पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-24
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
मैं फैक्ट्री से वापस आया तो माधवी घर पर नहीं – और मौसी चुदाई के लिए तैयार बैठी थी।
मौसी मुझे लगभग घसीटती हुए बोली, “आजा आज बहुत टाइम है। आज ही देती हूं तुझे गांड चुदाई का मजा और साथ ऐसा मजा जो तूने अब तक नहीं लिया होगा। हुए उसके बाद रात को माधवी की टाइट फुद्दी चोद।”
फिर मौसी हँसते हुए बोली, “धीरज आज तेरे मजे ही मजे हैं।”
जिस तरह मौसी खुल कर चुदाई करवाती थी, मौसी को चोदने में अब मुझे भी मजा आने लगा था। चलते-चलते मैंने पूछा, “मौसी आपके मम्मी से बात हुई?”
मौसी ने हंसते हुए बोली, “हुई मेरे चोदू मुन्ना, बात हुई।”
मैंने फिर पूछा, “फिर मौसी, क्या बोली मम्मी?”
कौशल्या ने हंसते हुए जवाब दिया, “धीरज, सुधा जीजी ने क्या बोलना था। जीजी बोली जितना धीरज का लंड मेरा और दिव्या का है, उतना ही उसका लंड तेरा और माधवी का भी है। मजे लो धीरज के लम्बे मोटे लंड के – ऐसा लंड बहुत कम मर्दों का होता है – और धीरज तो दो-दो ढाई-ढाई घंटे की चुदाई की बाद भी नहीं झड़ता।”
फिर मौसी बोली, “धीरज अब मस्त बेधड़क होके चोद मां बेटी को। बस धीरज इतना ध्यान रखना, माधवी को ये पता नहीं चलना चाहिए की तू मुझे भी चोद रहा है।”
तब तक हम दोनों कमरे में पहुंच गए।
कमरे में पहुंचते ही मौसी ने अपने कपड़े उतार दिए और मुझे पकड़ कर मेरे मुंह के साथ अपना मुंह लगा दिया। अब मुझे मालूम ही था कि अब मुझे क्या करना था।
मैंने अपनी जुबान मौसी के खुले मुंह में डाल दी। मौसी मेरी जुबान चूस रही थी और मौसी हाथ से मेरी पेंट की ज़िप खोल रही थी। मौसी को पेंट की ज़िप खोलने में दिक्कत हो रही थी। मैंने अपनी पेंट के बटन ही खोल दिए और मेरे पेंट नीचे ढलक गयी। मौसी ने मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया।
नंगी मौसी का हाथ लगते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मौसी ने अपना मुंह मेरे मुंह से अलग किया और बोली, “आजा धीरज, कर अपनी मौसी की चुदाई।”
ये बोल कर मौसी जा कर बिस्तर पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर बोली, “आजा मेरे राजा, ये देख ये फुद्दी बुला रही है तुझे, बाढ़ आयी हुई है इसमें। आजा मेरे राजा, अब देर मत कर।”
मौसी कौशल्या मेरा का लंड लेने में कुछ ज्यादा ही उतावली हो रही थी। मैंने भी अपने बाकी के कपड़े उतारे और सीधा जा कर मौसी के ऊपर चला गया। बिना देरी किये मैंने लंड मौसी की फुद्दी में डाला, मौसी के होठ अपने होठों में लेकर मैं मौसी की चुदाई करने लगा। जल्दी ही मौसी मस्त हो गयी और मेरा लंड भी एक-दम सख्त हो गया।
