी। उन्हें वह लड़का इतना ज़्यादा पसंद आया कि उन्होंने बिना किसी देरी के सिर्फ तीन महीने बाद की शादी की तारीख भी तय कर दी। यह सब मेरे लिए बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।
कज़िन की शादी खत्म होने के बाद, मैं बिल्कुल अकेला बेंगलुरु वापस आ गया। नेहा दीदी ने कुछ दिन और मम्मी-पापा के साथ रहने का फैसला किया था, इसलिए वह वहीं रुक गई।
बेंगलुरु आकर मैं फिर से उसी सख्त और कड़े नियमों वाले हॉस्टल में रहने लगा। हॉस्टल की टाइमिंग बहुत कड़ी थी, रात को आठ बजे के बाद गेट बंद हो जाता था और वॉर्डन हर वक्त सब पर नज़र रखता था। वहाँ की चारदीवारी में मुझे पहले से कहीं ज़्यादा अकेलापन महसूस होने लगा था। लेकिन इस बार हालात अलग थे, अब मेरे पास ना तो नेहा दीदी की तस्वीरें देखने का कोई मौका था और ना ही उनसे बात करने का।
हम दोनों वैसे तो एक ही शहर में थे, लेकिन उन दिनों हमारे बीच बात-चीत पूरी तरह बंद हो चुकी थी। कॉलेज से सीधे हॉस्टल आना और बिना किसी से बात किए अपने कमरे में बंद हो जाना, यही मेरा रोज़ का रूटीन बन गया था। एक-दूसरे से मिलना तो अब पूरी तरह नामुमकिन सा हो गया था। हॉस्टल के सूने कमरे में बैठ कर मैं बस इसी कशमकश में डूबा रहता था।
वक्त हवा की तरह उड़ने लगा और देखते ही देखते शादी के दिन करीब आ गए। जब शादी में सिर्फ एक हफ्ता बचा था, तब कॉलेज और वॉर्डन के चक्कर काटने के बाद आखिरकार मुझे हॉस्टल से छुट्टी मिल ही गई। मैंने स्टेशन जाने के लिए अपनी चादरें समेटी और सामान पैक करके सीधे अपने घर निकलने की तैयारी करने लगा।
तभी पापा का फोन आ गया। मैंने सोचा वह पूछेंगे कि मैं कब तक पहुँच रहा हूँ, लेकिन उन्होंने फोन उठाते ही कहा, “गोलू, तुम सीधे घर मत आओ। पहले वहाँ जाओ जहाँ नेहा दीदी रह रही हैं और उन्हें भी अपने साथ ही लेकर घर आओ।”
पापा की यह बात सुन कर मैं एक पल के लिए वहीं रुक गया। इतने दिनों से हमारे बीच जो पूरी तरह खामोशी थी, वह अब अचानक टूटने वाली थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इतने दिनों बाद जब मैं उनके सामने जाऊंगा, तो हम दोनों एक-दूसरे से क्या बात करेंगे।
मैंने अपना बैग उठाया और स्टेशन से सीधे एक टैक्सी पकड़ कर उनके अपार्टमेंट की तरफ निकल गया। पूरे रास्ते गाड़ी की खिड़की से बाहर देखते हुए मेरे दिमाग में अजीब सी हलचल चल रही थी कि इतने दिनों की खामोशी के बाद जब हम अचानक आमने-सामने होंगे, तो क्या बात होगी।
टैक्सी से उतर कर मैं उनके फ्लोर पर गया। फ्लैट के बंद दरवाज़े के सामने खड़े होकर मैंने गहरी सांस ली और डोरबेल बजाई।
कुछ ही सेकंड में जैसे ही लॉक खुलने की आवाज़ आई और उन्होंने दरवाज़ा खोला, मेरे दिल की धड़कन एक पल के लिए बिल्कुल रुक गई। वह ठीक मेरे सामने खड़ी थी। उन्होंने एक सफेद रंग का क्रॉप टी-शर्ट और नीले रंग का शॉर्ट्स पहन रखा था।
