पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-33
हिंदी चुदाई कहानी का आखिरी भाग-
मम्मी अपनी और मनोहर मौसा की पूरी रात चली चुदाई की कहानी धीरज को सुना रही थी।
“मनोहर ने मेरे मम्मों पर पेशाब किया और मुझे उसमें भी बड़ा मजा आ रहा था। जैसे ही मनोहर का गर्म पेशाब मेरे मम्मों पर गिरा तो मेरे मुंह से निकला, “ये क्या कर रहा है मादरचोद मनोहर, साले बड़ा मजा आ रहा है।”
“इसके बाद इकट्ठे ही हमने स्नान किया और कपड़े पहन कर बाहर आ गए। तब तक आठ बज चुके थे। यश और कौशल्या बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।
“हमें देखते ही यश बोले, “मनोहर, पूरी रात?”
“तेरे मौसा जी हंसते हुए बोले, “हां यार यश, रात तीन बजे तक चुदाई चली। हम तो अभी भी कुछ करके ही आये हैं” ये बोलते हुए मनोहर ने मेरी तरफ देखा और हंस दिया।”
“पेशाब वाला सीन मेरी आंखों के आगे घूम गया और मैं भी हंस दी।”
मनोहर बोला, “जीजी तो मस्त चुदाई करवाती है यश, मजा ही आ गया। चुदाई में तो जीजी सब कुछ करती हैं। आगे-पीछे – सब जगह ले लिया जीजी ने। तू तो बड़े मजे लता होगा जीजी को चोदने के।”
मम्मी मुझसे बोली, “धीरज असली मजे की बात तो ये थी कि अब हम सब कुछ साफ़-साफ़ ही बोलने लग गए थे – लंड फुद्दी गांड चुदाई, सब कुछ।”
मैंने कहा, “मम्मी आपने तो मौसा जी के साथ पहली चुदाई में ही सब कुछ कर लिया।”
मम्मी बोली, “धीरज हमने तो ग्रुप चुदाई शुरू ही इसलिए की थी कि चुदाई के पूरे मजे लिए जा सकें। अब अगर इसमें भी शर्म ही करनी थी तो फिर ग्रुप चुदाई का फायदा ही क्या था?”
मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी एक बात और बताओ जब आप लोग एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पे एक-दूसरे के सामने चुदाई करते थे, आगे-पीछे मुंह में सब जगह लंड लेते थे, तब आपको सब से ज्यादा मजा किस्में आया था? मेरा मतलब क्या करने में सब से ज्यादा मजा आया था?”
मम्मी हंसते हुए बोली, “धीरज तू भी पूरे मजे ले रहा है अपने मम्मी की चुदाई की कहानी के। तुझे बताते बताते मेरी फुद्दी फिर से गरम होने लग गयी है।”
मैंने भी हंसते हुए कहा, “कोइ बात नहीं मम्मी, मैं अभी यहीं हूं। आपकी फुद्दी ठंडी करने के लिए। मेरा ये लंड कब काम आएगा। मेरा लंड भी तैयार ही है, लो देख लो।” ये कह कर मैंने अपना कुरता ऊपर किय। मेरे लंड का उभार साफ़ दिखाई दे रहा था।”
मम्मी ने मेरा लंड पकड़ लिया और बताने लगी, “धीरज सब से ज्यादा मजा मुझे दो बार आया था। पहला तो उस दिन जब मैं और मनोहर अकेले कमरे में थे। वो हमारी ग्रुप चुदाई का पहला दिन था।”
“रात भर के चुदाई के बाद जब अगली सुबह जब बाथरूम में जा कर मैंने और मनोहर ने एक-दूसरे के ऊपर पेशाब किया। मैं मनोहर के लंड पर पेशाब कर चुकी थी और टॉयलेट सीट पर बैठी थी। मनोहर मेरे सामने आया और उसने पहले तो लंड मेरे मुंह में डाल दिया, और फिर मुट्ठ मारने लगा। मुट्ठ मारते मारते जब मनोहर को मजा आया तो मनोहर ने लंड का गरम सफेद लेसदार पानी मेरे मम्मों पर गिरा दिया। मैंने मनोहर ले लंड से निकली मलाई के एक-एक बूँद चाट ली। इसके बाद मनोहर ने ने मेरे मम्मों पर पेशाब किया। सच में धीरज मस्त मजा आया था इसमें भी।”
