पिछला भाग पढ़े:- साक्षी दीदी और मेरी सेक्स कहानी-1
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
उस शाम का माहौल अजीब तरह से भारी लग रहा था। मैं सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था, लेकिन मेरा ध्यान स्क्रीन पर बिल्कुल नहीं था। सुबह जो कुछ हुआ था, वह बार-बार मेरे दिमाग में घूम रहा था। मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि सच में हुआ क्या था। तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई। मैंने सिर घुमाया, और जैसे मेरी सांस अटक गई।
साक्षी दीदी अंदर आई, बिल्कुल वैसे ही जैसे हर दिन आती थी। कॉलेज से थकी हुई, बैग कंधे पर, चेहरे पर हल्की सी थकान। लेकिन मेरे लिए वो वैसी नहीं रह गई थी। सुबह के बाद, सब कुछ बदल चुका था… कम से कम मेरे अंदर। मैं उसे देखता रह गया। कुछ सेकंड के लिए तो मैं ये भी भूल गया कि मैं क्या कर रहा था। भूख, प्यास, सब जैसे गायब हो गए थे। बस वही खड़ी थी, और मेरा दिमाग उसी में अटका हुआ था।
साक्षी दीदी अंदर आई, चप्पल उतारी, और बिना मेरी तरफ देखे अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगी। मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी उठी।
मैंने फिर से टीवी की तरफ देखने की कोशिश की, लेकिन अब तो जैसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। स्क्रीन पर क्या चल रहा है, कौन बोल रहा है, सब धुंधला लग रहा था। दिमाग बार-बार उसी सुबह पर जाकर अटक जाता। मैं चैन से बैठ भी नहीं पा रहा था।
करीब आधा घंटा यूं ही बीत गया। मैं सोफे पर बैठा रहा, लेकिन हर मिनट और भारी होता जा रहा था। आखिरकार मैंने रिमोट टेबल पर रखा और धीरे-धीरे उठ गया।
मेरे कदम अपने आप उसके कमरे की तरफ बढ़ने लगे। दिल तेज धड़क रहा था, जैसे कोई गलत काम करने जा रहा हूं। हर कदम पर एक अजीब सा डर और खिंचाव दोनों साथ-साथ चल रहे थे।
मैं उसके कमरे के दरवाज़े के सामने जाकर रुक गया। कुछ सेकंड तक बस वहीं खड़ा रहा। अंदर से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। मैंने गहरी सांस ली… और धीरे से दरवाज़े पर दस्तक दी।
अंदर से हल्की सी आहट हुई, फिर दरवाज़ा खुला। साक्षी दीदी सामने खड़ी थी। उसने सफेद क्रॉप टी-शर्ट पहन रखी थी और नीचे काले शॉर्ट्स। उसके बाल बंधे हुए थे, जिससे उसका चेहरा और साफ दिख रहा था।
मेरी नजर अपने आप उसके ऊपर टिक गई। सफेद टी-शर्ट उसके शरीर से हल्के से चिपकी हुई थी, जैसे कपड़ा उसकी हर हल्की हरकत के साथ ढल रहा हो। उसके स्तन उस कपड़े के नीचे साफ उभर रहे थे। सीधे दिखाई नहीं दे रहे थे, लेकिन उनकी गोलाई और आकार कपड़े के जरिए महसूस हो रहा था। कपड़ा इतना पतला था कि उनकी बनावट छिप भी रही थी और सामने भी आ रही थी।
जब वो हल्का सा हिली, तो टी-शर्ट के नीचे वो हल्की सी मूवमेंट भी दिखी, जिसने मेरी नज़र को और रोक दिया। ऐसा लग रहा था जैसे नज़र हटाने की कोशिश भी बेकार है।
मैं कुछ सेकंड तक कुछ बोल ही नहीं पाया। बस उसे देखता रह गया। दिल की धड़कन और तेज हो गई थी, और दिमाग में एक ही चीज चल रही थी, सुबह की बात… और अभी सामने खड़ी वही इंसान।
मैंने हिम्मत जुटाई और धीरे से कहा, “दिदी… मैं अंदर आ जाऊं?”
वो हल्का सा मुस्कुराई, जैसे उसे पहले से पता हो कि मैं क्या सोच रहा हूं। “आ जा गोलू… इतना पूछ क्यों रहा है?”
