पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-31
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
ग्रुप सेक्स की शरुआत तो अलग-अलग कमरों में एक-दूसरे की बीवी के साथ चुदाई से हुई। मगर जल्दी ही चारों एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर, एक-दूसरे के सामने चुदाई करने लग गए।
“सब की हंसी बंद हुई तो मनोहर बोले, “यश जीजी को चोदने का तो मजा ही आ गया। अब आगे से ये ग्रुप सेक्स कैसे किया करेंगे?” “जवाब जीजी ने दिया। जीजी बोली, “अब आगे से ये होगा कि हर शुक्रवार या तो तुम दोनों गुडगांव आ जाया करना, या हम यहां आ जाया करेंगे, और दो रात ऐसी ही चुदाई किया करेंगे, तुम मेरे साथ और यश कौशल्या के साथ। और आगे से जब हम ग्रुप सेक्स किया करेंगे, तो इकट्ठे एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर, एक-दूसरे के सामने किया करेंगे – अदल-बदल कर।”
“इस पर तेरे मौसा का लंड खड़ा हो गया था। तेरे मौसा ने लंड खुजलाया और बोले, “एक-दूसरे के सामने? ये तो बड़ा मजा रहेगा। मगर जीजी वो कब करेंगे?
“जीजी बोली, ” मनोहर आज रात ही कर लेंगे। डालना तुम दोनों अपने लंड हमारी आगे-पीछे बदल-बदल कर – कभी तुम और मैं कभी यश और मैं – कभी यश और कौशल्या, कभी तुम और कौशल्या।”
“फिर जीजी ने यश जीजा जी से पूछा, “क्यों यश, तैयार हो?”
“जीजा जी का लंड भी खड़ा हो चुका था। जीजा जी बोले, “मुझे क्या एतराज होगा, मुझे तो कौशल्या को चोद कर मजा ही बड़ा आया है। क्या मस्त गांड चुदवाती है ये। मगर अब क्या करूं मेरा लंड तो अभी ही खड़ा हो चुका है।”
“तेरे मौसा बोले, करना क्या है, अब जो काम रात को करना है, वो काम अभी कर लेते हैं – ग्रुप सेक्स, इकट्ठे चुदाई एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर – अदल-बदल कर, एक-दूसरे के सामने। मेरा लंड भी फुंफकारे मार रहा है।”
“मैं बोली, “थोड़ा सबर कर लो। अभी कामवाली आती होगी। उसे काम करके तो जाने दो, अभी दिन में ही कर लेंगे ये चुदाई भी। इतने में हम भी कुछ चाय पानी नाश्ता कर लेते है।”
“जीजी बोली, “ठीक है मैं बाथरूम जा कर आती हूं। मनोहर के लंड के अब तक पानी से भरी पड़ी है मेरी फुद्दी। फिर जीजी यश जीजा जी से बोली, “यश जरा तुम भी चलना मेरे साथ। जरा देखना क्या हालत की है इस मनोहर ने मेरी गांड की।”
“जीजा जी बोले, “अरे सुधा इसमें बाथरूम में क्या करना है? यही दिखाओ अपनी गांड। मनोहर भी तो देख ले क्या गुल खिलाया है इसके लंड ने। कहीं कौशल्या की पहले रात वाली गांड चुदाई के तरह तुम्हारी गांड का भी तो कचरा नहीं कर दिया?”
“इस पर मैं बोली, “सच में जीजी पहली रात को मनोहर ने तो मेरी इतने गांड चुदाई की कि मेरे गांड का कचरा ही कर दिया था। इसके बाद तो एक महीने तक गांड चुदाई नहीं करवाई मैंने मनोहर से।”
“धीरज, अब हम लोगों में शर्म तो एक ही दिन में खत्म हो चुकी थी।”
“जीजी उठी और अपने सलवार खोल कर चूतड़ हमारी तरफ कर दिए और दोनों हाथो से चूतड़ चौड़े कर दिये। जीजी की गांड लाल हुई पड़ी थी। यश जीजा जी बोले, “लो मनोहर देख लो भाई क्या किया तुमने मेरी बीवी की गांड का।”
“तेरे मौसा उठे और जीजी की गांड देख के गांड का छेद चाटने लगे। छेद चाटते हुए मनोहर बोले, “जीजी गांड लाल तो है। दुःख तो नहीं रही?”
