पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-26
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
धीरज के पापा यश, मम्मी सुधा, मौसा मनोहर और मौसी कौशल्या तो खूब मजे करते थे। ग्रुप चुदाई में हर वो काम करते थे जो मजे के लिए किया जा सकता था।
मौसी आगे बोली, “धीरज इन चुदाईयों जब हम इकट्ठे बैठते थे या बैठते हैं तो समझो कमाल की ही बातें होती हैं। तेरे मौसा मनोहर – जीजा जी से पूछते हैं, “और भाई यश कैसी रही रात, कैसी रही साली कौशल्या के साथ चुदाई?”
“और यश जीजा जी बोलते हैं, “मस्त रही मनोहर, चार बार चोदा मैंने कौशल्या को। मस्त चुदाई करवाती है कौशल्या। फुद्दी भी मस्त है, खूब पानी छोड़ती है। मजा आ जाता है चूसने का। फिर जीजा जी ने मुझसे कहते है, “तुम ही बताओ कौशल्या कैसी रही चुदाई?”
“मैं भी हंसती हुई बताती, “मस्त रही मनु। जाते ही कपड़े तो हमने उतार ही दिए। मैं सोफे पर बैठे थी और जीजा जी खड़ा लंड लेकर मेरे सामने आ गए। मैंने जीजा जी का लंड फिर से मुंह में लिया – जीजा जी का लंड तो एक-दम फुंफकारे मारने लगा। बस फिर क्या था, जीजा जी ने मेरी फुद्दी चूसी, चूतड़ चाटे और आधी रात तक चार बार मेरी चुदाई की। मजा ही आ गया।”
“और धीरज वो दोनों यहीं नहीं रुकते। तेरे मौसा मनोहर अपने कहानी बताते है – यार यश, सुधा जीजी भी मस्त चुदाई करवाती है मैंने तो जीजी की गांड भी चोद दी एक बार। जीजी की गांड बड़ी ही टाइट है, बड़ा मजा आता है चोदने का।”
“फिर वो आपस में कहते है कुछ भी कह लो, ये अदला-बदली की चुदाई है तो बढ़िया यार। कभी छुट्टियां आएं तो पांच-सात दिनों का प्रोग्राम बनाओ, मजा आ जाएगा अदला-बदली की इकट्ठी चुदाई का।”
जीजी बोली, “अदला-बदली की इक्कठी चुदाई? इसमें इतना क्या सोचना है, जब मन करेगा तभी कर लेंगे।”
“एक दिन डाइनिंग टेबल पर बैठे ये सेक्स चुदाई की बातें हो रहीं थी कि तेरे मौसा मनोहर ने लंड फिर मौसा ने अपना लंड पायजामें में ठीक करते हुए कहा, “यश मेरा तो लंड खड़ा ही होने लगा है।”
“यश जीजा जी जीजी से बोले, सुधा जाओ, मनोहर के लंड का इलाज करो।”
जीजी बोली, “तुम लोगों की बातें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी तो वैसे ही गर्म हुए पड़ी है।”
फिर जीजी मेरी तरफ देखते हुई बोली, “और कौशल्या तुम्हारी फुद्दी का क्या हाल है?”
“मैं भी बोली, “जीजी मेरी फुद्दी तो गरम ही रहती है, ठंडी होती ही कहां है।”
मेरी बात सुन कर सब हंस दिए। “फिर मैंने यश जीजा जी की तरफ देखते हुए पूछा, “क्यों जीजा जी चोदना है एक बार और?”
