यह कहानी साल 2023 की है, जब मैं अपने पहले ब्रेकअप के बाद बहुत उदास था। मैं अंदर से पूरी तरह टूट चुका था और मुझे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि मेरी जिंदगी अब बदलने वाली थी। उसी समय मेरी बड़ी बहन दिशा दीदी ने मुझे अपने साथ जंगल में कुछ दिन बिताने का मौका दिया। वह वहाँ वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर के रूप में काम कर रही थी। उनका कहना था कि उनके साथ रह कर और जंगल में कुछ दिन बिता कर मैं अपने टूटे दिल को संभाल पाऊँगा।
लेकिन अगर मुझे यह कहानी सही तरीके से शुरू करनी है, तो मुझे बहुत पीछे जाना होगा। तभी आप आसानी से समझ पाएँगे कि मेरे और मेरी बड़ी बहन दिशा दीदी के बीच यह रिश्ता कैसे शुरू हुआ और कैसे आगे चल कर वह मेरे बच्चे की माँ बनी।
तब हम लोग नागपुर शहर में रहते थे। हमारे घर में सिर्फ चार लोग थे — मैं, दिशा दीदी, माँ और पापा। बचपन से ही दिशा दीदी मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी। हम दोनों हर बात एक-दूसरे से शेयर करते थे। उस समय मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं अपनी ही दिशा दीदी के लिए कुछ अलग महसूस करने लगूँगा।
असल में दिशा दीदी मुझसे चार साल बड़ी हैं। जब भी हम घर पर होते, हम घंटों बातें करते थे। वह मुझसे कुछ भी नहीं छुपाती थी। अपने कॉलेज की बातें, दोस्तों के किस्से और अपने बॉयफ्रेंड के साथ बिताए हुए मजेदार पल भी मुझे बताती थी। जाहिर है, वह बहुत पर्सनल बातें नहीं बताती थी, लेकिन इतना जरूर था कि वह मुझे अपनी जिंदगी का बहुत खास हिस्सा मानती थी। मैं भी उन्हें अपने कॉलेज की बातें बताता था। मेरे दोस्त क्या करते थे, कॉलेज में क्या हुआ, और मेरी जिंदगी में क्या चल रहा है, यह सब मैं उनसे शेयर करता था।
दिशा दीदी ने जूलॉजी की पढ़ाई की थी क्योंकि उन्हें बचपन से ही जानवरों से बहुत प्यार था। उन्हें जानवरों की फोटो लेना बहुत पसंद था। इसी शौक की वजह से उन्होंने एक इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया, जहाँ वह जानवरों की तस्वीरें डालती थी। धीरे-धीरे लोगों को उनका काम पसंद आने लगा। उनके फोटो पर अच्छे कमेंट आने लगे और उनके फॉलोअर्स बढ़ने लगे। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग इवेंट्स में जाना शुरू किया और देश के कई जंगलों में जाकर जंगली जानवरों की तस्वीरें लेने लगी।
फिर एक दिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मौका आया। बैंगलोर की एक मशहूर मैगज़ीन ने उन्हें वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर के तौर पर काम करने का ऑफर दिया। दिशा दीदी के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा था, क्योंकि अब उनका शौक ही उनका करियर बनने वाला था।
लेकिन दिशा दीदी के बारे में मुझे सबसे ज्यादा जो चीज पसंद थी, वह यह नहीं था कि वह कितनी अच्छी थी। मुझे उनके बारे में सबसे ज्यादा उनकी खूबसूरती पसंद थी। सच कहूँ तो मैंने अपनी पूरी जिंदगी में उनसे ज्यादा सुंदर लड़की नहीं देखी थी। वह अपने शरीर का बहुत ध्यान रखती थी। जंगलों में घूमना, घंटों पैदल चलना और भारी कैमरा उठा कर काम करना आसान नहीं था। शायद इसी वजह से उनका शरीर इतना फिट था। उनकी पतली कमर और भरे हुए स्तन उन्हें और भी खूबसूरत बनाते थे।