दूसरा उस दिन आया जब हमने दोपहर को पहली बार इकट्ठे चुदाई की थी। हुआ ये था धीरज, मनोहर और यश हमारी फुद्दीयां चोद चुके थे। मनोहर गांड चोदने का बहुत शौक़ीन है और उधर कौशल्या भी कम नहीं है। मनोहर यश से बोला, “यश मेरा जीजी की गांड चोदने का मन है। बड़ा मजा आता है जीजी की गांड में लंड डालने का।”
“यश बोले, “अरे मनोहर तो इसमें कहने पूछने की क्या बात है। डालो सुधा की गांड में लंड, वो मना थोड़े है कर रही है। पहले भी तो तुमने डाला ही है सुधा की गांड में।”
“तभी कौशल्या बोली, “जीजा जी आप भी डालो ना मेरी गांड में।”
“बस फिर क्या था, उन्होंने हम दोनों को सोफे पर अगल बगल में ही उल्टा लिटा दिया। हमारे चूतड़ पीछे थे। मनोहर मेरे पीछे था और यश कौशल्या के पीछे। अगले ही पल मनोहर का लंड मेरी गांड में था और यश का लंड कौशल्या की गांड में। मनोहर और यश हमारी गांड चुदाई करते करते ऐसी-ऐसी बातें कर रहे थे कि पूछो मत।”
“मनोहर बोल रहा था, “यार जीजी की गांड चोदने का मजा ही अलग है। पूरा लंड लेती है जीजी। और उधर तेरे पापा बोल रहे थे, “इधर भी पूरा लंड ले रखा है कौशल्या ने, बस टट्टे ही बाहर हैं।”
“फिर यश बोले, “मनोहर ये तो भाई अपनी जीजी का धन्यवाद कर जो तुझे कौशल्या की सील बंद फुद्दी चोदने को मिली। वरना ये तो मुझसे अपनी शादी से पहले ही चुदाई करवाना चाहती थी, सुधा ने ही इसे रोक दिया।”
“मनोहर हंसते हुए मेरी गांड में लंड आगे-पीछे करते हुए बोला, “यश जीजी के उसी एहसान का तो बदला चुका रहा हूं जीजी की गांड चोद कर।”
“कहते-कहते मनोहर ने मेरी गांड में जोर जोर की धक्के लगाते हुए कहा, “ले सुधा और ले – क्या मस्त गांड है। मनोहर ने इतना कस कर मुझे पकड़ा हुआ था कि मैं नीचे हिल भी नहीं पा रही थी।”
“यश और मनोहर की बातें सुन-सुन कर मैं और कौशल्या नीचे एक-दूसरे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी।”
मम्मी बोली, “तो धीरज ये थे वो दो मजे, जो मैं कभी नही भूल सकती – मस्त गांड चुदाई एक-दूसरे के सामने और एक जब गरम-गरम खुशबू वाला लंड का पानी टप-टप करता मम्मों पर में गिर रहा था।”
मम्मी बोली, “धीरज उसके बाद तो पेशाब करने वाला काम मैं तेरे पापा यश के साथ भी करने लग गयी।”
मैंने कहा, “मम्मी ये पेशाब करने वाला काम तो किसी दिन मैं भी करूंगा आपके साथ।”
मम्मी बोली, “किसी दिन क्यों बेटा आज ही करले। तुझे भी किसी चीज़ के ना नहीं है। एक बार अभी मेरी फुद्दी चोद कर मुझे फुद्दी का मजा दे दे, फिर चलते है बाथरूम में – करवाते हैं एक-दूसरे के फुद्दी लंड को स्नान।”
फिर मम्मी मेरा लंड पकड़ कर बोली, “लेकिन धीरज बाथरूम में तेरे लंड की मुट्ठ मैं मारूंगी। कई साल ही हो गए किसी जवान लड़के के लंड की मुट्ठ नहीं मारी और लंड का पानी नहीं पिया – चल आजा – तेरा लंड तो मलाई भी बड़ी छोड़ता है, मजा आ जाएगा चाटने का। तेरे पापा के लंड की मुट्ठ मारा करती थी जवानी में।”
मैं सोच रहा था मजे की लिए औरत आदमी क्या-क्या करते हैं। इसके बाद मैंने और मम्मी ने एक चुदाई की। जब मम्मी की फुद्दी दो बार पानी छोड़ गयी तो हम बाथरूम में आ गए। बस इसके बाद तो मेरे साथ भी वही कुछ किया मम्मी ने जो मम्मी ने मनोहर मौसा जी के साथ किया था पहली ग्रुप चुदाई में।
पहले मैं टॉयलेट सीट पर बैठा और मम्मी मेरे दोनों तरफ टांगें करके मेरी गोद में बैठ गयी, मुझे बाहों में ले लिया और मेरे लंड पर पेशाब किया। फिर मम्मी टॉयलेट सीट पर बैठ गयी और मैं मम्मी के सामने जा कर खड़ा हो गया।
