पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-30
हिंदीं चुदाई कहानी अब आगे-
एक बार जब हम तीनों की – मेरी जीजा जी और जीजी की ग्रुप सेक्स के लिए हां हो गयी – तो हम उसी दिन, इतवार को मनोहर से बात करने रोहिणी के लिए रवाना हो गए। वैसे धीरज मुझसे तो कोइ पूछ ही नहीं रहा था क्योंकि मैं तो एक तरह से पहले ही ग्रुप सेक्स कर रही थी।”
“रोहिणी पहुंच कर इधर-उधर के बातों के बाद जीजी ने थोड़ी ही देर में तेरे मौसा मनोहर से मुद्दे की बात शुरू कर दी, जिसके लिए हम रोहिणी आये थे।”
जीजी मनोहर से बोली, “मनोहर, तुमने मजे लेने हैं अपनी साली – आधी घरवाली के साथ? वैसे वाले मजे जैसे मजे मर्द लेते हैं लड़कियों के साथ, बोलो लेने हैं? और जब मनोहर ने पूछा, “कैसे मजे जीजी”, तो जीजी में साफ़ ही बोल दिया, “चुदाई के मजे मनोहर चुदाई के मजे, फुद्दी चोदने के मजे।”
“जैसे ही जीजी ने ये बोला तो तेरे मौसा तो जैसे सुन्न ही पड़ गए। तेरे मौसा को तो एक पल के लिए समझ ही नहीं आया कि जीजी ये बोल क्या रही है? चुदाई के मजे, फुद्दी चोदने के मजे।”
“मनोहर की तो जैसे आवाज़ ही बंद हो चुकी थी वो बस इतना ही बोले, जीजी ये आप क्या कह रही है, फुद्दी चोदने के मजे? चुदाई के मजे? किसकी फुद्दी जीजी, मैं समझा नहीं?”
“जीजी बोली, “हां मनोहर यही बोल रही हूं। फुद्दी चोदने के मजे, चुदाई के मजे, मेरी फुद्दी चोदने के मजे – अपनी साली, आधी घरवाली की फुद्दी चोदने के मजे – बोलो लेने हैं ये मजे? इसमें ना समझ में आने वाली कौन सी बात है?”
“जीजी की बात सुन कर तेरे मौसा तो परेशान ही हो गए और यश जीजा जी से बोले, “यार यश ये जीजी को क्या हो गया है, ये क्या बोल रही है?”
जीजा जी बोले, “मनोहर, मैं क्या बताऊं, तुम्हारी साली है, तुम खुद ही पूछ लो सुधा से वो क्या बोल रही है।”
“जब मनोहर कुछ नहीं बोले तो जीजी ही बोली, “मनोहर मेरी बात ध्यान से सुनना। मैं कह रही हूं हम चारों क्यों ना मिल कर ग्रुप सेक्स करें? तुम और यश और हम दोनों बहनें। तुम दोनों हम दोनों बहनों को चोदो, एक दूसरी के सामने – हमारी फुद्दी, गांड, मुंह में जहां मन करे लंड डालो और खुद भी मस्त मजे लो और हमें भी मस्त मजे दो।”
तेरे मौसा अब भी चुप थे मगर जीजी की इतनी साफ़ बातें सुन कर उनका लंड हरकत में आ चुका था। एक औरत-औरत क्या – तेईस साल की जवान लड़की ही तो थी तब जीजी। एक जवान लड़की अपनी फुद्दी प्लेट में सजा कर एक जवान मर्द को परोस रही थी तो भला किसा मन नहीं करेगा चुदाई का?”
