पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-17
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
पापा आ चुके थे। मम्मी की और मेरी चुदाई बंद थी, मगर दिव्या को मैंने उस रात को चोद दिया।
दिव्या को चोदने के लिए नीचे दिव्या के कमरे में चला गया। मस्त चुदाई हुई। जब दिव्या को दो बार मजा आने के बाद भी मेरे लंड ने पानी नहीं छोड़ा, तो मैंने दिव्या से पूछा की क्या उसे एक चुदाई और करवानी है? तब तक एक बज चुका था।
दिव्या बोली, “तो फिर ठीक है धीरज। अब तुम लेट जाओ और मैं उस दिन की तरह – जब मम्मी ने तुम्हारे लंड पर बैठ कर मजा लिया था, वैसा ही मजा मैं भी लेती हूं। जब तुम्हारे लंड का पानी मेरे फुद्दी में निकल जाएगा, तो मम्मी की ही तरह फुद्दी खोल कर तुम्हारे लंड का पानी बाहर निकाल कर चाटूंगी। मेरी तुम्हारी चुदाई में ये काम भी क्यों रह जाए।” ये बोल कर दिव्या हंस दी।
मैंने मन ही मन सोचा, “यार कैसे कैसे मजे लेती है ये लड़कियां। मैं बिस्तर पर लेट गया। मेरा लंड बिलकुल सीधा खड़ा था। दिव्या ने अपनी टांगें मेरे दोनों तरफ की और लंड को पकड़ कर फुद्दी के छेद पर रखा और एक ही बार में लंड पर बैठ गयी।
दिव्या बोली, “आह धीरज मजा आ गया यार, पूरा का पूरा फुद्दी में बैठा है तेरा लौड़ा।”
लौड़ा! मुझे हंसी आ गयी। दिव्या मस्त चुदाई के मूड में लग रही थी। मुझे तो खुद लंड के अगले सिरे – लंड के टोपे पर – कुछ नरम-नरम छूता हुआ महसूस हो रहा था।
दिव्या ने दोनों हाथ मेरे कंधों पर रखे और मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने लगी। दिव्या की टाइट फुद्दी और फुद्दी के अंदर तक जाता हुआ लंड – मजा ही मजा आ रहा था मुझे – चुदाई का असली मजा।
तभी दिव्या ने एक हाथ मेरे कंधे से हटाया और अपनी फुद्दी का दाना रगड़ने लगी।
अब दिव्या मम्मी की जितनी तजुर्बेकार तो थी नहीं। जैसे ही दिव्या ने एक हाथ, मेरे कंधे से हटाया, दिव्या का बैलेंस थोड़ा बिगड़ा और दिव्या को मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने में दिकक्त आने लगी।
मैंने दिव्या से कहा, “दिव्या तुम चुदाई पर ध्यान दो, तुम्हारी फुद्दी का दाना मैं रगड़ता हूं।”
दिव्या ने अपनी फुद्दी से हाथ हटा कर फिर से मेरे कंधे पर रख दिया और उछल-उछल कर लंड फुद्दी में अंदर-बाहर करने लगी। मैं अपने हाथ के अंगूठे से दिव्या के फुद्दी का दाना रगड़ने मसलने लगा।
जल्दी ही दिव्या मस्ती में आ गयी और सिसकारियां लेने लगी, “आह आह धीरज, क्या मस्त मजा आ रहा ही, धीरज यार क्या लंड है। आह धीरज मजा आने वाला है। बस आने ही वाला हैं। क्या मस्त लंड है धीरज आह आह धीरज निकल गया साले निकल गया।”
दिव्या की मेरे लंड के ऊपर के उछल कूद से मुझे भी मजा आ गया। मेरे लंड में से भी गर्म-गर्म मलाई निकल कर दिव्या की फुद्दी में गिरने लगी।