मम्मी ने पहले मेरा लंड चूसा, और फिर मम्मी मेरे लंड की मुट्ठ मारने लगी। मम्मी बड़ी ही मस्ती से – बड़े ही प्यार मेरा लंड पकड़ कर मुट्ठ मार रही थी। मुट्ठ मारते-मारते मम्मी बीच-बीच में मेरा लंड चूम लेती और बोलती, “आह धीरज क्या मस्त लंड है, कितना बड़ा है। इतना बड़ा लंड तो तेरे पापा और मौसा मनोहर का भी नहीं है। मजा आ जाता है जब तू इसको फुद्दी में डालता है। इसीलिए मैं, तेरी मौसी कौशल्या, दिव्या और माधवी तेरे लंड के लिए पागल हुई रहती हैं।”
मम्मी के इस बात पर मुझे महेंद्र के घर चोदी हुई लड़कियां भी याद आ गयी। वो भी तो मेरे इस 3XL लंड के पीछे पागल ही थी।
जिस तरीके से मम्मी मेरा लंड पकड़ कर मुट्ठ मार रही थी, मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था – कोइ जल्दी नहीं थी मम्मी को और ना ही मुझे लंड का पानी छुड़वाने की कोइ जल्दी थी। ऐसा लग रहा थी कि मम्मी को लंड मेरी मुट्ठ मारने में बहुत मजा आ रहा था। जिस प्यार से मम्मी मेरे लंड की मुट्ठ मार रही थी, मेरी मस्ती बढ़ती जा रही थी। मन तो कर रहा था वही फर्श पर मम्मी को लिटा कर चोद दूं। मगर क्या जल्दी थी? चुदाई के मामले में तो मम्मी अब एक तरह से घर के मुर्गी थी, पकड़ो और कर लो चुदाई।”
बीस मिनट मुट्ठ मारने के बाद जा कर मेरे लंड ने पानी छोड़ा। जैसे ही मेरे लंड का पानी निकलना शुरू हुआ , अपने आप ही मजे के मारे मेरे मुंह से निकला, “ले मम्मी साली मादरचोद रंडी निकल गया मेरा। क्या मस्त मुट्ठ मारी है – ले अब जो करना है कर इसका। क्या-क्या करती है तू मादरचोद मजे लेने के लिये। आह मम्मी निकल रहा है – बड़ा मजा आ रहा है।”
मेरे लंड से पानी निकल रहा था और मम्मी की मम्मों पर गिरता जा रहा था। मम्मी अपने मम्मों पर गिरता मेरे लंड का पानी हाथ से मल-मल कर चाटती जा रही थी। एक-एक बूंद चाटने की बाद मम्मी ने मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
चूस-चूस कर मम्मी ने मेरा लंड बिल्कुल साफ़ कर दिया।
फिर मम्मी बोली, “चल धीरज डाल अपना गरम पेशाब मेरे मम्मों पर जैसे उस दिन मनोहर ने डाला था।”
मैंने लंड पकड़ा और लंड धार उधर करते हुए मम्मी के दोनों मम्मों पर पेशाब करने लगा। मम्मी मेरा पेशाब अपने मम्मों पर मलते-मलते बोलती जा रही थी, “आह धीरज, आह धीरज।”
जब मेरे लंड से पूरा पेशाब निकल गया तो मम्मी ने एक बार और मेरा लंड चूसा और फिर उठी और मुझे बाहों में लेकर चूमती हुई बोली, “धीरज मजा आ गया बेटा। वो पहली ग्रुप चुदाई याद आ गयी। क्या मस्त मोटी धार निकलती है तेरे लंड में से।”
“फिर जैसे मम्मी अपने आप से ही बोली, “कितना गर्म होता है इन मर्दों का पेशाब, कितना नमकीन, कितना मजा आता है अपने ऊपर पेशाब करवाने का।”
मैंने तो मम्मी, दिव्या और माधवी का पेशाब भी मुंह में लिया था। पेशाब तो लड़कियों का भी गर्म ही होता है, और नमकीन भी। खैर जो भी था मस्त मजा दे रही थी मम्मी ने मुझे।
मम्मी की मौसा जी की साथ चुदाई की कहानी सुनने की बाद मेरे जेहन – दिमाग – में एक बड़ा सवाल आया। मैंने मम्मी से पूछा, “तो मम्मी लोग ग्रुप सेक्स के दौरान अदल बदल कर चुदाई करते थे जब आप पापा और मौसा जी की लंडों का पानी भी तो आप दोनों की फुद्दीयों में जाता ही होगा।”
मम्मी बोली, “बिल्कुल जाता था, ऐसा ही होता था।”
मैंने पूछा, “तो मम्मी एक बात बताओ, हमें – मुझे दिव्या और माधवी को कैसे पता चलेगा कि कौन किसके लंड का बीज है?”
