पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-18
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
मैं तो ये सोच सोच कर ही खुश था कि अब अपनी मम्मी और दिव्या को फिर से चोदूंगा – और वो उसकी मौसेरी बहन माधवी? उसकी फुद्दी की सील भी तो टूटेगी उसके लंड से।
दिव्या और माधवी कुंवारी जरूर थी, मगर चुदाई मम्मी ही मस्त करवाती थी। मम्मी की चुदाई मुझे भूल ही नहीं रही थी।
दिव्या मुझे मम्मी की गांड में लंड डालता देख रही थी। दिव्या बोली, “धीरज एक बार मेरी गांड में भी डालना किसी दिन।”
मैंने कहा, “दिव्या तेरी गांड तो मम्मी की गांड से और भी ज्यादा टाइट होगी। तेरी गांड में नहीं जा पायेगा मेरा मोटा लंड।”
दिव्या बोली, “नहीं जाएगा तो मत डालना, एक बार ट्राई करने में क्या हर्ज़ है? मम्मी की गांड में तुम्हारा लंड जाते हुए देख कर मेरा मन भी गांड में लेने का” होने लगा है।”
मैंने कहा, “ठीक है, पहले एक गांड तो चोद लूं”, और मैंने मम्मी की कमर पकड़ ली और मम्मी की गांड चुदाई करने लगा।
मेरा लंड मम्मी के गांड में टट्टों तक बैठ रहा था। गांड चोदते-चोदते मैंने मम्मी से कहा, मम्मी मस्त रगड़े लग रहे है लंड पर। बड़ा मजा आ रहा है।”
मम्मी बोली, “रगड़ बेटा मुझे भी मजा आ रहा है। तेरी कुतिया तेरे नीचे ही है, ऐसे जकड़ कर गांड चोदना जैसे एक कुत्ता कुतिया को अपनी अगली टांगों में जकड़ कर चोदता है। फाड़ अब मेरी गांड अपने मोटे लंड से। फुला दे इसकी गांड चोद-चोद कर। बेटा भूल जाना कि ये तेरी मम्मी के गांड है। ऐसे चोदनी है जैसी तू अपनी मम्मी की नहीं एक रंडी की गांड चोद रहा है। चल लगा मस्त रगड़े।”
मम्मी की बातों ने तो मेरा तो मेरा दिमाग़ ही घुमा दिया। ये क्या बोल रही है मम्मी, वो भी दिव्या के सामने? दिव्या मुस्कुराती हुए मेरे तरफ देख रही थी।
जो भी था, मैं भी वैसी ही बातें बोलते हुए – जैसी बातें मम्मी बोल रही थी और मम्मी की गांड चोदने लगा। मैं मम्मी की गांड में धक्के भी लगा रहा था और साथ-साथ बोलता भी रहा था, “ले मेरी रंडी, मेरी कुतिया, मेरी चुदक्कड़ मम्मी, ले और ले पूरा ले अपनी गांड में साली मादरचोद रंडी।”
मम्मी की और मेरी बातें सुन-सुन कर दिव्या मुस्कुरा ही जा रही थी। मम्मी अपने चूतड़ जोर-जोर से आगे-पीछे कर रही थी। मम्मी जिस तरीके से गांड चुदवा रही थी लग ही नहीं रहा था कि मम्मी गांड नहीं चुदवाती थी। जो भी था मम्मी के इस तरह चूतड़ आगे-पीछे करने से गांड चुदाई का मजा मस्त आ रहा था।
मुझे महेंद्र के घर पर कामवालियों की गांड चुदाई याद आ रही थी। मैंने वहां भी गांड चोदी थी, लेकिन मम्मी जिस तरीके से गांड चुदवा रही थी उसका तो कोइ जवाब ही नहीं था।
अब हो ये रहा था, जब मम्मी चूतड़ आगे करती तो मैं लंड पीछे कर लेता था, और जब मम्मी चूतड़ पीछे करती मैं एक झटके के साथ लंड आगे कर देता था। इससे लंड एक-दम से पूरा अंदर बैठता था और मेरे बड़े-बड़े टट्टे मम्मी की चिकने पानी से गीली हुई फुद्दी पर पट्ट-पट्ट की आवाज़ के साथ टकराते थे।
