शुरुआत में वह थोड़ा झिझक रही थी। इंदौर के एक पारंपरिक माहौल से होने के कारण किसी अजनबी से शरीर की मालिश कराना उसके लिए थोड़ा असहज करने वाला विचार था। इसलिए उसने पहले तो साफ मना कर दिया। लेकिन जब मैंने उसकी थकी हुई आंखों और सुस्ती को देखा, तो थोड़ा और जोर दिया। थोड़ी देर की मान-मनौव्वल के बाद वह इस शर्त पर मान गई कि वह केवल एक ‘लेडी मसाजर’ से ही मसाज कराएगी।
मैंने मुस्कुराते हुए उसे पास खींचा और समझाते हुए कहा, “ललिता, तुम समझ नहीं रही हो। असली आराम और थेरेपी तो मेल मसाजर के हाथों में होती है। उनके हाथों का प्रेशर अच्छा और मजबूत होता है, जिससे मांसपेशियों का खिंचाव और पूरे दिन की थकान पूरी तरह मिट जाती है।”
मेरी यह बात सुन कर वह थोड़ी असहज और संकोची तो हुई, उसकी पलकें झुक गई, पर उसने इस बार मेरा कोई कड़ा विरोध नहीं किया। मौन रह कर ही उसने जैसे मेरी बात को स्वीकार कर लिया।
तभी मुझे ध्यान आया कि हम मॉल रोड से लौटते समय इंदौर के मशहूर पान की तर्ज पर वहां मिलने वाला एक खास ‘पलंग-तोड़ पान’ पैक करवा कर लाए थे, जो अपनी खास जड़ी-बूटियों और स्वाद के लिए जाना जाता है और जिससे शरीर में एक नई ऊर्जा और उत्तेजना का संचार होता है।
मैंने वह पान निकाला और ललिता की तरफ बढ़ा दिया। दिन भर की थकान के बाद कुछ मीठा और तरोताजा करने वाला खाने की चाह में उसने भी उस पान को बड़े चाव और स्वाद लेकर खाया। पान के अंदर मौजूद गुलकंद और विशेष मसालों का असर कुछ ही मिनटों में दिखने लगा; ललिता के चेहरे पर एक हल्की सी लाली छा गई, उसकी आंखों की थकान धीरे-धीरे एक अजीब सी चमक और भीतरी गर्माहट में बदलने लगी, और कमरे का तापमान अचानक जैसे थोड़ा और बढ़ गया।
पलंग-तोड़ पान का असर अब हम दोनों के शरीरों में एक अजीब सी भीतरी गर्माहट और सिहरन पैदा कर रहा था। थकान के बीच भी एक हल्की सी उत्तेजना रगों में दौड़ने लगी थी। हम दोनों ने जाने की तैयारी शुरू की। मैंने एक साधारण ग्रे रंग का लोअर और आरामदायक काली टी-शर्ट पहन ली। वहीं ललिता ने जब कपड़े बदलने के लिए सूटकेस खोला, तो उसकी उंगलियां कुछ पल के लिए ठिठकी।
उसने अंदर पहनने के लिए लाल रंग का एक बेहद आकर्षक, जालीदार ब्रा और पैंटी का सेट चुना। उसके ऊपर उसने हल्के नीले रंग का एक गाउन डाल लिया, जो केवल उसके घुटनों तक ही आ रहा था। गाउन के पतले कपड़े और उसकी सुडौल काया के उभार साफ तौर पर अपनी झलक दिखा रहे थे।
हम दोनों तैयार होकर होटल के ठीक सामने स्थित एक आलीशान और प्रतिष्ठित स्पा पार्लर पहुंचे। पार्लर के अंदर कदम रखते ही हल्की मद्धम रोशनी, धीमी संगीत की धुन और लेवेंडर व चंदन के तेल की भीनी-भीनी खुशबू ने हमारा स्वागत किया। वहां का शांत माहौल ही शरीर को थोड़ा आराम देने वाला था।