जब भी वह टी-शर्ट पहनती थी, उनके स्तनों का उभार साफ दिखाई देता था। मैं खुलकर उन्हें देखने की कोशिश नहीं करता था, क्योंकि वह मेरी बड़ी बहन थी। लेकिन फिर भी मेरी नजर कई बार अपने आप उनके स्तनों पर चली जाती थी। मैं तुरंत नजर हटा लेता था, लेकिन मेरा दिल तेज धड़कने लगता था।
कभी वह झुक कर अपना कैमरा बैग उठाती थी, तो उनकी टी-शर्ट उनके स्तनों से और ज्यादा चिपक जाती थी। कभी वह बाल बाँधने के लिए दोनों हाथ ऊपर करती थी, तो उनका पूरा शरीर और भी सुंदर लगता था। ऐसे छोटे-छोटे पल थे, लेकिन मेरे लिए बहुत खास थे।
जब भी वह मुझे गले लगाती थी, तो उनके गर्म और नरम स्तन मेरे सीने से हल्के से दब जाते थे। वह बस एक छोटा सा हग होता था, लेकिन मेरे लिए वह पल लंबे समय तक याद रहता था।
उस समय तक मैंने उनके नंगे स्तनों को कभी सीधे नहीं देखा था। लेकिन इतना जरूर था कि जब भी वह मेरे पास आती थी, मेरा ध्यान अपने आप उनकी ओर चला जाता था। शायद यही वजह थी कि धीरे-धीरे मैं उन्हें सिर्फ अपनी बड़ी बहन की तरह नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की की तरह देखने लगा था।
उस समय तक मैंने उनके स्तनों को कभी सीधे नहीं देखा था। लेकिन इतना जरूर था कि जब भी वह मेरे पास आती थी, मेरा ध्यान अपने आप उनकी ओर चला जाता था। शायद यही वजह थी कि धीरे-धीरे मैं उन्हें सिर्फ अपनी बड़ी बहन की तरह नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की की तरह देखने लगा था।
उनकी जीन्स उन पर बहुत अच्छी लगती थी। उनकी जांघें भरी हुई थी, इसलिए जीन्स उनकी टांगों से बिल्कुल फिट रहती थी। जब वह चलती थी, तो उनकी जांघों की बनावट साफ दिखाई देती थी। कई बार मैं बस उन्हें चलते हुए देखता रह जाता था। जब वह छोटे शॉर्ट्स पहनती थी, तब उनकी जांघें और भी सुंदर लगती थी। उनकी गोरी और मजबूत टांगें देख कर मेरी नजर बार-बार वहीं चली जाती थी। जब वह सोफे पर बैठती थी और एक पैर दूसरे पैर पर रखती थी, तो उनकी जांघों का ऊपर वाला हिस्सा थोड़ा सा दिख जाता था।
उनका पिछवाड़ा भी बहुत खूबसूरत था। जब वह झुक कर अपना कैमरा बैग उठाती थी, तो मेरी नज़र अपने आप उनकी तरफ चली जाती थी। जीन्स में उनका पिछवाड़ा बहुत अच्छा लगता था। जब वह रसोई में खड़ी होकर कुछ बना रही होती थी, या नीचे रखी हुई चीज उठाने के लिए झुकती थी, तो मैं चुपचाप उन्हें देखता रहता था।
कभी-कभी वह घर में आराम से छोटे शॉर्ट्स पहन कर घूमती थी। जब वह बिस्तर पर बैठ कर फोटो देखती थी और अपने पैर मोड़ कर बैठती थी, तो उनकी जांघों के बीच का नाजुक हिस्सा हल्का सा दिख जाता था। मैं ज्यादा देर तक नहीं देखता था, लेकिन उतनी सी झलक भी मेरे मन में लंबे समय तक बनी रहती थी।
