पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-12
फैमिली चुदाई की कहानी अब आगे-
अजीब नज़ारा था। दिव्या मम्मी को चूम रही थी – वो भी पागलों के तरह।
जब दिव्या ने मम्मी को नहीं छोड़ा, तो मम्मी ने भी दिव्या को बाहों में ले लिया और वो भी उसे चूमने लगी। दिव्या बस यही बोलती जा रही थी, “मेरी प्यारी मम्मी, मेरी प्यारी मम्मी”, और मम्मी बोलती जा रही थी, “मेरी प्यारी गुड़िया मेरी प्यारी बेटी।”
दिव्या चुदाई का मजा लेने के बाद चहक रही थी और बहुत ही खुश-खुश लग रही थी। फिर कुछ देर के इस चुम्मा-चाटी के बाद दोनों मां-बेटी अलग हुई तो मम्मी ने दिव्या से पूछा, “दिव्या कोई प्रॉब्लम तो नहीं नीचे दर्द तो नहीं हो रहा?”
दिव्या बोली, “नहीं मम्मी सब ठीक है। फिर दिव्या ने मेरी तरफ देखते हुए बिना लाग-लपेट की एक-दम से बोल दिया, “मम्मी अगर आपको कोइ ऑब्जेक्शन ना हो तो धीरज से एक बार और करवाने का मन है। धीरज ने अपना “वो” गर्म-गर्म मेरे अंदर नहीं डाला।”
मम्मी ने भी शायद नहीं सोचा होगा कि दिव्या एक-दम से ही एक और चुदाई की बात कर देगी। मम्मी ने भी ऐसे हालात नहीं देखें होंगे, जहां उनकी अपनी बेटी उनके अपने ही बेटे से चुदाई की बात करे, मगर ऐसा हो तो रहा ही था।
मामी कुछ भी बोलने से हिचकिचा सी रही थी फिर भी मम्मी बोली, “दिव्या आज? अभी?”
दिव्या बोली, “हां मम्मी अभी। फिर धीरज सारी रात आपके पास रहेगा।”
“हां मम्मी अभी। फिर धीरज सारी रात आपके पास रहेगा” दिव्या की ये बात सुन कर मम्मी शर्मा गयी। मम्मी की चेहरा की रंगत लाल हो गई। ये शायद पहली बार था कि मम्मी भी इस तरह शरमाई थी और मुझे भी शर्म सी आ गयी थी फिर भी मामी बोली, “दिव्या तुम मेरी चिंता मत करो। मैंने बहुत करवाया है ये काम। अब तुम्हारा टाइम है बेटा। तुम मजे लो।”
मम्मी ने बहुत साहस किया और मुझसे बोली, “जाओ धीरज बेटा देखो क्या चाहिए दिव्या को?”
जैसे ही मम्मी ने कहा “जाओ धीरज बेटा देखो क्या चाहिए दिव्या को”, मेरे लंड में एक-दम से हरकत सी हो गयी। दिव्या उठी और साथ-साथ मैं भी उठ गया। दिव्या आगे आगे थी और मैं दिव्या के पीछे-पीछे। हमारे वाले कमरे में आते ही दिव्या ने मैक्सी उतार दी और तकिया रख कर बेड के किनारे पर लेट गयी और अपनी टांगें उठा कर बोली, “लो धीरज, थोड़ी चूसो मेरी फुद्दी और फिर उसके बाद जो करना है करो। मगर अपने लंड का गर्म-गर्म “वो” मेरे फुद्दी में डालना।”
मैं नीचे बैठ कर दिव्या की फुद्दी चूसने लगा। पांच मिनट भी फुद्दी चुसाई नहीं हुई थी कि दिव्या ने चूतड़ घुमाने शुरू कर दिए। मैं समझ गया कि दिव्या लंड मांग रही थी। लंड तो मेरा दिव्या की फुद्दी देख कर हे खड़ा हो चुका था। मैंने ने दिव्या से पूछा, “दिव्या क्या हुआ। लंड अंदर डालूं क्या?”
