फिर माँ बाथरूम चली गई नहाने के लिए, और मैं और पापा बाहर बैठ के टीवी देख रहे थे। तभी कोई दरवाज़ा खटखटाता है। मैं जाके दरवाजा खोलता हूं, तो सामने मौसा जी थे।
मैं उनको देख के उनको प्रनाम करता हूं, और उनको लेके अंदर आता हूं। मौसा जी सोफे पर पापा के साथ बैठ के बातें करने लगते हैं। फिर मौसा जी मुझसे बोलते हैं-
मौसा जी: बेटा रीना कहाँ है (वो माँ को नाम लेके ही बुलाते है)?
मैं: वो मौसा जी माँ नहाने गई है।
मौसा जी (पापा की तरफ देख के बोले): लगता है मेरी साली को कुछ ज्यादा ही जल्दी है।
पापा: हाँ वो तो कब से इंतज़ार कर रही है आपका।
मैं कुछ समझ नहीं पाया उनकी बात को। इतनी देर में माँ बाथरूम से नहा के निकली, और सिर्फ तौलिये में थी। क्या मस्त माल लग रहो थी वो। हम सब उनको देखने लगे। माँ मौसा को देख के उनको वैसे ही प्रनाम करने आ गई।
माँ: कब आये जीजा जी? हम कब से आपका इंतजार कर रहे थे।
मौसा जी: कोई बात नहीं। अब हम आ गये हैं। अब इंतज़ार ख़त्म हो गया।
माँ: हम तैयार होके आते हैं।
मौसा जी: जाओ अच्छे से तैयार हो जाओ।
माँ: आप रुको तो, आज देखो मैं कैसे तैयार होती हूँ।
उसके बाद माँ बेडरूम में चली गई और तैयार होने लगी। इधर मौसा जी पापा को बोले-
मौसा जी: आदर्श को कहीं बाहर भेजो ना। हमसे कंट्रोल नहीं हो रहा है। एक राउंड होके आता हूँ।
पापा बोले: अभी भेजता हूँ।
मैंने ये सब सुन लिया था। मुझे लग गया कि कुछ तो गड़बड़ थी।
पापा: आदर्श बेटा, इधर आओ।
मैं: जी पापा।
पापा: जाओ और अपने दोस्त लोगों को रात की पार्टी में आने के लिए बोल देना।
मैं: ठीक है पापा।
मैं बोल के बाहर गया और नीचे के दरवाजे से अंदर आ गया। फिर छुप के पापा और मौसा जी की बात सुनने लगी।
पापा: जल्दी जाईए, नहीं तो आदर्श आ जाएगा।
मौसा जी: आप नहीं चलियेगा?
पापा: हम ध्यान रखेंगे कि कहीं कोई आ ना जाए।
मौसा जी: ठीक है फिर हम आते हैं साली की गांड मार के।
उनकी बातें सुन के मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये मेरी ही फैमिली थी। ये क्या हो रहा था? पापा माँ को मौसा जी से चुदवाने भेज रहे थे। ये हो क्यों रहा था? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
फिर मौसा जी माँ के कमरे में जाते हैं और पापा दरवाजे के पास ही बैठ कर फोन चलाते हैं। मैं भी भाग के जाता हूं, और मम्मी के कमरे की खिड़की खोल के देखने लगता हूं।
माँ: क्या जीजा जी, आपसे रहा नहीं गया?
मौसा जी: तू चीज ही ऐसी है कि क्या बताऊं। मेरे से रहा ही नहीं गया। अब जल्दी से मुझे खुश कर दे।
माँ: क्या आपको कभी मना किया है? कर लीजिये जो करना है।
ये बोल के माँ तौलिया खोल के पूरी नंगी हो गई। मैं बता नहीं सकता हूं मां क्या लग रही थी। उनको देख के मेरे मुँह में पानी आ गया। मौसा जी आगे बढ़ के माँ को पकड़ के चूमने लगे। माँ ने भी धीरे-धीरे अपने होंठ खोले, और मौसा जी ने माँ के होंठों की पूरी लाली चूस ली।
फ़िर मौसा जी ने पहले अपनी जीभ माँ के मुँह में डाली, और अपनी जीभ से माँ के पूरे मुँह का रस-पान कर लिया। फ़िर वो माँ की जीभ को अपने मुँह में लेके चूसने लगे। चुम्बन और चुसाई इतनी गहरी थी, कि माँ की सांस उखड़ने लगी।
माँ ने एक-दम से अपने होंठ मौसा जी की गर्लफ्रेंड को अलग किया और देखा, कि माँ के होंठ सूज गए थे, एक-दम लाल सेब की तरह। फ़िर मौसा जी नीचे बैठ के माँ की चूत को छूने लगे।
माँ: इश्शह… जीजा जी।