जब वह कुर्सी पर बैठ कर लैपटॉप पर काम करती थी, तो कभी-कभी उनके बैठने का तरीका ऐसा होता था कि मेरी नज़र अनजाने में उनकी जांघों के बीच चली जाती थी। मैं कुछ साफ नहीं देख पाता था, लेकिन इतना ही काफी था कि मेरा दिल तेज धड़कने लगे और मेरा लंड सख्त होने लगे।
एक रात की बात है। मैं अपने कमरे में सो रहा था। रात काफी हो चुकी थी, इसलिए मुझे लगा था कि अब सब सो चुके होंगे। तभी मेरे कमरे का दरवाजा धीरे से खुला। मैंने आंखें खोली तो देखा कि दिशा दीदी सामने खड़ी थी।
मैं तुरंत उठ कर बैठ गया और पूछा, “क्या हुआ दीदी?” इतना सुनते ही वह मेरे पास आ गई और रोने लगी। उन्होंने बताया कि उनके बॉयफ्रेंड ने उन्हें धोखा दिया था।
मैंने उन्हें अपने पास बैठाया। वह लगातार रोती रहीं। मैं चुप-चाप उनकी बातें सुनता रहा। कुछ देर बाद उन्होंने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। उस समय मैं कुछ खास नहीं कह पाया, लेकिन मैं बस चाहता था कि उन्हें लगे कि मैं उनके साथ हूँ।
उस रात के बाद दिशा दीदी कुछ दिन हमारे साथ रहीं। फिर धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाल लिया। कुछ महीनों बाद उन्हें बैंगलोर में उनका काम मिल गया। यह उनके लिए एक बड़ा मौका था, इसलिए उन्होंने बिना ज्यादा सोचे वहां जाने का फैसला कर लिया। मुझे उनके लिए खुशी थी, लेकिन अंदर से मैं उदास भी था। मुझे पता था कि अब वह पहले की तरह हर दिन मेरे सामने नहीं होंगी।
बैंगलोर जाने के बाद उनका काम और भी ज्यादा बढ़ गया। वह अक्सर अलग-अलग जंगलों में जाती थी। कभी कर्नाटक के जंगल, कभी असम, कभी मध्य प्रदेश, तो कभी किसी नेशनल पार्क में कई दिनों तक रहती थी। उनका सपना था कि वह जानवरों की ऐसी तस्वीरें लें जिन्हें देख कर लोग हैरान रह जाएँ। इसी काम के लिए वह घंटों जंगल में घूमती रहती थी। कई बार वहां नेटवर्क भी नहीं होता था, इसलिए कई-कई दिनों तक हमारी बात नहीं हो पाती थी।
शुरुआत में मुझे उनकी बहुत याद आती थी। मैं फोन उठा कर उन्हें कॉल करना चाहता था, लेकिन अक्सर फोन नहीं लगता था। जब उनका मैसेज आता था, तो मैं उसे बार-बार पढ़ता था। वह बस इतना लिखती थी कि सब ठीक है और वह काम में बिजी हैं। मैं खुश होता था कि वह अपना सपना पूरा कर रही हैं, लेकिन साथ ही मुझे बुरा भी लगता था।
मुझे अपने ही मन पर शर्म आती थी। वह मेरी बड़ी बहन थी, और मैं उनके बारे में वैसे सोचता था जैसे शायद मुझे नहीं सोचना चाहिए था। इसलिए मैंने खुद को समझाना शुरू किया कि मुझे उन्हें सिर्फ बहन की तरह देखना चाहिए। मैं उनसे कम बात करने लगा और अपने मन की बातें अपने अंदर ही रखने लगा।
देखते ही देखते चार साल गुजर गए। समय के साथ हमारी बात कम हो गई, लेकिन मेरे मन में उनके लिए जो जगह थी, वह कभी कम नहीं हुई। फिर साल 2023 आया। नवंबर का महीना था। उसी समय मेरी जिंदगी भी बदल गई, क्योंकि मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे धोखा दे दिया। मैं अंदर से पूरी तरह टूट गया था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि किससे बात करूँ और क्या करूँ।