जीजा जी बोले, “अरे कौशल्या जब तुम्हारे फुद्दी गर्म ही है तो सोचना क्या – चलो, मेरा लंड भी तैयार है। तुम्हारी फुद्दी की तरह ये भी हमेशा तैयार ही रहता है – चाहो तो अपनी जीजी से पूछ लो।”
इस पर सब लोग एक बार और हंस दिए।
तेरे मौसा बोले, “तो फिर चलो एक ही कमरे में, आज ही कर लेते हैं अदला-बदली की इकट्ठी चुदाई। क्या ख्याल है जीजी।”
जीजी बोली, “मुझे तो इसमें कभी ऐतराज़ ही नहीं था, चलो”
“बस फिर क्या था। उस दिन हम चारों एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर आ गए और मेरे और जीजी की खूब अदल-बदल कर चुदाई हुई – जीजा जी और मैं, मनोहर और सुधा जीजी। फिर मैं और मनोहर, सुधा जीजी और जीजा जी।”
“तब तक एक-दूसरे के सामने चुदाई की बातें कर कर के हमारी शर्म खत्म हो ही चुकी थी। हमने एक-दूसरे के साथ अदल-बदल कर खूब मस्त चुदाई करवाई, और जो रही सही शर्म थी वो भी जाती रही।”
“उस दिन की चुदाई में तो कभी जीजा जी का लंड मेरी फुद्दी मैं और तेरे मौसा का लंड जीजी की फुद्दी में। फिर मनोहर मेरे ऊपर और जीजा जी जीजी के ऊपर। लंड कभी फुद्दी में, कभी गांड में और कभी मुंह में। क्या मस्त चुदाई थी।”
“धीरज इस इकट्ठी चुदाई में फुद्दी गांड मुंह में सब जगह लंड डल जाता। तेरे मौसा मनोहर को गांड चुदाई का बहुत शौक है। मेरी गांड तो उन्होंने पहली रात को ही रगड़ दी थी। उधर जीजा जी जीजी की गांड चोदते नहीं इसलिए जीजी के गांड का छेद मस्त टाइट है। मनोहर को ये बात मालूम है, इसलिए उसे जीजी की टाइट गांड में लंड डालने में बहुत मजा आता है। जीजी को भी गांड चुदाई का शौक नहीं, मगर मनोहर का मन जीजी की गांड चोदने का हो जाए तो जीजी कभी भी मनोहर को गांड चोदने से मना नहीं करती।”
“एक दिन तो मनोहर जीजी की गांड चोद रहा था और यश जीजा जी मेरी गांड – अजीब ही सीन था। हम दोनों बहनें चूतड़ उठा कर सोफे पर लेटी हुई थी और जीजा जी और तेरे मौसा पीछे से हमारी गांड चोद रहे थे, अदल-बदल कर। तीन घंटे चली इस अदला-बदली वाली चुदाई के बाद चारों फिर डाइनिंग टेबल पर आ गए। यश जीजा जी ने जीजी से पूछा, “सुधा मनोहर का लंड गांड में लेने का मजा आया?”
जीजी जो बोली वो मस्त बोली, “यश, गांड फुद्दी की चुदाई की बात तो छोड़ो, असल बात तो ये है कि ये अदल-बदल वाली पूरी चुदाई है ही मस्त। और तुम लोग जो बोलते हो – “यार यश, सुधा की गांड बहुत टाइट है भाई, जरा जीजी की गांड की तरफ भी ध्यान दिया कर। और यश तुम ही कौन से कम हो, तुम भी तो कह ही देती हो, भाई मनोहर सुधा की गांड का ध्यान तू ही रखा कर, मुझे कौशल्या की फुद्दी चूसने में ही बड़ा मजा आता है – वैसे गांड चुदाई की शौक़ीन कौशल्या गांड चुदाई मस्त करवाती ही है।”
“गांड चुदाई के दौरान कौशल्या जो चूतड़ आगे-पीछे करती है, मजा ही आ जाता है।” जीजा जी की इस बात पर तेरे मौसा बोले, “वैसे यार यश एक बार कौशल्या की गांड चुदाई जीजी को भी दिखानी पड़ेगी। जीजी अभी ये नहीं करती।”
मैंने मौसी की बातें सुन कर कहा, “मौसी आप तो पूरा मजा लेते हो चुदाई का। अच्छा मौसी ये बताईये, वो जो आपने मेरे चूतड़ चाट कर मुझे मजा दिया – आप लोग ये भी करते ही होंगे – ये कैसे करते हो आप लोग?”
