पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-8
हिंदी कामुकता कहानी अब आगे-
फार्म से वापस आ कर मैं अंदर भी नहीं गया। भूपिंदर के सामने जाने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी। मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू ये सामान अंदर छोड़ आ और बोलना हम सीधे सेक्टर सत्रह जा रहे हैं, कुछ जरूरी काम है।”
सेक्टर सत्रह पहुंच कर मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू ये साथ वाले फास्ट फूड वाले को बोल मैंने दो चिकन बर्गर मंगवाए है। एक तू रख लेना एक ऊपर ले आना मेरे पास।”
ऊपर अपने ऑफिस मैं जब कभी मैंने कुछ खाना होता था तो मैं इस साथ वाले फास्ट फूड से ही कुछ मंगवा लेता था। ये फास्ट फूड वाले मेरे किरायदार थे और जो भी भेजते थे वो स्पेशल ही होता था। अगर थोड़ा सा ही कुछ होता था तो ये मुझसे पेमेंट भी नहीं लेते थे। मगर जब कभी मेरे यार दोस्त भी मेरे साथ होते थे, तो वो बिल भेज देते थे जो किराये में एडजस्ट हो जाता था।
पंद्रह मिनट में जुगनू एक लिफ़ाफ़े में दो जम्बो साइज़ के चिकन बर्गर ले आया। एक मैंने जुगनू को दे दिया और जुगनू से कहा, “जुगनू उधर से पेप्सी का कैन निकाल ले अपने लिए।”
जुगनू मुझसे कभी कोइ सवाल नहीं करता था। जुगनू ने फ्रिज में से पेप्सी का कैन निकाल लिया और एक बर्गर लेकर नीचे चला गया।
मैंने फ्रिज में “टाइगर एशियन” – ऑस्ट्रेलिया की सुपर स्ट्रांग बियर – की दो बोतलें निकाली और सोफे पर बैठ कर चिकन बर्गर और बियर के मजे लेने लगा।
बिशनी की ताबड़तोड़ चुदाई करके और चिकन से भरा हुआ बियर के साथ बर्गर खा कर दिमाग हल्का हो चुका था।
शाम के चार बजने वाले थे, अब सोचने का वक़्त था कि भूपिंदर ने प्रीती से क्या बात की होगी। मैं उठा, मुंह हाथ धो कर फ्रेश हुआ और दरवाजा लॉक करते-करते सोचने लगा, “चलो जी घर चलें, देखें रात को किसकी फुद्दी चोदने को मिलती है – बीवी भूपिंदर की, बेटी प्रीती की – दोनों की या फिर किसी की भी नहीं – और मुट्ठ मार के सोना पड़ेगा।
सीढ़ियां नीचे उतरा तो मुझे देख कर जुगनू आ गया। मैं सीधा वाइन शॉप में चला गया। जुगनू भी अंदर ही आ गया। वाइन शॉप का मैनेजर गोगी मुझे जानता ही था। मुझे अंदर आते देख हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया।
मैंने कहा, क्या हाल है गोगी सेठ। चल एक काम कर, दो शिवाज़ रीगल स्कॉच, दो मालाबार जिन, दो टोकी जापानी व्हिस्की और एक क्रेट कूपर एक्स्ट्रा बियर निकाल दे।
गोगी बोला, “अभी लो सरदार जी। और फिर लड़के को आवाज़ दे कर बोला, “ओये चमन, ये सामान निकाल कर बाहर गाड़ी में रखवा। और सरदार जी?”
मैंने कहा, “बस कितने हुए।”
गोगी बोला, “अरे सरदार जी छोड़ो जी, पैसे कहीं भागे थोड़ी ही जा रहे हैं आते रहेंगे पैसे।” और फिर पक्के पंजाबी स्टाइल में गोगी ने साथ ही कैलकुलेटर पर हिसाब दिया और बोला, “ये हुए जी सरदार जी तेईस हजार आठ सौ। आप तेईस दे दो जी।”
मैंने मुक्तसरी कुर्ते के जेब में से पांच सौ के नोटों के गड्डी निकाली और गोगी के हाथ में दे कर बोला, “ले गोगी गिन कर निकाल ले।”
गोगी नोटों के गड्डी पकड़ते हुए बोला, “सरदार जी आप कभी नोट नहीं गिनते।”
गोगी ने तेईस हजार रुपये निकाले और बाकी के नोट मुझे वापस कर दिए। तब तक गोगी का लड़का बोतलें गाड़ी में रख आया। गोगी बोला, “सरदार जी वो मालिक साहब आपको पूछ रहे थे जी।” सुदर्शन मालिक वाइन शॉप का मालिक था। मैंने कहा, “क्या हो गया गोगी?”