मनोहर का लंड जीजी की फुद्दी, चुदाई की बातें सुन-सुन कर खड़ा होने लग गया था। मनोहर ने अपना खड़ा होता हुआ लंड खुजलाया। ये किसी से भी छुपा नहीं रहा। मनोहर को इस तरह लंड खुजलाते देख कर जीजी उठी और जा कर मनोहर की टांगो के ऊपर दोनों तरफ अपनी टांगें करके खड़े होते हुए लंड पर बैठ गयी और मनोहर के गले में बाहें डाल कर मनोहर के होंठ अपने होठों में ले लिए।”
“मनोहर कुछ देर तो बुत की तरह बैठे रहे, मगर अब तो मनोहर के लिए भी बहुत हो चुका था। मनोहर का एक हाथ जीजी के मम्मों पर पहुंच गया – दूसरा हाथ मनोहर ने जीजी को कस कर अपने से चिपका लिया। मनोहर ने जीजी के मम्मे से हाथ हटाया और हाथ नीचे करके जीजी की फुद्दी टटोलने लगे।”
“मैंने जीजा जी की तरफ देखा – मेरी और यश जीजा जी की नज़र मिली और जीजा जी ने अपना लंड खुजलाया और मैंने अपनी फुद्दी पर हाथ फेर दिया। पूरा माहौल ग्रुप चुदाई वाला बनने लगा था।”
“मनोहर ने अपना हाथ जीजी की फुद्दी से हटाया और जीजी को दोनों बाहों में जकड़ लिय। मतलब मनोहर जीजी को चोदने के लिए तैयार हो चूके थे।”
“कुछ मिनटों के बाद मनोहर ने जीजी के अपने से अलग किया और बोले, जीजी क्या सच में ही मेरा लंड लेना है आपने अपनी फुद्दी में?”
“जीजी ने एक बार फिर मनोहर के होंठ चूमें और बोली, “मनोहर तुम्हारे खड़े लंड पर बैठी हूं, अभी भी तुम्हें विश्वास नहीं हो रहा की मैं सच में ही तुम्हारा लंड अपनी फुद्दी में लेना चाहती हूं – तुमसे चुदाई करवाना चाहती हूं।”
“धीरज, अब बहुत हो चुका था, मनोहर बोले, “तो फिर चलिए जीजी अंदर चलते हैं, अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा।”
“जीजी खड़ी हो गयी। मनोहर भी खड़े हो गए, मनोहर का लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पायजामें में बाहर आने को हो रहा था।”
“मनोहर ने एक नज़र यश के तरफ देखा और जीजी की कमर पर हाथ रख कर जीजी को कमरे की तरफ ले जाने लगे। चलते चलते मनोहर ने हाथ पीछे किया और जीजी के चूतड़ों में उंगली दाल दी।” दी।”
“जीजा जी ने भी यही किया था जब जीजा जी गुडगांव में मुझे चोदने के लिए कमरे में ले जा रहे थे।”
“साले भोसड़े वाले असारे मर्द एक से ही होते हैं।”
“जीजी और तेरे मौसा कमरे में चले गए और दरवाजा बंद कर लिया।”
“अब रह गए मैं और जीजा जी। ग्रुप सेक्स की शुरूआत एक तरह से हो चुकी थी।”
जीजा जी मुझसे बोले, “कौशल्या, ये तो गए अब दो घंटे से पहले क्या आएंगे। हम भी चलें? मेरा लंड भी खड़ा फुद्दी ढूंढ रहा है।”
“मैंने कहा, “जीजा जी मेरी फुद्दी भी गर्म हुई पड़ी है – ये भी लंड ही ढूंढ रही है, चलिए, हम भी चलते हैं।”