मजे में मैं बोलने लगा, “मेरी लंड की प्यासी कुंवारी बहन, साली पूरा लंड ले लेती है फुद्दी मैं आह दिव्या निकल रहा है मेरे जान, आह दिव्या मेरी जान निकल गया।” और इसके साथ ही मुझे पूरा मजा आ गया।
दिव्या कुछ देर तो लंड के ऊपर ऐसे ही बैठी रही। फिर मम्मी की ही तरह, जरा सी ऊपर उठी और हाथ नीचे करके फुद्दी की फांकें खोल दी – मम्मी की तरह। मेरे लंड का गाढ़ा सफ़ेद पानी दिव्या की फुद्दी से निकल कर मेरे लंड के ऊपर और आस-पास फ़ैल गया।
जब दिव्या को लगा कि सारा गाढ़ा पानी उसकी फुद्दी से निकल गया है, तो दिव्या उठी और झुक कर मेरे लंड और टट्टे चाटने लगी। दिव्या ने चाट-चाट कर मेरा लंड साफ दिया – एक-एक बूंद मेरे लंड की मलाई की चाट गयी।
उसके बाद दिव्या उठी और बोली, “लो धीरज, हो गई तेरे लंड की सफाई। अब जा और सो जा, तेरी चुदाई से मेरी तसल्ली हो गई, मजा आ गया, वो भी पूरा, अब मैं भी सोऊंगी आराम से। अब जब आएगा मई या जून में तब असली मजा आएगा।” रात की दो बजे मैं दिव्या की कमरे से निकला और अपने कमरे में आ गया।
अगले दिन मैं अपने कालेज आ गया। अब चुदाई को भूल कर पढ़ाई का टाइम था। मई आ गया और एग्जाम भी हो गए। जिस दिन परीक्षा खत्म हुई, उसी दिन महेंद्र मेरे पास आया और बोला, “आजा भाई धीरज, दो दिनों के लिए घर खाली है, आज निर्मला आएगी अपने साथ किसी लड़की को लेकर। देखते हैं उसकी ये नई लड़की कैसी है, और क्या करवाती है।”
मेरे 3XL वाले साइज़ के ख़ास लंड के कारण फुद्दीयां अपने आप ही मेरे पास आ जातीं थी। मेरी मम्मी भी तो एक बार चुदाई करवाने के बाद मेरे लंड की दीवानी हो गयी थी और यही हाल दिव्या का भी था, और यही माधवी का भी होने वाला था।
मैं महेंद्र के साथ उसके घर चला गया। उनके पहुंचने के दस मिनट के बाद ही निर्मला आ गई। निर्मला के साथ आयी सुमन और साथ में एक कमसिन लड़की।
मुझे तो देखने में वो छोटी उम्र की लग रही थी। छोटी उम्र की लड़की चोदने में जोखिम ही जोखिम था और मुझे इस तरह का जोखिम लेने में कोइ दिलचस्पी नहीं थी – मुझे कौन सी फुद्दीयों की कमी थी।
निर्मला आते ही मुझ से बोली, “धीरज ये मेरी ननद है कमलेश, मेरे घर वाले की छोटी बहन। तुम्हारा लंड इसकी फुद्दी में डलवाने लाई हूं। फिर सुमन की तरफ इशारा करके बोली, “और इसे तो तुम लोग जानते ही हो, चुदाई भी कर चुके हो इसकी।”
अंदर आते ही सब ने अपने कपड़े उतार दिए। कमलेश पतले जिस्म वाली लड़की थी। छोटे-छोटे मगर तने हुए मम्मे। छोटे-छोटे चूतड़ और बिना बालों की फुद्दी।
कमलेश तो मुझे शुरू से ही कच्ची उम्र की लग रहे थी। मैंने साफ़ ही निर्मला से कहा, “निर्मला में तो नहीं चोदूंगा इसे, मुझे तो ये छोटी उम्र की लग रही है।”
