पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-13
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
जब मम्मी ने दिव्या से पूछा, “दिव्या एक बार और चुदवानी है”, तो मस्ती में दिव्या बोली, “नहीं मम्मी चुदवानी नहीं, मुझे आप दोनों की चुदाई देखनी है।”
“मम्मी एक हाथ से अपनी फुद्दी खुजलाते हुए हँसते हुए बोली, “चुदाई देखनी है? चुदाई में क्या देखना है। हो तो गयी तेरी भी चुदाई, अब इसमें देखने वाली कौन से बात है, सब चुदाईयां एक जैसी ही होती हैं।”
दिव्या बोली, “मम्मी मैंने धीरज का मोटा लंड आपकी फुद्दी में आगे पीछे होते हुए देखना है। धीरज को आपकी फुद्दी चूसते हुए देखना है, देखना है। आप कैसे धीरज का लंड चूसती हो, वो देखना है। आपको मजे से चूतड़ घुमाते हुए देखना है। फिर जब आपके सामने धीरज मुझे चोदेगा, तब आप भी देखना और मजे लेना।”
मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “धीरज ये कैसी पागलों वाली बातें कर रही है ये लड़की?”
दिव्या की बातों से मुझे भी मजा आने लगा था। मैं सोच रहा था क्या मजा आएगा जब दो दो फुद्दीयां सामने होंगी। जिसमे चाहो लंड डालो।”
अब हम लोगों के बीच शर्म तो खत्म हो ही चुकी थी। मैंने दिव्या के सामने ही मम्मी की लवार का नाड़ा खोलते हुए कहा, “मम्मी दिव्या के सामने चुदाई कर लेते हैं, क्या फर्क पड़ेगा। दिव्या मेरी और आपकी चुदाई देख ही चुकी है।आपने भी दिव्या को मुझसे चुदते हुए देख ही लिया है। आपने दिव्या की बातें भी सुन लीं हैं। क्या-क्या बोली वो चुदाई करवाते हुए। मम्मी क्यों ना हम तीनों ही मजे लें चुदाई के इकट्ठे एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर? मेरी और आपकी चुदाई हो रही होगी और दिव्या भी अपनी फुद्दी में उंगली डाल कर मजे ले रही होगी। मम्मी एक अलग तरह का मजा आएगा। ऐसा करने में क्या हर्ज है?”
तब तक मैं मम्मी की सलवार का नाड़ा खोल चुका था। मेरी उंगली मम्मी की फुद्दी में थी। मम्मी की फुद्दी गीली हुई पड़ी थी।
मैंने उंगली मम्मी की फुद्दी ऊपर-नीचे करते हुए कहा, “मम्मी आपकी फुद्दी भी तो गरम हो चुकी है। कुछ करूं क्या? डालूं लंड?”
मम्मी ने मेरा हाथ फुद्दी से नहीं हटाया। मम्मी को मजा आ रहा था। मगर मम्मी बोली, “नहीं धीरज अभी नहीं।” शायद अभी भी मम्मी को कुछ हिचकिचाहट थी।
दिव्या फिर बोली, “मम्मी मान जाओ। देखो धीरज ने कितनी बढ़िया और समझदारी वाली बात कही है। एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर – आप दोनों चुदाई करो और मैं उंगली अपनी फुद्दी में डाल कर मजा लूंगी। मम्मी मेरी तो फुद्दी गीली भी होने लगी है।”
दिव्या ने मम्मी का हाथ पकड़ा और बोली, “मम्मी एक बात बताओ, अब आप से क्या छुपाना – मैं और माधवी एक-दूसरी की खूब फुद्दी चूसती हैं। हम तो एक-दूसरी के फुद्दी चोदती भी हैं।” ये बोल कर दिव्या फिस्स-फिस्स करके हंस दी।
मम्मी हैरानी से बोली, “फुद्दी चोदती हो? तुम और माधवी, एक-दूसरी की? मगर लंड कहां है तुम दोनों के पास? कैसे करती हो तुम लोग चुदाई?”