दिव्या बोली, “हां धीरज बस अब देर मत करो, और चोदना शुरू करो।” मैंने दिव्या की टाँगे थोड़े सी फैलाई और खड़े-खड़े ही लंड फुद्दी के छेद पर रख कर एक बार में ही पूरा लंड अंदर डाल दिया। लंड जैसे ही अंदर गया दिव्या फिर चिल्लाई, “धीरज ये तो फिर दुखने लगा है।”
मगर अब रुकने की कोइ गुंजाइश नहीं थी। मैंने ने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किया – दिव्या का चिल्लाना बंद हो गया और दिव्या मस्त हो कर चूतड़ घुमाने लगी।
तभी दिव्या बोली, “धीरज ऐसे नहीं – ऐसे मजा नहीं आ रहा। मेरे ऊपर लेट कर चोदो मुझे – पहले की ही तरह, अपनी बाहों में ले कर जैसे हस्बैंड-वाइफ करते हैं।”
दिव्या लेट कर ही चुदाई करवाना चाहती थी। उसने मुझे साफ़ ही बोल दिया, “”धीरज ऐसे नहीं – ऐसे मजा नहीं आ रहा। मेरे ऊपर लेट कर चोदो मुझे – पहले की ही तरह, अपनी बाहों में लेकर जैसे हस्बैंड वाइफ करते हैं।”
मैंने लंड दिव्या की फुद्दी में से निकाल लिया, दिव्या भी उठी और बिस्तर पर लेट गई और तकिया अपने चूतड़ों के नीचे सरका लिया। एक ही दिन की चुदाई में दिव्या समझ चुकी थी कि चुदाई का असली मजा कैसे आता है।
मैं लंड दिव्या की फुद्दी मैं डालने ही वाला था कि दिव्या बोली, “धीरज एक बार लंड मुंह में डालो, चूसने का मन हो रहा है। मैंने टांगें दिव्या के आस-पास की और उसके मुंह की ऊपर बैठ कर लंड दिव्या के मुंह में डाल दिया। मस्त चुसाई कर रही थी दिव्या की – एक तजुर्बेकार चुदक्कड़ की तरह – मम्मी की तरह ही।
कुछ देर लंड चूसने की बाद दिव्या ने लंड मुंह में से निकाल लया और बोली, “बस धीरज अब फुद्दी में डाल कर रगड़ाई करो, फिर से वैसे ही मजे दो – बहुत सारे।”
“अब फुद्दी में डाल कर रगड़ाई करो, फिर से वैसे ही मजे दो – बहुत सारे।” दिव्या पूरे मूड में आ चुकी थी।
पांच मिनट की चुदाई में ही दिव्या ने चूतड़ ऊपर-नीचे करने शुरू कर दिए। दिव्या सिसकारियां लेने लगी थी और कुछ-कुछ बोलने लगी, “आह धीरज मजा आ गया। रगड़ो, चोदो, आअह आ गया आज तो चुदाई का।”
मुझे भी मम्मी की चुदाई की दौरान बोलने वाली बातें याद आ गयी। मैंने चुदाई करते-करते बोलना शुरू कर दिया, “ले मेरी रानी, ले मेरी जान, लेले पूरा लंड अपनी फुद्दी में, अपने नरम-नरम चूतड़ों के छेद में, अपनी गांड में जड़ तक लेले मेरा लंड मेरी जान।”
इतना सुनना था कि दिव्या ने और भी जोर से चूतड़ घुमाने शुरू कर दिए। मेरे इस तरह बोलने से दिव्या को और भी ज्यादा मजा आने लगा था। मुझे लगा थोड़ा गंद और बोलना चाहिए। दिव्या चुदाई जरूर पहली बार करवा रही थी, मगर दिव्या बच्ची नहीं थी, सब समझ थी उसे।
मैंने दिव्या को बाहों में जकड़ लिया और दिव्या को चोदते-चोदते वही बातें बोलने लगा, जो मम्मी ने मझे बोलने से मना किया था, “ले मेरी रंडी दिव्या, मेरी कुतिया, तेरी मां का भोसड़ा, साली मादरचोद चुदक्कड़ रंडी, आज तेरी फुद्दी का कचरा ही कर दूंगा। एक रखैल एक रंडी की तरह चोदूंगा तुझे – फाड़ दूंगा तेरी फुद्दी। अपना मोटा लंड अभी तेरी गांड में डालता हूं, तेरी चीखें निकल दूंगा मेरी जान।”
ये सुना ही था कि दिव्या ने अपनी टांगें मेरी कमर के पीछे करके मुझे अपनी टांगों में जकड़ लिया और चूतड़ घुमाते-घुमाते बहुत ही ऊंची आवाज़ में बोलने लगी, “आजा धीरज, चोद दबा कर, फाड़ दे मेरी फुद्दी।”
दिव्या की आँखें बंद थी और आवाज इतनी ऊंची थी कि मम्मी भी कमरे में आ गयी, दिव्या चुदाई के मजे बोलती जा रही थी, “और जोर से चोद धीरज, चोद मुझे धीरज, फाड़ मेरी फुद्दी।”
मैंने मम्मी की तरफ देखा। मम्मी मुझे देख कर मुस्कुरा दी। मम्मी हमारे पास बेड पर ही बैठ गयी और दिव्या की सर पर हाथ फेरने लगी। दिव्या ने आंखें खोल कर मम्मी की तरफ देखा।
मम्मी बोली, “दिव्या बेटा बहुत मजा आ रहा है फुद्दी में?”