मैंने मौसी के होंठ छोड़े और मौसी की फुद्दी जोरदार रगड़ाई वाले धक्के लगाते हुए बोला, “ले मेरी जान, ये रहा तेरे धीरज का लौड़ा तेरी फुद्दी में – मेरी रानी ले, ले मेरी जान ले, आज तबीयत से रगडूंगा तेरी टाइट फ़ुद्दी।”
मौसी जोर से बोली, “क्या बोल रहा है मादरचोद धीरज, मेरी जान …… मेरी रानी। साले कोइ ढंग की बात तो बोल, जिससे फुद्दी गर्म हो।”
मौसी बोली, “बोल ले मेरी कुतिया मौसी, तेरी मां का भोसड़ा मादरचोद मौसी, साली रंडी दुनिया भर की चुदाईयां करवा चुकी है और अब भी ऐसे नखरे कर रही है जैसे पहली बार चूत मरवा रही है – ऐसे पूरा लंड ले लेती है जैसे कभी लंड लिया ही ना हो। साली मादरचोद चुदक्कड़ रंडी मौसी, आज देख तेरी फुद्दी की क्या हालत करता हूं। मादरचोद कुतिया तेरी फुद्दी का कचरा ही कर दूंगा। एक रखैल एक रंडी की तरह चोदूंगा तुझे – जब देखो फुद्दी खोल कर चुदाई के लिए तैयार रहती है।”
“धीरज अगर तुम ये सब बोलो तो मेरा चुदाई का मजा दुगना हो जाएगा। एक बार बोलो धीरज, बस एक बार।”
मौसी अभी ये सब बोल कर ही हटी थी, कि मैं शुरू हो गया, “तेरी मां का भौंसड़ा मादरचोद कुतिया, चुप-चाप फुद्दी चुदवा, आज की रात तू रंडी है मेरी, पैसे खर्च किये हैं मादरचोद तुझे चोदने के लिए। साली कौशल्या, पूरी रात रगडूंगा तुझे तो आज, अभी तो तेरी फुद्दी में डाला है रंडी, अभी तो तेरी गांड भी फाड़नी है। साली दोनों बहने एक जैसी चुदक्कड़ हैं, लंड पूरा लेती हैं और चीखती तो ऐसे है जैसे पहली बार चूत मरवा रही हैं। तेरी तरह ही तेरी बहन भी फुद्दी में पूरा लंड लेती है, ऐसे चुदाई करवाती है जिसे सालों से चुदाई हुई ही ना हो।”
अभी मेरे मुंह से फूल झड़ ही रहे थे कि मौसी ने जोर से चूतड़ ऊपर किये एक जोर की सिसकारी ली, “आअह धीरज बेटा निकल गया मेरा। मजा आ गया बेटा आह आह धीरज, बड़ा मजा आ रहा है आह धीरज।” और इसके साथ ही मौसी ढीली हो गयी।
ढीली होने के बावजूद मौसी ने ना तो मेरी कमर से टांगें हटाई और ना ही मुझे छोड़ा। पांच सात मिनट भी नहीं हुए थे कि मौसी मेरे कान में फुसफुसाई, “धीरज बड़ा ही मस्त लंड है तेरा। पूरी फुद्दी भरी पड़ी है तेरे लंड से। और धीरज तू बोलता भी मस्त है और चोदता भी बड़ा मस्त है। बड़ी किस्मत वाली है तेरी मम्मी जो ऐसे लंड से चुदाई करवाती है, और बड़ी किस्मत वाली हैं दिव्या और माधवी जिनकी पहली चुदाई ही ऐसे मस्त लंड से हुई है।”
फिर मौसी बोली, “बेटा एक बार फुद्दी का मजा और देदे फिर आज ही गांड चुदवाऊंगी। आज माधवी के आने से पहले पहले पूरी चुदाई कर दे मेरी, फिर रात को तू माधवी के पास चले जाना। तेरे इस खूंटे जैसे लंड की चुदाई का असली मजा तो माधवी और दिव्या जैसी जवान लड़कियों को ही आना चाहिए।”
ये बोल कर मौसी ने अपना मुंह खोल कर मेरे मुंह पर लगा दिया। मौसी के चूतड़ ऊपर नीचे होने लगे। मौसी को एक और चुदाई चाहिए थी।
