पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-14
फ्री हिंदी सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट-
हम लाऊंज में बैठे हुए थे और देर रात तक मेरी और प्रीती की चुदाई की बातें कर रहे थे। प्रीती ने भूपिंदर को अपनी सूखी गांड चुदाई के बारे में बताया तो भूपिंदर का मन भी ऐसे गांड चुदाई का होने लगा।
भूपिंदर ने प्रीती को एक बार गांड दिखाने को कहा। अभी कांता अंदर ही थी। जैसे ही कांता निकली, कांता के जाते ही प्रीती ने दरवाजा बंद किया और गाऊन ऊपर कर के चूतड़ उठा कर लेट गयी और चूतड़ फैला कर भूपिंदर से बोली, “लो मम्मी देखो आ कर मेरी गांड का हाल।” भूपिंदर उठी और प्रीती के चूतड़ थोड़े और फैला कर गांड का छेद देखा और बोली, “प्रीती ज्यादा फूली तो नहीं हुई, मगर चूतड़ों के छेद की साइडों सी लाल जरूर है।”
मैं भी उठ कर प्रीती के पीछे चला गया। प्रीती के चूतड़ों का छेद किनारों से लाल हो गया था मगर अब गांड फूली नहीं। प्रीती के चूतड़ देख कर मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। मैंने पायजामा उतार दिया और बोला, “प्रीती की गांड देख कर तो लंड गांड में डालने का मन होने लगा है।”
प्रीती बोली, “डाल लो पापा मैं तो लेटी ही हुई हूं।”
भूपिंदर बोली, “बस भी करो अब। मेरी भी तो गांड है, मेरी भी तो फुद्दी है, तुम दोनों ही मजे लेते रहोगे क्या?”
हंसते हुए नंगा मैं वापस सोफे पर आ कर बैठ गया। प्रीती सीधी होने लगी तो भूपिंदर ने कहा, “एक मिनट प्रीती, ऐसे ही लेटी रह – जरा अपने गांड चाटने दे।” ये बोल कर भूपिंदर नीचे बैठी और प्रीती की गांड के छेद पर जुबान फेरने लगी।
गांड चाटने के बाद भूपिंदर मुझसे बोली, “अवतार एक बार मेरी गांड भी चोदो ऐसे ही जैसे प्रीती के चोदी है। लाल कर दो मेरी गांड एक बार।”
मैंने कहा, “ठीक है, आज रात को ही लो।”
भूपिंदर बोली, “रात की रात को देखेंगे, एक बार तो अभी चोद दो सेक्टर सत्रह जाने से पहले।”
ये बोल कर भूपिंदर खड़ी हो गयी और प्रीती से बोली,”प्रीती मैं अंदर चलती हूं, तेरी गांड चाट कर तो मेरी फुद्दी भी गर्म होने लगी है। चल एक बार फुद्दी चुसवा ले मेरे से, बड़ा मन कर रहा है तेरी फुद्दी चूसने चाटने का।”
प्रीती बोली, “आप चलो मम्मी मैं पापा का थोड़ा लंड चूस कर आती हूं, देखो कैसे फुंफकारे मार रहा है।”
भूपिंदर बोली, “ठीक है जल्दी आना। कहीं फिर से गांड ही चुदवाने लग जाना।”
भूपिंदर ये बोल कर चली गयी। प्रीती मेरे सामने आ कर सोफे पर बैठ गयी और बोली, “चलो पापा खड़े हो जाओ, लंड चूसूं आपका।”
मैं खड़ा हो गया और प्रीती ने मेरा लंड मुंह में ले लिया। प्रीती की लंड चुसाई बहुत मस्त थी। भूपिंदर भी ऐसा लंड नहीं चूसती थी जैसा प्रीती चूसती थी।