उनके पूरे शरीर और लंबे पैरों पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थी, जिससे उनकी त्वचा पर एक अजीब सी नमी और चमक दिख रही थी। क्रॉप टी-शर्ट काफी छोटी और टाइट थी, जिसकी वजह से उनकी पतली कमर और नाभि का हिस्सा पूरी तरह खुला और साफ दिखाई दे रहा था।
उनके लंबे बाल पूरी तरह बिखर कर उनके चेहरे और आँखों के सामने आ गए थे। दरवाज़ा खोलते ही उन्होंने अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाया और उन बिखरे बालों को समेट कर सिर के पीछे करने की कोशिश की। उनके इस तरह हाथ ऊपर उठाने से उनकी शॉर्ट सफेद टी-शर्ट ऊपर की तरफ और ज़्यादा खिंच गई।
शायद वह ब्रा पहनना भूल गई थी, जिसकी वजह से उनके स्तनों का साइज और उनका पूरा गोल आकार साफ-साफ उभरकर सामने आ रहा था। टी-शर्ट का पतला सफेद कपड़ा उनके स्तनों के बड़े उभार की वजह से सामने से पूरी तरह खिंच गया था, जिससे उनका पूरा शेप और उनका खिंचाव बेहद साफ लग रहा था।
कपड़ा हल्का होने की वजह से उनके निपल्स का कड़ापन सामने से साफ उभर रहा था, और उनका नुकीला आकार बाहर की तरफ साफ-साफ दिखाई दे रहा था। जैसे ही उन्होंने बालों को पीछे करने के लिए हाथ उठाए, उनके स्तनों का आकार टी-शर्ट के अंदर और भी ज़्यादा ऊपर की ओर तन गया, जिससे उनकी गोलाई और भी बड़ी और सुंदर दिखाई दे रही थी। वह बिना कुछ बोले, बस चौंक कर दरवाज़े पर टिकी रही और मुझे देखती रही।
जैसे ही वह चौंक कर दरवाज़े पर खड़ी मुझे देख रही थी, इससे पहले कि वह कुछ भी बोल पाती, मैंने तुरंत कहा, “पापा ने मुझे आपको लेने के लिए भेजा है।”
मेरे इतना कहते ही वह थोड़ा पीछे हट गई और दरवाज़े का रास्ता छोड़ दिया ताकि मैं अपार्टमेंट के अंदर आ सकूं। मैं बिना कुछ बोले अंदर बढ़ा और सीधे जाकर सामने रखे सोफे पर बैठ गया।
तभी उन्होंने सोफे के पास रखा हुआ एक दुपट्टा उठाया और तुरंत उससे अपने शरीर के सामने के हिस्से को ढकने लगी। उनका इस तरह अचानक शर्माना या खुद को छिपाना मुझे बेहद अजीब लगा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वह अब मुझसे इस तरह खुद को क्यों छिपा रही थी। हमारे बीच तो पहले से ही सब कुछ हो चुका था।
मैंने उन्हें कई बार बिना कपड़ों के, पूरी तरह नंगी देखा था। सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि हम दोनों उस हद तक करीब थे जहाँ मैं अपना लंड उनके मुँह में और उनके पीछे के हिस्से में भी डाल चुका था। जो इंसान मेरे सामने पहले सब कुछ खोल चुका हो, उसका इस तरह पर्दा करना मुझे पूरी तरह हैरान कर रहा था।
