कमरे के बीचों-बीच एक बड़ा और आरामदायक मसाज टेबल (बेड) लगा था, जिस पर सफेद रंग की चादर बिछी थी।
मेरी थेरेपिस्ट, जिसका नाम रीना था, एक बेहद आकर्षक और गठीले बदन की महिला थी। उसने बड़ी ही पेशेवर मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा और कहा, “सर, आप अपनी टी-शर्ट और लोअर उतार कर बेड पर पेट के बल लेट जाइए। मैं दो मिनट में ऑयल लेकर आती हूँ।”
मैं बेड के पास गया और अपने कपड़े उतार कर सिर्फ अपने अंडरवियर में बेड पर लेट गया। कुछ ही पलों में रीना वापस आई। उसने अपने हाथों में गुनगुना जैतून और सैंडलवुड का तेल लिया। जब उसने पहली बार अपनी नर्म और ठंडी हथेलियों को मेरी पीठ पर रखा, तो मेरे पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। शुरुआत के दस-पंद्रह मिनट उसने पूरी तरह पेशेवर अंदाज में काम किया। उसकी उंगलियां मेरी पीठ की मांसपेशियों को दबाते हुए रीढ़ की हड्डी के पास के खिंचाव को कम कर रही थी। पहाड़ों की चढ़ाई की पूरी थकान जैसे धीरे-धीरे पिघल रही थी।
पीठ, कंधों और पैरों की मालिश करते हुए रीना लगातार मुझसे बेहद धीमी और मखमली आवाज़ में बात कर रही थी। बातों-बातों में उसने पूछा, “सर, आप इंदौर से आए हैं? आपकी वाइफ बहुत खूबसूरत हैं।” मैंने हाँ में जवाब दिया। धीरे-धीरे बातों का सिलसिला थोड़ा अनौपचारिक होने लगा। जब मैं सीधा लेटा, तो माहौल का तनाव और बढ़ गया। रीना ने अब मेरी छाती और पेट पर तेल लगाना शुरू किया।
उसकी उंगलियों का स्पर्श अब केवल थकान मिटाने वाला नहीं रह गया था, बल्कि वह जान-बूझ कर बेहद धीमे और सहलाने वाले अंदाज में आगे बढ़ रही थी।
लोअर ना होने के कारण और उस पलंगतोड़ पान के असर की वजह से मेरे शरीर में उत्तेजना साफ तौर पर दिखाई देने लगी थी। रीना ने मेरी आंखों में देखा और एक छोटी सी शरारती मुस्कान दी। उसने धीरे से मेरे चड्डी के इलास्टिक के पास अपनी उंगलियां छुआईं और फुसफुसाते हुए पूछा, “सर, क्या आपको थोड़े एक्स्ट्रा रिलैक्सेशन की जरूरत है?”
मैंने बिना कुछ बोले उसकी आंखों में देखते हुए सिर हिला दिया। रीना ने बिना देर किए बेहद सधे हुए हाथों से मेरे अंडरवियर को नीचे सरका दिया। अब मैं उसके सामने पूरी तरह नंगा था। उसने अपने हाथों में थोड़ा और गुनगुना तेल लिया और मेरी जांघों से शुरुआत करते हुए धीरे-धीरे मेरे सबसे जांघों की तरफ बढ़ी। उसकी रेशमी हथेलियों ने जब पहली बार उसे अपनी गिरफ्त में लिया, तो मेरे मुंह से एक हल्की सी आह निकल गई। उसने बेहद धीमे और लयबद्ध तरीके से मेरे लंड को ऊपर-नीचे (हैंडजॉब) करना शुरू किया। तेल की चिकनाहट और उसके हाथों की गर्मी ने मुझे पूरी तरह बेकाबू कर दिया था।
लेकिन रीना सिर्फ वहीं तक रुकने वाली नहीं थी। कमरे की मद्धम रोशनी में उसकी खुद की सांसें भी अब भारी होने लगी थी। उसने ऊपर पहनी अपनी कुर्ती के बटन धीरे-धीरे खोले और उसे पूरी तरह उतार कर एक तरफ रख दिया। उसका सुडौल बदन अब मेरे सामने था। वह बेड पर मेरे ठीक ऊपर घुटनों के बल बैठ गई। उसने खुद को थोड़ा और आगे बढ़ाया और मेरे होठों को अपने होठों की गिरफ्त में ले लिया। हमारा चुंबन गहरा और तीव्र होता चला गया।
उत्तेजना अपने चरम पर पहुंच चुकी थी। रीना ने अपने पैंटी को भी फुर्ती से अलग किया। उसने मेरे अंगों को सहलाते हुए खुद को सही पोजीशन में सेट किया। कमरे में सिर्फ हमारी भारी होती सांसों और तेल की सरसराहट की आवाज़ थी। रीना ने बेहद धीमे और नियंत्रण के साथ मेरे लंड के ऊपर बैठ कर अपनी चूत में ले लिया को और धीरे से नीचे की तरफ बैठी। जैसे ही मैंने उसके भीतर पूरी तरह से लंड डाल दिया, कमरे का तापमान जैसे एक-दम से बढ़ गया। वह अहसास बेहद सेक्सी और गर्म था।
शुरुआत में उसने बेहद धीमे और छोटे-छोटे स्ट्रोक्स लेने शुरू किए ताकि शरीर उस दबाव को झेल सके। हर एक मूवमेंट के साथ चूत की घिसाई और तेल की चिकनाहट मिल कर एक तीव्र आनंद पैदा कर रही थी। रीना ने मेरी छाती पर अपने हाथ टिकाए और अपनी रफ्तार को थोड़ा तेज किया। मैं अपनी कमर को ऊपर उठाते हुए उसकी चूत में लंड ठोके जा रहा था।
हमारी सांसें उखड़ रही थी और पूरे शरीर पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमकने लगी थीं। कमरे की वह मद्धम रोशनी और बाहर ललिता के दूसरे कमरे में होने का विचार, इस पूरे अनुभव को और अधिक उत्तेजक बना रहा था।
करीब दस से पंद्रह मिनट के हॉट सेक्स के बाद और चुदाई सिलसिले के बाद, जब सहनशक्ति जवाब देने लगी, तो रीना ने आखिरी के कुछ स्ट्रोक्स बेहद गहरे और तेज लिए। चरम आनंद की उस आखिरी सीमा पर पहुंच कर, मेरे लंड से पानी निकल आया और कंडोम में रह गया। रीना भी एक गहरी सिसकारी भरते हुए मेरे ऊपर ही ढह गई। हम दोनों कुछ मिनटों तक वैसे ही शांत लेटे रहे, अपनी उखड़ी हुई सांसों को सामान्य होने का समय देते हुए।
इसके बाद, रीना ने उठ कर मुझे एक साफ तौलिया दिया। मैंने खुद को साफ किया और अपने कपड़े दोबारा पहने। जब मैं पूरी तरह तरोताजा, संतुष्ट और एक अजीब से रोमांच से भरा हुआ उस कमरे का दरवाजा खोल कर बाहर मुख्य लॉबी की तरफ आया, तो ललिता पहले से ही वहां एक सोफे पर बैठी मेरा इंतजार कर रही थी।
इसके आगे क्या हुआ, पढ़िएगा अगले पार्ट में।