पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-25
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
मौसी ने अपने चूतड़ों के नीचे दो तकिये रख कर फुद्दी ऊपर उठा दी। एक तकिया मौसी ने अपने सर के नीचे रखा और बोली, “आजा धीरज, अपना लंड मेरे मम्मों के बीच रख दे और अपने चूतड़ मेरे मुंह पर रख और फुद्दी चूस मेरी। देख कैसा मजा आता है। सच में ये तो चुदाई का अजीब ही तरीका था।
मैं मौसी के ऊपर उल्टा लेट गया। मौसी के चूतड़ों के नीचे दो तकिये थे, जिसके कारण, फुद्दी बिलकुल ऊपर हो गयी थी। मौसी ने टांगें फैलाई हुई थी जिससे फुद्दी थोड़ी सी खुल गयी थी। मैंने अपना खड़ा लंड मौसी के मम्मों के बीच रख दिया, अब मेरे चूतड़ मौसी के बिलकुल ही मुंह के ऊपर आ गए।
मौसी ने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ खोले, और थूक लगा कर अपने दो उंगलियां, मेरे चूतड़ों के छेद में डाल दी। मैं सोचने लगा, ये मौसी क्या कर रही थी? मगर मैंने फिर सोचा, देखते है मौसी कौन से अलग से मजे की बात कर रही थी।
मैं मौसी की फुद्दी चूसने चाटने लगा। मुझे तो इस सब में बड़ा मजा आ रहा था।
तभी मौसी ने अपनी उंगलियां मेरे चूतड़ों में से निकाली और हल्के से खुल गए चूतड़ों के छेद में अपनी जुबान घुसेड़ कर जुबान ऊपर नीचे करते हुई चूतड़ों का छेद चूसने चाटने लगी।
फिर मौसी ने मेरे चूतड़ छोड़ दिए और हाथ नीचे करके अपने मम्मे मेरे लंड के ऊपर आगे-पीछे करने लगी। मौसी के नरम मुलायम मम्मों के बीच मेरा लंड था। मम्मे आगे पीछे करने से लंड की ऊपर की स्किन भी आगे-पीछे हो रही थी। लंड का टोपा मम्मों के साथ हल्की-हल्की रगड़ खा रहा था।
अब सीन ये था कि मेरी जुबान मौसी की फुद्दी में थी, और मौसी की जुबान मेरे चूतड़ों के अंदर थी और मेरा लंड मौसी के मम्मों में था और मौसी अपने मम्मों को आगे पीछे करते हुए एक तरह से मेरे लंड के साथ वही कर रही थी जो लंड फुद्दी के अंदर करता है, या जो लड़के मुट्ठ मारते वक़्त करते हैं।
सब से ज्यादा मजा मुझे मौसी की चूतड़ चुसाई का आ रहा था। पहली बार कोइ मेरे चूतड़ों का छेद इस तरह चूस चाट रहा था। जल्दी ही मुझे लगा कि मेरा लंड अब किसी भी वक़्त पानी छोड़ सकता था। मुझे मजा सा आने लगा था। मैंने भी चूतड़ आगे-पीछे करने शुरू कर दिए। इससे मेरा लंड भी मौसी के मम्मों के बीच आगे-पीछे होने लगा।
और इसके साथ ही मरे लंड में से ढेर सारा गर्म चिकना पानी निकला और मौसी के मम्मों पर फ़ैल गया। मैंने मौसी के फुद्दी से मुंह हटाया और मैं जोर से बोला, “मौसी मादरचोद रंडी, निकल गया मेरे लंड से पानी – कैसे-कैसे मजे देती है साली मादरचोद मौसी।”
थोड़ी देर में मेरे लंड की पूरी गरम-गरम सफ़ेद गांधी रबड़ी मौसी के मम्मों पर निकल गयी।
मौसी ने अपना मुंह मेरे चूतड़ों से हटा लिया। मैं मौसी के ऊपर से उतरा – नीचे देखा तो ढेर सारा सफ़ेद-सफ़ेद लंड का पानी पूरे लंड और आस-पास और मौसी के मम्मों पर लगा हुआ था।
मैंने मौसी से कहा, “मौसी मैं बाथरूम जा कर लंड साफ करके आता हूं।”
मौसी बोली, “अरे कहां जा रहा है, इधर लेट मैं करूंगी तेरा लंड साफ़।”
ये बोल कर मौसी ने पहले तो अपने हाथ से अपने मम्मों और पेट पर से मेरे लंड का पानी पोंछा और चाट लिया। फिर मौसी मेरे पास आयी और मेरे लंड पर और आस-पास जितना भी लंड का चिकना लेसदार पानी था, सारा चाट गयी। जब ये सब कुछ हो गया तो मौसी मेरे के पास ही लेट गयी और पूछा, “कैसा मजा आया धीरज?”