जीजी बोली, “और अगर मैं कहूं दुःख रही है तो क्या आज नहीं डालोगे लंड मेरी गांड में?”
“मनोहर बोले, “बिलकुल जीजी अगर आप कहेंगी कि दुख रही है तो नहीं डालूंगा।”
“जीजी हंसते हुए बोली, “मनोहर आज तुम मेरी फिक्र मत करो। अगर मन करेगा तो फिर से डाल लेना इसमें लंड आज भी। आज हमारी ग्रुप चुदाई का मुहूर्त है किसी को किसी तरह की कोइ भी मनाही नहीं है – जो चाहो करो, जैसे चाहो वैसे चोदो।”
“थोड़ी ही देर में कामवाली आ गई।”
“सब लोग अपने अपने काम में लग गये। कोइ बाथरूम चला गया, कोइ अखबार पढ़ने लगा। मैं नाश्ता तैयार करने लग गयी।”
“कामवाली काम करके गई ही थी कि जीजा जी उठ खड़े हुए और बोले, “लो भाई चली गयी कामवाली। चलो फिर, अब देर किस बात की है?”
“जीजी और मनोहर हंस पड़े और जीजी बोली, “क्या हुआ यश, रहा नहीं जा रहा?”
“जीजा जी ने कुरता ऊपर किया और बोली, “लो खुद ही देख लो। जीजा जी का लंड पूरा खड़ा था।”
“हम चारों अंदर आ गये और आनन-फानन में कपड़े उतार दिए। जीजा जी और तेरे मौसा सोफे पर बैठ गये और जीजी ने तेरे मौसा का लंड मुंह में ले लिया और मैंने जीजा जी का। बस इसके बाद जीजा जी ने मुझे और तेरे मौसा जी ने जीजी के चोदा। हमें जब मजा आ गया तो अदल-बदल हो गया। अब जीजा जी जीजी के ऊपर थे और तेरे मौसा मेरे ऊपर।”
“एक-एक बार जब हमें दुबारा मजा आया तो तेरे मौसा जीजी बोले, जीजी अब कहो तो एक बार आपके गांड में डाल लूं? आपकी गांड बड़ी टाइट है, बड़ा मजा आता है।”
“जीजी भी बोली, “कैसे मना कर दूं मनोहर? मैं तो पहले ही कह चुकी हूं, आज हमारे ग्रुप चुदाई का मुहूर्त है किसी को किसी तरह की कोइ भी मनाही नहीं है – जो चाहो, जैसे चाहो वैसे चोदो। आ जाओ, चोद लो मेरी गांड।”
“तेरे मौसा जी जीजा जी से बोले, “यश तुम भी एक बार गांड ट्राई करो। कौशल्या की गांड में डालो, मस्त लेती है पूरा का पूरा लंड गांड में। ऐसे चूतड़ आगे-पीछे करेगी, तुम्हें कुछ करने मी जरूरत ही नहीं होगी। जीजी के गांड तो लगता है तुम चोदते नहीं, तभी जीजी की गांड का छेद बहुत टाइट है।” बस धीरज इसके बाद हमारी गांड चुदाई चालू हो गयी।”
“जीजा जी बोले, “मनोहर कौशल्या गांड चुदवा चुकी है मुझसे और सच में ही मस्त गांड चुदवाती है कौशल्या।”
“मनोहर बस इतना ही बोले, “सही बात है यश, गांड चुदवाने में कौशल्या का कोइ जवाब नहीं।”
“बस फिर क्या था, उन्होंने हम दोनों को सोफे पर अगल-बगल में ही उलटा लिटा दिया। हमारे चूतड़ पीछे थे। मनोहर जीजी के पीछे था और जीजा जी मेरे पीछे। अगले ही पल मनोहर का लंड जीजी की गांड में था और यश का लंड मेरी गांड में। मनोहर और यश हमारी गांड चुदाई करते करते ऐसी-ऐसी बातें कर रहे थे कि पूछो मत।”