गोगी बोला, “वो जी कुछ आगे की लीज़ की बात करनी थी जी।”
मैंने चलते हुए कहा, “मालिक को बोलना फोन करेगा मुझे।”
गोगी हाथ जोड़ कर बोला, “ठीक है जी।”
जुगनू ने सामान गाड़ी के डिक्की में रखवाया और चलने को तैयार हो गया। मैं जुगनू के साथ वाली सीट पर बैठ गया और बोला, “चल भाई जुगनू।”
बीस मिनट में हम घर पहुंच गए। दरवाजा प्रीती ने ही खोला। मैं अंदर गया तो पीछे पीछे जुगनू भी शराब और बियर की बोतलें लेकर आ गया। मैंने जुगनू से कहा, “जुगनू, व्हिस्की बार में रख दे और चार-पांच बियर की बोतलें फ्रिज में लगा कर बाकी बार के नीचे वाले खाने में रख दे।”
प्रीती बोली, “पापा आप दोपहर को घर नहीं आये और सीधा सेक्टर सत्रह चले गए। खाना खाया या नहीं?”
मैंने कहा, “खाना खा लिया था, तुम बताओ मम्मी का क्या हाल है सुबह बड़ी परेशान थी”, कहते हुए मैंने प्रीती के मम्मों के तरफ देखा।
प्रीती भी मेरा नजरें भांप गयी और अपने मम्मे ऊपर के तरफ करती हुई बोली, “सब सही है पापा।”
फिर प्रीती ने जुगनू की तरफ देखा। जुगनू बार ठीक-ठाक करने में लगा हुआ था। प्रीती ने धीरे अपनी फुद्दी थपथपाई और धीरे से बोली, “आज से आपके मजे ही मजे हैं पापा, मां बेटी दोनों को चोदो और मजे लो, बाकी तो आपको मम्मी ही बताएगी।”
मैं जा कर लाउंज में बैठ गया।
प्रीती जुगनू से बोली, “जुगनू मेरी वेट करना। मार्किट जाना है।”
प्रीती फिर मुझ से बोली, “पापा मैं मटन ले आऊं। मटन नहीं है।”
मैंने कहा “ठीक है।”
मगर मैं समझ गया प्रीती मुझे भूपिंदर के पास अकेला छोड़ना चाहती है। प्रीती ने वहीं से आवाज लगाई , “मम्मी मैं जुगनू के लेकर मार्किट जा रही हूं। कुछ लाना तो नहीं है?”
भूपिंदर ने भी आवाज दी, “लाना तो कुछ नहीं प्रीती, चाय तो पीती जा।”
प्रीटी बोली, “नहीं मम्मी देर हो जाएगी।”
प्रीती चलते-चलते जैसे मेरे कान में बोली, “पापा तैयारी करके रखना। एक पेग एक्स्ट्रा लगाना आज।”
प्रीटी की बात सुनते ही मेरे लंड ने हरकत कर दी। प्रीती गयी और भूपिंदर आ गयी, हाथ में चाय की ट्रे लेकर। ट्रे टेबल पर रख कर बोली, “लगता है बिज़ी रहा आज का दिन अवतार?”
मैंने कहा, “हां रहा तो सही। पहले फार्म में काम था। एक गाये गाभिन है दूध नहीं दे रही। उसको सतपाल के फार्म में भेजना था और नई गाये लानी थी। पूरन को वही समझाते समझाते टाइम लग गया। फिर सत्रह जाना था। वहां वाइन शॉप की लीज़ खत्म होने वाली है। उसके बारे में बात करनी थे।”
भूपिंदर ने पूछा, “अवतार कितने साल की लीज़ बनती है इन दुकानों की?”
मैंने कहा, “इन दुकानों की लीज़ कम से कम तीन साल की बनती है। अगले साल फ़ास्ट फ़ूड वाले की भी लीज़ खत्म होने वाली है। वो तो पचास हज़ार महीने का किराया बढ़ाने की ऑफर तो अभी से दे रहा है। मगर मैंने कोइ वादा नहीं किया अब तक।”
भूपिंदर इसके बाद चुप हो गयी। भूपिंदर इस तरह चुप बैठने वाली औरतों में से नहीं थी। पक्का ही उसके मन में कोइ उलझन चल रही थी। वो कुछ बात करना चाहती थी, मगर उलझन के कारण बात नहीं कर पा रही थी। शायद भूपिंदर यही सोच रही थी कैसे बात शुरू करे।
कुछ देर के बाद भूपिंदर बोली, “अवतार मैंने प्रीती से बात की थी सुबह तुम्हारे जाने के बाद।”
मैं बोला कुछ नहीं, बस भूपिंदर को देखता रहा। भूपिंदर फिर चुप हो गयी। मैंने ही पूछा, “फिर क्या कहा प्रीती ने भूपिंदर?”