दुपट्टा ओढ़ने के बाद वह थोड़ी देर शांत खड़ी रहीं, जैसे अपनी बात कहने के लिए सही शब्द ढूंढ रही हों। फिर मेरी तरफ देखते हुए वह बिल्कुल धीमी और हल्की आवाज़ में बोली, “क्या हम कल चल सकते हैं? मुझे यहाँ से कुछ ज़रूरी सामान खरीदना है।”
सोफे पर बैठे-बैठे करीब एक घंटा बीत गया। जब वह अंदर के कमरे से तैयार होकर बाहर आई, तो उन्हें देख कर मैं थोड़ी देर के लिए देखता ही रह गया। उन्होंने घर के वह ढीले-ढाले कपड़े बदल लिए थे और अब एक हल्के नीले रंग की कुर्ती और फिटिंग जींस पहन रखी थी।
उनके बाल अभी भी थोड़े गीले थे जिन्हें उन्होंने पीछे की तरफ बांध रखा था। इस सिंपल लुक में भी वह बहुत ही प्यारी और सुंदर लग रही थी। उन्होंने अपना सैंडल पहना, पर्स उठाया और मेरी तरफ देख कर चलने का इशारा किया।
हम अपार्टमेंट से नीचे आए और गाड़ी लेकर शहर के सबसे बड़े कपड़ों के मार्केट की तरफ निकल गए। दोपहर का समय था, इसलिए सड़कों पर गाड़ियों की लंबी लाइनें लगी थी और धूप सीधे चेहरे पर पड़ रही थी। कुछ ही देर में हम उस बड़े कपड़ों के शोरूम के सामने थे, जिसका नाम पूरे शहर में मशहूर था। शोरूम का कांच का बड़ा सा दरवाज़ा खोल कर जैसे ही हम अंदर गए, वहाँ का माहौल बिल्कुल अलग था।
सेंट्रल एसी की ठंडी हवा चेहरे पर लगी और चारों तरफ लाइट्स की वजह से पूरा काउंटर चमक रहा था। दिन का समय होने के बाद भी दुकान के अंदर पैर रखने की जगह नहीं थी; हर तरफ शादियों की शॉपिंग करने आए परिवारों की भीड़ थी। सेल्समैन चिल्ला-चिल्ला कर साड़ियाँ दिखा रहे थे।
मैं चुप-चाप उनके पीछे-पीछे चल रहा था। वह सीधे भारी साड़ियों वाले स्पेशल काउंटर की तरफ बढ़ी और वहाँ जाकर बैठ गई। जब उन्होंने सेल्समैन से कहा, “मुझे शादी के लिए लाल रंग की साड़ियाँ दिखाइए,” तो सुन कर मैं एक पल के लिए चौंक गया। मेरे दिमाग में अचानक कई सवाल घूमने लगे क्योंकि उन्होंने गाड़ी में या अपार्टमेंट में मुझसे एक बार भी यह नहीं कहा था कि वह यहाँ अपनी शादी का जोड़ा खरीदने आ रही थी। उनका यह फैसला मेरे लिए बिल्कुल अचानक और हैरान करने वाला था।
सेल्समैन ने तुरंत मुस्कुराते हुए उनके सामने साड़ियों के डिब्बे खोलने शुरू कर दिए। देखते ही देखते काउंटर पर साड़ियों का ढेर लग गया। लाल रंग के भी इतने सारे शेड्स थे—कुछ गहरे लाल, कुछ एक-दम चटक लाल, तो कुछ पर सोने के तारों का भारी काम किया हुआ था। वह हर एक साड़ी को अपने हाथों में लेकर उसके कपड़े को छूकर देख रही थी। कभी वह साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर रखती और सामने लगे बड़े से शीशे के सामने खड़ी होकर खुद को देखती।
वह बहुत बारीकी से हर एक डिजाइन को चेक कर रही थी कि वह उन पर कैसी लग रही है। साड़ियों की वैरायटी इतनी ज़्यादा थी और उनकी पसंद ऐसी थी कि सेल्समैन भी थकने लगा था। एक साड़ी पसंद आती, तो दूसरी उससे बेहतर लगती।