प्रीती ने लंड थोड़ा और चूसा और खड़ी हो गयी और बोली, “जाओ पापा मम्मी चूतड़ उठा कर वेट कर रही होगी। कहीं ऐसा ना हो लंड मेरे मुंह में ही मलाई छोड़ दे। बढ़िया चुदाई करनी है आज आपने मम्मी की गांड की – लाल कर देनी है पापा आज चोद-चोद कर। पापा सूखी ही रगड़ना और हाथ भी पीछे करके पकड़ लेना, हिलने मत देना मम्मी को, जैसे मेरे पकड़े थे। जो मर्जी कहे मम्मी, छोड़ना मत आज।”
मैंने पायजामा उठाया और अंदर जाने लगा। पीछे-पीछे प्रीती भी चल पड़ी। अंदर कमरे में भूपिंदर नंगी हो कर सोफे पर बैठी हुई थी। जैसे ही मैं और प्रीती अंदर पहुंचे तो भूपिंदर प्रीती से बोली, “चल प्रीती थोड़ी फुद्दी चुसवा ले फिर गांड चुदवाऊं अवतार से।”
प्रीती ने गाऊन ऊपर किया और बेड के किनारे पर तकिया रख उस पर बैठ गयी और एक तकिया सर के नीचे रख कर लेट गई, अपनी टांगें उठाईं और नीचे से हाथ डाल कर अपनी फुद्दी की फांकें साइडों में फैला दीं। प्रीती की फुद्दी खुल गयी और भूपिंदर ने नीचे बैठ कर प्रीती की फुद्दी चूसने चाटने लगी।”
मैं सोफे पर बैठ गया। जिस तरह भूपिंदर गांड चुदाई के लिए उतावली थी, उससे मैंने सोचा था कि भूपिंदर प्रीती की फुद्दी थोड़ी सी ही चूसेगी, और फिर गांड चुदवाने आ जाएगी।
मगर अब तो लग रहा था भूपिंदर को फुद्दी चाटने-चूसने में मजा आ रहा था। वो प्रीती कि फुद्दी छोड़ ही नहीं रही थी। तभी प्रीती के चूतड़ हिलने लगे। प्रीती बोली, “मम्मी अब मत हटना, मुझे मजा आने वाला है, मेरी फुद्दी पानी छोड़ने ही वाली है।”
भूपिंदर ने भी हूं हूं करते सर हिला दिया और प्रीती कि फुद्दी चूसती रही। तभी प्रीती ने चौड़ी की हुई टांगें बंद करके भूपिंदर का सर अपनी टांगों में जकड़ लिया और ऊंची आवाज में बोली, “मम्मी निकल गया मेरा, मजा आ गया मम्मी।”
प्रीती ने टांगें खोल दी और भूपिंदर मुंह पोंछती हुई उठी और उठ कर प्रीति की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रगड़ने लगी। भूपिंदर के फुद्दी भी शायद गरम हो चुकी थी। फुद्दी पर फुद्दी रगड़ते हुए भूपिंदर बोलती भी जा रहे थे, “आह मेरी प्रीती क्या मस्त फुद्दी है तेरी। पानी से भरी हुई। कितना लक्की है सुखचैन, जो ऐसी मस्त फुद्दी को चोदता है।”
भूपिंदर ने प्रीती की पर अपनी फुद्दी पर अब धक्के लगा रही थी जैसे चुदाई कर रहे हो। तभी भूपिंदर बोली, “प्रीती मेरी बेटी, निकल गया मेरा आह प्रीती मेरी बेटी, मेरी अच्छी बेटी, आह।”
भूपिंदर को फुद्दी का मजा आ गया और प्रीती के ऊपर से हट कर भूपिंदर सामने आयी और बोली, “चलो अवतार, अब तुम करो जो करना है मेरी गांड के साथ, बोलो कहां लेटूं, कैसे लेटूं?”