“और हम भी अंदर दूसरे कमरे में चले गए।”
“अंदर जाते ही हमने देर नहीं लगाई और हम दोनों की ताबड़-तोड़ चुदाई शुरू हो गयी। एक ही बार में जीजा जी ने मेरी फुद्दी और गांड दोनों रगड़ दी – मजा ही आ गया। जीजा जी को भी गांड चुदाई में मजा आने लगा था।”
“ढाई घंटे की चुदाई के बाद, हम बाहर आये तो मनु और जीजी अभी भी अंदर कमरे में ही थे।”
“हम नंगे ही आधा घंटा बैठे रहे। जब आधे घंटे के बाद भी दोनों, तेरे मौसा जी और जीजी बाहर नहीं आये तो जीजा जी बोले, “कौशल्या लगता है कुछ ज्यादा ही मस्ती में आ गए है सुधा और मनोहर, मौज करने दो दोनों को, चलो हम भी चलें।”
“इसके बाद मैं और तेरे पापा यश फिर कमरे में चले गए और फिर हमारी देर रात तक चुदाई होती रही। चुदाई की थकान के कारण हम वहीं सो गए।”
“सुबह सात बजे हमारी नींद खुली और हम फ्रेश हो कर बाहर आ गए।”
“सुबह के आठ बज चुके थे, मगर मनोहर और जीजी अभी भी कमरे में ही थे। मैंने चाय बना ली। मैं और जीजा डाइनिंग टेबल पर बैठ चाय के चुस्कियां लेने लगे।”
“जीजा जी बोली, “कौशल्या, सच कहूं, तुम्हें चोदने का मजा बहुत मस्त आता है।”
“मैं हँसते हुए बोली, “जीजा जी लगता है मनोहर और जीजी भी चुदाई के मस्त मजे ले रहे हैं।”
“जीजा जी बस इतना ही बोले, “कमाल है, अभी तक भी अंदर ही है, कितना चोद रहा है मनोहर सुधा को, और ये सुधा ये भी कितना चुदवा रही है? ये लोग चुदाई कर रहे हैं या भक्ति कर रहे हैं?”
“चुदाई कर रहे हैं या भक्ति कर रहे हैं?जीजा जी की इस बात पर मेरे हंसी छूट गयी, और तभी मनोहर और जीजी कमरे से बाहर आ गए। दोनों नहा धो कर फ्रेश हो कर आये थे।”
“तेरे मौसा और जीजी बड़े खुश लग रहे थे। लगता था मस्त चुदाई हुई थी रात को।”
आते ही तेरे मौसा जी हंसते हुए बोले, “मजा ही आ गया यार यश, जीजी तो मस्त चुदाई करवाती है। ये ग्रुप सेक्स तो सच में ही बड़ी मस्त चीज़ है यार।”
“जीजी भी बड़ी खुश लग रही थी। जीजी बोली, “मनोहर अभी ग्रुप सेक्स हुआ ही कहां है? असली ग्रुप सेक्स तो तब होगा, जब सब मिल कर इकट्ठे एक ही कमरे में एक दुसरे के सामने चुदाई करंगे।”
“मनोहर बोले, “खैर जीजी ये बताओ कैसे रही रात की चुदाई?”
“जीजी हंसते हुए बड़ी ही बेशर्मी के साथ बोली, “यश मस्त चुदाई हुई रात को, सब जगह डाल लिया मनोहर ने लंड। चुदाई के साथ-साथ और बह बहुत कुछ किया मनोहर ने। मनोहर जो जो बोलता गया मैं करती गयी। अब जब चुदाई के मजे लेने ही हैं तो फिर ना किस बात की और नखरा किस बात का।”
“फिर तेरे मौसा तेरे पापा से बोले, “यश तुमने भी चोदा कौशल्या को?”