मम्मी को तो जैसे अंदाज़ा ही था कि इतना सब जानने के बाद मैं ये सवाल पूछूंगा ही।
बिना किसी हैरानी और हिचकिचाहट के मम्मी बोली, “अरे बेटा धीरज, क्या करना है ये पता करके कि कौन किसके लंड से निकला है? बस इतना समझो कि जो जिसके घर में पैदा हुआ, समझो उसी घर के मर्द के लंड का बीज है। ये बात ना कभी मैंने, ना कौशल्या ने, ना ही मनोहर ने और ना ही कभी तेरे पापा ने सोची। हो सकता है तुम सब ही यश के लंड से निकले हो या सब ही मनोहर के लंड से निकले हो। या फिर तुम और दिव्या मनोहर के लंड के बीज हो और माधवी यश के लंड का बीज – मतलब कुछ भी हुआ हो सकता है।”
मैंने फिर पूछा, “तो मम्मी क्या इसीलिए बवाना वाला करोड़ों का फैक्ट्री का शेड मौसा जी मुझे देने को तैयार हो गये और ना आपको कोइ एतराज हुआ ना मौसी को, पापा ने भी कोइ ख़ास एतराज़ नहीं किया?”
मम्मी बोली, “बिल्कुल धीरज, यही बात है। मनोहर को लगता है तुम उसके लंड के पैदाइश भी हो सकते हो और तुम्हें ज़िंदगी में कामयाब बनाना उसकी जिम्मेदारी है।”
इन सब बातों कि बाद तो मैंने कुछ सोचना ही बंद कर दिया। अगर मैं कुछ सोचता भी था तो वो ये कि कब और कैसे मम्मी, मौसी, दिव्या और माधवी की चुदाई करनी है। मम्मी, दिव्या, मौसी और माधवी का ख्याल आते ही मेरी आंखों के आगे उनकी फुद्दीयां और चूतड़ घूमने लगते थे – उनकी चुदाईयां याद आने लगती थी।
एक बात और हुई कि ये सब जान कर मैंने फैसला कर लिया कि मौसा जी के बवाना वाले शेड में ही अपने खुद की फैक्ट्री लगाऊंगा।
मेरी डिग्री पूरी हो गयी थी। नौ महीने की ट्रेनिंग भी गुडगांव की एक बड़ी फैक्ट्री में हो गयी। मौसा जी ने एक शेड मेरे नाम कर दिया। पापा और मौसा जी ने मिल कर ताईवान से सीएनसी मशीनें मंगवा ली।
महेंद्र की भी जॉब मानेसर – जो गुडगांव के पास ही है – वहां लग गयी है। दो तीन महीने के बाद जब कभी भी उसका घर खाली होता है, महेंद्र मुझे फोन कर देता है। अब तो मुझसे चुदाई करवाने के लिए महेंद्र की कामवाली नई-नई लड़कियां लाने लग गयी है। सब 3XL का कमाल है।
जो काम मौसा जी की फैक्ट्री में होता था, वही काम मैंने बढ़ा लिया और वो काम मेरी फैक्ट्री में भी होने लगा। मौसा जी के साउथ के टूर लगते रहते हैं। जब मौसा जी साउथ जाते है तब मैं रोहिणी में ही रहता हूं। उन दिनों में मौसी और माधवी कि मस्त चुदाई होती है।
अभी भी मम्मी और पापा अब भी शुक्रवार को रोहिणी आ जाते हैं। मैं और दिव्या भी साथ ही आते हैं। रात को दिव्या और माधवी एक कमरे में सोते हैं और मैं ड्राईंग रूम में सोता हूं। रात को मम्मी पापा पीछे के दरवाजे से मौसा मौसी की कमरे में चले जाते होंगे – मैं पीछे की दरवाजे से माधवी और दिव्या वाले की कमरे में चला जाता हूं। आधी-आधी रात तक हमारी चुदाई चलती है।”
मम्मी, दिव्या मौसी और माधवी – चार-चार फुद्दीयां, चारों मस्त चुदाई करवाती हैं।
फैमिली हो तो ऐसी।
समाप्त।
पढ़ने के लिए धन्यवाद। कहानी कैसी लगी, ये अवश्य बताईये।
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