दिव्या ने मम्मी का हाथ चूमा और बोली, “मेरी स्वीट स्वीट मम्मी वैसी वाली लंड फुद्दी वाली चुदाई नहीं मम्मी। मैं और माधवी एक दूसरी की फुद्दी पर फुद्दी से धक्के लगाती हैं और मजे लेती हैं। पानी से भरी दोनों की फुद्दीयां गीली होती हैं। पानी फुद्दीयों से टपक रहा होती है। मम्मी फुद्दी पर फुद्दी के धक्के लगाते हुए छप्प-छप्प, फच्च-फच्च की अजीब-अजीब आवाजें आती हैं। बड़ा मजा आता है।” ये बोल कर दिव्या हंस दी।
फिर दिव्या बोली, “और मम्मी सब से ज्यादा मजा तो हमें एक-दूसरी के फुद्दी चूसने-चाटने में आता है – ओह माई गॉड – कितना पानी निकलता है हमारी फुद्दीयों में से। क्या मस्त स्वाद होता है फुद्दी की पानी का, क्या मस्ती भरी महक आती है फुद्दी में से।”
फिर अचानक से दिव्या बोली, “मम्मी क्या आपने कसी लड़की की फुद्दी चूसी है – अभी नहीं, मगर अपनी जवानी में?”
मम्मी चुप रही – कुछ भी नहीं बोली।
इसके बाद तो दिव्या मम्मी के जवाब का इंतजार किये बिना ही चहक कर बोली, “मम्मी, आपको एक बार फुद्दी जरूर चूसनी चाहिए। मम्मी सच में बड़ा मजा आता है फुद्दी चूसने चाटने का। चलिए मम्मी मैं चुसवाऊंगी आपसे अपने फुद्दी।”
दिव्या बोली, “मम्मी आपने कभी सोचा नहीं, कि ये मर्द लोग लड़की को चोदने से पहले, उसकी फुद्दी क्यों चूसते-चाटते हैं?”
फिर दिव्या खुद ही जवाब देती हुई बोली, “मम्मी फुद्दी की महक और फुद्दी के पानी का टेस्ट ही इन मर्दों को मस्त कर देता है।”
अब बोलने की बारी मम्मी की थी, “बस कर मेरी अम्मां, ये बातें जो तू मुझे बता रही है, मुझे सब मालूम है। फुद्दी क्या मर्दों को तो चूतड़ों का छेद चाटने में भी बड़ा मजा आता है।”
दिव्या बोली, “मुझे मालूम है मम्मी, मैं और माधवी भी एक-दूसरी के चूतड़ों छेद चाटती है और मजे करती हैं।”
और मम्मी ने दिव्या के छोटे-छोटे मम्मों पर हाथ फेरते हुए कहा, “ठीक है कर लेंगे इकट्ठे चुदाई। चाट लूंगी तेरी की फुद्दी और चूतड़। अब खुश?”
जैसे ही मम्मी ने ये कहा, “ठीक है कर लेंगे इकट्ठे चुदाई। चाट लूंगी तेरी फुद्दी और तेरे चूतड़। अब खुश?”
दिव्या खड़ी हो गयी और मम्मी को चूमते हुए बोली, “मेरी स्वीट स्वीट मम्मी। मेरा स्वीट स्वीट धीरज।” और दिव्या ने मम्मी के सामने ही मेरे सामने बैठ और मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
मम्मी ने दिव्या को मेरा लंड चूसते देख कर कहा इतना ही कहा, “कमाल ही हो तुम लोग।”
दिव्या की लंड चुसाई से जल्दी ही मेरे लंड ने हरकत शुरू कर दी। मेरा लंड खड़ा होती देख दिव्या बोली, “मम्मी धीरज का लंड तैयार होने लगा है। चलो आप भी कपड़े उतारो और एक बार मेरी फुद्दी चूसने का मजा लो। अब तक धीरज की लंड का पानी भी फुद्दी के अंदर ही है। फुद्दी की टेस्ट की साथ लंड की मलाई के टेस्ट का भी मजा लो। तब तक धीरज का लंड पूरा खड़ा हो जाएगा। अब तो मैं भी धीरज की लंड की मलाई का टेस्ट भी करूंगी। क्यों धीरज?”