“इससे से पहले कि जीजा जी कुछ जवाब देते जीजी बोली, “मनोहर ये क्या पूछ रहे हो, यश और कौशल्या की चुदाई? ये सारी कहानी कौशल्या और यश के चुदाई से ही तो शुरू हुई है।”
“धीरज, फिर तो जीजी जो बोली तो बोलती ही गई। “जीजी बोली, “मनोहर आज जो कुछ भी हुआ है – जो भी हमारी ग्रुप चुदाई शुरू हुई है ये सब इस पागल कौशल्या की वजह से ही हुआ है।”
“ये कौशल्या तो कुंवारी होते हुए ही यश का लंड अपनी फुद्दी में लेने के लिए मरी जा रही थी, मैंने ही इसे रोक रखा था ये कह कर कि लड़की की पहली चुदाई पर उसके पति का हक़ होता है। उसकी फुद्दी की सील उसके पति के लंड से ही फटनी चाहिए, वरना ये तो यश के लंड से अपनी फुद्दी की सील फड़वा लेती।”
“जीजी मनोहर को बता रही थी, “मनोहर, उस वक़्त तो ये कौशल्या मान गयी, मगर कल जब इसे मौका मिला तो इसने यश से चुदाई करवा ली। मुझे जब पता लगा कि इन जीजा साली ने चुदाई कर ली है, तो मैंने सोचा कि एक जीजा साली ने आपस में चुदाई कर ली है तो फिर मैं और तुम ही क्यों पीछे रहें – मैं और तुम भी तो जीजा साली ही हैं और इसी लिए मैंने ही इनको ग्रुप सेक्स के लिए राजी कर किया।”
“फिर जीजी बोली , “सच कहूं मनोहर मुझे तो तुम्हारा लंड फुद्दी में और गांड में लेने का बहुत मजा आया।”
“मनोहर यश से बोला, “यार यश जीजी का आईडिया तो बुरा तो नहीं था। मजे के मजे और घर की बात घर में। और सच पूछो यश तो जीजी को चोदने का तो मुझे भी बहुत मजा आया।”
“फिर तेरे तेरे मौसा जीजी से बोले बोले, “जीजी आप के तो चरण छूने का मन करता है जो आपने कौशल्या की फुद्दी की सील मेरे लंड से फटने के लिए बचा कर रखी। जीजी सच में ही कौशल्या के फुद्दी की सील मेरे लंड से ही फटी। ढेर सारा खून निकला था पहली रात की चुदाई में कौशल्या की फुद्दी में से। मेरी मम्मी तो ऐसी चुदाई से इतने नाराज हुई थी कि मुझे कमरे से ही ये कहते हुए बाहर कर दिया था, की ये क्या कहीं भागी जा रही थी।”
“जीजी बोली, ये चरन वरन छूने की बात भूल फुद्दी चूसने की बात करो।” मनोहर जीजी की बात पर हंस दिए।”
“मनोहर की मम्मी जी वाली बात पर मैंने हंसते हुए कहा, “मनोहर क्यों झूठ बोल रहे हो यार। मम्मी जी तो इस लिए नाराज हुई थी क्योंकि तुमने शराब पी कर मेरी चुदाई की थी और पहली ही रात को मेरे गांड का कचरा कर दिया था। जिस तरह मैं बैठी हुई थी, मम्मी जी तो एक मिनट में ही समझ गए थी की तुमने मेरी गांड के साथ क्या किया होगा। मम्मी जी तो मुझे गांड पर लगाने के लिए क्रीम भी दे कर गयी था।”
“माहौल बड़ा ही शानदार हो चुका था। मेरी बात पर सब जोर जोर से हंसते लगे।”
“सब की हंसी बंद हुई तो मनोहर बोले, “यश जीजी को चोदने का तो मजा ही आ गया, अब आगे से ये ग्रुप सेक्स कैसे किया करेंगे?”
“जवाब जीजी ने दिया। जीजी बोली, “अब आगे से ये होगा की हर शुक्रवार या तो तुम दोनों गुडगांव आ जाया करना या हम यहां आ जाया करेंगे, और दो रात ऐसी ही चुदाई किया करेंगे – तुम मेरे साथ और यश कौशल्या के साथ। और आगे से जब हम ग्रुप सेक्स किया करेंगे तो इकट्ठे एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर दूसरे के सामने किया करेंगे – अदल-बदल कर।”
“इस पर तेरे मौसा का लंड खड़ा हो गया था। तेरे मौसा ने लंड खुजलाया और बोले, “एक-दूसरे के सामने? ये तो बड़ा मजा रहेगा। मगर जीजी वो कब करेंगे?
“जीजी बोली, “मनोहर आज रात ही करेंगे। डालना तुम दोनों अपने लंड हमारी आगे-पीछे बदल-बदल कर – कभी तुम और मैं कभी यश और मैं – कभी यश और कौशल्या, कभी तुम और कौशल्या।”
[email protected]
अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-32