समय का पता ही नहीं चला। शोरूम की लाइट्स और साड़ियों के रंगों के बीच उलझते-उलझते घंटों बीत गए। आखिरकार, लगभग तीन-चार घंटे की मेहनत और दर्जनों साड़ियाँ रिजेक्ट करने के बाद, उन्होंने एक बेहद खूबसूरत, गहरे लाल रंग की बनारसी साड़ी पसंद की, जिस पर बहुत ही बारीक और सुंदर काम किया हुआ था। साड़ी फाइनल होने के बाद बिलिंग काउंटर पर पेमेंट हुई और सामान पैक कराया गया। जब हम उस भारी पैकेट को लेकर शोरूम से बाहर निकले, तो दोपहर की तेज़ धूप पूरी तरह ढल चुकी थी। आसमान में शाम का धुंधलका और हल्का अंधेरा घिर आया था। थके हुए कदमों से हम वापस गाड़ी की तरफ बढ़े और उनके अपार्टमेंट के लिए रवाना हो गए।
शाम को जब हम वापस उनके अपार्टमेंट पहुंचे, तो थक कर मेरा बुरा हाल हो चुका था। साड़ियों के उस बड़े शोरूम की भीड़, लगातार खड़े रहना और घंटों तक चलने वाली शॉपिंग की वजह से मेरा पूरा शरीर टूट रहा था। दिमाग और बदन दोनों पूरी तरह थक चुके थे। मैं बिना कुछ सोचे-समझे सीधे उनके बेडरूम के अंदर चला गया। कमरे में हल्की शांति थी। मैंने जूते उतारे और सीधे उनके मुलायम बिस्तर पर लेट गया। आँखें भारी हो रही थी, इसलिए मैंने आँखें बंद कर ली और सोने की कोशिश करने लगा ताकि थकान थोड़ी कम हो सके।
अभी मुझे लेटे हुए कुछ ही मिनट हुए थे और मैं नींद की आगोश में जा ही रहा था कि तभी बेडरूम का दरवाज़ा धीरे से खुला। वह कमरे के अंदर आई। उनके कदमों की आहट बहुत धीमी थी। वह मेरे पास आई और बहुत ही आराम से, बिना कोई आवाज़ किए बिस्तर के कोने पर बैठ गई। उनके बैठने से गद्दे में जो हल्का सा झुकाव हुआ, उससे मुझे उनके पास होने का अहसास हो गया।
उन्होंने कुछ देर चुप-चाप मुझे लेटे हुए देखा, शायद वह यह समझने की कोशिश कर रही थी कि मैं सो रहा हूँ या जाग रहा हूँ। फिर उन्होंने बेहद धीमी, नर्म और थोड़ी फिक्रमंद आवाज़ में मुझसे कहा, “गोलू, तुम सुबह से इतने शांत क्यों हो? प्लीज कुछ तो बोलो।”
उनकी यह बात सुन कर मेरे अंदर का सारा दर्द और गुस्सा बाहर आ गया। मैं बिस्तर पर थोड़ा उठ कर बैठा, उनकी तरफ देखा और रुंधे हुए गले से कहा, “मैं क्या बोलूँ दीदी? आपने मुझसे बिना कुछ पूछे खुद ही शादी करने का फैसला कर लिया और मुझे इस तरह अकेला छोड़ने जा रही हैं।”
मेरी बात सुन कर उनकी आँखों में भी आंसू आ गए। उन्होंने बहुत ही दुखी मन से अपनी सफाई देते हुए कहा, “गोलू, मैं मम्मी-पापा के फैसले को मना नहीं कर सकती। उनकी बात टालना मेरे बस में नहीं है।”
उनका यह जवाब सुन कर मेरा दिल पूरी तरह टूट गया। मैंने थोड़ा गुस्से में अपना मुंह दूसरी तरफ फेर लिया और कहा, “अगर आप उनके फैसले को मना नहीं कर सकती, तो फिर इस बारे में मुझसे डिस्कस ही क्यों कर रही हैं? मुझे यह सब बता कर क्यों और ज़्यादा तकलीफ दे रही हैं?”
