पिछला भाग पढ़े:- पापा की परी प्रीती-9
हिंदी अन्तर्वासना कहानी का अगला पार्ट-
मैं फार्म और सत्रह सेक्टर से वापस आ कर लाउंज में बैठा था। प्रीती बहाना बना कर मार्किट चली गई थी, ताकि मैं और भूपिंदर खुल कर बात कर सकें। भूपिंदर दिन में अपनी और प्रीती में हुई बातें बता रही थी।
भूपिंदर ने प्रीती से कहा कि अगर उसने मुझसे, अपने पापा से चुदाई करवानी ही है तो वो – मेरी पत्नी भूपिंदर – दो तीन महीने के लिए वापस कनाडा चली जाती है, ताकि प्रीती की और मेरी खुल कर चुदाई हो सके।
इस पर प्रीती ने भूपिंदर से कहा, “मम्मी, पापा आपसे बहुत प्यार करते हैं। मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हूं। पापा के साथ मेरी ये चुदाई आपका दिल दुखाने कि लिए नहीं है, सिर्फ एक टाइम पास है, जब तक सुखचैन नही आ जाता, वो भी इस लिए मम्मी कि ये सेक्स ये चुदाई ये भी ज़िदगी का हिस्सा हैं – जरूरी हैं। मगर इसे मजबूरी समझ कर करने से कोइ फायदा नहीं बल्कि नुक्सान ही है। आप कहेंगी तो मैं पापा से चुदाई नहीं करवाऊंगी। किसी और से भी नहीं करवाऊंगी और सुखचैन का इंतज़ार करूंगी।”
भूपिंदर ने बताया, “अवतार प्रीती तो ये बोल कर चुप हो गयी और मैंने भी हथियार डाल दिए। प्रीती की बातों का मुझे कोई जवाब नहीं सूझ रहा था। मैंने प्रीती को बाहों में ले लिया और कहा, “बेटा तेरी सारी बातें सही हैं। पर तू ही बता अब क्या करें? कैसे तेरे पापा तेरी और मेरी चुदाई करेंगे? पहले मेरे फुद्दी में लंड डाल कर मुझे चोदेंगे फिर तेरे कमरे में जाएंगे तुझे चोदने के लिए? या दोपहर को तुझे चोदेंगे और रात को मुझे? कैसे होगा ये सब?”
“अवतार इसके बाद तो जो प्रीती ने कहा वो तो कमाल ही था। प्रीती बोली, “मम्मी एक बात बताओ, जो आप कह रही हो दोपहर को रात को या जो भी इसकी जरूरत ही कहां है। आपको अब मालूम है पापा मुझे चोदते रहे हैं वो भी पूरे दो महीने तक। और आपकी और पापा की चुदाई तो सब को मालूम ही है क्योंकि आप पति-पत्नी हो। अब आपने मुझे ना जाने कितनी बार नंगा देखा है और मैंने भी आपको। मां बेटी तो इकट्ठे नहाती भी हैं और ये आम है।”
“मम्मी अब तो पापा भी मुझे नंगा देख चुके हैं हर तरफ से, आगे से पीछे से और मैं पापा को। तो अब आप ये बताओ अब क्या बचा है? किस बात का पर्दा है मेरे आप में और पापा में? हम तीनों इकट्ठे मजा कयों नहीं ले सकते? हम दोनों इकट्ठे पापा से चुदाई क्यों नही करवा सकते? क्यों भला पापा कभी आपके कमरे में जाएं आपको चोदने कि लिए, कभी मेरे कमरे में आएं मुझे चोदने के लिए।”