तकरीबन एक हफ्ते बाद दिवाली आने वाली थी। हर साल की तरह इस बार भी दिशा दीदी छुट्टियों पर घर आने वाली थी। उनके आने की खबर सुनते ही मेरे दिल में एक अजीब सी खुशी दौड़ गई। मैं दुखी जरूर था, लेकिन मन के किसी कोने में यह बात मुझे सुकून दे रही थी कि कुछ ही दिनों में दिशा दीदी फिर से मेरे सामने होंगी।
चार दिन बाद दिशा दीदी घर आ गई। पिछली बार मैंने उन्हें करीब दो साल पहले देखा था। जैसे ही वह घर के अंदर आई, मैं उन्हें देखकर कुछ पल के लिए बस देखता ही रह गया। वह पहले से भी ज्यादा सुंदर लग रही थी। जंगलों में घूमने और लगातार काम करने की वजह से उनका शरीर और भी फिट हो गया था। लेकिन सबसे ज्यादा मेरी नजर उनके स्तनों पर जा रही थी, जो पहले से ज्यादा भरे हुए लग रहे थे।
उन्होंने एक फिट टी-शर्ट और छोटे शॉर्ट्स पहन रखे थे। टी-शर्ट उनके शरीर से पूरी तरह चिपकी हुई थी। जब वह चल रही थी, तो उनके स्तनों की हल्की हरकत साफ दिखाई दे रही थी। उनके निप्पल भी टी-शर्ट के ऊपर से उभरे हुए नज़र आ रहे थे। मैं कोशिश कर रहा था कि ज्यादा देर तक उन्हें न देखूँ, लेकिन मेरी नज़र बार-बार वहीं चली जाती थी।
घर में आते ही उन्होंने मम्मी-पापा को गले लगाया। फिर मेरे पास आई और हमेशा की तरह मुझे भी कस कर गले लगाया। उनके स्तन मेरे सीने से दबे, और उनकी खुशबू ने एक पल के लिए मेरा सारा दुख भुला दिया। उन्होंने मुस्कुरा कर कहा, “क्या हुआ? ऐसे क्या देख रहा है?”
मैं घबरा गया और बस इतना कहा, “कुछ नहीं दीदी, आप बहुत दिनों बाद आई हो।”
हम सब सोफे पर बैठ गए और बातें करने लगे। दिशा दीदी ने बताया कि वह सिर्फ दो दिनों के लिए आई हैं। इसके बाद उन्हें एक बड़े फोटो कॉन्टेस्ट में जाना था, जहां जंगल के जानवरों की सबसे अच्छी तस्वीर लेने वाले को पाँच लाख रुपये मिलने वाले थे। यह उनके लिए बहुत बड़ा मौका था, इसलिए वह इस बार ज्यादा दिन रुक नहीं सकती थी।
करीब आधे घंटे तक हम सब बातें करते रहे। फिर दिशा दीदी ने कहा कि वह सफर से बहुत थक गई हैं और पहले जाकर अपना चेहरा धो लेंगी। इतना कह कर वह बाथरूम की तरफ चली गई।
मैं भी उठकर अपने कमरे में आ गया। मैं बिस्तर पर बैठा बस यही सोच रहा था कि दो साल बाद भी उन्हें देख कर मेरे दिल की धड़कन वैसे ही तेज हो गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे मेरे अंदर दबे हुए सारे जज्बात फिर से जाग गए हों।
कुछ मिनट बाद मेरे कमरे का दरवाजा धीरे से खुला। मैंने ऊपर देखा तो दिशा दीदी चेहरा धोकर मेरे कमरे में आ चुकी थी। उनके चेहरे पर पानी की हल्की बूंदें थी, बाल थोड़े गीले थे, और वह पहले से भी ज्यादा सुंदर लग रही थी।
उन्होंने कमरे में इधर-उधर देखा, फिर मेरे बिस्तर पर रखा मेरा तौलिया उठाया और उससे अपने चेहरे की बची हुई पानी की बूंदें पोंछने लगी। उस छोटे से पल में भी मैं बस उन्हें ही देखता रह गया। चेहरा धोने के बाद उनकी त्वचा और भी ताज़ा लग रही थी।
तौलिया वापस रखते हुए वह मेरे पास आकर बिस्तर पर बैठ गई। कुछ सेकंड तक हम दोनों चुप रहे। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा और हल्की आवाज़ में पूछा, “सुना है तुम्हारा ब्रेकअप हो गया?”