मेरी बात सुन कर उनके चेहरे पर एक अजीब सी बेबसी और शर्म आ गई। उन्होंने अपनी गर्दन थोड़ी झुकाई और बेहद धीमी, कांपती हुई आवाज़ में कहा, “क्योंकि गोलू, मैं अभी भी वर्जिन हूँ।”
उनकी यह बात सुनते ही मैं पूरी तरह चौंक गया। मैंने तुरंत अपना मुंह घुमा कर उनके चेहरे की तरफ देखा, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहना चाह रही थी।
तभी उन्होंने मेरी आँखों में आँखें डाली और बिना झिझके आगे कहा, “हम दोनों ने आपस में बहुत कुछ किया है… जैसे मैंने तुम्हारा लंड चूसा है, तुमने मुझे पीछे से चोदा है और यहाँ तक कि मेरे बूब्स भी दबाए हैं, लेकिन हमने कभी भी सामने से कुछ नहीं किया। इसलिए मैं चाहती हूँ कि शादी से पहले मेरी वर्जिनिटी तुम तोड़ो, कोई दूसरा आदमी नहीं।”
इससे पहले कि मैं कुछ भी कह पाता या अपने हैरान दिमाग को संभाल पाता, उन्होंने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया। उनके चेहरे पर अब कोई झिझक या डर नहीं था, बल्कि एक पक्का फैसला साफ दिख रहा था। उन्होंने अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाकर अपनी नीले रंग की कुर्ती को ऊपर की तरफ खींचा और उसे अपने सिर से निकालते हुए एक तरफ रख दिया। इसके तुरंत बाद, उन्होंने अपनी जींस का बटन खोला और उसे भी पैरों से नीचे सरका कर पूरी तरह उतार दिया।
इन कपड़ों के नीचे उन्होंने सफेद रंग की ब्रा और पेंटी पहन रखी थी। कमरे की हल्की पीली रोशनी में उनकी साफ, गोरी रंगत और उनका सुडौल बदन साफ चमक रहा था। उनकी सांसें थोड़ी तेज़ चल रही थी, जिससे उनका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था।
फिर उन्होंने बिना एक पल भी रुके, बहुत ही आराम से अपनी ब्रा की हुक खोली और उसे अपने कंधों से नीचे गिरा दिया। उसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी पेंटी को भी कमर से नीचे सरका कर पैरों से बाहर निकाल दिया। उनके सारे कपड़े हटते ही उनका पूरा नंगा शरीर पहली बार सीधे मेरी आँखों के सामने था।
उनके बूब्स एक-दम सही शेप में, भरे हुए और सुडौल थे। उनके बूब्स के ठीक बीच में हल्के गुलाबी रंग के निपल्स इस रोशनी में बेहद सुंदर और उभरे हुए लग रहे थे। जैसे ही वह बिस्तर पर मेरी तरफ थोड़ी सी झुकीं, उनके बूब्स का भारीपन और उनका उभार और भी निखर कर मेरे सामने आ गया। नीचे उनके पेट की हल्की और कोमल बनावट के ठीक नीचे उनका नाजुक हिस्सा था, जो बेहद साफ और सुंदर दिख रही थी।
वहाँ हल्के, बहुत ही छोटे और मखमली बाल थे और उनके नाजुक हिस्से की त्वचा पूरी तरह बेदाग, कोमल और सॉफ्ट लग रही थी। पहली बार उन्हें इस रूप में, इतने करीब से देखना मेरे लिए किसी सपने जैसा था, जहाँ उनका अंग-अंग बेहद कामुक और प्यारा लग रहा था। मैं बस बिना पलक झपकाए उनके इस रूप को देखता रह गया।
वह मेरे बिल्कुल करीब आई और उन्होंने अपने कोमल हाथों से मेरे कपड़े उतारना शुरू कर दिया। सबसे पहले उन्होंने मेरी टी-शर्ट को ऊपर की तरफ खींचा और उसे मेरे शरीर से अलग कर दिया। उनके हाथों का टच जब मेरी बॉडी पर हो रहा था, तो मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी करंट जैसी सिहरन दौड़ गई। इसके बाद उन्होंने बहुत ही आराम से मेरी जींस और अंडरवियर को भी नीचे सरका कर पूरी तरह उतार दिया।