भूपिंदर बोली, “वही जो तुमने बताया था कि चुदाई की पहल तुमने नहीं उसने की थी। उसने ही तुम्हें उसे चोदने के उकसाया था। उसने तो यहां तक बता दिया कि सुखचैन के आसाम के लिए रवाना होने के दिन ही रात को वो झीने कपड़े पहन कर तुम्हारी सामने आ गयी। पारदर्शी गाउन की नीचे उसने गहरे रंग की ब्रा और पैंट पहनी थी और दूसरे दिन तो वो भी नहीं पहनी थी।”
“अवतार प्रीती तो बहुत ही साफ-साफ बातें कर रहे थी। उसने बताया कि अगले दिन कांता ने आना नहीं था, वो तीन दिनों के लिए किसी काम से बाहर गयी थी और घर में बस तुम और प्रीती ही थे। अगले दिन प्रीती ने जो पारदर्शी गाउन पहना उस गाउन के नीचे उसने ना ब्रा पहनी और ना ही पैंटी ही। नीचे उसके चूतड़ों के बीच की लाइन साफ-साफ दिखाई दे रही थी – यही हाल मम्मों का भी था। मम्मों के बीच की लाइन मम्मों कि निप्पल वगैरह साफ़ दिखाई दे रहे थे।”
“फिर उसने बताया कि इतने पर भी तुमने खाली उसकी कमर पर हाथ रखा इससे आगे नहीं बढ़े।”
“फिर प्रीती ने कहा, “मम्मी मैं चुदाई के बिना नहीं रह सकती थी – मैं क्या कोई भी मेरी उम्र की शादी-शुदा लड़की नहीं रह सकती जो चुदाई का मजा ले चुकी हो।”
“अवतार हद्द तो तब हुई जब प्रीटी ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और बोली, “मम्मी आप भी तो जवानी में इसी तरह चुदाई करवाती थी पापा से, इतना तो मुझे भी मालूम है।”
“और फिर अवतार प्रीती ने जो मुझसे कहा उससे तो मुझे तो शर्म ही आ गयी। प्रीती हंसते हुए बोली, “मम्मी मैं आप पर कोइ ताना नहीं कस रही, ना ही आपका मजाक बना रही हूं। उल्टा मुझे आप पर नाज़ है कि आप एक अच्छी बीवी हैं, और एक अच्छी मम्मी भी साबित हुई हैं। कनाडा से वापस आने के बाद पापा के लंड का पूरा ध्यान रखा है आपने। एक हफ्ता पापा से चुदवाने के बाद अपने अब घर की सुध ली है।”
“फिर प्रीती बोली, “चलिए मम्मी छोड़िये इस बात को भी। आपने कनाडा में चुदवाई किसी से – नहीं ना? क्यों? आप तो इस उम्र में भी कैसे हुए तंदरुस्त शरीर की मालकिन हैं। आपको देख कर कोइ भी नहीं कह सकता कि आप अपनी बेटी की शादी कर चुकी हैं। क्या चोदने वालों की कमी थी वहां कनाडा?”