दिव्या बोली, “हां मम्मी बहुत मजा आ रहा है। मम्मी फुद्दी में अंदर तक गया हुआ है धीरज का इतना बड़ा लंड। पूरी फुद्दी भरी पड़ी है धीरज के लंड से। मम्मी धीरज को बोलो ना और भी जोर से करे।”
दिव्या की आँखें बंद थी और दिव्या जो जोर से चूतड़ भी घुमा रही थी। जो कुछ दिव्या बोल रही थी, दिव्या को पक्का ही मालूम नहीं था वो क्या बोल रही है और किसे बोल रही है।
दिव्या बोली, “मंम्मी मैं धीरज से चूतड़ भी चुदवाऊंगी, धीरज का लंड मुंह में भी लूंगी। आअह धीरज रगड़ मेरे भाई। मुझे मजा आने वाला है। आह धीरज आने वाला है। मम्मी मजा निकलने वाला है मेरी फुद्दी का।”
मम्मी मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगी, शायद कहना चाह रही थी की रगड़ धीरज इसकी फुद्दी – इसे आज मस्त चुदाई चाहिए।
तभी दिव्या चिल्लायी, “मम्मी निकल गया मेरी फुद्दी का मजा। धीरज रगड़ और जोर जोर से। धीरज तेरा लंड रोज लूंगी, धीरज अब मत रुकना, आअह निकल रहा है मम्मी। अभी भी आ रहा है मुझे मजा। आआह मम्मी कितना मजा आता है चुदाई का। आअह आ गया मम्मी निकल गया।”
इतना बोल कर दिव्या चुप हो गयी। मगर ना तो दिव्या ने मेरी कमर से टांगें ही हटाई और ना ही मुझे छोड़ा। मैंने भी दिव्या के फुद्दी मैं धक्के लगा बंद बंद नहीं किये।
दिव्या मुश्किल से तीन-चार मिनट चुप रही और फिर से चूतड़ घुमाने लगी और फिर से वही बातें बोलने लगी। मम्मी वहीं बैठी थी, शायद दिव्या की चुदाई के मजे ले रही थी।
दिव्या फिर बोली, “मजा आ गया मम्मी। मेरी फुद्दी फिर से गरम होने लगी है। चोदते रहो धीरज चोदते रहो। सारी रात चोदो आज मुझे। तुम्हें आज मैं मम्मी को भी चोदने नहीं दूंगी। तुम्हें कमरे से ही बाहर नहीं जाने दूंगी। सारी रात चुदाई करवाऊंगी।”
मम्मी दिव्या की सर पर हाथ फेरती जा रही थी और बस इतना ही बोल रही थी, “बस दिव्या बेटा बस, कहीं नहीं जाने वाला धीरज। आज तेरे पास ही रहेगा तुझे ही चोदेगा जब तक तू कहेगी, जितना तू कहेगी, जैसे तू कहेगी।”
मगर दिव्या तो जैसे कुछ सुन ही नहीं रही थी। दिव्या तो आह मम्मी आह धीरज आह मम्मी ही बोलते जा रही थी।
मम्मी दुबारा से बोली, “क्या बात है दिव्या बेटा, बहुत मजा आ रहा है?”
दिव्या बोली, “हां मम्मी बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। मम्मी धीरज को बोलना मुझे सारी रात चुदाई करवानी है।”
मम्मी मुस्कुराते हुए बोली, “हां-हां बेटा सारी रात चुदाई करेगा धीरज तेरी।”
मैं धक्के लगाता जा रहा था। मेरा लंड एक-दम सख्त हो चुका था। जल्दी ही मुझे मजा आने वाला था। मैंने दिव्या को जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया और मजे में बोलने लगा, “ले दिव्या अब निकलेगा मेरे लंड से गर्म-गर्म फव्वारा। आह बड़ी ही टाइट फुद्दी है दिव्या तेरी। मजा आ गया आज तुझे चोदने का। क्या मस्त रगड़े लग रहे हैं लंड पर। मस्त टाइट फुद्दी है दिव्या तेरी। पूरा लंड जकड़ा हुआ हुआ है तूने अपनी फुद्दी में।”
दिव्या को भी मजा आने वाला हो गया। दिव्या भी बोलने लगी, “बड़ा ही मस्त है धीरज तेरी लौड़ा, तेरा लंड। मेरी फुद्दी में अंदर तक गया हुआ है। आज तो तुझे फुद्दी में से लंड निकालने ही नहीं दूंगी। मम्मी मुझे तो फिर मजा आने वाला हो गया।”
मम्मी ने मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए हुआ धीरे से कहा, “धीरज मजा आने वाला है दिव्या को, रगड़ दे आज इसकी फुद्दी – बहुत गर्मी में है दिव्या की फुद्दी आज। बेटा अपने लंड का गर्म पानी डाल इसकी फुद्दी के अंदर तभी ठंडी और शांत होगी ये और इसकी चुदाई की ठरक।”