उसकी आवाज़ में एक सामान्यपन था, लेकिन मुझे सब कुछ अलग लग रहा था। मैं धीरे-धीरे कमरे के अंदर गया। अंदर का माहौल शांत था। वो मेरी तरफ देख रही थी— मेरे चेहरे को ध्यान से, जैसे कुछ पढ़ने की कोशिश कर रही हो। फिर उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
वो मुड़ी और जाकर बेड पर बैठ गई। बैठते समय उसने अपने पैर क्रॉस कर लिए। उसकी इस हरकत के साथ ही उसकी टी-शर्ट हल्की सी खिंची, और उसके स्तन एक पल के लिए और ज्यादा उभर कर दिखे। कपड़ा थोड़ा सा हिला, और उस हल्की सी मूवमेंट ने मेरे ध्यान को और खींच लिया।
कमरे में कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा। मैं अब भी खड़ा था, और वो मुझे देख रही थी। मैंने आखिर हिम्मत करके कहा, “दीदी… मुझे आपसे सुबह वाली बात करनी है।”
वो तुरंत हल्का सा मुस्कुराई, जैसे उसे पहले से अंदाजा था। उसने सिर थोड़ा झुकाया और बोली, “कौन सी बात?”
मेरे गले में जैसे शब्द अटक गए। फिर भी मैंने धीरे से कहा, “वो… जब आपने कहा था… कि आप… मुझे दिखा सकती हैं…”
वो मेरी बात पूरी होने से पहले ही मुस्कुरा दी। उसकी आँखों में हल्की सी शरारत थी।
“जब मैंने कहा था कि मैं तुम्हें अपने बूब्स दिखा सकती हूँ?” उसने सीधा बोल दिया। मेरे अंदर एक झटका सा लगा। उसने इतनी आसानी से बोल दिया, जैसे ये कोई बड़ी बात ही ना हो।
मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाई, और इस बार सीधा उसकी आँखों में देखते हुए कहा “लेकिन दीदी… मुझे समझ नहीं आ रहा…”
वो चुप-चाप मुझे देखने लगी।
मैंने आगे कहा, “तीन महीने पहले… आपने मुझे थप्पड़ मारा था… सिर्फ इसलिए कि मैं… आपकी पैंटी के साथ वो सब कर रहा था…” मेरी आवाज़ धीमी हो गई थी, लेकिन अब मैं रुक नहीं पा रहा था। “और अब… आप खुद कह रही हो कि आप… मुझे अपने बूब्स दिखा सकती हो… ऐसा क्यों?”
कमरे में एक पल के लिए पूरी खामोशी छा गई। वो मुस्कुराते हुए बोली, “जब मुझे पता चला कि तू मेरी पैंटी के साथ गलत काम कर रहा था… मैं बहुत परेशान हो गई थी। सच में बहुत गुस्सा आया था।”
मेरे पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई। मैं तुरंत बोल पड़ा, “दीदी मैं…”
उसने हाथ उठा कर मुझे रोक दिया। “रुक, पहले मेरी बात सुन,” उसने शांत आवाज़ में कहा।
वो थोड़ी सी आगे झुकी और बोली, “मैंने ये बात अपनी सहेलियों को भी बताई थी।”
“क्या?!” मेरे मुंह से अपने आप निकल गया। “आपने सब को बता दिया?”