“जरा सोचिये मम्मी कैसा मजा आएगा। जब पापा आपको चोद रहे होंगे तो मैं सोफे पर बैठ कर आपकी चुदाई देखते-देखते अपनी फुद्दी में उंगली डाल कर मजा ले रही होऊंगी और जब पापा मुझे चोद रहे होंगे तो आप अपनी फुद्दी में उंगली डाल कर मजा ले रही होंगी।”
“और अगर पापा का मन दोनों को इकट्ठे चोदने का होगा तो दोनों चूतड़ उठाए, चूतड़ पीछे करके बिस्तर कि किनारे पर उल्टा लेटी हुई होंगी। पापा कभी आपकी चूत में लंड डालेंगे कभी मेरी चूत में – कभी बीवी की फुद्दी में लंड कभी बेटी के फुद्दी में लंड।”
“और मम्मी मान लो पापा का दोनों को चोदने का ना भी हो तो कोइ बात नहीं। हम में से एक चुदाई करवाएगा दूसरा चुदाई देखता हुआ चुदाई का मजा लेगा मजा लेगा। मम्मी मस्त रहेगा ये भी।”
“मम्मी जब पापा आपकी फुद्दी चूसते चाटते हैं तो कभी आपका भी तो मन करता होगा किसी के फुद्दी चूसने का। सुखचैन जब मेरी फुद्दी चूसता है तब मेरा तो बड़ा मन करता है किसी के फुद्दी चूसने का। हम तीनों रहेंगे तो मैं और आप एक-दूसरी की फुद्दी भी चूसेंगी एक-दूसरी के फुद्दी का पानी भी टेस्ट करेंगी।”
“अवतार इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाती, प्रीती ने मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए और मेरी चूत पर अपना हाथ फेरने लगी। फिर प्रीती ने मेरे होंठ छोड़े और बोली, “मम्मी अब मना मत करना। आज रात को ही हम दोनों पापा के लंड का मजा लेंगी।”
“और इसके बाद प्रीती ने मेरी चूत अपना हाथ हटाया और मेरा हाथ पकड़ा और अपनी फुद्दी पर रख दिया और बोली, “मम्मी एक बार ट्राई करने में क्या जाता है, नहीं मजा आएगा तो आगे से नहीं करेंगे।”
“अवतार मैं क्या बताऊं, प्रीती के ये बातें सुन-सुन कर तो मेरे फुद्दी पानी-पानी हो चुकी थी। मेरा तो मन उसी वक़्त चुदाई करवाने का होने लगा था। मन कर रहा था अभी कपड़े उतार कर लेट जाऊं और प्रीती को बोलूं, “आ प्रीती चूस मेरी फुद्दी और मुझे भी चुसवा अपनी।”
“मैंने प्रीती की फुद्दी पर हाथ फेरते हुए कह ही दिया ठीक है प्रीती आज ट्राई करते हैं। देखते हैं कैसी रहती है ये मां-बेटी की चुदाई। देखते है कैसे तेरे पापा हम दोनों की फुद्दियां चोदते हैं दोनों फुद्दियों का पानी छुड़ाते हैं।”
ये बोल कर भूपिंदर चुप हो गयी। मेरा लंड तो खड़ा हो ही चुका था, लेकिन मैं चुप था।
भूपिंदर बोली, “तुम क्या कहते हो अवतार? क्या ये ठीक रहेगा?”
मैंने एक पल को सोचा कि वैसे इसके अलावा और दूसरा कोइ चारा भी तो नहीं है। मैंने यही बात भूपिंदर को भी बोल दी, “भूपिंदर सवाल मेरे ठीक समझने या ना समझने का नहीं। सवाल इस वक़्त ये है कि इसके अलावा और चारा भी क्या है। असल में तो प्रीती ने तुम्हें अपने दिल की बात साफ़-साफ़ बता दी है। तुम्हें प्रीती की बातें कैसी लगी?”