मैंने मौसी को बाहों में जकड़ लिया और लंड के धक्के लगाने शुरू कर दिए। जल्दी ही मौसी की फुद्दी फिर से गरम हो गयी और वो चूतड़ हिलाने घूमने के साथ-साथ कुछ भी बोलने लगी। मौसी के साथ-साथ मैं भी वैसे ही बातें बोलने लग गया। दोनों बस बोलते जा रहे थे। जल्दी ही मौसी ने एक जोरदार सिसकारी ली, “आह धीरज मादरचोद, साले फिर छोड़ने लगी मेरी फुद्दी पानी। ये तेरा लौड़ा है या क्या है, क्या रगड़े लगते हैं फुद्दी में। लगा, साले दो चार करारे धक्के लगा, फाड़ मेरी फुद्दी।”
ये सुन कर मैंने पूरा लंड फुद्दी में से निकाला और झटके के साथ वापस मौसी की फुद्दी में डाल दिया। मौसी बोली, “आअह धीरज क्या मस्त डाला लंड मेरे बेटे, एक-दो बार और डाल ऐसे ही।”
मैंने फिर से लंड पूरा निकाला और झटके के साथ फुद्दी में डाला, इस धक्के के साथ ही मौसी की फुद्दी पानी छोड़ गयी। मौसी जोर से बोली, “अरे धीरज निकल गया, छोड़ गयी मेरी फुद्दी पानी, मजा आ गया साले मुझे। क्या मस्त चोदता है तू।”
मौसे इस मजे के बाद ढीली हो गयी और अपनी टाँगें मेरी कमर से हटा ली। मतलब था चुदाई का ये दौर अब खत्म हो गया था। मैंने खड़ा लंड मौसी की फुद्दी में से निकाला और पलट कर मौसी के पास ही लेट गया। दस मिनट हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे। फिर मौसी उठी और मेरा खड़ा लंड चूसने के बाद बोली, “चल धीरज, उठ जा, अब गांड चुदवाऊंगी तुझसे। तुझे भी बहुत बेसब्री है मेरी गांड चोदने की, और मुझे भी बहुत बेसब्री है तेरा मोटा लंड गांड में लेने की।आज तेरी ये ख्वाहिश भी पूरी कर दूंगी। चल उठ जा मेरे राजा, आजा।”
इतना बोल कर मौसी बेड से उठी और जा कर सोफे पर उल्टा लेट गयी। हाथों से चूतड़ चौड़े करके मौसी बोली, “ले धीरज, ये रही तेरी मौसी की गांड, अब डाल अपना लंड इसमें और गांड के टाइट छेद की रगड़ाई के मजे ले।”
मैं भी बहुत बेसब्री से इस पल का इंतज़ार कर रहा था। मैं उठा और मौसी के पीछे चला गया। नीचे बैठ कर मौसी के चूतड़ खोल कर गांड का छेद थोड़ा चाटा और फिर खड़ा हो कर थूक से मौसी की गांड का छेद और अपना लंड गीला किया और एक ही बार में पूरा लंड मौसी की गांड में बिठा दिया। मौसी हल्का सा चिहुंकी, और बोली, “अरे धीरज बेटा आराम-आराम से कर। इतनी जल्दी क्या है? मस्त मजा ले गांड चुदाई का, कोइ जल्दी नहीं। वैसे भी तेरी मौसी की गांड है, किसी रंडी की नहीं, फाड़ेगा क्या?”
मैंने बस इतना ही कहा, “हां मौसी फाड़ूंगा, जैसे मौसा जी ने फाड़ी थी सुहागरात वाली रात को।” इतना बोल कर मैंने ने मौसी को कमर से पकड़ लिया और लंड के लम्बे लम्बे धक्के मौसी की गांड में लगाने लगा।
इस बार मौसी ने नहीं कहा, “अरे धीरज बेटा आराम-आराम से कर इतनी जल्दी क्या है? मस्त मजा ले गांड चुदाई का, कोइ जल्दी नहीं। वैसे भी तेरी मौसी की गांड है, किसी रंडी की नहीं, फाड़ेगा क्या?”