उनका यह सवाल सुनते ही मैंने नज़रें झुका ली। मैं इस बारे में किसी से बात नहीं करना चाहता था, लेकिन पता नहीं क्यों, उनके सामने मैं खुद को रोक नहीं पाया।
मैंने धीरे-धीरे उन्हें सब कुछ बता दिया। कैसे मेरी गर्लफ्रेंड किसी और के साथ थी। कैसे उसने मुझसे झूठ बोला। और कैसे एक ही पल में मेरा भरोसा टूट गया। बोलते-बोलते मेरी आवाज़ भारी हो गई।
मैंने कहा, “मैंने सच में उससे बहुत प्यार किया था, दीदी। मुझे लगा था कि वह हमेशा मेरे साथ रहेगी।”
इतना कहते-कहते मेरी आंखों में आँसू आ गए। मैंने चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया, लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पाया। कुछ ही सेकंड में मेरी आंखों से आँसू बहने लगे।
दिशा दीदी ने बिना कुछ कहे अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा। उन्होंने कहा, “रो ले। कभी-कभी रो लेना जरूरी होता है।”
इतना कह कर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उन्होंने मुझे इतनी मजबूती से पकड़ा कि मैंने खुद को पूरी तरह उनके सहारे छोड़ दिया। मेरा चेहरा उनके सीने से लग गया। उनके स्तन मेरे गाल और माथे से दब रहे थे, और मैं साफ महसूस कर सकता था कि उन्होंने मुझे कितनी कस कर पकड़ रखा था।
मैं चुप-चाप उनसे लिपटा रहा और रोता रहा। हर बार जब वह मुझे थोड़ा और अपनी तरफ खींचतीं, तो उनके स्तनों का दबाव मेरे चेहरे पर और साफ महसूस होता था। उनकी टी-शर्ट के ऊपर से उनके निप्पल मेरे गाल को हल्के से छू रहे थे।
उन्होंने एक हाथ मेरे सिर पर रखा और धीरे-धीरे मेरे बालों में उंगलियां फेरने लगी। उनका सीना मेरे चेहरे से लगा हुआ था, उनकी गर्माहट मुझे शांत कर रही थी। मैं उनकी धड़कन सुन सकता था और उनकी सांसों की हल्की हरकत महसूस कर सकता था। कुछ मिनटों तक उन्होंने मुझे उसी तरह पकड़े रखा।
करीब पाँच मिनट बाद मैं धीरे-धीरे शांत होने लगा। मेरी सांसें आम होने लगी और आँसू भी रुक गए। दिशा दीदी ने महसूस किया कि अब मैं थोड़ा संभल चुका था। उन्होंने धीरे से मुझे अपने सीने से अलग किया।
उन्होंने मेरी आँखों में देखा और अपने अंगूठे से मेरे गाल पर बचे आँसू पोंछ दिए। फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली, “जब मेरा दिल टूटा था, तब तुमने मुझे संभाला था, गोलू। उस रात अगर तुम मेरे साथ नहीं होते, तो शायद मैं खुद को संभाल नहीं पाती।”
उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे से दबाया। फिर बोली, “आज तुम दुखी हो… और अब मैं तुम्हारे लिए कुछ करना चाहती हूँ।”
मैं चुप-चाप उनकी तरफ देखता रहा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहना चाहती था।
दिशा दीदी ने मुस्कुरा कर कहा, “गोलू, मैं कुछ दिनों में एक नए जंगल में जाने वाली हूँ। इस बार मुझे बहुत खास तस्वीरें लेनी हैं। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे साथ चलो।”
मैंने हैरानी से पूछा, “मैं?”