“मनोहर बोल रहा था, “यार जीजी की गांड चोदने का मजा ही अलग है। पूरा लंड लेती है जीजी। और उधर तेरे पापा बोल रहे थे, “इधर भी पूरा लंड ले रखा है कौशल्या ने, बस टट्टे ही बाहर हैं।”
“फिर यश जीजा जी हंसते हुए मनोहर से बोले, “मनोहर ये तो भाई अपनी जीजी का धन्यवाद कर जो तुझे कौशल्या की सीन बंद फुद्दी चोदने को मिली, वरना ये तो मुझसे अपनी शादी से पहले ही चुदाई करवाना चाहती थी।”
“तेरे मौसा भी कौन से कम हैं। वो उसी लय में हंसते हुए बोले, “यश जीजी की उसी एहसान का तो बदला चुका रहा हूं इनकी गांड चोद कर।”
“ये कहते-कहते मनोहर ने जीजी गांड में जोर-जोर के धक्के लगाते हुए कहा, “ले सुधा और ले – क्या मस्त गांड है।”
“मैं और जीजी नीचे एक-दूसरे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी।”
“गांड चुदाई के दौरान हमने फुद्दी के दाने रगड़-रगड़ कर मजे ले लिए थे। फुद्दीयां पहले ही चुद चुकी थी, मगर मनोहर और जीजा जी के लंड अभी भी खड़े ही थे।”
“गांड चुदाई के बाद मैं और जीजी सोफे पर बैठी थी।”
“मनोहर बोला, “लो भाई यश इन दोनों का काम तो हो गया। आगे भी ले लिया इन्होने पीछे भी ले लिया। अब क्या करें हमारे लंड तो अभी भी खड़े ही हैं?”
“मनोहर ने जीजी से पूछा, ” जीजी आप बताओ, अब क्या करे?”
“जीजी बोली, “मनोहर अब एक ही जगह बची है, मुंह में लंड डाल कर मजा ले लो।”
“जीजी की बात सुन कर मैंने कहा, “जीजी मैं बताऊं, मेरे पास एक आईडिया है।”
“जीजी बोली, “बता।”
“मैं बोली, “जीजी मुंह में तो हम लेती ही हैं, क्यों ना हम इनके लंड की मुट्ठ मार कर इनके लंड का पानी अपने मुंह में गिराएं। जब सफ़ेद-सफ़ेद गरम-गरम मलाई निकलेगी इनके लंडों में से तो चाटने का मजा ही आ जाएगा।”
“जीजी बोली, “वाह कौशल्या ठीक है , तो फिर यही करते हैं अब।”
“बस फिर क्या था, मनोहर जीजी के आगे और जीजा जी मेरे आगे आ गए। मैंने और जीजा जी का और जीजी ने मनोहर का लंड पकड़ लिया और उनके लंडों की मुट्ठ मारने लगी।”
“मनोहर और जीजा जी आह जीजी आह कौशल्या ही बोलते जा रहे थे। दस मिनट लंड चूसने और मुट्ठ मारने के बाद मनोहर और जीजा जी को मजा आने वाला हो गया।”
“जीजा जी बोले, “कौशल्या मेरा निकलेगा अब।”
“उधर मनोहर भी बोले, “जीजी मेरा भी लंड मलाई छोड़ने वाला है। दो ही मिनट की बाद मनोहर जोर से बोला, “ले मादरचोद सुधा, निकला मेरा।”
“जीजी ने मुंह पूरा खोल लिया – और मनोहर की लंड से गाढ़ा सफ़ेद गरम शहद निकला और जीजी के मुंह में गिरने लगा। मनोहर का लंड पानी छोड़ता जा रहा था और जीजी गर्म सफ़ेद पानी चाटती जा रही थी। तभी जीजा जी भी बोले, “ले कौशल्या मेरी जान ले, मेरा भी निकला।”
“हम दोनों – मैंने और जीजी ने जीजा जी और मनोहर के लंड से निकले पानी की एक-एक बूंद चाट ली।”
“धीरज सच में मस्त मजा था – बिलकुल अलग ही तरह का।”