वो हल्का सा हँसी। “डर मत,” उसने कहा, “लड़के शायद ऐसी बातें नहीं करते। लेकिन हम लड़कियां करती हैं। ऐसी चीजों के बारे में हम खुल कर बात करते हैं।”
मैं चुप हो गया, दिल और तेज धड़कने लगा। वो आगे बोली, “और जब मैंने उनसे बात की… तो मुझे पता चला कि ये सिर्फ मेरे साथ नहीं हुआ।”
मैंने धीरे से उसकी तरफ देखा। वो मेरी आंखों में देखते हुए बोली, “मेरी कई सहेलियों ने बताया कि उनके साथ भी ऐसा हुआ है… किसी ने कहा कि उनके भाई बस उनकी चीज़ें छूते हैं… लेकिन कुछ ने ये भी बताया कि उनके भाई उन्हें चोदना चाहते थे।”
ये सुन कर मैं पूरी तरह हिल गया। मेरे मुंह से कोई शब्द नहीं निकला। वो मेरी हालत देख कर फिर हल्का सा मुस्कुराई, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ थोड़ी नरम थी।
“तू सोच रहा होगा कि मैंने ये सब क्यों बताया,” उसने कहा।
मैं बस उसे देखता रहा। वो धीरे से बोली, “क्योंकि मैं सिर्फ गुस्सा नहीं थी… मैं समझना चाहती थी कि तू ऐसा क्यों कर रहा था।”
मैं उसकी तरफ देखता रहा। उस पल मुझे पहली बार एहसास हुआ कि वो कितनी समझदार है। मैं हमेशा जानता था कि मेरी दीदी सुलझी हुई है… लेकिन आज जो मैं देख रहा था, वो उससे भी आगे था। उसे सब पता था… फिर भी उसने मुझसे दूरी नहीं बनाई। उसने रिश्ता तोड़ने की बजाय उसे संभालने के बारे में सोचा। मैं अंदर ही अंदर सोच रहा था, मैंने उसकी चीज़ों को छुआ… उसे बुरा लगा… फिर भी वो मेरे सामने बैठ कर शांति से बात कर रही है। वो मुझे ध्यान से देख रही थी, जैसे मेरे मन की हालत समझ रही हो।
वो हल्का सा मुस्कुराई। उसकी मुस्कान में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक अजीब सी सहजता थी। उसने थोड़ा झुक कर मेरी आँखों में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “तो बताओ गोलू… क्या तुम सच में देखना चाहते हो? अगर तुम चाहो… तो मैं तुम्हें दिखा सकती हूँ।”
मेरे अंदर जैसे सब कुछ थम गया। कुछ सेकंड तक मैं कुछ बोल ही नहीं पाया, लेकिन फिर हिम्मत करके मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “हाँ… साक्षी दीदी… मैं सच में देखना चाहता हूँ।”
मेरे ये शब्द सुन कर उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और गहरी हो गई। उसने मेरी आँखों में देखते हुए सिर थोड़ा सा झुकाया। कमरे में खामोशी और गहरी हो गई थी।
वो धीरे-धीरे खड़ी हुई और अपनी टी-शर्ट उतार कर एक तरफ रख दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ अपनी ब्रा में खड़ी थी। एक पल के लिए उसके गाल हल्के लाल हो गए, जैसे उसे थोड़ी झिझक महसूस हुई हो। उसने नज़रें थोड़ी देर के लिए झुका ली… फिर वापस मेरी तरफ देखा।
मैं वहीं खड़ा था, मेरी नज़रें उसी पर टिकी हुई थी। दिल की धड़कन और तेज हो गई थी। उसने धीरे से अपना हाथ पीछे ले जाकर ब्रा की हुक पकड़ी। उसकी उंगलियाँ एक पल के लिए रुकी… फिर उसने धीरे से हुक खोल दी। हुक खुलते ही उसने एक हल्की साँस ली, जैसे खुद को संभाल रही हो। उसने मेरी तरफ देखा… और फिर बहुत धीरे-धीरे ब्रा को अपने कंधों से नीचे सरकाने लगी। कपड़ा धीरे-धीरे नीचे आया… और फिर उसके हाथ से फिसल कर फर्श पर गिर गया।
अब वो मेरे सामने खड़ी थी… उसके स्तन साफ दिखाई दे रहे थे। वो कुछ सेकंड तक वैसे ही खड़ी रही, बिना अपने हाथों से ढके। उसके स्तन भरे हुए थे, नरम लग रहे थे। ना बहुत बड़े, ना छोटे… बस ठीक से उभरे हुए। ऊपर से नीचे तक उनका आकार साफ दिख रहा था। बीच में हल्की सी लाइन दिख रही थी, और जब वो हल्का सा सांस ले रही थी तो उनका उठना-गिरना भी साफ दिख रहा था।
उसके चेहरे पर अभी भी थोड़ी झिझक थी, लेकिन वो भाग नहीं रही थी… बस खड़ी होकर मुझे देख रही थी।
मैं वहीं खड़ा था… मेरी नज़रें बार-बार उसके स्तनों पर जा रही थी। दिमाग जैसे काम करना बंद कर चुका था। कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी… बस देखता जा रहा था।
मैंने हिम्मत करके धीरे से पूछा, “दीदी… क्या मैं… इन्हें छू सकता हूँ?”