उन्होंने सिर हिलाया और बोली, “हाँ, तुम। घर में अकेले बैठ कर बस पुरानी बातें सोचते रहोगे तो और दुखी हो जाओगे। लेकिन अगर तुम मेरे साथ जंगल चलोगे, नई जगह देखोगे, जानवरों को करीब से देखोगे, सुबह की ठंडी हवा महसूस करोगे, तो तुम्हारा मन अपने आप हल्का हो जाएगा।”
मैंने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “लेकिन दीदी, जंगल में रहना बहुत बोरिंग नहीं होता?”
मेरी बात सुनकर वह हँस पड़ी। फिर बोली, “बिल्कुल नहीं, गोलू। ”
इतना कहकर उन्होंने अपना मोबाइल निकाला और मेरे और भी पास आकर बैठ गई। उन्होंने गैलरी खोली और मुझे अपनी तस्वीरें दिखाने लगी। एक फोटो में वह नदी के किनारे खड़ी थी। दूसरी तस्वीर में दूर घास के बीच एक बाघ दिखाई दे रहा था। किसी फोटो में हाथियों का झुंड था, तो किसी में रंग-बिरंगे पक्षी।
मैं उनकी तस्वीरें देखता जा रहा था और साथ ही उन्हें भी देख रहा था। जब वह किसी फोटो के बारे में बताती थी, तो उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती थी।
तभी नीचे से माँ ने उन्हें आवाज दी। दिशा दीदी ने जल्दी से मोबाइल मेरे हाथ में दिया और बोली, “तुम देखते रहो, मैं अभी आती हूँ।” इतना कह कर वह कमरे से बाहर चली गई।
मैं अकेला बैठा उनके मोबाइल में तस्वीरें देखता रहा। एक के बाद एक जंगल की शानदार तस्वीरें सामने आती जा रही थी। मैं स्क्रीन पर उंगली फेरते हुए उनकी दुनिया को देख रहा था। फिर अचानक गलती से मेरी उंगली एक अलग फोल्डर पर चली गई। वह उनका निजी फोल्डर था। जैसे ही वह खुला, मेरी सांस एक पल के लिए रुक गई।
उस फोल्डर में दिशा दीदी की बहुत सारी तस्वीरें थी। शायद उन्होंने ये तस्वीरें अपने बॉयफ्रेंड के लिए खींची थी। स्क्रीन पर एक के बाद एक उनकी ऐसी तस्वीरें सामने आ रही थी, जिन्हें देखकर मेरी सांसें तेज हो गई। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं दिशा दीदी को इस तरह देख रहा हूँ।
कुछ तस्वीरों में वह आईने के सामने पूरी तरह बिना कपड़ों के खड़ी थी। उनके लंबे बाल कंधों पर बिखरे हुए थे। उनके भरे हुए स्तन साफ दिखाई दे रहे थे, और उनकी पतली कमर के नीचे उनका नाजुक हिस्सा भी नजर आ रहा था। वह कैमरे की तरफ देख कर हल्का सा मुस्कुरा रही थी, जैसे उन्हें पता हो कि सामने वाला उनकी हर चीज ध्यान से देखेगा।
कुछ तस्वीरों में वह बिस्तर पर बैठी थी। उन्होंने अपने पैर फैलाए हुए थे, जिससे उनकी जांघों के बीच का नाजुक हिस्सा साफ दिखाई दे रहा था। कुछ फोटो में वह अपनी उंगलियाँ अपने नाजुक हिस्से के पास ले जा रही थी, और कुछ में ऐसा लग रहा था जैसे वह उन्हें अंदर ले जाने की कोशिश कर रही हों।
कुछ तस्वीरों में वह बिस्तर पर लेटी हुई थी। उनके स्तन दोनों तरफ फैले हुए थे और उनका एक हाथ उनके शरीर पर था। कुछ फोटो में कैमरा उनके स्तनों पर ज्यादा था, तो कुछ में उनकी जांघों और नाजुक हिस्से पर।
