पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-14
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
मैं बिस्तर के बीच में लेटा हुआ था। एक तरफ नेहा दीदी थी और दूसरी तरफ पायल दीदी। मेरा लंड पैंट के अंदर पूरी तरह से अकड़ा हुआ था, इतना कि उसमें खिंचाव महसूस हो रहा था। मैं बुरी तरह डरा हुआ था कि अगर मैंने हिलने की कोशिश की और उनमें से कोई जाग गई, तो मेरा बचना मुश्किल होगा। मेरा दिमाग एक-दम खाली था, मैं कुछ सोच ही नहीं पा रहा था, बस मेरा लंड और सख्त होता जा रहा था।
बेचैनी में मैंने अपना चेहरा नेहा दीदी की तरफ घुमाया। वह अपनी पीठ मेरी तरफ करके सो रही थी। जैसे ही मैं उनकी तरफ मुड़ा, मेरी छाती उनकी पीठ से जा लगी। वह गहरी नींद में थी और उनकी साँसों की धीमी आवाज़ आ रही थी। उनकी पीठ की गर्माहट सीधे मेरे सीने पर महसूस हो रही थी, जिससे मेरा बेकाबू लंड और भी ज़्यादा सख्त हो गया था। मैं बस उस जगह जम गया, समझ नहीं पा रहा था कि आगे क्या करूँ।
मेरी पीठ की तरफ पायल दीदी थी, मुझे ठीक से पता नहीं था कि वो सो रही हैं या नहीं। अपने लंड को शांत करने के लिए पहले मेरे मन में पायल दीदी का ख्याल आया, पर अगर मैं बिना उनकी मर्जी के कुछ करता, तो वो मुझ पर बहुत गुस्सा होती। इसीलिए मैंने नेहा दीदी को चुना। वो चादर ओढ़ कर सो रही थी, तो मैंने धीरे से चादर का कोना उठाया और अपने शरीर को सरकाते हुए उनकी गर्म चादर के नीचे घुस गया।
अब चादर के अंदर की गर्माहट और नेहा दीदी के करीब होने का एहसास मुझे और भी बेताब कर रहा था। मेरी धड़कनें तेज थी और लंड का तनाव चादर के नीचे और ज्यादा बढ़ गया था। मैं बस अपनी जगह पर पड़ा हुआ था, यह कोशिश करते हुए कि मेरी किसी भी हलचल से नेहा दीदी की नींद ना खुल जाए।
मैंने धीरे से अपनी पैंट उतार दी। अब मेरा लंड पूरी तरह से नंगा था और चादर के नीचे की गर्मी में और भी ज्यादा सख्त हो रहा था। मैंने एक-दम हल्के से अपना हाथ नेहा दीदी की बॉडी पर रखा और उन्हें खींच कर अपने सीने के करीब कर लिया।
उनका बड़ा पिछवाड़ा अब मेरे बिल्कुल पास था। नेहा दीदी ने सिल्क के शॉर्ट्स पहने हुए थे, और मेरा नंगा लंड उनके उन सिल्क के शॉर्ट्स और उनके बड़े पिछवाड़े को बार-बार टच कर रहा था। चादर के अंदर की उस तंग जगह में, उनका पूरा शरीर मेरे सीने से लगा हुआ था और मेरा नंगा लंड उनकी जांघों के पीछे धड़क रहा था।
मैं अब पूरी तरह से बेकाबू हो रहा था। नेहा दीदी ने जो सिल्क के शॉर्ट्स पहने थे, उनका चिकना अहसास मेरे नंगे लंड पर सीधे महसूस हो रहा था। मैंने अपना हाथ उनके कमर के पास और मजबूती से रखा और उन्हें अपनी ओर और दबाया।
चादर के अंदर की वो जगह काफी गरम हो गई थी। मेरा लंड उनके शॉर्ट्स के ऊपर से उनके बड़े पिछवाड़े को रगड़ रहा था, और जैसे ही मैं थोड़ा हिलता, सिल्क का वो कपड़ा और भी ज्यादा फिसलने लगता। नेहा दीदी अभी भी गहरी नींद में थी, पर मेरे सीने से लगे उनके शरीर की गर्माहट और उनके पिछवाड़े का वो भारीपन मुझे पूरी तरह पागल कर रहा था। मैं बस उस रगड़ का मजा ले रहा था और मेरा लंड उनके पिछवाड़े के खांचे में फँस कर और भी ज्यादा तड़प रहा था।