हम सीधे मुख्य काउंटर पर पहुंचे, जहां एक सलीके से तैयार रिसेप्शनिस्ट बैठी थी। मैंने आगे बढ़ कर उनसे ‘कपल मसाज’ के पैकेजों के बारे में पूछताछ की।
रिसेप्शनिस्ट ने हमारे हाव-भाव और ललिता की हिचकिचाहट को भांपते हुए बेहद पेशेवर और सामान्य तरीके से सुझाव दिया, “सर, हमारे पास कपल्स के लिए विशेष पैकेज हैं, जिसमें आमतौर पर आप दोनों के लिए फीमेल मसाजर की सुविधा दी जाती है, ताकि आपकी वाइफ पूरी तरह सहज महसूस कर सकें।”
लेकिन मेरे दिमाग में तो पहले से ही कुछ और, एक बिल्कुल अलग तरह का रोमांच चल रहा था। मैंने रिसेप्शनिस्ट की आंखों में देखते हुए पूरी दृढ़ता और बिना किसी हिचक के कहा, “नहीं, हमें सामान्य पैकेज नहीं चाहिए। हमें ‘क्रॉस-जेंडर मसाज’ करानी है। यानी मेरी वाइफ के लिए एक कुशल मेल मसाजर (पुरुष) होना चाहिए और मेरे लिए एक फीमेल मसाजर (महिला)।”
मेरी यह बात सुनते ही काउंटर पर खड़ी ललिता का चेहरा एक-दम से लाल हो गया। उसने अपनी नजरें झुका ली और घबराहट में अपने गाउन के किनारों को उंगलियों से भींचने लगी। रिसेप्शनिस्ट ने भी एक पल के लिए चौंक कर हमें देखा, लेकिन तुरंत खुद को संभालते हुए कंप्यूटर पर उपलब्धता चेक करने लगी।
रोमांच को और बढ़ाने के इरादे से मैंने अपनी अगली मांग सामने रखी, “और हां, हमारी एक और शर्त है। हम दोनों की मसाज एक ही कमरे में, एक साथ होनी चाहिए।”
इस बार काउंटर मैनेजर ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए बड़ी विनम्रता से अपनी असमर्थता जताई और कहा, “अत्यंत क्षमा चाहते हैं सर। इस वक्त वीकेंड और सीजन की वजह से हमारे सारे डबल-बेड वाले कपल सुइट्स बुक हैं। अभी हमारे पास केवल सिंगल-बेड वाले कॉटेज ही खाली हैं। इसलिए एक ही कमरे में आप दोनों की मसाज संभव नहीं हो पाएगी। आप दोनों को अलग-अलग कमरों में ही जाना होगा।”
मैनेजर की बात सुन कर ललिता ने राहत की सांस ली और मेरी तरफ इस उम्मीद से देखा कि शायद अब मैं यह विचार छोड़ दूंगा। लेकिन मेरे भीतर की उत्सुकता और बढ़ चुकी थी। कुछ पल सोचने का नाटक करने के बाद मैंने मैनेजर की तरफ देख कर सिर हिलाया और कहा, “ठीक है, हमें यह व्यवस्था भी मंजूर है। आप हमारे कमरे बुक कर दीजिए।”
पार्लर की उस मद्धम रोशनी में ललिता का संकोच और उसकी घबराहट साफ देखी जा सकती थी। उसकी सांसें थोड़ी तेज चल रही थीं और गाउन के भीतर उसकी लाल जालीदार ब्रा की रूपरेखा उसके दूदू के उभारों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी। वह पूरी तरह असहज थी कि अब कुछ ही देर में एक अजनबी पुरुष उसके इस खूबसूरत और सुडौल शरीर को छुएगा और उसकी मालिश करेगा।
आगे की कहानी, अगले पार्ट में।