मैं सोच रहा था कि मौसी की ग्रुप सेक्स की कहानी तो बड़ी मस्त और मजेदार थी।
कहानी सुनाने के बाद मौसी बोली, “और बस धीरज ये सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो अब तक चल रहा है। अब तेरे मौसा जी और जीजा जी के लंड सख्त नहीं होता, मगर फिर भी ये ग्रुप सेक्स चालू है। अब दोनों हमारी फुद्दीयों और गांड में डिडलो – रबड़ के लंड डालते हैं या हमारी फुद्दीयां चूसते चाटते हैं और हमें मजा दी देते हैं – और हम उनके लंड चूस कर या मुट्ठ मार कर उन्हें मजा दे देती हैं।”
मौसी आगे बोली, “अब यहीं पर फर्क है। लंड का मजा तो मुठ मार आ गया मगर फुद्दी? फुद्दी के मजे के लिए फुद्दी के रगड़ाई भी तो होनी चाहिए, जो नहीं होती। बस धीरज इसीलिए मैं और जीजी तेरा लंड अपनी फुद्दी में डलवा रही हैं।”
ये कहानी सुना कर मौसी चुप हो गयी।
मैंने बस इतना ही कहा, “कमाल हो मौसी आप लोग भी।”
मैंने मौसी से पूछा, “अच्छा मौसी एक बात बताओ, मम्मी और मौसा जी के पूरी रात वाली वो चुदाई कैसी रही? क्या-क्या हुआ उसमें?”
मौसी बोली, “धीरज बंद कमरे में क्या हुआ, कैसे हुआ ये तो किसी ने किसी से कभी पूछा ही नहीं – पूछने के जरूरत ही नहीं पड़ी। अक्सर तो सारी चुदाईयां तो एक-दूसरे के सामने की होती थी। और जो कुछ बंद कमरे में होती भी थी, वो जब सब इकट्ठे बैठते थे तो खुद ही बता देते थे। उस रात भी जब पूरी रात बंद कमरे में रहने के बाद तेरे मौसा जी और जीजी बाहर आये तो थोड़ा तो उन्होंने ने खुद ही बता दिया।”
“उस दिन सुबह के आठ बजे होंगे, मैं और यश जीजा जी बैठे चाय पी रहे थे कि मनोहर जीजी कमरे से बाहर आ गए। आते ही तेरे मौसा जी बोले, “यार यश, जीजी तो मस्त चुदाई करवाती है, मजा ही आ गया। आगे-पीछे सब जगह ले लिया जीजी ने।”
“जीजी भी हंस दी और बोली, “आगे-पीछे क्या यश, जहां जहां मनोहर बोलता रहा, मैं लेती रही। अब जब चुदाई करवानी ही है तो बताओ नखरा कैसा?”
“बस धीरज इससे ज्यादा ना हमने पूछा, ना मनोहर और जीजी ने बताया ”
मौसी की बातें सुन-सुन कर मैं हैरान था। मैंने मौसी से पूछा, “मौसी और क्या-क्या करते रहे हो आप लोग?”
मौसी बोली, “धीरज सब कुछ करते रहे हैं, जो भी कुछ ग्रुप सेक्स में हो सकता है वो सब कुछ।”
फिर मौसी कुछ सोचते-सोचते हंस दी।
मैंने पूछा, “क्या हुआ मौसी, आप हंसी क्यों, कुछ याद आ गया क्या?”
मौसी बोली, “हां धीरज कुछ याद ही आ गया।”
फिर मौसी ही बोली, “धीरज एक दिन हम ग्रुप सेक्स कर रहे थे। यश जीजा जी मुझे चोद कर हटे थे। मुझे मजा आ चुका था, मगर जीजा जी के लंड ने पानी नहीं छोड़ा था और जीजा जी का लंड खड़ा ही था। मैं और जीजा जी सोफे पर बैठ गए। मेरे हाथ में जीजा जी का खड़ा लंड था।”
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