मौसा जी: रीना तेरी चूत में एक अलग खुशबू है।
ये सुन कर माँ शर्मा गई। मौसा जी अब चाटने लगे, और 15 मिनट में माँ चरम-सीमा पर आ गई।
माँ: हाय राम, मेरे प्रभु, ओह जीजा जी, क्या करते हो? प्लीज चोदो मुझे। अब और तड़पाओ मत।
मौसा जी चूत को और ज़ोर से पकड़ कर चूसने लगे।
माँ: उफफफफ जीजू, मैं झड़ने वाली हूँ। उइइइइ माँ, आआआआह।
माँ की चूत का रस मौसा जी पूरा पी गए। फिर माँ को एक छोटा सा चुंबन दिया, और फिर उन्हें माँ से पूछा-
मौसा जी: देख रीना, तेरी चूत का पानी कितना मीठा है। मेरे होठों से चख कर देख।
माँ: छी जीजू, ये गंदा है बहुत।
मौसा जी ने फिर ज़ोर से मम्मी का मुँह पकड़ा और हमें थूक दिया और कहा-
मौसा जी: क्या थूक में तेरा ही रस है।
पहले मम्मी ने थोड़ा मुँह दबाया और फिर कहा-
माँ: हाँ मीठा तो है।
फ़िर मौसा जी माँ को बिस्तर पर लिटा के चूत पे लंड रगड़ने लगे, और थोड़ी देर में एक-दम से चूत में पूरा लंड डाल दिये। माँ ज़ोर का झटका सह नहीं पाई।
माँ: आआआह… जीजा जी निकालो इसको प्लीज।
फिर माँ एक दम से झटपटाई, पर मौसा जी ने उन्हें कस के पकड़ा हुआ था। मम्मी चीखने लगी, और उनके आंसू निकल गये। माँ ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी, पर मौसा जी अब स्पीड बढ़ाने लगे। मौसा जी अब ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे। क्या सीन था, स्तन हवा में झूल रहे थे, और बाल मौसा जी पकड़ कर खींच रहे थे।
मौसा जी ज़ोर-ज़ोर से और तेज़-तेज़ धक्के लगा रहे थे। उनके काले बड़े-बड़े अंडकोष मम्मी के चूतों से टकरा रहे थे। मम्मी के आंसू निकलने अब बंद हो गए थे, और अब उन्हें भी मजा आ रहा था। मम्मी सिसकारियां ले रही थी। वो बिल्कुल एक रांड लग रही थी, जिसको एक काला तगड़ा आदमी चोद रहा था।
धक्कों की रफ़्तार तेज़ हो रही थी, और माँ का बदन ख़राब हो रहा था। तभी मौसा जी ने माँ को एक-दम से पलट दिया, और एक दम से लंड उनकी चूत में डाल दिया।
माँ: आआह आउच ऊउउउइ। क्या करते हो दिवाकर जी, मार ही डालोगे क्या?
मौसा जी माँ के मुँह से पहली बार जीजा जी की जगह अपना नाम सुन कर खुश हो गए, और उनके अंदर एक जानवर समा गया। अब वो और ज़ोर-ज़ोर से सांड की तरह माँ को चोद रहे थे।
माँ: आआह दिवाकर जी, मैं झड़ने वाली हूँ। हाय राम आआह।
मौसा जी: मैं भी रीना।
देखते ही देखते मौसा जी और माँ दोनों एक साथ झड़ गए, और मौसा जी ने अपना गाढ़ा वीर्य माँ की चूत में उड़ेल दिया। उसके बाद दोनों 15 मिनट तक हांफते रहे।
फिर मैंने देखा, कि माँ की चूत में से गाढ़ा वीर्य टपक रहा था। मौसा जी उठे और ये नजारा देख कर हँसने लगे। माँ उदास लग रही थी, क्योंकि मौसा जी उनके अंदर ही झड़ गये थे।
मौसा जी समझ गए, और उन्हें मम्मी की चूत में उंगली डाली, और उंगली भर कर वीर्य बाहर निकला। फिर उससे उनकी मांग भर दी। मां एक-दम शॉक रह गई। माँ की माँग में मौसा जी का गाढ़ा वीर्य मिल गया।
मौसा जी: आज से तू मेरी रांड पत्नी है।
माँ मौसा जी से लिपट गई, और मौसा जी के जोड़ी चूसने लगी।
माँ: आज से मेरे जिस्म पर आपका पहला हक है। आप ही मेरे स्वामी हो।
फिर मौसा बोले: अब तैयार हो जाओ जल्दी आओ। बाकी तेरी गांड का उद्घाटन मैं और तेरा पति मिल के करेंगे।
उसके बाद मौसा बाहर आने लगे। मैं भी भाग के घर से बाहर चला गया।
अब आगे रात में कैसे पापा और मौसा जी माँ की एक साथ गांड मारते हैं, वो अगले हिस्से में। धन्यवाद।