मेरे इतना कहते ही वो एक-दम शांत हो गई। उसने मेरी तरफ सीधा देखा, फिर हल्का सा सिर ना में हिलाया।
“नहीं गोलू…” उसने धीरे से कहा, “मैंने सिर्फ दिखाने का वादा किया था… बस उतना ही।”
मैं तुरंत चुप हो गया। मुझे समझ आ गया कि वो क्या कहना चाहती है। मैं बस हल्का सा सिर हिला कर पीछे हट गया, लेकिन मेरी नज़रें अब भी उसी तरफ जा रही थी। वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही… जैसे ये देख रही हो कि मैं उसकी बात समझ गया हूँ या नहीं। फिर उसने हल्की सी साँस ली और वैसे ही खड़ी रही, बिना जल्द-बाज़ी के।
वो कुछ सेकंड तक मुझे देखती रही… फिर धीरे से बोली, ” लेकिन अगर तुम चाहो तो मेरे बूब्स को देखते हुए अपना लंड हिला सकते हो।”
मैंने उनके चेहरे को ऐसे देखा मानो मुझे मेरे कानों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था। साक्षी दीदी के नाज़ुक होठों से लंड सुनना बहुत ही प्यारा और अनोखा था। मैं अपने आप सख्त होने लगा था फिर भी दीदी के सामने अपना लंड हाथों में पकड़ कर हिलाना मुझे अजीब लग रहा था।
मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “लेकिन दीदी… मैं ये सब आपके सामने कैसे कर सकता हूँ…”
वो हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “गोलू… तुम अभी मेरे बूब्स देख रहे हो ना… फिर मेरे सामने हिलाने में अजीब क्यों लग रहा है?”
मैं चुप हो गया… उसकी बात सुन कर मेरे अंदर अजीब सा एहसास होने लगा। उसकी आँखों में अब झिझक कम और समझ ज्यादा दिख रही थी।
मैंने गहरी साँस ली… दिल जोर से धड़क रहा था। उसके शब्द अब भी मेरे दिमाग में घूम रहे थे। थोड़ी देर तक मैं वहीं खड़ा रहा, फिर जैसे हिम्मत जुटाई।
मैंने धीरे-धीरे अपने पैंट की तरफ हाथ बढ़ाया… उंगलियाँ हल्की कांप रही थी। एक पल के लिए मैंने उसकी तरफ देखा—वो अब भी मुझे देख रही थी, शांत… लेकिन उसके गाल पहले से ज्यादा लाल हो चुके थे।
मैंने धीरे से अपनी पैंट नीचे खिसकाई… फिर पूरी तरह उतार दी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में खड़ा था। दिल की धड़कन और तेज हो गई थी, जैसे हर सेकंड भारी लग रहा हो। मैंने एक पल रुक कर खुद को संभालने की कोशिश की… फिर धीरे से अपना अंडरवियर भी नीचे खिसकाया।
जैसे ही मैंने उसे भी नीचे किया, मैं पूरी तरह दीदी के सामने था। मेरा शरीर पहले ही सब बता रहा था… साफ दिख रहा था कि मेरा लंड कितना हार्ड था। मेरी सांसें तेज हो रही थी और हाथ हल्के कांप रहे थे।
मैंने नज़र उठा कर उनकी तरफ देखा। वो उसे देख रही थी… लेकिन खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश कर रही थी, जैसे ये सब उसके लिए नया नहीं हो। फिर भी उसके चेहरे ने सब बता दिया। उसके गाल और लाल हो गए थे, और वो कुछ सेकंड तक बिना कुछ बोले बस मुझे देखती रही… जैसे वो भी इस पल को समझने की कोशिश कर रही हो।
मैं कुछ सेकंड तक वैसे ही खड़ा रहा… फिर धीरे-धीरे अपना हाथ नीचे ले गया। उंगलियाँ अभी भी हल्की कांप रही थी। मैंने अपना हाथ अपने लंड पर रखा… जैसे ही छुआ, मेरे पूरे शरीर में एक झटका सा महसूस हुआ। सांस और तेज हो गई।
मैंने धीरे-धीरे हाथ चलाना शुरू किया… पहले बहुत हल्का… जैसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या कर रहा हूँ। मेरी नजरें बार-बार ऊपर उठ कर दीदी के स्तनों पर जा रही थी… और फिर वापस नीचे।
हर बार जब मैं उनकी तरफ देखता… मेरा हाथ अपने आप तेज चलने लगता। मैं खुद को रोकने की कोशिश करता, लेकिन नज़रें हट ही नहीं रही थी।
मेरी सांस अब और भारी हो गई थी। हाथ की पकड़ कभी ढीली, कभी टाइट हो रही थी… जैसे मैं खुद भी इस एहसास को समझने की कोशिश कर रहा था। मैंने फिर उनकी तरफ देखा, वो अब भी मुझे देख रही थी। इस बार उसकी नजरें थोड़ी देर के लिए मेरे लंड पर रुकी… फिर जल्दी से ऊपर उठ गई।
तभी उसने धीरे से कहा, “गोलू… एक बात का वादा करो…”
मैंने तुरंत उसकी तरफ देखा, “क्या दीदी?”