मैंने बहुत धीरे से नेहा दीदी के शॉर्ट्स का नाड़ा खोला और उन्हें नीचे सरकाया। मेरा पूरा ध्यान इस बात पर था कि पायल दीदी की नींद ना खुले, इसलिए मैं बहुत संभल कर यह सब कर रहा था। चादर के अंदर ही मैंने उनके शॉर्ट्स के साथ-साथ उनकी पैंटी भी उतार दी। अब उनका पिछवाड़ा पूरी तरह से नंगा था। मैंने उसे पहले कई बार देखा था, इसलिए बिना देखे भी मुझे पता था कि वो कितना गोरा और भरा हुआ है। मेरी उंगलियां उनके नंगे और मुलायम पिछवाड़े को छू रही थी, और उस अहसास से मेरा लंड चादर के अंदर और भी ज्यादा जोर-जोर से धड़क रहा था।
मैंने एक-दम धीरे से नेहा दीदी के नंगे पिछवाड़े पर अपना हाथ फेरा और फिर अपने लंड को उनके नंगे पिछवाड़े की दरार पर टिका दिया। सिल्क के कपड़े अब बीच में नहीं थे, इसलिए उनकी त्वचा की असली गर्माहट सीधे मेरे लंड पर महसूस हो रही थी। वो जगह बहुत गर्म और मुलायम थी। मैंने लंड को धीरे से उनके पिछवाड़े के बीच रगड़ा, जिससे मुझे एक जबरदस्त सुकून मिला। मैं बहुत आराम से उनके पिछवाड़े के खांचे में अपने लंड को दबा रहा था, और वो नंगा अहसास मेरे दिमाग को पूरी तरह से पागल कर रहा था।
मैं धीरे से अपना लंड उनके छोटे से पिछवाड़े के छेद पर टिका कर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगा। जैसे ही लंड का अगला हिस्सा वहाँ लगा, नेहा दीदी एक-दम से हड़बड़ा कर जाग गई। वो एक पल के लिए समझ ही नहीं पाई कि क्या हो रहा था, लेकिन जैसे ही उन्होंने महसूस किया कि मैं पीछे था और पायल दीदी भी साथ में ही सो रही थी, वो घबरा गई।
उन्होंने धीमी आवाज़ में कांपते हुए कहा, “पागल हो गए हो क्या गोलू? ये क्या कर रहे हो?”
मैंने फुसफुसाते हुए उनके कान के पास कहा, “सॉरी दीदी, पर मैं अब और खुद को रोक नहीं पा रहा था,” और बिना और देरी किए मैंने एक ही झटके में अपना पूरा लंड उनके पिछवाड़े के अंदर धकेल दिया।
उनके छोटे से छेद में मेरा लंड पूरी तरह समा गया। यह सब इतनी अचानक हुआ कि नेहा दीदी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। पहली बार था जब हम ऐसे कर रहे थे, इसलिए उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि इस अचानक हुए दर्द का सामना कैसे करें। उनके चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था, वो मुँह खोल कर चिल्लाने ही वाली थी, लेकिन पायल दीदी की मौजूदगी का ख्याल आते ही उन्होंने अपने होंठ जोर से भींच लिए।
उनकी सांसें तेज हो गई थी और दर्द को बर्दाश्त करने के लिए उन्होंने अपनी उंगलियों से बेडशीट को इतनी जोर से पकड़ लिया था कि उनकी पोरें सफेद पड़ गई थी। अंदर की वो जकड़न और गर्मी मुझे पागल कर रही थी, और वो चादर के अंदर ही दर्द और अहसास के बीच फंसी हुई थी।
नेहा दीदी की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने दर्द में सिसकते हुए मेरे कान में फुसफुसाया, “बहुत बड़ा है गोलू… इसे निकालो, बहुत दर्द हो रहा है।” उनकी आवाज में एक अजीब सी तड़प थी, जो उस छोटे से छेद के खिंचाव से पैदा हो रही थी। वो पूरी तरह से तनी हुई थी और मेरा लंड उनके पिछवाड़े की टाइट मांसपेशियों में बुरी तरह फंस गया था, जिससे उन्हें हर सेकंड तेज दर्द महसूस हो रहा था।