मां बेटी की चूत चुसाई और फुद्दी चुदाई देख-देख कर मेरी हालत वैसे ही खराब हुई पड़ी थी। प्रीटी की चूत चुसाई और चुदाई करती हुई भूपिंदर के चौड़े चूतड़ देख कर मेरा लंड बार-बार उछल रहा था। जैसे ही भूपिंदर ने पूछा बोलो कहां लेटूं, मैं सोफे से उठ कर खड़ा हो गया और बोला, “आजा मेरी जान यहीं आजा, चूतड़ उठा कर लेट जा, फाड़ूं तेरी गांड।”
भूपिंदर चूतड़ उठा कर सोफे पर उलटा लेट गयी। मैंने एक तकिया भूपिंदर के चेहरे के नीचे रख दिया। भूपिंदर के चूतड़ों पर एक धप्प लगाते हुए मैंने कहा, “तुम दोनों मां-बेटी के चूतड़ भी बड़े मस्त है, देखते ही चाटने का मन होने लगता है। ये कह कर नीचे झुक कर मैंने भूपिंदर के चूतड़ चाटने शुरू कर दिए। एक बार भूपिंदर के चूतड़ चौड़े किया और गांड के छेद पर भी जुबान फेर दी।
चूतड़ों के छेद पर जुबान लगते ही भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “आह अवतार मजा आ गया, अब डालो लंड गांड में, रहा नही जा रहा।”
मैं खड़ा हुआ और भूपिंदर की गांड पर थूक लगा कर लंड छेद पर रखा और बोला, “अब देख तेरी गांड की क्या हालत करता हूं आज।”
मैंने लंड गांड में थोड़ा अंदर धकेल दिया। भूपिंदर की गांड का छेद प्रीती की की गांड के छेद जितना टाइट नहीं था, मगर फिर भी रगड़ाई के लिए ठीक था।
लंड थोड़ा अंदर गया मगर थोड़ा सा अंदर जाने के बाद आगे जा नहीं जा रहा था। मैंने लंड पर थोड़ा थूक और लगाया और दुबारा से लंड अन्दर डालना शरू कर दिया। थोड़ी जोर आजमाइश के बाद लंड आधा गांड में चला गया। बस अब एक तगड़ा झटका लगाने की बात थी।
मैंने लंड बाहर निकाल कर छेद पर थोड़ा थूक और लगाया और लंड गांड के छेद पर रख कर सर मोड़ कर प्रीती की तरफ देखा। प्रीती बेड पर ही बैठी हुई थी। मैंने प्रीती को एक इशारा किया और प्रीती आ कर मेरे पास खड़ी हो गयी। मैंने भूपिंदर के चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए धीरे से भूपिंदर के बाजूओं को पकड़ा और पीछे कर के पकड़ लिए। भूपिंदर कुछ भी नहीं बोली। शायद समझ नहीं पायी कि मैंने उसके हाथ क्यों पकड़े थे, मगर जल्दी ही भूपिंदर को समझा में आने वाला था जब मैंने गांड चुदाई के वक़्त उसे हिलने भी नहीं देना था।
मैंने भूपिंदर से पूछा, “भूपिंदर डालूं?”
भूपिंदर बोली, “क्या अवतार अभी भी सोच ही रहे हो, डालो। मेरी गांड तो कब से फड़क रही है?”
मैंने भूपिंदर के हाथ पकड़े और एक कस कर धक्का लगाया और लंड पूरा भूपिंदर के गांड में बिठा दिया।
भूपिंदर बोली, “अवतार इतनी जोर से। आराम से क्यों नहीं डाला?”
मैंने जोरदार धक्के लगाते हुए कहा, “गांड लाल करवानी है या नहीं?”
और फिर भूपिंदर की गांड में लम्बे-लम्बे धक्के लगाने लगा। प्रीती पास खड़ी लंड भूपिंदर की गांड में अंदर बाहर होता देख रही थी। थोड़े धक्कों के बाद ही गांड और लंड पर लगा थूक सूख गया, अब भूपिंदर की सूखी गांड में धक्के लग रहे थे। उधर भूपिंदर हिल भी नहीं पा रही थी।
भूपिंदर बोली, “अवतार थोड़ा थूक लगा लो, दर्द होने लगा है, मगर ना तो मैं रुका और ना कोइ जवाब ही दिया, बस भूपिंदर की गांड चोदता रहा।
भूपिंदर बोली, “अवतार मेरी तो फुद्दी भी गरम हो गयी है, एक बार लंड निकाल कर फुद्दी में डाल लो, इसका भी काम हो जाएगा।”
मगर मैंने तो जैसे सुना ही नहीं। लंड अब पूरा सख्त हो चुका था। हर धक्के के साथ भूपिंदर की के चूतड़ों के छेद की स्किन अंदर-बाहर हो रही थी। प्रीती की नज़र मेरे लंड पर से हट ही नहीं रही थे। भूपिंदर अब चिल्लाने लगी थी, “अवतार तुम्हें समझ नहीं आ रहा? मुझे दर्द हो रहा है।”
प्रीती आगे गयी और भूपिंदर के पास बैठ गयी। भूपिंदर प्रीती से बोली, “प्रीती मना कर अपने पापा को। नहीं चुदवानी मैंने गांड-गूँड। बहुत हो गया, मुझे दर्द हो रहा है।