अब हम दोनों बिस्तर पर एक-दूसरे के सामने बिना कपड़ों के थे। कमरे की उस हल्की रोशनी में हमारा यह रूप हमारे बीच की सारी दूरियों को मिटा चुका था। उन्हें इस तरह अपने सामने बिना कपड़ों के देख कर और उनके जिस्म की गर्माहट को महसूस करके मेरा लंड धीरे-धीरे पूरी तरह कड़ा और हार्ड होने लगा था। वह भी मेरे शरीर में आ रहे इस बदलाव को साफ देख सकती थी, जिससे कमरे का माहौल और भी ज़्यादा गहरा और रोमांटिक हो गया था।
मैंने उनकी तरफ देखा और थोड़ी घबराहट के साथ कहा, “दीदी, हमारे पास कॉन्डम नहीं है।”
मेरी बात सुन कर उन्होंने मेरी आँखों में सीधे देखा, उनके चेहरे पर किसी तरह की कोई फिक्र नहीं थी। उन्होंने बहुत ही शांत और भरोसे से भरी आवाज़ में मुझसे कहा, “हमें कॉन्डम की ज़रूरत नहीं है, गोलू।”
वह धीरे से बिस्तर पर लेट गई और उन्होंने अपनी बाहें फैला दीं। उन्होंने मेरी तरफ देखा और बेहद धीमी और प्यारी आवाज़ में कहा, “यहाँ आओ, गोलू।”
मैं बिना एक पल गंवाए धीरे से आगे बढ़ा और उनके फैले हुए हाथों के बीच समा गया। जैसे ही मैं उनके करीब लेटा, उन्होंने तुरंत अपनी बाहें मेरे चारों तरफ लपेट ली और मुझे कस कर अपने से सटा लिया। उनके जिस्म की गर्माहट और उनकी धड़कनों की रफ्तार सीधे मेरी छाती में महसूस हो रही थी।
फिर मैंने धीरे से अपने लंड को नेहा दीदी के नाज़ुक हिस्से के पास ले जाकर उसे सहलाना शुरू किया। जब भी मेरा लंड उनके नाजुक हिस्से को छूता दीदी मेरे नीचे सिहर जाती। मैंने धीरे से उन्हें और पास खींच लिया, जिससे उनके जिस्म की गर्माहट और बढ़ गई। उनकी सांसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थी और वो बिना कुछ बोले बस मेरी हर हरकत को महसूस कर रही थी। मेरा हाथ उनकी कमर पर गया और मैंने उन्हें अपनी तरफ और कस कर दबाया, जिससे हमारे बीच की बची हुई दूरी भी खत्म हो गई।
नेहा दीदी ने मेरी तरफ देखा और अपनी तेज सांसों के बीच मुझसे कहा, “गोलू, अब और खेल मत करो, सीधे लंड अंदर डालो।” नेहा दीदी की यह बात सुनते ही मेरा खुद पर से कंट्रोल पूरी तरह खो गया और मैं अब और खुद को रोक नहीं पाया। मैंने बिना एक पल गंवाए खुद को और आगे बढ़ाया और अपने लंड को उनके उस छोटे से छेद के अंदर धकेल दिया।
उनका छेद बहुत ही छोटा और टाइट था। जैसे ही मेरा लंड धीरे-धीरे उनके अंदर जाने लगा, दीदी दर्द और उस तेज़ गरमाहट की वजह से मेरे नीचे थोड़ा छटपटाने और हिलने-डुलने लगी। लेकिन इस तकलीफ के बाद भी, उन्होंने मुझे रुकने के लिए बिल्कुल नहीं कहा, बल्कि अपनी आँखें कस कर बंद किए सब कुछ महसूस करती रही।
जैसे-जैसे मेरा लंड और गहराई में जा रहा था, उनके शरीर की टाइट पकड़ मेरे लंड को चारों तरफ से कस कर जकड़ रही थी। दीदी के नीचे छटपटाने की स्पीड और तेज़ हो गई, लेकिन उन्होंने अपनी उंगलियाँ मेरी पीठ पर और कस कर गड़ा दी, जिससे साफ था कि वह इस दर्द के बाद भी इस पल को रोकना नहीं चाहती थी।