मैंने उनकी बात मान कर धीरे से अपना लंड उनके पिछवाड़े से बाहर निकाला। जैसे ही वो बाहर आया, नेहा दीदी ने राहत की सांस ली, लेकिन मैंने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया।
मैंने तुरंत दोबारा अपना लंड उनके उसी तंग और गरम छेद पर रखा और इस बार थोड़ा और जोर लगा कर अंदर डाल दिया। वहां दोबारा जाते ही वो दर्द से और ज्यादा कांप उठी। उनकी बॉडी पूरी तरह तन गई थी और वो अपनी आँखें बंद करके दांतों से होंठ दबाए हुए थी। दर्द की वजह से उनकी सांसें तेज चल रही थी और वो चादर के अंदर ही अपने शरीर को सिकोड़ नहीं, बल्कि कस कर पकड़े हुए थी। हर बार जब मैं लंड को अंदर-बाहर कर रहा था, वो दर्द से तड़प रही थी, लेकिन पायल दीदी के डर से वो आवाज बिल्कुल भी बाहर नहीं आने दे रही थी।
नेहा दीदी का बदन दर्द की वजह से बुरी तरह कांप रहा था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस सब को कैसे झेलें, क्योंकि पहली बार ऐसा करने की वजह से उनका छेद पूरी तरह से खुला नहीं था। मेरी हर हरकत पर उनकी पकड़ बेडशीट पर और ज्यादा सख्त हो जाती थी। वो पूरी तरह से बेबस थी, एक तरफ दर्द था जो उन्हें अंदर से चीर रहा था और दूसरी तरफ पायल दीदी के जागने का डर।
मैंने थोड़ा और जोर दिया, जिससे वो फटी-फटी आंखों से मेरी तरफ देखने लगी। उनके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थी और वो दर्द से तड़पते हुए बार-बार अपनी सांसें छोड़ रही थी। मेरा लंड उनके अंदर जाने और बाहर आने के दौरान उनके पिछवाड़े की मांसपेशियों को बुरी तरह रगड़ रहा था, जिससे उन्हें दर्द तो बहुत हो रहा था, पर धीरे-धीरे वो उस अहसास के साथ ढलने लगी। मैंने रुकने के बजाय अपनी रफ्तार थोड़ी और बढ़ा दी, जिससे उनकी सिसकियां और भी तेज हो गई, जिन्हें वो अपने तकिए में दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी।
नेहा दीदी की सांसें उखड़ी हुई थी। उन्होंने बहुत मुश्किल से खुद को संभाला और मेरे कान के बिल्कुल पास आकर फुसफुसाया, “गोलू, बस दो मिनट रुक जा… या तो दो मिनट रुक या फिर मैं खुद को रोक नहीं पाऊंगी और जोर से चिल्ला पड़ूंगी।”
मैंने उनकी हालत देखते हुए धीमे से कहा, “ठीक है दीदी, मैं रुक जाता हूँ।”
मैंने उनकी बात मानी और धीरे से अपना लंड उनके पिछवाड़े से बाहर निकाल लिया। जैसे ही मेरा लंड पूरी तरह बाहर आया, नेहा दीदी ने चैन की सांस ली। वो एक-दम थक कर बेड पर गिर गई और उनका पूरा बदन पसीने से गीला हो गया था। वो कुछ देर आँखें बंद करके अपनी सांसों को काबू में करने की कोशिश करती रही। दर्द कम होने के साथ उनके चेहरे पर जो घबराहट थी, वो अब कम हो रही थी और उन्होंने अपना हाथ माथे पर रख लिया।
नेहा दीदी ने अपनी सांसें थोड़ी ठीक की और अपना चेहरा मेरी तरफ घुमा कर बहुत धीरे से पूछा, “अभी और कितना टाइम लगेगा तुम्हारा निकलने में?”