मौसी बोली, “बिल्कुल करते हैं, और बहुत करते हैं – लेकिन बारी-बारी से, और वो इसलिए जब मैं मनोहर के चूतड़ चाटती हूं और मनोहर के लंड से जो पानी मेरे मम्मों पर और मनोहर के लंड पर गिरता है वो जीजी चाट कर साफ़ करती है। और जब जीजी जीजा जी के चूतड़ चाटती है और जीजा जी के लंड से पानी निकलता है और जीजी के मम्मों और जीजा जी के लंड पर गिरता है वो मैं चाट कर साफ़ करती हूं। चाट कर मम्मों और लंड की सफाई के चक्कर में ये काम हम बारी-बारी से करते हैं।”
मैं अभी भी सोच रहा था कैसे कैसे मजे लेते हैं ये लोग।
मैंने पूछा, “लेकिन मौसी, आप कह रही हैं आपकी शादी के छह महीने के बाद ही ये सब शुरू हो गया। ये तो बताईये ये सब शुरू कब और कैसे हुआ?”
मौसी बोली, “क्या बात है धीरज, हमारी ग्रुप चुदाई की कहानी में मजा आ रहा है? फिर खड़ा हो रहा है क्या?”
मैंने अपना लंड खुजलाते हुए कहा, “मौसी मजा तो आएगा ही, आप लोग आपस में चुदाई ही ऐसे मस्त करते हो। आपकी कहानी तो है ही बड़ी सेक्सी, ये तो किसी का भी लंड खड़ा कर देगी।”
मौसी खुल कर हंसते हुए बोली, “ठीक है सुनाती हूं, मगर याद रखना आज रात की तेरी असली चुदाई जवान माधवी के साथ ही होनी है, इसलिए इस वक़्त अपने लंड पर काबू रखना – ये जोश में आ कर तेरा ये जम्बो साइज़ का लंड कहीं मेरी फुद्दी ही ना ढूंढने लग जाए, और अगर इसने मेरी फुद्दी ढूंढ भी ली और उसके अंदर चला भी गया तो भी ध्यान रखना इसका गर्म-गर्म शहद माधवी की फुद्दी की लिए संभाल कर रखना।”
मैं लंड को हिलाते हुए बोला, “मौसी इसकी फ़िक्र ना करो आप, इस लंड का गर्म-गर्म शहद माधवी की फुद्दी या गांड में ही जाएगा आज।”
इसके बाद तो मौसी ने जो कहानी सुनाई, वो वाकई, कमाल की कहानी थी – उस कहानी पर तो अच्छी खासी ब्लू फिल्म – चुदाई की फिल्म – बनाई जा सकती थी।
मौसी ने बताना शुरू किया, “धीरज ये तो तुम्हें पता ही है जीजी, मतलब सुधा, तुम्हारी मम्मी मुझसे दो साल बड़ी है। जीजी ने बी-एड किया और जीजी बाईसवें साल में थी और जीजी की शादी हो गयी और जीजी यहां गुडगांव अपनी ससुराल आ गयी। हम लोग फरीदाबाद रहते थे जो गुडगांव से ज्यादा दूर नहीं है।”
“जीजी की शादी के बाद मैं अक्सर यहां गुडगांव आती-जाती रहती थी। मैं बीस की हो चुकी थी और अब फुद्दी में लंड लेने का मन करने लगा था। इस उम्र की लड़कियों को जीजाओं का बड़ा शौंक होता है और जीजे भी साले ऐसे हरामी होते हैं मौक़ा मिलते ही सालियों को चोद देते हैं। गुडगांव जीजी के घर की ऊपर की मंजिल पर ही जिस कमरे सोती थी, साथ वाले कमरे मैं ही जीजी और जीजा जी होते थे।”
“आधी-आधी रात तक जीजी और जीजा जी की कमरे से आवाजें आती रहती थी – चुदाई की दौरान होने वाले शोर की आवाजें – “आह यश और जोर से करो, मजा आ गया, आह यश क्या लंड है, क्या चुदाई है क्या चोदते हो यश। जीजा जी की आवाज आती थी, ले मेरी सुधा और ले, पूरा जा रहा है तेरी फुद्दी में।”
“ये आवाजें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी गरम हो जाती थी और मैं फुद्दी में उंगली डाल कर मजा लेती थी। कभी-कभी तो मन करता था किसी अनजान को ही पकड़ लूं और बोलूं आजा भैया, मेरी फुद्दी चोद कर जाना।”
एक दिन मैं गुडगांव में थी, जैसे ही जीजा जी ऑफिस गए, मैंने जीजी से कहा, “जीजी एक बात बोलूं?”