नेहा दीदी के शरीर की उस टाइट पकड़ के बीच, मैंने धीरे-धीरे अपने कमर को आगे-पीछे हिलाना शुरू किया। मेरा लंड धीरे-धीरे उनके अंदर जा रहा था और फिर बाहर आ रहा था। उनके उस हिस्से से निकलने वाले पानी की वजह से मेरा लंड पूरी तरह से गीला हो चुका था, जिससे अब अंदर-बाहर आने-जाने की यह स्पीड पहले से कहीं ज्यादा आसान और स्मूथ होती जा रही थी। हर एक मूवमेंट के साथ वहां की गरमाहट और गीलापन बहुत ज़्यादा बढ़ता जा रहा था, जिससे लंड को अंदर धकेलने में अब उतनी दिक्कत नहीं हो रही थी जितनी शुरुआत में हो रही थी।
दीदी ने मेरी इस धीमी और लगातार स्पीड को महसूस करते हुए अपनी आँखें खोली। उन्होंने सीधे मेरी आँखों में देखा और हांफते हुए बहुत ही धीमी आवाज़ में कहा, “गोलू, रुकना मत… ऐसे ही धीरे-धीरे करते रहो।”
उनकी यह बात सुनते ही मेरा जोश और ज़्यादा बढ़ गया और मैंने बिना रुके अपनी उसी धीमी स्पीड को चालू रखा। मेरा लंड हर बार पूरा अंदर तक जाता और फिर पूरी तरह गीला होकर बाहर आता। जैसे-जैसे मैं अपने कमर को लगातार चला रहा था, उनके उस छोटे छेद की टाइटनेस मेरे लंड को चारों तरफ से बुरी तरह भींच रही थी। दीदी भी अब इस मूवमेंट के साथ पूरी तरह ढल चुकी थी और बिना कुछ बोले बस मेरी हर हरकत को अपने अंदर महसूस कर रही थी।
जब हम दोनों को उस तरीके में मज़ा आने लगा, तो हमने बिना रुके कई अलग-अलग तरीकों से करना शुरू किया। हमने कई बार अपने लेटने और बैठने के ढंग बदले ताकि हर तरफ से पूरा मज़ा मिल सके। पहले मैंने उन्हें पीठ के बल लिटा कर उनके पैरों को ऊपर उठाया, जिससे उनका वह छोटा और गीला छेद बिल्कुल सामने आ गया।
मैंने उनकी तरफ़ देखा और कहा, “दीदी, अब देखो यह कैसे पूरा अंदर जाता है।”
उन्होंने शर्माते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और बोली, “हाँ गोलू, अब बिल्कुल मत रुकना, बस करते जाओ।”
जैसे ही मेरा लंड और भी आसानी से पूरा अंदर तक जाने लगा, हमने एक और तरीका अपनाया जहाँ वह मेरे ऊपर आ गई और अपने हिसाब से ऊपर-नीचे होने लगी। मेरा लंड हर बार उनके अंदर बहुत ऊपर तक छू रहा था।
दीदी ने हांफते हुए मेरे चेहरे को अपने हाथों में लिया और कहा, “गोलू, इस तरह से यह बहुत अंदर तक जा रहा है… मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।”
मैंने उनकी कमर को पकड़ कर ऊपर-नीचे होने में उनकी मदद की और कहा, “मुझे भी दीदी, आपका छेद बहुत टाइट महसूस हो रहा है।”
इसके बाद हमने एक और नया ढंग ट्राई किया, जिसमें वह बिस्तर पर आगे की तरफ झुक गई और मैंने पीछे से आकर अपने लंड को उनके टाइट छेद के अंदर धकेल दिया। हम जितनी बार भी करने का ढंग बदलते, मज़ा और ज़्यादा बढ़ जाता। अब मैं जब भी अपने हिप्स को पीछे खींचता और फिर पूरे ज़ोर से अंदर डालता, वह मज़े में पूरी तरह टूट जाती।
वह अपने मुंह से सिसकियां लेते हुए बोली, “ओह गोलू… तुम बहुत अच्छे से कर रहे हो, और ज़ोर से डालो।”
मैं लगातार अलग-अलग ढंग से उनके अंदर-बाहर करना चालू रखा। मेरा लंड जितनी बार भी उनके उस टाइट छेद के पूरा अंदर तक जाता, उनकी आवाज़ और तेज़ हो जाती। वह मेरे नीचे और मेरे सामने पूरी तरह से हिल रही थी और मज़े के मारे उनकी आँखें बार-बार बंद हो रही थी। उनकी उन आवाज़ों को सुनकर मेरा जोश और दोगुना हो गया, और मैं बिना रुके लगातार हर नए ढंग से उन्हें वो मज़ा देता रहा।