प्रीती ने मेरी तरफ देख और एक आंख दबा ना में सर हिला कर बोली, “पापा बस करो मम्मी को सच में ही दर्द हो रहा होगा। गांड से निकाल कर मम्मी की फुद्दी में लगा लो आठ-दस धक्के।”
मगर प्रीती का आंख दबाना और नां में सर हिलाना – इसका मतलब था, “पापा चोदते रहो मम्मी की गांड।”
मैं भूपिंदर की गांड चोदने में मस्त था। मोटे सख्त के हर धक्के के साथ भूपिंदर के चूतड़ों के छेद की स्किन अंदर-बाहर हो रही थी। प्रीती की नजर मेरे लंड पर से हट ही नहीं रही थे। भूपिंदर की गांड में मोटे लंड की सूखी चुदाई के रगड़ों से दर्द हो रहा था, मगर मुझे तो भूपिंदर की गांड का छेद चोद-चोद कर फुलाना था। भूपिंदर मुझे गांड में से लंड निकालने कर फुद्दी में डालने को कह रहीं थी।
मगर मैं भूपिंदर की बात अनसुनी कर रहा था हुए गांड में धक्के लगाता जा रहा था। मुझे भी लंड का मजा आने वाला होने लगा था। मैंने जोर-जोर से धक्के लगाते हुए कह, “भूपिंदर ले मेरी जान, पूरा लंड जा रहा है तेरी गांड में। बस निकलने ही वाला है मेरा। मजा आ गया आज तो। क्या मस्त टाइट गांड है। तुम दोनों ही मां बेटी मस्त गांड चुदवाती हो आअह भूपिंदर मेरी जान।
प्रीती ने जब देखा मुझे मजा आने वाला है तो प्रीती खड़ी हो गयी और मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगी और साथ ही बोलने लगी आअह पापा मेरी गांड में भी कुछ-कुछ होने लगा है। आज रात को गांड ही चुदवाऊंगी आह पापा, क्या मस्त चोदते हो आप। प्रीती फिर सोफे पर बैठ गयी और नीचे हाथ करके भूपिंदर की चूत का दाना रगड़ने लगी।
भूपिंदर की चूत भी गरम हो चुकी थी। भूपिंदर अब गांड का दर्द भूल हर चुदाई का मजा ले रही थी और साथ ही बोल रही थी, “आह अवतार और जो से रगड़ो, फाड़ो मेरी गांड आज। आह प्रीती ये तो मजा आने लग गया है। प्रीती जरा जोर-जोर से रगड़, हां ऐसे ही। अवतार अब मत रुकना। मेरी फुद्दी बस पानी छोड़ने ही वाली है।
भूपिंदर को इस तरह बोलते सुन मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी और तभी मेरी जुबान से निकल गया, “ले मेरी कुतिया ले पूरा लंड तो ले रही हो तू अपनी गांड में ले, और ले। निकलेगा भूपिंदर मेरी जान अब निकलेगा।”
तभी जैसे भूपिंदर की फुद्दी ने पानी छोड़ दिया। भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “अवतार निकल गया मेरा। मजा आ गया मेरी फुद्दी में।”
फिर भूपिंदर बोली, “अब बस करो अवतार थक गयी मैं।
मैंने भूपिंदर की बाहें छोड़ दी, मगर कमर कस कर पकड़ ली। मैं भूपिंदर को हिलने भी नहीं दे रहा था। बस अब कभी भी मेरे लंड की मलाई निकल सकती थी।
तभी मुझे मजा आ गया, “आह भूपिंदर ले गया तेरी गांड में। निकल गया मेरे लंड से। जैसे ही मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ी मैंने भूपिंदर की कमर छोड़ दी। भूपिंदर एक दम से आगे हो कर सोफे पर ढेर हो गयी।
मेरे खड़े लंड से सफ़ेद गाढ़ी मलाई अभी भी टपक रही थी। प्रीती पास ही बैठी ही। जैसे ही उसने देखा की मेरे लंड से अभी भी पानी निकल रहा है, उसने मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
जब तक मेरा लंड ढीला नहीं हो गया प्रीती लंड चूसती रही और फिर मेरा लंड छोड़ कर भूपिंदर से बोली, “मम्मी मजा आया गांड चुदवाने का?”
भूपिंदर सीधी हुई, “क्या मजा आया। मेरी तो गांड दुःख ही बहुत रही थी” और फिर गुस्से से मुझे बोली, “और तू अवतार, तुझे सुनाई नहीं दे रहा था, मैं बोलती जा रही थी दुःख रही है दुःख रही है – और तू? रुक ही नहीं रहा था। ऐसे चुदाई करते हैं क्या बीवी की गांडू भोसड़ी के अवतार?”
प्रीती ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी।
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