मैंने उनके चेहरे के पास झुक कर बहुत धीमी आवाज में कहा, “बस कुछ ही मिनट और लगेंगे दीदी।” मेरी बात सुन कर उन्होंने एक बार गहरी सांस ली, जैसे वो खुद को अगले कुछ मिनटों के लिए तैयार कर रही हो।
नेहा दीदी ने अपनी आँखें खोली और अंधेरे में टटोलते हुए बेड के पास रखी मॉइस्चराइजर की बोतल उठा ली, जिसे वो हर रात सोने से पहले अपने चेहरे पर लगाती थी। उन्होंने वो बोतल मेरे हाथ में थमा दी और धीरे से मेरे कान में फुसफुसाया, “पहले इसे मेरे पिछवाड़े पर लगा लो, उसके बाद ही कुछ करना।”
उनकी बात का मतलब साफ था—उन्हें लग रहा था कि शायद इससे दर्द कम होगा और काम आसानी से हो पाएगा।
मैंने मॉइस्चराइजर की कुछ बूंदें हाथों पर ली और नेहा दीदी के पिछवाड़े पर लगा दी। क्रीम की वजह से वहां की जगह एक-दम चिकनी हो गई थी। जब मैंने अपना लंड दोबारा उनके छेद पर रख कर अंदर धकेला, तो इस बार वह बिना किसी अटकन के बहुत आसानी से अंदर चला गया।
अब मेरे लिए अंदर-बाहर करना बहुत आसान हो गया था। मैं पूरी रफ्तार से लगा हुआ था। दर्द अब पहले के मुकाबले कम था, फिर भी नेहा दीदी को तकलीफ तो हो ही रही थी। उनके गले से छोटी-छोटी दबी हुई आवाजें निकल रही थी, जिन्हें वो अपने होंठ काट कर दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी।
हम बहुत ध्यान रख रहे थे। जैसे ही पायल दीदी की सांस की आवाज थोड़ी बदलती या वो बिस्तर पर ज़रा सी हिलती, हम दोनों एक-दम रुक जाते थे। कुछ पल के सन्नाटे के बाद, जब हमें लगता कि पायल दीदी गहरी नींद में हैं, तो हम फिर से शुरू हो जाते थे।
कुछ मिनट बाद, जब मुझे लगा कि मैं अब और नहीं रोक पाऊंगा, तो मैंने कहा, “दीदी, मैं बस अब आने वाला हूँ।”
नेहा दीदी ने अपनी आँखें बंद की और धीमी आवाज में बोली, “ठीक है गोलू, अंदर ही निकाल दो।”
उनकी बात सुनते ही मेरी रफ्तार और तेज हो गई। मैंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और कुछ ही सेकंड में मेरा सारा सफ़ेद पानी उनके पिछवाड़े के अंदर चला गया।
अगली सुबह जब घर में सब लोग उठे, तो नेहा दीदी का चलना-फिरना बहुत मुश्किल हो रहा था। वो घर में बहुत धीरे और संभल कर चल रही थी, जैसे उनके पिछवाड़े में बहुत दर्द या खिंचाव हो।
जब घर में पायल दीदी ने उनसे पूछा, “दीदी, आप ऐसे अजीब तरीके से क्यों चल रही हो?”