भूपिंदर बोली, “अवतार मैं भी यही सोच रही हूं कि इस वक़्त इसके अलावा और चारा भी क्या है। अगर ऐसा ही है तो फिर यहीं सही। तुम भी बीवी और बेटी को इकट्ठे चोदो – दो-दो चूतों को चोदने का मजा लो और दो-दो चूतों को चुदाई का मजा दो।”
ये बोल कर भूपिंदर उठी और मेरे लंड पर हाथ रख कर मुझे चूम लिया। मेरा खड़ा लंड पायजामे कि ऊपर से पकड़ कर हंसते हुए बोली, “लो, ये तो अभी से तैयार हो चुका है।”
तभी दरवाजे का ताला खुलने की आवाज आयी और भूपिंदर जा कर सामने सोफे पर बैठ गयी।
प्रीती वापस आ गयी थी। हाथ में थैला था। आते ही बोली , “चलो मम्मी पापा आप अब तक यहां ही बैठे हो? चलो फ्रेश हो जाओ, मैं भी फ्रेश हो जाती हूं फिर खाना खाते हैं और बनाते हैं आगे का प्रोग्राम।”
प्रीती ने सामन फ्रिज में रखा और गेस्ट रूम में चली गए जहां वो रह रही थी। मैंने भूपिंदर से कहा, “चलो भूपिंदर तुम भी तैयार हो जाओ, हमारी बेटी तो फुल मूड में लग रही है आज।”
भूपिंदर भी उठ गयी और बोली, “चलो मैं भी फ्रेश होती हूं, तुम भी फ्रेश हो जाओ।”
हम तीनों फ्रेश हो कर लाउंज में आ गये। मैंने शिवाज़ रीगल की बोतल खोल ली और प्रीती ने जिन की। भूपिंदर वाइन पीने लगी तो प्रीती बोली, “मम्मी ये क्या पी रही हो, ये तो गोरों का ड्रिंक है, आप जिन पियो जो मैं पी रही हूं मस्त मजा आ जाएगा।”
भूपिंदर ने भी वाइन की बोतल टेबल पर रख दी और प्रीती ने भूपिंदर के गिलास में एक जिन का पैग डाल दिया। एक-एक पैग के बाद हमने खाना खाया। खाना खाने के बाद हम गेस्ट रूम में चले गए जहां प्रीती रह रही थी। जाते ही प्रीती ने अपने और भूपिंदर के गिलास में थोड़ी जिन डाली और मेरा आधा गिलास व्हिस्की से भर दिया। प्रीती मस्त चुदाई के मूड में लग रही थी, मगर भूपिंदर थोड़ी चुप-चुप सी थी। हम तीनों, मैं मेरी परी जैसी बेटी प्रीती और और मेरी प्यारी बीवी भूपिंदर फ्रेश हो कर लाउंज में आ गये।
प्रीती भूपिंदर से बोली, “मम्मी कैसा लग रहा है, क्या बात है इतनी चुप-चुप क्यों हो?”
भूपिंदर मुझसे बोल तो गयी थी “तुम भी बीवी और बेटी को इकट्ठे चोदो – दो-दो चूतों को चोदने का मजा लो और दो-दो चूतों को चुदाई का मजा दो”, मगर जब रात को जब चुदाई का वक़्त आया तो भूपिंदर में वो चुदाई करवाने का जोश, वो दम, वो चुदाई करवाने का उतावलापन नहीं था। भूपिंदर हिचकिचा रही थी। पंजाबी में कहा जाए तो भूपिंदर की बेटी के सामने चुदाई करवाने से “गांड फट रही” थी।
उस दिन मतलब पहली ही रात को – अगर प्रीती ने पहल ना की होती सारा का सारा चुदाई का प्रोग्राम फ्लॉप हो जाना था। मेरा लंड भी खड़ा नहीं होना था, भूपिंदर की फुद्दी गरम नहीं होनी थी। ऐसे में प्रीती अकेली क्या कर लेती?