वो थोड़ी गंभीर हो गई। उसकी आवाज़ अब पहले से अलग थी। “तुम ये बात कभी किसी को नहीं बताओगे…” उसने कहा, “ना दोस्तों को… ना किसी और को… ये सिर्फ हमारे बीच ही रहेगी।”
मैंने उसकी तरफ देखा… फिर धीरे से कहा, “मैं वादा करता हूँ दीदी…”
मैंने धीरे-धीरे हाथ चलाना शुरू किया… लेकिन कुछ ही सेकंड में मेरी पकड़ और तेज हो गई। मेरा हाथ तेजी से चलने लगा… जैसे मैं खुद को रोक ही नहीं पा रहा था। हर बार जब मैं उसकी तरफ देखता… खास कर उसके स्तनों की तरफ… मेरा हाथ और तेज चलने लगता। मेरी सांसें भारी हो गई थी।
मैंने उसकी तरफ देखा वो अब भी मुझे देख रही थी। उसके गाल पहले से ज्यादा लाल हो चुके थे। फिर उसने धीरे-धीरे अपने हाथ ऊपर उठाए… और अपनी उंगलियों से अपने निप्पल्स को हल्के-हल्के रगड़ने लगी। उसकी हर हरकत धीमी थी… लेकिन साफ थी कि वो जान-बूझ कर ऐसा कर रही है।
कमरे में सिर्फ हमारी तेज साँसों की आवाज़ थी। कुछ ही सेकंड में मुझे महसूस हुआ कि अब मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा हूँ। मेरा हाथ अपने आप और तेज हो गया… और फिर अचानक मेरे अंदर से गर्म पानी निकलना शुरू हो गया… जो नीचे फर्श पर गिरने लगा।
वो भी कुछ सेकंड तक चुप रही… फिर हल्की आवाज़ में बोली, “अब ठीक लग रहा है?”
मैंने उसकी तरफ देखा, फिर हल्का सा सिर हिलाया, “हाँ दीदी…”
उसने गहरी साँस ली, जैसे वो भी इस पूरे पल से बाहर आना चाहती हो। फिर उसने झुक कर अपने कपड़े उठाए और पहनने लगी। मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े उठाए और पहन लिए। हाथ अभी भी थोड़े कांप रहे थे, लेकिन दिमाग धीरे-धीरे शांत हो रहा था।
जब मैंने कपड़े पहन लिए, तो एक बार फिर उसकी तरफ देखा। वो भी तैयार होकर खड़ी थी, लेकिन अब उसके चेहरे पर पहले जैसी झिझक नहीं थी। मैं अभी भी यकीन नहीं कर पा रहा था कि अभी जो हुआ… वो सच में हुआ था। मेरे दिमाग में बार-बार वही पल घूम रहा था—साक्षी दीदी को उस तरह नंगी देखना।
तभी उसने मेरी तरफ देख कर धीरे से कहा, “अब गोलू मुझसे वादा करो कि तुम मेरी पैंटी को कभी हाथ नहीं लगाओगे और मुझे चोदने के बारे में भी नहीं सोचोगे।” उसकी आवाज़ में इस बार साफ सख्ती थी।
मैंने तुरंत सिर हिलाया, “मैं वादा करता हूँ दीदी…”
मैं उसके कमरे से बाहर निकल आया। दरवाज़ा बंद होते ही जैसे मेरे अंदर फिर से वही बेचैनी लौट आई। कदम अपने आप चलते रहे, लेकिन दिमाग कहीं और ही अटका हुआ था। मैं बार-बार उसी एक चीज़ के बारे में सोच रहा था… उसके स्तन। जिस तरह वो मेरे सामने खड़ी थी, जिस तरह उनका आकार, उनका नरम-पन मेरी आँखों में बस गया था… मैं जितना भूलने की कोशिश करता, उतना ही वो तस्वीर साफ होती जा रही थी।
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