कुछ तस्वीरों में वह पीछे मुड़ कर आईने के सामने खड़ी थी। उन तस्वीरों में उनका गोल पिछवाड़ा बहुत साफ दिखाई दे रहा था। मैं उन तस्वीरों को देख कर कुछ पल के लिए बिल्कुल चुप रह गया। जीन्स और शॉर्ट्स में जो शरीर मुझे इतना सुंदर लगता था, वह बिना कपड़ों के मेरी सोच से भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था।
हर तस्वीर के साथ मेरा दिल और तेजी से धड़कने लगा। मेरी उंगलियाँ स्क्रीन पर रुकी हुई थी, लेकिन मैं नजरें हटा नहीं पा रहा था। मैंने उन्हें हमेशा कपड़ों में देखा था, लेकिन पहली बार उनके शरीर को इस तरह देखकर मैं पूरी तरह हैरान रह गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि फोन तुरंत बंद कर दूँ या कुछ और सेकंड तक देखता रहूँ। मेरा लंड सख्त हो चुका था और दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी कि दिशा दीदी असल में कितनी खूबसूरत थी।
उसी समय बाहर से उनके कदमों की आहट सुनाई दी। मेरा दिल एक-दम से और तेज धड़कने लगा। मैंने घबरा कर तुरंत वह फोल्डर बंद कर दिया और जल्दी से वापस जंगल वाली तस्वीरें खोल ली। मैंने ऐसे दिखाने की कोशिश की जैसे मैं अब भी वही आम फोटो देख रहा हूँ।
कुछ सेकंड बाद दिशा दीदी कमरे में वापस आ गई। उन्होंने आते ही मेरी तरफ देखा और मुस्कुराकर पूछा, “तो गोलू, क्या सोच रहे हो? मेरे साथ चलेगा या नहीं?”
मैंने मोबाइल उनकी तरफ बढ़ाया और उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “मैं आपके साथ चलूँगा, दीदी।”
मेरी बात सुन कर उनके चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई। उन्होंने प्यार से मेरे बालों पर हाथ फेरा और कहा, “बहुत अच्छा किया, गोलू। देखना, यह सफर तुम्हारे लिए बहुत खास होगा।”
मैं भी हल्का सा मुस्कुरा दिया। लेकिन मेरे मन में सिर्फ जंगल का ख्याल नहीं चल रहा था। अभी-अभी मैंने उनके फोन में जो देखा था, उसके बाद मेरे लिए यह सफर और भी खास हो गया था। पहली बार मुझे लगा कि मैं दिशा दीदी के साथ अकेले इतने दिन बिताने वाला हूँ, और यह सोच कर ही मेरे दिल की धड़कन फिर से तेज हो गई।
दो दिन बाद हम दोनों सफर के लिए पूरी तरह तैयार थे। दिशा दीदी ने अपना कैमरा, लेंस और बाकी सामान पैक कर लिया था, और मैंने भी अपना बैग तैयार कर लिया था। जब हम घर से निकल रहे थे, तब मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि यह सफर मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा।
उसी दिन से मेरी असली कहानी शुरू हुई।
एक ऐसे लड़के की कहानी, जो बचपन से अपनी बड़ी बहन से बहुत प्यार करता था।
पहले यह प्यार सिर्फ मेरे दिल के अंदर छिपा हुआ था, लेकिन आने वाले दिनों में हमारा रिश्ता एक ऐसे मोड़ पर पहुँचने वाला था जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था। मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि जंगल में बिताए गए वे दिन हमें इतना करीब ले आएँगे कि एक दिन दिशा दीदी को मैं चोद सकूंगा