शादी से पहले के उन महीनों में मैं अक्सर उसे देख कर सोचता था कि क्या होगा अगर ललिता की इस बेपनाह जवानी को कोई और भी छुए और चुदाई करे उसकी? क्या होगा अगर मैं अपनी सबसे कीमती चीज को किसी और के हवाले कर दूं? यह विचार ही मुझे चरम सुख के करीब ले जाता था।
2024 की कड़ाके की सर्दी में हम उसका जन्मदिन मनाने शहर से बाहर एक रिजॉर्ट में गए थे। वहां मैंने पहली बार ‘रोलप्ले’ किया और पहली बार पूरी रात चोदा मैंने।
ललिता उस वक्त बहुत उत्साहित थी; उसने सोचा कि यह सिर्फ एक नया प्रयोग है। लेकिन हकीकत में, मैं अपनी ‘ककोल्ड’ (Cuckold) फैंटेसी को उस खेल के पीछे छुपा रहा था। जब वह रोलप्ले में किसी और का नाम लेकर मुझे उत्तेजित करती, तो मेरा पागलपन और बढ़ जाता।
मैं जानता था कि अगर मैंने सीधे तौर पर उससे किसी और के साथ संबंध बनाने चूदाई की बात की, तो वह अपनी लोक-लाज और संस्कारों के कारण भड़क जाएगी।
इसलिए, मैंने एक ऐसा जाल बुनना शुरू किया जिसमें वह खुद-ब-खुद उलझ जाए और उसे यह सब एक ‘हादसा’ या ‘जरूरत’ लगे। और उसे गिल्ट लगे और लगे कि उसी की गलती से वह चुद गई पराए मर्द से
आखिरकार फरवरी 2026 में हमारी शादी हो गई। सात फेरों के बाद जब मार्च में हम हनीमून के लिए दार्जिलिंग पहुंचे, तो वहां की बर्फीली वादियों और धुंध ने मेरे इरादों को और हवा दे दी।
होटल के उस लग्जरी कमरे की बड़ी खिड़की से दिखते पहाड़ों के बीच मैंने तय कर लिया था कि आज मैं अपनी फैंटेसी को पूरी करूंगा और उसकी चूदाई किसी गैर मर्द से करवाऊंगा।
हनीमून का वह हफ्ता… दार्जिलिंग की बर्फीली हवाएं जब होटल की खिड़कियों से टकराती थी, तो कमरे के अंदर का माहौल और भी रूमानी हो जाता था। ललिता इन वादियों में किसी खिली हुई कली की तरह महक रही थी। लेकिन मेरे दिमाग में तो उस वक्त कुछ और ही तूफान चल रहा था। मैं अपनी उस दबी हुई ककोल्ड फैंटेसी को अब और कैद नहीं रख पा रहा था। मुझे एक ऐसे मौके की तलाश थी जहाँ ललिता को शक भी ना हो और मेरा सपना भी पूरा हो जाए।
तभी मेरी नज़र होटल के स्पा मेन्यू पर पड़ी। मैंने सोचा क्यों ना एक ‘मेल मसाजर’ का सहारा लिया जाए। एक ऐसा अजनबी जो ललिता के उस बेदाग जिस्म को अपनी उंगलियों से छुए और उसे उस सुख की दहलीज तक ले जाए जहाँ से वापसी मुमकिन ना हो।
मैंने शाम को ललिता से कहा, “बेबी, पहाड़ की इस चढ़ाई और ठंड ने तुम्हारे जिस्म को थका दिया होगा। क्यों ना हम रूम में ही एक प्रोफेशनल मसाज करवाएं? मैंने सुना है यहां के मेल मसाजर बहुत स्किल्ड होते हैं।”
ललिता ने सुनते ही अपनी आँखें सिकोड़ ली। वह थोड़ी पुरानी सोच की और संकोची थी। उसने झिझकते हुए कहा, “नहीं अंशुल, किसी पराए मर्द से मालिश? मुझे अजीब लग रहा है। तुम ही कर दो ना।”
मैंने उसे अपनी बाहों में घेरा और उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा, “अरे पगली, वो प्रोफेशनल होते हैं। जैसे डॉक्टर होते हैं, वैसे ही मसाज करने वाले। कमर… इन्हें एक अच्छी मालिश की जरूरत है। बस रिलैक्स करो, मैं भी तो यहीं हूं।”