निर्मला बोली, “अरे धीरज, कोइ छोटी-वोटी नहीं है। चार साल पहले दसवीं पास कर चुकी है। आठ साल से तो इसे महीना आ रहा है। देखने में ही छोटी लगती है अपने भाई, मेरे खसम की तरह। वैसे 20 साल की है।”
“कमलेश घरों में काम नहीं करती, बस एक घर में ही जाती है और वहां भी बच्चा संभालती है। दोनों मियां-बीवी नौकरी करते हैं और उनका बच्चा छोटा है। किसी एजेंसी के जरिये उन्होंने इसे काम पर रखा है। धीरज ये एजेंसीयां छोटी उम्र की लड़कियों को काम पर नहीं रखवाती। इसके पास एजेन्सी का दिया कार्ड भी है। चाहो तो देख लो।”
निर्मला बता रही थी, “ये तो इसने एक दिन मेरी और अपने भाई की चुदाई देख ली और तभी से मेरे पीछे पड़ी है। इसे भी चुदाई करवानी है। ये तो बोलती है इसने अभी तक चुदाई नहीं करवाई, कुंवारी है। मैंने भी सोचा अगर लंड लेना ही है इसने तो फिर मस्त लंड ही ले। इसलिए मैं धीरज का लंड उसकी फुद्दी में डलवाने के लिए इसे यहां ले आई।”
ये सुन कर हम सब ने अपने कपड़े उतार दिए। मैं तो दिव्या की कुंवारी फुद्दी चोद ही चुका था – फुद्दी की सील तोड़ ही चुका था। मैंने महेंद्र से कहा, “चल भाई महेंद्र चढ़ जा कमलेश पर, तब तक में निर्मला की गांड चोदता हूं – बाद में मैं चोद दूंगा इसे।”
वैसे भी महेंद्र के मुझ पर काफी एहसान थे। चार-चार फुद्दीयां चुदवा चुका था मुझसे महेंद्र।
निर्मला बोली, “अरे-अरे धीरज, इतनी भी क्या जल्दी है? पहले जरा लंड तो चुसवाओ।”
ये बोल कर निर्मला ने महेंद्र का लंड मुंह में ले लिया और कमलेश से बोली, “जा कमलेश चूस धीरज का लंड – देख ले ये भी जाएगा तेरी फुद्दी में।” सुमन लंड चूसने की अपनी बारी का इंतजार कर रही थी।
कमलेश ने मेरा लंड मुंह में ले लिया। इस थोड़ी चुसाई के बाद निर्मला सुमन से बोली, “आजा सुमन तू भी चूस ले धीरज का लौड़ा, फिर मैं गांड में डलवाऊं।”
कमलेश ने ये सुन कर धीरज का लंड मुंह में निकाल लिया और सुमन ने आ कर मेरा लंड मुंह में ले लिया। निर्मला कमलेश से बोली, “जा लेट जा बिस्तर पर और ले महेंद्र का लंड अपनी फुद्दी में। उसके बाद लंड की जगह लौड़ा जाएगा तेरी फुद्दी में।” ये बोल कर निर्मला हंस दी।
अब सुमन मेरा लंड चूस रही थी। कुछ देर लंड चूसने के बाद सुमन उठी और निर्मला से बोली, “चलो निर्मला डलवाओ धीरज का लंड अपनी गांड में।”
निर्मला भी उठी और सोफे पर उल्टी लेट गया और बोली, “चलो धीरज अब डालो मेरी गांड में अपना डंडा और महेंद्र को चोदने दो इस कमलेश को। बड़ी लंड की प्यासी हुई पड़ी है ये।”
गांड चोदने चुदवाने का इसी बढ़िया कोई तरीका है ही नहीं। गांड का छेद बिलकुल लंड के सामने होता है।
महेंद्र बोला, “निर्मला, लंड पर कंडोम चढ़ाऊं, या अंदर ही निकाल दूं लंड का पानी कमलेश की फुद्दी में?”