दिव्या पास ही खड़ी गौर से मेरा लंड को मम्मी की गांड में अंदर-बाहर होते हुए देख रही थी। दिव्या ने अपनी दो उँगलियों में मेरा लंड हलके से पकड़ लिया, बिलकुल मम्मी के गांड के छेद के पास से। अब मेरा लंड दिव्या उंगलियों को छूता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था।
आठ-दस मिनट की गांड चुदाई के बाद मम्मी ने अपना हाथ नीचे करके अपनी फुद्दी का दाना रगड़ना शुरू कर दिया।
मम्मी को ऐसा करते देख दिव्या ने भी अपनी एक टांग सोफे के ऊपर रख ली और वो भी मम्मी की तरह अपनी फुद्दी में उंगली करने लगी।
मैं मम्मी की गांड चुदाई में मस्त था। मम्मी और दिव्या दोनों अपनी अपनी फुद्दीयों का दाना रगड़ रही थी। मम्मी गांड के छेद के अंदर बाहर होने से मेरे लंड पर बहुत रगड़े लग रहे थे। मुझे कभी भी मजा आ सकता था।
अभी मैंने मम्मी की गांड आठ-दस मिनट ही और चोदी थी कि मम्मी ने एक ने एक सिसकारी ली, “आह धीरज बेटा क्या मस्त गांड चोद रहा है तू, मेरी चूत पानी छोड़ गयी।”
इसके साथ ही दिव्या ने मेरे चूतड़ कस कर पकड़ लिये और जोर से बोली, “धीरज मेरा भी निकल गया। मम्मी मुझे तो एक बार और मजा आ गया।”
इस तरह मां-बेटी को मजा आता देख कर मेरा का लंड भी मलाई छोड़ गया। मजे के मारे मैं भी बोला, “ले मेरी मम्मी, निकला तेरी गांड के अंदर मेरे लंड का शहद। इतना मजा आ रहा था मुझे, ऐसा लग रहा था मेरे लंड से गर्म-गर्म शहद निकलना बंद ही नहीं हो रहा था।
मजे के मारे मैं बोल रहा था, “आह मेरी मम्मी, अभी भी निकल रहा है मेरी जान। मम्मी क्या गांड है आपकी, क्या गांड चुदाई करवाती हैं आप अपने मोटे मुलायम चूतड़ आगे-पीछे करके मजा ही आ गया आज तो, अभी भी निकल रहा है मम्मी, अभी भी निकल रहा है।”
दिव्या मेरी तरफ ही देखती जा रही थी – शायद सोच रही थी ये मैं क्या बोल रहा हूं – या फिर ये चाहते थी कि मैं उसे चोदते हुए भी यही कुछ बोलूं।
थोड़ी देर में मेरे लंड में से गर्म-गर्म मलाई निकालनी बंद हो गयी और मेरा लंड ढीला हो गया तो मैंने लंड मम्मी की गांड में से निकाला और एक तरफ खड़ा हो गया।
मम्मी अभी वैसी ही चूतड़ ऊपर करके लेटी हुई थी। दिव्या भी मस्ती में वहीं मम्मी के पास ही खड़ी मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फेर रही थी। मम्मी मजा आने के बाद की सुस्ती से अभी भी वैसे ही चूतड़ पीछे करके लेटी हुई थी।
तभी दिव्या ने मम्मी के चूतड़ों पर हाथ फेरते-फेरते मम्मी की गांड के छेद में उंगली डाल कर उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी।
दिव्या को ऐसा करते देख कर मैं जा कर सोफे पर बैठ गया। मम्मी की टाइट गांड चोदने की इच्छा पूरी हो चुकी, अब किसी दिन दिव्या की गांड में लंड डालना था। मैं सोच रहा था – अगर मम्मी की गांड चुदाई में लंड पर इतने रगड़े लगे हैं तो पता नहीं दिव्या और माधवी की गांड चुदाई मैं कितने रगड़े लगेंगे – या उनकी कुंवारी गांडों में मेरा मोटा जा भी पायेगा या नहीं। फिर मुझे दिव्या की बात याद आ गयी, “नहीं जाएगा तो मत डालना, एक बार ट्राई करने में क्या हर्ज़ है।”