मैंने कहा, “कर लेना मेरे लंड की मलाई टेस्ट, मुझे क्या फर्क पड़ता है। उल्टा तेरी तो लंड चुसाई भी तेरी फुद्दी की तरह कुंवारी होगी, मजा ही बड़ा आएगा जब तू मेरा लंड चूस रही होगी।”
मेरी इस बात पर मम्मी और दिव्या दोनों हंस पड़े और मम्मी ने उठ कर अपने कपड़े उतार दिए और बोली, “चल दिव्या, ले मैंने भी उतार दिए अपने कपड़े। बता अब क्या करना है?”
दिव्या एक पक्के लेस्बियन – समलिंगी की तरह बेड की किनारे पर तकिया रख कर उस पर बैठी और एक तकिया पीछे रख दिया। दिव्या पीछे की तरफ लेट गयी और साइडों से नीचे हाथ करके अपनी फुद्दी की फांकें खोल करके बोली, “आईये मम्मी, चूसिये मेरी फुद्दी और मजे लीजिये। धीरज के लंड का पानी भी अभी तक इसी में है।”
दिव्या को इस तरह लेटते देख मैं भी उठा और जा कर सोफे पर बैठ गया। मम्मी ने नीचे फर्श पर मोटा तकिया रखा और घुटनों के बल तकिये पर नीचे बैठ गयी और अपने दोनों हाथों से दिव्या की फुद्दी की फांकें फैला कर दिव्या की फुद्दी चूसने चाटने लगी।
बड़ा ही मस्त करने वाला सीन था। मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। सोफे पर बैठा मैं मां बेटी की ये फुद्दी चुसाई देखने लगा।
मम्मी नीचे अपने घुटनों पर बैठी हुई मम्मी के चूतड़ चौड़े हुए पड़े थे। चूतड़ों के बीच की लाइन फ़ैली हुई थी दोनों तरफ के नितम्ब – मतलब दोनों चूतड़ अलग-अलग दिखाई दे रहे थे।
मैंने सोचा, “अगर मैं मम्मी के चूतड़ों के नीचे लेट कर देख सकता तो मुझे दिखाई पड़ता कि मम्मी के चूतड़ों का छेद भी मम्मी की फुद्दी की तरह ही चौड़ा हुआ पड़ा था और चूतड़ों के अंदर का गुलाबी नजारा दिखाई दे रहा था – बिलकुल मम्मी की फुद्दी की तरह।”
मेरी आंखों के आगे मम्मी की गांड का हल्का भूरा खुला हुआ छेद घूमने लगा। मैं जा कर मम्मी के पीछे बैठ गया और हाथ नीचे करके थूक लगा कर मम्मी की गांड के अंदर पूरी की पूरी उंगली डाल दी। मेरी थूक लगी पूरी की पूरी उंगली फिसल कर एक-दम ही मम्मी के चूतड़ों के छेद में बैठ गयी।
मम्मी ने एक सेकंड के लिए अपना मुंह दिव्या की फुद्दी से हटाया और बोली, “आह धीरज क्या किया है बेटे, बड़ा मजा आया है। उंगली अंदर-बाहर कर। लगता है अब तो तुझसे गांड ही चुदवानी ही पड़ेगी।”
इतना बोल कर मम्मी फिर से दिव्या की फुद्दी चूसने लगी। मैं मम्मी की गांड में उंगली अंदर-बाहर करने लगा। कुछ देर के बाद मैंने अपनी दो उंगलियां एक साथ जोड़ी और ढेर सारा थूक उँगलियों पर लगा कर दोनों उंगलियां मम्मी की गांड में डाल दीं। मम्मी फिर से वही बोली, “आह धीरज मजा आ गया मेरे बेटा।”
क्या सीन था, मम्मी अपनी बेटी की फुद्दी चूस रही थी और बेटे ने मम्मी के चूतड़ों में उंगलियां डाली हुई थी – और ये तो अभी आज की चुदाई के अगले दौर की शुरूआत ही हुई थी। पता नहीं आगे चुदाई में और क्या-क्या होने वाला था।