इस बार सुमन बोली, “महेंद्र क्यों लड़की की पहली चुदाई का कचरा कर रहे हो? बिना लंड के गर्म-गर्म पानी के फुद्दी में गिरने के मजा कैसे आएगा चुदाई का? वही तो असली मजा आएगा इसे, जब गर्म गर्म आधा कप, इसकी फुद्दी में जायेगा। बेधड़क हो कर चोदो इसे, गोली रहती है हमारे पास।” फिर जैसे सुमन अपने आप से बोली, “क्या जाने कौन कब फुद्दी चोद दे। हम काम वालियों के पीछे तो मर्द पड़े रहते हैं, क्या नए-नए जवान होते लड़के, क्या साले खड़ूस बुढ्ढे।”
तब तक मैं निर्मला की गांड में लंड डाल कर चुदाई चालू कर चुका था। मैंने निर्मला की कमर कस के पकड़ी हुई थी और धड़ा-धड़ धक्के लगा रहा था। दो-तीन चुदाईयों में पानी तो मेरे लंड का नहीं निकलना था।
महेंद्र भी गया और कमलेश के चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर कमलेश की टांगें चौड़ी की और उसकी फुद्दी में लंड ऊपर-नीचे कर की फुद्दी का छेद ढूंढा और एक ही झटके में लंड कमलेश की फुद्दी में डाल दिया।
जैसे ही महेंद्र का लंड कमलेश की फुद्दी में गया दोनों एक साथ बोल पड़े। महेंद्र बोला, “अरे धीरज, यार लगता है पक्की कुंवारी है कमलेश, बड़ी टाइट फुद्दी है यार।” और कमलेश बोली, “भाभी बड़ी जलन हुई है।”
निर्मला बोली, “कमलेश अभी सब ठीक हो जाएगा। अभी तो लंड ही गया है तेरी फुद्दी में। अभी मजा आना शुरू हो जाएगा।”
फिर निर्मला बोली, “मेरी बन्नो, अभी तो महेंद्र का लंड ही गया है – जब इस धीरज का लौड़ा जाएगा तेरी फुद्दी में फिर देखना कैसा मजा आता है।”
निर्मला की बात पर मैं, महेंद्र, सुमन और खुद और निर्मला हंस पड़े। मैं निर्मला की गांड चोद रहा था और महेंद्र कमलेश की फुद्दी। निर्मला अपने हाथ से अपनी फुद्दी का दाना रगड़ रही थी।
जल्दी ही निर्मला और कमलेश दोनों की फुद्दीयां पानी छोड़ गयी। अब सुमन की बारी थी।
मैंने सुमन से पूछा, “हां तो सुमन, तुमने क्या चुदवानी है, गांड या फुद्दी?”
सुमन बोली, “मेरी छोड़ो धीरज, इस गर्मा-गर्म कुंवारी फुद्दी का इलाज करो। मैं महेंद्र से ही चुदवा लूंगी। तुम अपना खूंटा डालो इस कमलेश की फुद्दी में। वैसे मैं आज यहां गांड चुदवाने ही आयी हूं।”
महेंद्र बोला, “आजा भाई धीरज, अब तू डाल कमलेश की फुद्दी में अपना खूंटा और मैं चोदता हूं, निर्मला की गांड।”
महेंद्र निर्मला की पीछे आ गया और मैं कमलेश की ऊपर चढ़ गया। जैसे ही मेरा लंड कमलेश की फुद्दी में गया, कमलेश बोली, “आह धीरज भैया, ये तो मजा ही आ गया, भाभी मेरी फुद्दी तो भर गयी इनके लौड़े से।”
निर्मला हंसते हुए बोली, “चल मजे ले कमलेश, धीरज भैया से चुदवाने के, ऐसे लंड भी सब की नहीं होते। किस्मत वाली है जो तेरी पहली चुदाई ही मस्त हो रही है।”
दो घंटे चली इस चुदाई में मजा आ गया। कमलेश, सुमन और निर्मला ने मस्त चुदाई करवाई। सुमन और निर्मला ने गांड चुदवाई और निर्मला तो कमलेश को लाई ही फुद्दी चुदवाने थी। चुदाई खत्म हो गयी। जब निर्मला सुमन और कमलेश, जाने लगी तो कमलेश निर्मला से बोली, “भाभी अब कब आएंगे?”
निर्मला हंसते हुए बोली, “क्या हुआ कमलेश, एक ही बार फुद्दी में लंड डलवा कर – एक बार की चुदाई में मस्त हो गयी? अब पता नहीं कब आएंगे। महेंद्र तो अब पता नही कहां जाएगा। अगर यहीं गुडगांव में ही इसकी नौकरी पक्की हो गयी, फिर तो आते-जाते रहेंगे, नहीं तो कुछ पता नही।”
फिर निर्मला बोली, “पर तू फ़िक्र मत कर मेरी बन्नो। तेरी चुदाई का जुगाड़ तो मैं अब कर ही दूंगी। मुझे अपनी फुद्दी का लिए भी तो बढ़िया सा लंड ढूढ़ना होगा। तेरे भैया की “लुल्ली” से मेरे फुद्दी की प्यास भी तो नही बुझती, और गांड में तो तेरे भैया के लंड का पता ही नहीं चलता कि गया भी है या नहीं।”
निर्मला की इस बात पर धीरज और महेंद्र ने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुरा दिए।
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