हमारे एग्जाम हो चुके थे और डेढ़ महीने की छुट्टियां शुरू हो गई थी। मैं सोच-सोच कर ही खुश था कि अब अपनी मम्मी और दिव्या को फिर से चोदूंगा। और वो मेरी मौसेरी बहन माधवी? उसकी फुद्दी की सील भी तो टूटेगी मेरे लंड से। जो भी था मम्मी की चुदाई मैं नहीं भूल पा रहा था – मम्मी चुदवाती ही ऐसी मस्त थी।
वहीं बात – तजुर्बा भी तो कुछ मायने रखता ही है। छुट्टियों में मैं जब घर आया तो माहौल बड़ा ही शानदार था। डेढ़ महीने के बाद घर आने से मम्मी और दिव्या बड़ी ही खुश थी। अगर मुझे दोनों मां-बेटी की फुद्दी चोदने की ठरक थी तो उन्हें भी तो अपने बेटे और भाई का लंड फुद्दी में डलवाने की ठरक थी।
पहले ही दिन, पापा के ऑफिस और कामवाली के काम करके जाते ही दिव्या मम्मी से बोली, “चलो मम्मी चलो शुरू करें, बड़े दिनों के बाद धीरज आया है। मेरी फुद्दी तो सुबह से ही गीली हुई पड़ी है।”
मम्मी बोली, “अरे दिव्या मेरा भी वही हाल है, फुद्दी क्या मेरी तो गांड में भी खुजली मची हुई है।”
हम ने देर नहीं की और अंदर आ कर तुरंत कपड़े उतार दिए।
मम्मी बोली, “देखो धीरज, अब माधवी यहां होगी, और तुमसे चुदाई भी होगी। माधवी को मेरी और तुम्हारी चुदाई के बारे में भनक भी नहीं लगनी चाहिए, और दिव्या, तूने भी अपने और मेरे बारे में माधवी से कुछ नहीं कहना है। माधवी मेरी छोटी बहन की बेटी है, और मेरी बहुत इज़्ज़त भी करती है। मैं नहीं चाहती कि मेरे बारे में वो कुछ गलत धारणा बना ले।”
मैं और दिव्या दोनों ही बोले, “ठीक है मम्मी।”
इसके बाद हमारी चुदाई शुरू हो गई। दिव्या ने फुद्दी में लंड लिया और मम्मी ने फुद्दी और गांड दोनों में। दोपहर से शुरू हुई चुदाई शाम चार बजे तक चली। मजा ही आ गया।
दो दिनों की बाद मम्मी-पापा ने दो हफ्ते के लिए जाना था। अगले दिन मम्मी बोली, “धीरज बेटा दिल्ली से माधवी को ले आ। तेरे पापा को तो टाइम नहीं मिलेगा, और तेरे मौसा का तो तुझे पता ही है, उनके पास भी फुर्सत नहीं है।”
मैं तो इसी बात से खुश था एक और फुद्दी मिल रही है चोदने को – जवान लड़की की – कुंवारी, सील बंद, एक-दम टाइट फुद्दी।
अगले दिन मैं सुबह-सुबह कार से रोहिणी के लिए निकल गया। मैं मौसी कौशल्या के घर पहुंचा तो माधवी मुझे देखते ही खुश हो गई। दोपहर का खाना खा कर तीनों – माधवी, कौशल्या और मैं बैठे हुए थे तो मौसी बोली, “धीरज सुधा बता रही थी उनका बारह तेरह दिनों का प्रोग्राम है। बेटा दो हफ्ते की बाद तेरे मौसा जी ने भी साऊथ के ट्रिप पर जाना है – कोइ सात आठ दिनों का प्रोग्राम है उनका। उससे पहले माधवी को यहां छोड़ जाना। इतने बड़े घर में तो मुझे अकेले डर सा ही लगता है।”
मैंने कहा, “ठीक है मौसी।”