भूपिंदर मुझे कुछ हिचकिचाती सी दिखाई दी। वो अभी भी उलझन में लग रही थी कि बेटी के सामने कैसे उसके पापा – अपने पति से चुदाई करवाए, और कैसे अपने सामने अपने बेटी प्रीती को अपने पापा से चुदने दे।
मैं भूपिंदर की इस उलझन को समझ रहा था और प्रीती भूपिंदर की इस उलझन को समझ रही थी। किसी हद तक भूपिंदर की उलझन ग़लत भी नहीं थी। आखिर एक मां का अपने पति से अपनी बेटी के सामने चुदाई करवाना? बात तो इतनी आसानी से पचने वाली नहीं थी।
प्रीती भूपिंदर के पास जा कर बैठ गयी और भूपिंदर के कंधों पर हाथ रख कर बोली, “क्या बात है मम्मी, क्या मन नहीं कर रहा? मम्मी एक बार ट्राई तो करो, सब ठीक हो जाएगा। चलो मैं ही शुरू करती हूं।”
और ये कह कर प्रीती ने अपने कपड़े उतार दिए और फिर से जा कर भूपिंदर के पास बैठ गयी। प्रीती ने भूपिंदर का हाथ अपने मम्मों पर रक्खा और बोली, “ये देखो मम्मी क्या मस्त मम्मे दिए है आपने मुझे, और ये फुद्दी?” ये बोलते हुए प्रीती ने भूपिंदर का हाथ अपनी चूत पर रख दिया।
भूपिंदर ने प्रीती को देखा और प्रीती के मम्मे धीरे-धीरे मसलने शुरू कर दिए। शायद अब वो भी मस्त होने लगी थी।
प्रीती भूपिंदर से बोली, “मम्मी उठो, जरा फुद्दी चुसवाओ अपनी।” भूपिंदर नहीं उठी। उसकी हिचकिचाहट शायद जा नहीं रही थी।
प्रीती खड़ी हो गयी और बोली, “चलो मम्मी इतना भी मत सोचो – आओ।”
प्रीती ने भूपिंदर का हाथ पकड़ा और भूपिंदर खड़ी हो गयी। प्रीती ने भूपिंदर की सलवार का नाड़ा खोल दिया। भूपिंदर की सलवार नीचे गिर गयी। इसके बाद प्रीती ने भूपिंदर की कमीज उतारने के लिए ऊपर के ही थे कि भूपिंदर ने अपनी कमीज खुद ही उतार दी। प्रीती ने भूपिंदर से कहा, “मम्मी अब बैठ जाओ बेड पर, चूतड़ों की नीचे मोटा सा तकिया रखो और पीछे की तरफ लेट जाओ।”
भूपिंदर मुझसे भी फुद्दी ऐसे ही चुसवाती थी। शायद प्रीती ने मुझे भूपिंदर की फुद्दी चूसते हुए देख लिया होगा। भूपिंदर ने बिना कुछ भी कहे मशीन की तरह एक तकिया लिया और चूतड़ों की नीचे तकिये रख कर उस पर बैठ कर पीछे की तरफ लेट गयी और अपनी टांगें उठा दी और टांगें चौड़े कर दी।
प्रीती नीचे घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और भूपिंदर की फुद्दी की फांकें चौड़ी करके कुछ देर तो भूपिंदर की फुद्दी को देखती रही और फिर प्रीती भूपिंदर की फुद्दी चूसने चाटने लगी।
भूपिंदर भी तो आखिर को एक औरत ही थी – फुद्दी चुसवाने चुदवाने की शौक़ीन पंजाबन।
जल्दी ही भूपिंदर के फुद्दी गरम हो गयी। भूपिंदर ने प्रीती का सर अपनी फुद्दी पर दबा दिया और “आह प्रीती आह प्रीती” बोलने लगी। प्रीती ने फुद्दी थोड़ी और चूसी और खड़ी हो गयी। प्रीती मेरी तरफ देख कर बोली, “आ जाओ पापा मस्त लेटी हुई है मम्मी – लंड अपनी फुद्दी लेने को तैयार। ऐसे ही अपना लंड डाल दो मम्मी की फुद्दी में पूरा अंदर तक जाएगा लंड, डालो लंड और करो चुदाई।।”