काफी देर तक उसे चूमने और बहलाने के बाद, वह आखिरकार मान गई। उसकी आँखों में अभी भी थोड़ा डर था, पर मेरे लिए वही डर सबसे बड़ी उत्तेजना बन रहा था।
मैंने मसाज बॉय को बुलाया। दार्जिलिंग की उस कड़ाके की ठंड में होटल का कमरा हीटर की वजह से अंदर से काफी गर्म और मदहोश कर देने वाला था। ललिता बेड पर बैठी खिड़की से बाहर गिरती बर्फ देख रही थी। तभी मैंने स्पा सर्विस को फोन किया और खास तौर पर एक ‘स्ट्रॉन्ग और मस्कुलर’ मेल मसाजर की मांग की।
करीब 30 मिनट बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। दरवाजा खुला और अंदर करण ने कदम रखा। उसकी कद-काठी देख कर मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। करीब 28 साल का वह गबरू जवान, जिसकी छाती चौड़ी और भुजाएं लोहे जैसी सख्त थी।
उसने टाइट टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से उसके डोले साफ झलक रहे थे। ललिता उसे देख कर थोड़ी असहज हुई, उसने अपने शॉर्ट्स को नीचे खींचने की कोशिश की। वह उस वक्त सफेद रंग की टाइट टी-शर्ट और काले रंग के शॉर्ट्स में थी, जिसमें से उसकी सुडौल जांघें और 34″ साइज के स्तनों का उभार करण की आंखों को सीधा दावत दे रहा था।
करण ने अपना बैग फर्श पर रखा और एक गहरी आवाज में बोला, “नमस्ते सर, नमस्ते मैम। क्या हम शुरू करें?”
ललिता ने मेरी तरफ झिझकते हुए देखा, जैसे वह कह रही हो कि क्या यह सही है? मैंने उसे चूम कर सोफे पर बैठा दिया और कहा, “रिलैक्स बेबी, यह प्रोफेशनल है।”
ललिता पेट के बल बेड पर लेट गई। करण ने अपनी जैकेट उतारी और काम शुरू किया। उसने अपनी जेब से जैस्मिन और सैंडलवुड ऑयल की बोतल निकाली। तेल की खुशबू ने पूरे कमरे को और भी ज्यादा कामुक बना दिया।
जैसे ही करण ने ललिता की पीठ पर तेल डाला और अपनी मजबूत हथेलियों से रगड़ना शुरू किया। ललिता के मुंह से एक दबी हुई आह निकली। करण के हाथ किसी माहिर खिलाड़ी की तरह उसकी रीढ़ की हड्डी से होते हुए नीचे कूल्हों की तरफ जा रहे थे।
कुछ मिनट बाद करण धीरे से फुसफुसाया, “मैम, आपकी टी-शर्ट में तेल लग रहा है और यह मसाज में बाधा डाल रही है। क्या मैं इसे निकाल दूं?” ललिता ने गर्दन घुमा कर मेरी ओर देखा। उसकी आंखों में डर और उत्तेजना का एक अजीब संगम था। मैंने मुस्कुरा कर सिर हिला दिया। करण ने बड़ी फुर्ती से उसकी टी-शर्ट ऊपर खींच दी। अब ललिता सिर्फ अपनी काले रंग की ब्रा और शॉर्ट्स में थी। उसकी गोरी और मखमली पीठ पर करण के सांवले हाथ जब चल रहे थे, तो वह नज़ारा मुझे पागल कर रहा था।
मसाज का सिलसिला नीचे बढ़ा। करण ने कहा, “मैम, लोअर बॉडी की नसों को खोलना जरूरी है, शॉर्ट्स थोड़े टाइट हैं।”
ललिता ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी आंखें बंद कर ली। करण ने उसके शॉर्ट्स के इलास्टिक को पकड़ा और धीरे-धीरे उसकी पिंडलियों से होते हुए पैर से बाहर निकाल दिया। अब वह सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में किसी सजी हुई अप्सरा जैसी लग रही थी।
इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में। कहानी की फीडबैक कमेंट में लिख कर बताएं।
अगला भाग पढ़े:- मेरी फैंटेसी रोलप्ले से चूदाई तक का सफर-2