मैंने देखा मम्मी भी सलवार के ऊपर से अपनी फुद्दी पर हाथ फेर रही थी। अपनी मम्मी की बात सुन कर मैं और भी जोर जोर से दिव्या को चोदने लगा। और तभी दिव्या जोर से चिल्लाई, “आअह मम्मी निकल गया।”
और इसके साथ ही मुझे भी मजा आने लगा – मेरे लंड का गर्म गर्म शहद दिव्या की फुद्दी में जाने लगा।
मैं भी बोलने लगा, “ले मेरी जान निकल रहा है तेरी फुद्दी में। ले मेरी जान मेरी दिव्या ले।” और इसके साथ ही मेरे लंड की मलाई से दिव्या की चूत भर गयी। दिव्या को मजा आ चुका था। इस बार दिव्या ढीली हो गयी और अपनी टांगें धीरज की कमर से हटा ली।
मम्मी अभी भी दिव्या की सर पर हाथ फेर रही थी। दिव्या ने मम्मी का हाथ पकड़ लिया और बोली, “मम्मी धीरज के लंड से जो निकला बड़ा ही गर्म-गर्म था, बड़ी देर तक धीरज की लंड से निकलता रहा। मम्मी इससे तो बड़ा मजा आता है।”
मजा आने के बाद मेरा लंड ढीला होने लगा। मैंने एक पलटी ली और लंड दिव्या की फुद्दी से निकाल कर दिव्या की पास ही लेट गया।
दिव्या भी ढीली हो गयी थी। मम्मी का हाथ अभी भी अपनी फुद्दी पर ही था। थोड़ी देर के बाद मम्मी दिव्या से बोली, “दिव्या अभी और चुदवानी है?”
दिव्या बोली, “नहीं मम्मी, मैं थक गयी हूं। धीरज के लंड से निकला “वो” गर्म-गर्म मेरी फुद्दी मैं – बस मम्मी मुझे पूरा मजा आ चुका है। अब आप चुदवाओ धीरज से। सच में बड़ा ही मस्त चोदता है धीरज।”
दिव्या ऐसे ही ढीली-ढाली लेटी रही और फिर दिव्या ने मम्मी का हाथ पकड़ा और बोली, “मम्मी एक बात बोलूं?”
मम्मी बोली, “हां बोल क्या बात है, एक बार और चुदवानी है क्या?”
दिव्या बोली, “नहीं मम्मी चुदवानी नहीं, मुझे धीरज को आपको चोदते हुए देखना है – आप दोनों की चुदाई देखनी है, आपकी फुद्दी में धीरज का लंड कैसे अंदर बाहर होता है वो देखना है। मेरे सामने चुदाई करवाओ ना धीरज से। बस एक बार। प्लीज़ मम्मी मना मत करना।”
मम्मी एक हाथ से अपनी फुद्दी खुजलाते हुए हँसते हुए बोली, “चुदाई देखनी है? चुदाई में क्या देखना है। हो तो गयी तेरी भी चुदाई, अब इसमें देखने वाली कौन से बात है, सब चुदाईयां एक जैसी ही होते हैं। लंड फुद्दी में जाता है। लड़का लंड आगे-पीछे करता है। लड़की की फुद्दी में लंड के रगड़े लगते हैं और लड़की को मजा आ जाता है।”
दिव्या बोली, “मम्मी वो बात नहीं। अब आप देखो, मैंने धीरज का लंड मुंह में लिया और चूसा, मगर कैसे चूसा, देखा तो नहीं ना। धीरज ने मेरी फुद्दी चूसी, मगर मैंने तो नहीं ना, धीरज कैसे फुद्दी चूसता है। और धीरज ने लंड मेरी फुद्दी में डाला अंदर-बाहर किया, मगर मैंने देखा तो नहीं ना। जब मुझे मजा आया तो मेरे चूतड़ घूमे ना, मगर मैंने अपने चूतड़ घूमते देखे तो नहीं ना।”
दिव्या कुछ रुक कर बोली, “बस मम्मी यही मैंने देखना है। आप कैसे धीरज का लंड चूसती हो, धीरज कैसे आपके फुद्दी चूसता है। धीरज का इतना बड़ा लंड कैसे आपकी फुद्दी में जाता है। धीरज कैसे आपकी चुदाई के दौरान लंड के धक्के लगाता है। आप चुदाई करवाते हुए क्या-क्या बोलती हो, कैसे चूतड़ घुमाती हो। बस मम्मी यही सब देखना है मुझे। फिर जब आपके सामने धीरज मुझे चोदेगा, तब आप भी देखना और मजे लेना।
मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “धीरज ये कैसी पागलों वाली बातें कर रही है ये लड़की?”
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