मैं बोला, “मौसी मजा तो बहुत आया, मगर कैसे-कैसे मजे लेते हो आप लोग।”
फिर मैं बोला, “मम्मी-पापा भी यही कुछ करते होंगे।”
मौसी हंसते हुए बोली, “वही क्यों मुन्ना, सभी लोग मजे के लिए यही कुछ करते हैं।”
फिर कुछ रुक कर मौसी बोली, “धीरज आज कल तो बस रबड़ के लंड – डिलडो से ही काम चलाना पड़ता है।”
फिर मौसी थोड़ा रुक कर बोली, “डिलडो मेरे पास है वैसा ही जीजी के पास भी है।”
मैंने मम्मी का डिलडो तो देखा ही था। फिर भी मैंने मौसी से कहा, “दिखाना मौसी कैसा है।”
मौसी उठी और बोली, “दिखाती हूं।”
मौसी अलमारी में से जो निकाल कर लाई वो रबड़ का वाइब्रेट करने वाला लंड था – एक-दम बिलकुल वैसा ही जैसा मम्मी के पास था – उतना ही लम्बा, उतना ही मोटा।
मैं सोच रहा था यहां तक तो ठीक है। मम्मी भी ऐसे ही रबड़ के लंड से काम चलाती होगी। मगर सवाल ये था कि किसी घरेलू औरत के लिए इस तरह के रबड़ के लंड खरीदना या मंगवाना ये कैसे मुमकिन है?
मैंने मौसी से पूछ ही लिया, “मगर मौसी, आपने ये डिलडो (रबड़ का लंड) मंगवाया या खरीदा कहां से?”
मौसी बोली, “धीरज ये मैंने नहीं मंगवाया। तेरे मौसा ने ही ला कर दिया है। मैंने तुझे बताया ही है तेरे मौसा का लंड खड़ा तो होता ही है, फुद्दी के अंदर भी जाता है, बस लंड में सख्ती नहीं आती इसलिए रगड़ाई वाली चुदाई नहीं हो पाती। अब तेरे मौसा ही इसे मेरी फुद्दी और गांड में डालते हैं और मुझे मजा देते हैं। ये फुद्दी या गांड के अंदर जा कर वाइब्रेट भी करता है, बस ऐसे काम चल रहा हैं।
फिर मौसी कुछ रुक कर दुबारा बोली, “धीरज, जीजी के लिए भी ऐसा ही एक डिलडो मैंने मंगवाया था। जीजी की प्रॉब्लम भी मेरी प्रॉब्लम जैसी ही हैं। जीजा जी के लंड में भी वो पहले वाली सख्ती नहीं हैं। वो भी ढंग से जीजी को नहीं चोद पाते।”
मौसी ने ही मम्मी के लिए भी ये रबड़ का लंड मंगवाया था, ये मेरे लिए नई बात थी। मम्मी को रबड़ का लंड मौसी ने ला कर दिया था। मम्मी ने इस बारे में मुझे को कुछ भी नहीं बताया था, या फिर शायद बताने का मौक़ा ही नहीं मिला।
शाम होने वाली थी। माधवी के आने का टाइम हो रहा था। मैंने मौसी से पूछा, “मौसी वो जैल पडी है? अगर माधवी का गांड चुदवाने का मन हो गया तो कैसे लंड जाएगा उसकी गांड में? उसकी गांड का तो छेद ही बड़ा टाइट है।”
मौसी बोली, “देखती हूं होनी तो चाहिए। तेरे तो मौसा ये वाईब्रेटर लंड मेरी गांड में जैल लगा कर ही डालते हैं।”
मौसी जैल क्रीम की टयूब ढूंढ कर ले आयी हुए और पकड़ा दी। मौसी से टयूब तो मैंने ले ली, मगर मेरे दिमाग में एक कीड़ा घूम रहा था। मम्मी के लिए ऐसा रबड़ का लंड मौसा जी ने ही ला कर दिया होगा, तो क्या मौसी ने मौसा को मम्मी पापा की प्रॉब्लम के बारे में भी बता दिया होगा?