तभी दिव्या ने मम्मी का सर अपनी फुद्दी पर दबा दिया और बोली, “मम्मी बस अब मत रुकना, मुझे एक मिनट में मजा आने वाला ही है।”
और फिर जैसे दिव्या अपने आप से बोली – “पता नहीं ये मेरी फुद्दी है या कुआं – इतनी चुदाई हो गयी आज और मेरी ये फुद्दी अभी भी गर्म की गर्म ही है, और अब एक और मजा आने वाला है।”
“फुद्दी है या कुआं”, दिव्या की बात सुन कर मेरी हंसी निकल गयी। धीरज ने मम्मी की गांड में से उंगली निकाली और जा कर सोफे पर बैठ कर मां-बेटी की फुद्दी चुसाई के मजे लेने लगा।
तभी दिव्या जैसे चीखी, “आह मम्मी मजा आ गया, पानी छोड़ गयी मेरी फुद्दी।”
मम्मी का मुंह अभी भी दिव्या की फुद्दी में ही था और मम्मी दिव्या की फुद्दी चूसने का मजा ले रही थी। दिव्या की बात सुन कर मम्मी दिव्या की फुद्दी से मुंह हटा कर बोली, “दिव्या लगता है धीरज ने अपने लंड के पानी से भर दी तेरी फुद्दी। सफ़ेद पानी टपक-टपक कर बाहर आ रहा था। चाटने का मजा ही आ गया।” मम्मी उठी और दिव्या के पास ही बैठ गयी।
थोड़ी देर दिव्या ऐसे ही लेटी रही और फिर बोली, “मम्मी मुझे मजा आ गया है। चलो उठो आपको फुद्दी के साथ फुद्दी चोदना दिखाती हूं पहले आप मेरी फुद्दी के ऊपर फुद्दी रख कर मेरी फुद्दी चोदो, फिर आप लेटना और मैं आपकी फुद्दी चोदूंगी – देखना बड़ा मजा आएगा आपको फुद्दी के साथ फुद्दी चुदवाने का।”
“मम्मी सच में बड़ा मजा बड़ा मजा आएगा जब मैं नीचे होऊंगी और लड़की जैसी बातें करूंगी और आप ऊपर मेरी फुद्दी रगड़ते हुए लड़कों जैसी बातें करना – जब मेरा काम हो जाए तो फिर आप नीचे लेटना हुए लड़की जैसी बातें करना और मैं ऊपर आपके फुद्दी चोदते हुए लड़कों जैसी बातें करूंगी। मैं और माधवी ये खूब करते हैं ये सब जब फुद्दी-फुद्दी वाली चुदाई करते हैं। ठीक है मम्मी?”
मम्मी बोली, “ठीक है मेरी सेक्सी-सेक्सी प्यारी बेटी।”
मम्मी उठी, दिव्या तो वैसे ही टांगे चौड़ी करके लेटी ही हुई थी।
दिव्या बोली, “देखो मम्मी अब आप अपनी फुद्दी मेरी फुद्दी पर रख कर अपनी फुद्दी को ऊपर-नीचे करो जैसे आपका लंड मेरी फुद्दी में गया हुआ है और आप मुझे चोद रही हो।
“ये समझो आप धीरज हो और ऊपर से धीरज आपकी फुद्दी चोद रहा है। और बीच-बीच में कभी अपनी फुद्दी को मेरी फुद्दी पर दाएं-बाएं करके रगड़ो, और मम्मी इसके साथ ही एक हाथ से अपनी फुद्दी का दाना भी रगड़ते जाओ, आपको भी जल्दी ही मजा आ जाएगा, मैं भी अपनी फुद्दी का दाना रगडूंगी।”
फिर दिव्या बोली, “और मम्मी मेरी फुद्दी चोदते हुए कुछ-कुछ बोलती रहना, जैसे आप धीरज से चुदाई करवाते हुए बोलती हो। और बहुत मजा आएगा। पहली बार आप बोलना फिर मैं भी बोलूंगी।”
मम्मी और दिव्या को ये सब करते देख कर मैं तो हैरान ही हो रहा था।
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