तो उन्होंने बात को घुमाते हुए कहा, “शायद रात को सोते समय गलत तरीके से लेट गई थी, इसीलिए पैरों में दर्द हो रहा है।”
लेकिन जब रसोई में या घर में कहीं भी हमारी नज़रें मिली, तो हम दोनों को पता था कि असल बात क्या है। उनके चलने में वो जो बेचैनी और दर्द था, वो रात को मेरे साथ हुई उस हरकत की वजह से था। जब भी हमारी नज़रें टकराती, वो तुरंत अपनी नज़रें चुरा लेती थी। हमें पता था कि ये राज बस हमारे बीच है।
मम्मी और पापा ने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि इस बार क्रिसमस की छुट्टियां हम गोवा में मनाएंगे। कोटा एयरपोर्ट से हमारी फ्लाइट शाम की थी, इसलिए दोपहर का खाना खा कर हम तैयार हो गए। हमने घर के बाहर से एक टैक्सी ली और एयरपोर्ट के लिए निकल पड़े।
जब हम एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां काफी भीड़ थी। भागते-दौड़ते हम चेक-इन काउंटर तक पहुंचे, जहां प्लेन पहले ही उड़ान भरने के लिए तैयार खड़ा था। हमने फटाफट अपने टिकट दिखाए, सिक्योरिटी चेक की लंबी लाइन को पार किया और प्लेन के अंदर जाकर अपनी सीटों पर बैठ गए।
कुछ ही देर में प्लेन ने रनवे पर दौड़ना शुरू किया और आसमान की तरफ उड़ान भर ली। तब तक शाम का वक्त हो चुका था। मैंने खिड़की के पास बैठ कर बाहर देखा, तो डूबते हुए सूरज की नारंगी और सुनहरी रोशनी बादलों पर बिखरी हुई थी। वह नज़ारा इतना खूबसूरत था कि बस उसे देखते रहने का मन कर रहा था।
तीन घंटे की लंबी फ्लाइट का सफर तय करने के बाद, हम रात के वक्त गोवा पहुँचे। एयरपोर्ट के बाहर निकलते ही हमने एक टैक्सी ली, जो ठंडी रात की हवा काटती हुई सीधे हमारे होटल पहुँची। पापा ने इस ट्रिप की प्लानिंग बहुत पहले ही कर ली थी और तीन कमरे बुक करवाए थे—एक मम्मी-पापा के लिए, दूसरा नेहा दीदी और पायल दीदी के लिए, और तीसरा मेरे लिए। होटल के कॉरिडोर में रोशनी काफी कम थी और ये तीनों कमरे एक कतार में बिल्कुल अगल-बगल थे।
हम सब सफर की थकान से इतने बेहाल थे कि हमारी आँखें भारी हो रही थी। अगले दिन गोवा घूमने की ताकत बचाने के लिए हमने बिना देर किए सोने का फैसला किया।
करीब चार घंटे की गहरी और थका देने वाली नींद के बाद, मेरे कमरे के दरवाजे पर किसी ने बहुत जोर-जोर से दस्तक दी। खट-खट की तेज आवाज गूँज रही थी। मुझे लगा शायद होटल की तरफ से कोई रात की ड्यूटी पर आया है, इसलिए मैंने बिना सोचे दरवाजा खोल दिया।
सामने नेहा दीदी खड़ी थी। उन्होंने अपने दोनों हाथ सीने पर मजबूती से बांध रखे थे और वो मुझे बहुत ही गुस्से वाली नज़रों से घूर रही थी। उनके चेहरे पर साफ नाराजगी थी।
मैंने घबराते हुए और नींद में लड़खड़ाते हुए उनसे पूछा, “क्या हुआ दीदी?”
नेहा दीदी बिना मेरी इजाजत के सीधे मेरे कमरे के अंदर आ गई और उन्होंने पीछे से दरवाजा जोर से बंद कर लिया। वह बहुत गुस्से में लग रही थी और मुझे घूरते हुए बोली, “तुम्हारी वजह से मैं सो नहीं पा रही हूँ, मेरा पिछला हिस्सा बहुत दुख रहा है।”
इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, नेहा दीदी ने अपने हाथ में पकड़ी हुई क्रीम की एक डिब्बी मेरी तरफ बढ़ाई और बोली, “इसे मेरे पिछले हिस्से पर लगा दो, इससे मुझे थोड़ा बेहतर महसूस होगा।”
मैंने घबराते हुए उनसे पूछा, “लेकिन अगर मम्मी-पापा या पायल दीदी यहाँ आ गए तो क्या होगा?”