प्रीती उठी और एक तरफ हो गयी और मैंने सोफे से उठा और भूपिंदर की टांगे थोड़ी और ऊपर कर की चौड़ी कर दी। लंड बिलकुल फुद्दी के छेद के सामने था। मैंने लंड छेद पर रखा और एक ही बार में लंड जड़ तक फुद्दी में बिठा दिया। भूपिंदर बस इतना ही बोली, “आह अवतार, पूरा गया है अंदर तक।”
उधर प्रीती मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए कहा, “पापा अब रुकना मत। आज ज़बरदस्त चुदाई करो मम्मी की, जैसे उस दिन सुबह मेरी चुदाई की थी।”
इसके बाद मैंने भूपिंदर की जोरदार चुदाई चालू कर दी। प्रीती पास ही खड़ी मेरा लंड भूपिंदर की फुद्दी में अंदर बाहर होता हुआ देख रही। तभी प्रीती झुकी और भूपिंदर के मम्मे चूसने लगी। जल्दी ही भूपिंदर के चूतड़ घूमने लगे और उसने प्रीती का सर अपने मम्मों पर दबा दिया। इसके बाद तो आठ दस ही धक्के लगे और भूपिंदर ने एक सिसकारी ली, “आह अवतार निकल गया मेरा आअह मजा आ गया क्या मस्त चुदाई हुई आज, आह प्रीती मजा आ गया।”
प्रीती खड़ी हुई और मुझसे बोली, “पापा अभी मत रुकना। चालू रक्खो मम्मी की चुदाई। एक बार और मजा आने दो मम्मी को फिर अपने लंड का गर्म शहद भी आज डाल देना मम्मी की फुद्दी में। मम्मी को पूरा मजा आएगा तभी खुल कर चुदाई करवाएगी आगे से।”
प्रीती की बात तो ठीक ही थी। मैंने भूपिंदर को चोदना जारी रखा। मेरे दोनों हाथ भूपिंदर के घुटनों के नीचे थे और मैंने भूपिंदर की टांगें उठाई हुई थी।
प्रीती भूपिंदर फुद्दी का दाना रगड़ने लगी। अगले ही मिनट भूपिंदर फिर से “आअह अवतार आआह अवतार” करने लगी। भूपिंदर दोनों हाथों से अपने मम्मों के निप्पल पकड़ लिए और मसलने लगी।
मेरा लंड भूपिंदर की फुद्दी में था, प्रीती भूपिंदर की चूत का दाना रगड़ रही थी और भूपिंदर खुद अपने मम्मों के निप्पल मसल रही थी। क्या सीन था।
भूपिंदर के चूतड़ फिर से घूमने लगे। भूपिंदर बोली, “आआह अवतार आअह ,,, लगाओ और जोर से।”
मैं अब पूरा लंड फुद्दी से निकाल कर झटके के साथ अंदर डालने लगा। मुझे भी मजा आने वाला था मगर मैंने मजा रोका हुआ था। मैं भूपिंदर के मजे के साथ ही लंड का पानी भूपिंदर की फुद्दी में डालना चाहता था।
भूपिंदर की चूतड़ जोर-जोर से हिलने लगे। प्रीती भी भूपिंदर की चूत का दाना जोर जोर से रगड़ रही थी। तभी भूपिंदर का हाथ प्रीती के हाथ पर पहुंच गया और भूपिंदर प्रीती का हाथ और भी जो से अपनी चूत कि दाने पर रगड़ने लगी।
तभी भूपिंदर ने एक जोर एक की सिसकारी ली, “आआह अवतार फिर निकल गया आअह। भूपिंदर प्रीती का हाथ वैसे ही अपनी चूत में ऊपर-नीचे करते हुए बोली, बस प्रीती और कितना मजा देगी मेरी बेटी, बस।”
भूपिंदर प्रीती को “बस” तो कह रही थी मगर प्रीती का हाथ अपनी चूत से हटा नहीं रही थी। प्रीती भी रुक नहीं रही थी और अपनी मम्मी भूपिंदर की चूत का दाना रगड़ती मसलती जा रही थी।
तभी मुझे भी मजा आ गया और मेरे लंड ने गरम पिचकारी छोड़ी और मैंने कहा, “ले भूपिंदर ले, निकला तेरी फुद्दी में ले, और मैंने और भी जोर के धक्के लगाते हुए कहा, “ले भूपिंदर और ले।”
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