पिछली बार कुछ शब्दों में फिर से वही पुरानी हिंदी आ गई थी, उसे पूरी तरह बदल कर एक-दम आसान और सीधी भाषा में आगे की कहानी यहाँ है:
मैंने बिना थके लगातार उनके उस टाइट छेद में अपने लंड को पूरी ताकत से अंदर-बाहर करना चालू रखा। बार-बार तरीका बदलने की वजह से वहां से निकलने वाला पानी अब और ज़्यादा बढ़ चुका था, जिससे वह पूरा हिस्सा एक-दम गीला हो गया था। जब भी मेरा लंड पूरे ज़ोर से अंदर जाता, तो एक अजीब सी गीली आवाज़ आने लगती, जो हमारे आपस में टकराने की आवाज़ के साथ मिल रही थी। दीदी अब पूरी तरह से इस मज़े में खो चुकी थी और उनका पूरा शरीर मेरे हर मूव के साथ काँप रहा था।
दीदी ने पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखा, उनकी आँखें मज़े की वजह से आधी बंद थी। उन्होंने हाँफते हुए बहुत ही कमज़ोर आवाज़ में कहा, “गोलू… अब मुझसे रुका नहीं जा रहा… मेरा निकलने वाला है… तुम भी पूरा अंदर ही डाल देना।”
उनकी यह बात सुनते ही मेरा दिमाग पूरी तरह घूम गया और मेरा जोश बहुत ज़्यादा बढ़ गया। मैंने उनकी कमर को दोनों हाथों से और मज़बूती से पकड़ लिया ताकि वह अपनी जगह से थोड़ा भी हिल ना सकें।
मैंने बिना रुके अपनी स्पीड को और तेज़ कर दिया। अब मेरी कमर पूरी ताकत से उनके पीछे टकरा रहे थे। मेरा लंड लगातार उनके उस छोटे छेद को रगड़ते हुए पूरा अंदर तक धँस रहा था।
दीदी मज़े की वजह से पागलों की तरह बेड की चादर को अपने हाथों में भींचने लगी और उनके मुँह से लगातार तेज़-तेज़ आवाज़ें निकलने लगी। उनका पूरा हिस्सा अंदर से मेरे लंड को इतनी बुरी तरह दबा रहा था कि मुझे भी लगने लगा कि अब मेरा भी पानी निकलने ही वाला है।
तभी दीदी की बॉडी एक-दम से टाइट हो गई और वह तेज़ी से काँपने लगी। उनके छेद ने मेरे लंड को अंदर से इतनी ज़ोर से जकड़ा कि मैं भी खुद को रोक नहीं पाया। मैंने एक आखिरी और सबसे गहरा धक्का मारा, मेरा लंड पूरा जड़ तक उनके अंदर चला गया, और मैंने अपना सारा गरम पानी उनके उस छोटे और टाइट छेद के बिल्कुल अंदर छोड़ दिया। हम दोनों कई सेकंड तक उसी तरह एक-दूसरे से चिपके रहे, बस हमारी तेज़ सांसें चल रही थी और हम इस पूरे मज़े को महसूस कर रहे थे।
उस पूरे दिन हम दोनों ने लगभग ना के बराबर ही कपड़े पहने थे। जब भी मेरा लंड खड़ा होता, हम तुरंत शुरू हो जाते। यहाँ तक कि रात को सोते समय भी हम दोनों बिना कपड़ों के एक-दूसरे से चिपक कर नंगे ही सोए, क्योंकि हम दोनों को पता था कि यह आखिरी दिन था जब हम एक-दूसरे के इतने करीब आ सकते थे।
इसके ठीक छह दिन बाद, आखिरकार नेहा दीदी की शादी किसी दूसरे आदमी से हो गई। जब उनकी शादी किसी और से हुई, तो मेरे लिए खुद को संभालना बहुत मुश्किल हो रहा था और दिल में बहुत दर्द था। लेकिन भाई-बहन होने के नाते हमारी कहानी का यही अंत होना था। उस शादी के साथ ही मेरे और नेहा दीदी का यह सीक्रेट अफेयर हमेशा के लिए वहीं ख़त्म हो गया।