“अवतार फिर प्रीती ने खुद ही अपनी बात का जवाब भी दे दिया, “नहीं मम्मी कोइ कमी नहीं थी वहां चोदने वालों की। आप एक इशारा भी कर देती तो दस गोरे और चूतिये सरदार लंड हाथ में लिए आपके पीछे-पीछे घूमते आपको चोदने कि लिए।”
“ये साले गोरे भड़वे तो वैसे भी हिंदुस्तानी लड़कियों की फुद्दियों के दीवाने होते हैं, और इन मीट मुर्गे खाने वाले शराबी सरदारों का लंड तो मरते दम तक खड़ा ही रहता है। मम्मी आपने इस लिए नहीं चुदवाई क्योंकि आपकी फुद्दी आपके हस्बैंड, मेरे पापा – आपके पति की अमानत है।”
“इसी तरह मम्मी मेरी फुद्दी भी मेरे पति सुखचैन की अमानत है। मैं इस फुद्दी के अंदर किसी गैर मर्द का लंड कैसे डलवा सकती हूं। मगर मम्मी पापा गैर नहीं हैं – वो मेरे आपके, हम दोनों के अपने हैं। मेरी फुद्दी पर मेरे पापा के लंड के मुहर है। आपकी फुद्दी में मेरे पापा का लंड से निकला बीज गया और मैं निकली आपकी फुद्दी में से। असल में तो मेरी फुद्दी पर पहला हक़ आपका और पापा का है। मम्मी, आप जितना चाहो चूसो चाटो मेरी फुद्दी – पापा भी जितना चाहें चोदें मेरी फुद्दी, मुझे कोइ एतराज नहीं।”
“अवतार, प्रीती बोलती ही जा रही थी, “और मम्मी जब तक सुखचैन यहां था, उसका लंड मेरी फुद्दी में जाता था तब तक तो मैंने पापा कि लंड की तरफ देखा भी नहीं। अब आप बताओ अगर मेरा फुद्दी चुदवाने का मन करे तो क्या मैं पापा से ना चुदवा कर मुहल्ले वालों से चुदवाऊं?”
“मम्मी कॉलेज में मैं सब से खूबसूरत और बिंदास लड़की थी – लम्बी ऊंची मस्त सेक्सी जिस्म वाली। लड़कियां जलती थी मुझसे मेरी कद काठी, मेरे जिस्म, मेरी ख़ूबसूरती की वजह से। आधे प्रोफ़ेसर और कालेज के लड़के मेरी फुद्दी चोदने को तो छोड़ो मम्मी मेरे मम्मों की, मेरी फुद्दी की एक झलक देखने के लिए भी कुछ भी करने को तैयार रहते थे।
मगर मम्मी मैंने छोटी मोटी चुम्मा-चाटी को छोड़ किसी को अपनी फुद्दी को हाथ भी नहीं लगाने दिया। मेरी सब से बड़ी खुशी ये है मम्मी की मैंने अपनी फुद्दी की सील भी सुखचैन की चुदवाई से ही तुड़वाई। अब आप बताओ मम्मी, क्या मैं किसी और लंड जाने दूं अपनी फुद्दी मैं या फिर पापा का लंड ही लूं इसमें?”
“अवतार प्रीती की इस बात ने तो मेरी बोलती ही बंद कर दी।” मैंने कुछ सोच कर प्रीती से कहा, “प्रीती अगर ऐसी ही बात है तो ऐसा करते हैं मैं दो-तीन महीने के लिए वापस कनाडा चली जाती हूं। तुम खुल कर चुदाई करवाओ अवतार, अपने पापा से। जब सुखचैन के आने का टाइम होगा तो मैं वापस आ जाऊंगी।”
“अवतार इसके बाद जो प्रीती ने मुझे कहा उसके बाद मेरे पास बोलने कि लिए कुछ भी नहीं बचा।”
“प्रीती ने कहा, “मम्मी पापा ने मेरे कहने से भले ही अपना लंड मेरी फुद्दी में डाल लिया है। ये भी हो सकता है पापा कहीं और भी लड़कियों को चोदते हो। पापा अच्छे खासे तंदरुस्त हैं, अमीर है, लम्बा मोटा उनका लंड है – मम्मी मगर वो प्यार, मुहब्बत आपसे ही करते हैं। चुदाई अपनी जगह है मम्मी और प्यार अपनी जगह है।”
“अगर आप सिर्फ ये बोल कर कनाडा चली जाएंगी कि आप कनाडा जा रही हैं ताकि मेरी और पापा की चुदाई चलती रहे – तो क्या आप समझती हैं कि पापा को ये ठीक लगेगा? मुझे ये ठीक लगेगा? आपको ठीक लगेगा?”
“कोई बड़ी बात नहीं आप के ऐसे जाने के बाद पापा का चुदाई का मन ही ना करे। मुझे नंगी देख कर भी उनका लंड ही खड़ा ना हो। या फिर पापा का लंड देख कर मेरी फुद्दी ही गीली ना हो, मेरा मन ही पापा का लंड ही अपनी फुद्दी में लेने का ना हो। उधर आप भी ये सोचती रहें के आपकी बेटी आपके प्रीती, अपने पापा से चुदाई करवा रही है। मम्मी ये तो हम तीनों की – मेरी आपकी और पापा की सेहत खराब करने जैसी बात हो जाएगी।”
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