मैंने मौसी से पूछा, ”मौसी एक बात बताएंगी?”
मौसी बोली, “पूछो बेटा क्या बात है?”
मैंने कहा, “मौसी आप कह रही हैं ऐसा ही एक वाईब्रेटर आपने मम्मी को भी दिया हैं। ये तो पक्का है अपने मौसा जी से ही वो मंगवाया होगा। मौसा ने पूछा नहीं ये दूसरा वाईब्रेटर किसके लिए है?”
मेरी इस बात पर मौसी एक-दम संजीदा हो गई और उसने मेरी बात का कोइ जवाब नहीं दिया। मुझे समझ नहीं आया कि मैंने ऐसा भी क्या पूछ लिया जो मौसी एक-दम संजीदा हो कर चुप हो गयी हैं।
कुछ देर मौसी चुप ही रही, और फिर बोली, “धीरज, जीजी – तेरी मम्मी मुझसे दो साल बड़ी जरूर हैं, मगर हम एक-दूसरी की बहनें होने से ज्यादा सहेलियां है। हमने कभी भी एक दूसरी से कोइ बात नहीं छुपाई।” ये कह कर कौशल्या फिर चुप हो गयी।
मैंने ने सोचा शायद अब मौसी कहेगी कि मम्मी ने पापा के लंड वाली प्रॉब्लम मौसी को बताई होगी, और मौसी ने मौसा जी से रबड़ का लंड मंगवा लिया होगा। मगर यहां तो जो मौसी ने मुझे बताया, उससे मेरा तो दिमाग़ ही हिल गया।
मौसी धीरे से बोली, “धीरज, एक बात बताऊं?”
मौसी जिस राजदार तरीके से बात कर रही थी, वो देख कर मैं हैरान था। मैं मौसी की तरफ देखने लगा।
आखिर को मौसी बोली, “बेटा धीरज, मैं तेरी मम्मी सुधा जीजी, यश जीजा जी और तेरे मौसा मनोहर – हम ग्रुप सेक्स करते हैं। ग्रुप सेक्स मतलब इकट्ठे चुदाई, – अदल-बदल कर। मैं जीजा जी से चुदवाती रही हूं और जीजी तेरे मौसा मनोहर से चुदाई करवाती है।
मुझे एक पल तो समझ ही नहीं आया कि मौसी ये बोल ही क्या रही थी। फिर धीरज ने पूछा, “मौसी ये क्या कह रही हो? आप और पापा-मम्मी और मौसा जी? इकट्ठे चुदाई? मतलब एक ही बिस्तर पर अदल-बदल कर?”