दोपहर बाद में और माधवी गुडगांव के लिए निकल गए। पूरे रास्ते माधवी चहकती रही और कम से कम बीस बार उसने अपने फुद्दी खुजलाई। बस यही रहा कि उसने मेरा लंड नहीं पकड़ा। पक्की बात है दिव्या ने उसे बता ही दिया होगा मेरी और अपनी चुदाई की बारे में।
गुड़गांव पहुंच कर दिव्या और माधवी नीचे कमरे में बंद हो गए। में ऊपर बैठा था। खाना खा कर मम्मी पापा तो अपने कमरे में चले गए। अगले दिन उन्हों सुबह सुबह निकलना था। पैकिंग वगैरह करनी थी।
दिव्या आयी और बोली, “धीरज रात को आओगे नीचे हमारे कमरे में? माधवी बहुत उतावली हो रही है, तुमसे अपनी फुद्दी की सील तुड़वाने के लिए।”
मैंने जवाब दिया, “दिव्या आज रहने देते हैं। मम्मी-पापा पैकिंग वगैरह करनी है, कुछ काम आ गया और मुझे कमरे में ना देख कर कहीं नीचे ही मुझे ढूढते-ढूंढते ही ना आ जाएं।”
दिव्या बोली, “हां धीरज ये तो है।” फिर दिव्या बोली, “धीरज पांच मिनट के लिए ही आ जाओ, माधवी को लंड देखना है तुम्हारा।”
मैंने कहा, “चलो ठीक है, तुम चलो में आता हूं।”
दिव्या और माधवी नीचे चली गयी और मैं भी पीछे पीछे उनके कमरे में चला गया। जाते ही मैंने अपने पायजामे का नाड़ा खोला और लंड बाहर निकाल लिया और माधवी से बोला, “लो माधवी देख ले ये जाएगा तेरी कुंवारी फुद्दी में। माधवी बड़े गौर से लंड देख रही थी।
दिव्या बोली, “अरे माधवी, पकड़ कर देख, मुंह में ले, अब फुद्दी में तो कल ही जाएगा।”
माधवी के जैसे ही लंड हाथ में लिया, मेरा लंड तो एक-दम से खड़ा ही हो गया।माधवी दिव्या से बोली, “दिव्या ये तो सच में ही बहुत बड़ा है।” ये बोल कर माधवी नीचे बैठ गयी और लंड मुंह में ले लिया।
मैंने कहा, “चलो माधवी, बस करो, बाकी का काम कल करेंगे।”
माधवी ने कहा, “धीरज, बस एक मिनट और चूसने दो।”
थोड़ा और चूसने के बाद माधवी ने मेरा का लंड मुंह में से निकाल दिया। मैंने पायजामा ऊपर किया और नाड़ा बांध कर ऊपर अपने कमरे में आ गया।
अगले दिन मम्मी पापा सुबह-सुबह ही निकल गए, उसके बाद तो दिव्या और माधवी भी ऊपर ही आ गयी – माधवी के सामान के साथ।
उस दिन जैसे ही काम वाली काम करके निकली, दिव्या मुझसे बोली, “चलें धीरज, माधवी से अब रहा नहीं जा रहा। रात को इतनी चुसाई करवाई फुद्दी की इसने, कि क्या बताऊं, पानी से भरी पड़ी थी इसकी फुद्दी रात से ही, फिर दिव्या अपने आप से बोली, “वैसे धीरज मेरे फुद्दी का भी वही हाल है।”
हम तीनों ही अपने के कमरे में आ गए। अम्मी पापा का बेड कुछ ज्यादा ही बड़ा था। हम तो तीन ही थे, उस बेड पर तो चार लोगों की भी मस्त चुदाई हो सकती थी।
मेरी तो अपने लंड की हालत खराब थी, एक कुंवारी टाइट फुद्दी चोदने के बाद, एक और कुंवारी फुद्दी चुदने के लिए उतावली हो रही थी। मेरा लंड तो कामवाली के जाते ही माधवी की कुंवारी फुद्दी के बारे में सोच-सोच कर ही खड़ा हो चुका था।
[email protected]
अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-20