मतलब मौसी भी गांड रगड़ाई का पूरा मजा लेती थी। आखिर गांड चुदाई की शौक़ीन भी तो थे दोनों मौसा और मौसी। मौसी की गांड का छेद मम्मी की गांड के छेद जैसा टाइट नहीं था और दिव्या और माधवी की गांडे तो अभी थी ही कुंवारी। फिर भी मेरे लंड पर लंड पर रगड़े तो लग ही रहे थे।
मैंने मौसी से कहा, “मौसी गांड चुदाई का भी अपना मजा है, बड़ा मजा आ रहा है आपकी गांड चोदने का।”
मौसी बोली, “बेटा अभी असली मजा तो तुझे देना है मैंने, तेरे चूतड़ों का छेद चाट कर। बस इतना ध्यान रखना लंड का पानी गांड में ना निकल जाए। तेरे लंड का पानी आज कहीं और निकलेगा। चल तू गांड चोदता रह, मैं मजा लेती हूं, चूत का दाना रगड़ कर।”
इतना कह कर मौसी ने एक हाथ नीचे किया और अपनी फुद्दी का दाना रगड़ने मसलने लगी। मौसी की गांड में मेरे लंड के धक्के चालू ही थे।
पांच मिनट में ही मौसी की फुद्दी गरम हो गयी। मौसी बोली, “धीरज जरा जोर-जोर के धक्के लगा बेटा। मेरी फुद्दी पानी छोड़ने वाली है। गांड के छेद और फुद्दी के छेद में कोइ दूरी तो होती नहीं। गांड चुदाई का मजा तो मैं ले ही चुका था। मौसी की कमर को पकड़े-पकड़े ही मैंने लंड मौसी की गांड में से निकाल कर उसकी फुद्दी में डाल दिया और बोला, “ले मौसी मेरी जान, अच्छे से मजा ले फुद्दी का। लम्बे मोटे लौड़े लेने वाली तेरी इस फुद्दी का उंगली से क्या होगा।” ये कह कर मैंने मौसी की फुद्दी चोदनी चालू कर दी।
जल्दी ही मौसी की फुद्दी पानी छोड़ गई।
गांड और फुद्दी चुदाई से फारिग होकर मैं और मौसी बिस्तर पर पास-पास ही लेट गए।
मौसी बोली, “धीरज, तेरे मौसा का महीने दो महीने में साऊथ का चक्कर तो लगता ही रहता है। तेरे पास टाइम हो तो आ जाया कर और मां-बेटी दोनों की फुद्दीयों में लगी आग बुझा जाया कर। पहले तो खाली मेरी ही फुद्दी लंड मांगती थी, अब तो माधवी भी लंड के मजे ले चुकी है – उसकी फुद्दी भी तो अब लंड मांगेगी। माधवी को तू ऐसे ही मस्त चोदता रहेगा तो इधर-उधर लंड नहीं ढूंढेगी।”
मैंने भी लेटे-लेटे मौसी की फुद्दी में उंगली डाली और कहा, “ठीक है मौसी आता रहूंगा। माधवी की बात नहीं है। माधवी तो गुड़गांव भी आती रहती है। उसे तो मैं वहां भी चोद दूंगा। दिव्या को भी तो लंड चाहिए अब। मम्मी तो अब मुझसे चुदाई करवा ही रही है, अब असली बात तो आपकी फुद्दी की है। आपकी फुद्दी को भी तो लंड चाहिए। आपकी फुद्दी की आग ठंडी भी तो ठंडे होनी चाहिए।”
मौसी ने मेरे होंठ चूसते हुए कहा, “मेरा राजा बेटा। चल उठ अब देती हूं तुझे तेरे चूतड़ चाट कर मजा। ऐसा मजा तूने आज तक नहीं लिया होगा।”
मौसी उठी और अपने चूतड़ों के नीचे दो तकिये रख कर फुद्दी ऊपर उठा दी। एक तकिया मौसी ने अपने सर के नीचे रखा और और बोली, “आजा धीरज, अपना लंड मेरे मम्मों के बीच रख दे और अपने चूतड़ मेरे मुंह पर रख और फुद्दी चूस मेरी। देख कैसा मजा आता है।”
सच में ये तो चुदाई का अजीब ही तरीका था। मजा लेने का ये बिलकुल अनोखा तरीका।
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