कौशल्या बोली, “हां धीरज, ज्यादातर इकट्ठे चुदाई एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर अदल-बदल कर। शुरू में एक दो बार ये अदल-बदल वाली चुदाई अलग-अलग कमरों में हुई। मतलब मैं और जीजा जी एक कमरे में, जीजी और मनोहर तेरे मौसा दूसरे कमरे में। मगर फिर जल्दी ही ये सब एक ही कमरे में होने लग गया – एक-दूसरे के सामने। और धीरज यहीं तक नहीं यश जीजा जी और मनोहर एक-दूसरे के सामने हमारे बारे ऐसी ऐसी गंदी-गंदी सेक्सी बातें बोलते हैं हमें नीचे चुदाई करवाते-करवाते भी हंसी भी आती और हैरानी भी होती है।”
मौसी बोल रही थी, “और धीरज ये कोइ हाल ही में ही शुरू नहीं हुआ, ये सब मेरी शादी के छह महीने के बाद से ही शुरू हो गया और अब तक – आज तक भी चल रहा है। जब से तेरे पापा और तेरे मौसा जी के लंड ढीले हुए हैं, उन्हें मालूम है कि उनके लंड फुद्दी में चले तो जाते हैं मगर सख्ती ना आने के कारण फुद्दीयों में रगड़े नहीं लगा पाते – तभी उन्होंने ये रबड़ के लंड ला कर दिए हैं। अब जब भी हम इकट्ठे चुदाई करते है, वो दोनों ये लंड लो हमारी फुद्दीयों में डाल कर हमें मजा देते हैं।”
मौसी ने मेरे के लंड पर हाथ रखा और बोली, “धीरज अब जो मजा मर्द के असली सख्त लंड से चुदाई का आता है वो इन रबड़ के लंडों से नहीं आता। यही कारण है सुधा जीजी ने तुझ से चुदाई करवाई, और अब मैं करवा रही हूं।”
पहले तो मैं परेशान सा हो गया। ग्रुप सेक्स? पापा-मम्मी, मौसी-मौसा का ग्रुप सेक्स? मौसी की शादी के छह महीने बाद से – और अब तक भी चल रहा है? लेकिन जल्दी ही मेरे दिमाग से सारा जाला साफ़ हो गया।
मैंने सोचा, अगर पापा-मम्मी, मौसी-मौसा ये चारों ग्रुप सेक्स कर रहे थे, तो मैं ही क्या कर रहा था? मैं भी तो अपनी मम्मी सुधा, सगी बहन दिव्या, मौसी कौशल्या और मौसेरी बहन माधवी को चोद रहा था। मम्मी अपनी बेटी के साथ मजे ले रही थी। मां-बेटी दोनों इकट्ठे – एक-दूसरे के सामने – मुझसे चुदाई करवा रही थी। यहां तक कि उसकी मौसी मुझे अपनी बेटी को चोदने दे रही थी। इतना कुछ हो रहा था तो क्या हो गया अगर मम्मी ने मौसा जी से चुदाई करवा ली और मौसी ने पापा से चुदाई करवा ली।
शायद मम्मी ने भी यही सोच कर “ये” मौसी को सब कुछ बता दिया होगा।
मैं अब नॉर्मल हो चुका था। मैंने मौसी से पूछा, “मगर मौसी आप ये सब करते कैसे हो, मेरा मतलब कहां?”
मौसी बोली, ये प्रोग्राम यहां हमेशा हमारे घर पर ही बनता था। बनता था क्या अभी भी यहीं बनता है। जीजा जी और जीजी शुक्रवार या शनिवार को आ जाते और सोमवार सुबह जाते। दो-तीन दिन मौका मिलते ही चुदाई शुरू हो जाती है और आधी-आधी रात तक चलती है।”
मौसी आगे बोली, “और धीरज, अगली सुबह जब इकट्ठे डाइनिंग टेबल पर बैठते है जीजा जी और तेरे मौसा एक-दूसरे को चुदाई की कहानी सुनाते हैं और हम सुन-सुन कर हंसती रहती है। अब हमें एक-दूसरे से शर्म तो आती ही नहीं। डाइनिंग टेबल पर चुदाई की बातें सुनाते-सुनाते लंड निकाल लेना, किसी के भी मुंह में डाल देना तो अब बहुत ही मामूली बात हो चुकी है।”
अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-27