“जीजी बोली, “बोलो क्या बात है?”
“मैंने कहा सुधा जीजी से कहा, “जीजी मेरा जीजा जी से चुदाई करवाने का मन हो रहा है। आपके कमरे से आधी आधी रात तक चुदाई की आवाजें आते रहती है, और मेरी फुद्दी गरम हो जाती हैं। और फिर उंगली फुद्दी मैं डाल कर मुझे मजा लेना पड़ता है।”
“जीजी बड़ी ही सुलझी हुई औरत है। जीजी ने बड़े प्यार से मुझे समझाया, “देखो कौशल्या, मुझे तुम्हारी और यश की चुदाई से कोइ ऐतराज़ नही। जीजे तो सालियों को हमेशा से चोदते ही रहे हैं, इसमें कौन सी नयी बात है – तभी तो कहते हैं साली आधी घरवाली।”
“मगर कौशल्या, लड़की की फुद्दी की पहली चुदाई पर उसके पति का हक़ होता है। लड़की की फुद्दी की सील, उसके पति की लंड से ही टूटनी चाहिए। थोड़ा सा और सबर कर ले। तेरे लिए भी मम्मी-पापा लड़का ढूंढ ही रहे हैं। कुछ दिन और उंगली से काम चला ले। एक बार अपने हस्बैंड का लंड अपनी फुद्दी में ले ले, फिर यश से भी चुदाई करवा लेना।”
“धीरज जीजी की इस बात पर मैं चुप हो गयी और इसके छह महीने की बाद ही मेरी मनोहर के साथ शादी हो गयी। फरीदाबाद से मैं यहां रोहिणी आ गयी। रोहिणी में मनोहर – तुम्हारे मौसा जी का घर बहुत बड़ा था – पैसे वाले लोग थे। घर पर दो-दो कारें और ड्राइवर होता था। जीजी तब स्कूल में जॉब करने लगी थी। शनिवार इतवार जीजी को छुट्टी होती थी। मैं जब चाहती जीजी से मिलने गुडगांव आ जाती।”
“एक दिन शनिवार को मैं गुडगांव आयी तो जीजा जी घर पर थे और जीजी स्कूल गयी हुई थी। हम लोग यहां डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। मैंने जीजा जी से पूछा, “जीजा जी जीजी कहां है?”
जीजा जी ने कहा, सुधा स्कूल गयी है इलेक्शन आने वाले है, उसमे सुधा की कोइ डयूटी लगी है, उसी की ट्रेनिंग है। शाम को ही आयेगी।”
“इसके बाद यश जीजा जी मुझे अजीब से नज़रों से देखने लगे। अब जीजा साली का रिश्ता होता तो मजेदार ही है। कोइ ऐसा जीजा नहीं होता होगा, जिसने अपनी जवान साली की मम्मों पर हाथ ना फेरा हो या उसके चूतड़ों पर चलते-चलते धप्प ना लगाया हो।”
गुडगांव में जीजी घर में नहीं थी और मैं और जीजा जी घर में अकेले – जीजा जी अजीब सी ही नज़रों से मुझे देख रहे थे। जीजा जी के इस तरह देखने में मुझे अजीब सा मजा आ रहा था। मेरी फुद्दी में खजली मच चुकी थी।
मैंने हंसते हुए कहा, “और जीजा जी आप आज घर पर कैसे?”
“जीजा जी ने भी हंसते हुए, कहा, “मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था।”
“और ये कहते ही जीजा जी ने मुझे पकड़ लिया और मेरे मम्मे दबा दिए।”
[email protected]
अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-28