उन्होंने बेफिक्र होकर जवाब दिया, “चिंता मत करो, सब सो रहे हैं।”
नेहा दीदी की बात सुन कर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उन्होंने बिना डरे अपने नाइट गाउन के बटन खोल दिए। गाउन नीचे गिरा तो अंदर उन्होंने नीले रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी। उन्होंने बिना किसी झिझक के अपनी पैंटी उतार दी और फिर अपनी ब्रा भी निकाल दी।
अब वह पूरी तरह से बिना कपड़ों के थी। उनके स्तन काफी भरे हुए और गोरे थे, जो हल्की रोशनी में साफ दिख रहे थे। उनका नाजुक हिस्सा भी बहुत साफ और देखने में अच्छा लग रहा था। उन्होंने मेरी तरफ बिल्कुल नहीं देखा, वह बस सीधे बेड की तरफ गई और उस पर जाकर लेट गई।
उन्होंने मुझसे कहा, “गोलू, आओ और क्रीम लगा दो।”
नेहा दीदी की आवाज सुन कर मेरा दिल सीने में इतनी जोर से धड़कने लगा कि मुझे लगा उन्हें भी उसकी आवाज सुनाई दे रही होगी।
उनकी बात सुनते ही मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैं बेड की तरफ बढ़ा। मेरी शॉर्ट्स के अंदर मेरा लंड एक-दम सख्त हो चुका था और कपड़े की रगड़ से मुझे काफी बेचैनी महसूस हो रही थी।
मैं बेड के पास पहुंचा तो नेहा दीदी पेट के बल लेटी हुई थी। उनका चेहरा बेडशीट में दबा था और उनका पिछवाड़ा सीधे मेरी आंखों के सामने था। उनकी बॉडी की चमक मुझे और भी ज्यादा बेकाबू कर रही थी। मैंने बिना सोचे अपने शॉर्ट्स और अंडरवियर नीचे खींच दिए। मेरा लंड बाहर आकर हवा में लटकने लगा और वो पूरी तरह अकड़ चुका था। मैं तुरंत उनके बिल्कुल पीछे जाकर खड़ा हो गया और मेरा लंड उनके शरीर के करीब पहुँच गया। मैंने अपना हाथ उनकी पीठ की तरफ बढ़ा दिया।
नेहा दीदी ने बिना पीछे मुड़े कहा, “गोलू, क्या कर रहे हो? जल्दी करो, क्रीम लगाओ।”
मैं उनके शरीर के काफी करीब हो गया था, जहाँ मुझे उनकी बॉडी की गरमाहट महसूस हो रही थी। मैंने अपने लंड की टिप को उनके पिछवाड़े पर रखा। वह जगह बहुत गर्म और तंग थी, जिसे महसूस करते ही मेरा पूरा शरीर सुन्न सा हो गया। मैंने एक गहरी सांस ली और बिना कोई मौका दिए, पूरी ताकत से एक झटके में अपना पूरा लंड उनके अंदर डाल दिया। मेरे लंड के अचानक अंदर जाते ही नेहा दीदी के मुंह से एक दबी हुई चीख निकली। वह एक-दम चौंक गई और बेडशीट को कस कर पकड़ लिया। उनका शरीर एक झटके के साथ तन गया और वह पूरी तरह से मेरे सामने झुक गई।
उन्होंने धीरे से कहा, “गोलू, ये क्या कर रहे हो? इसे बाहर निकालो, ये बहुत ज्यादा दर्द दे रहा है।”
मैंने अपनी पूरी ताकत से उन्हें और करीब खींचते हुए कहा, “प्लीज दीदी, मुझे इसकी बहुत ज़रूरत है, अभी।”
मैंने बिना उनकी बात पर ध्यान दिए अपनी कमर को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। मेरा लंड उनके पिछवाड़े में अंदर-बाहर जा रहा था, और हर बार अंदर जाते समय एक गीली आवाज़ हो रही थी जो कान में पड़ते ही मुझे और ज्यादा पागल कर रही थी।
नेहा दीदी के शरीर से बीच-बीच में दबी हुई आवाज़ें आ रही थी। वह अपने दांतों से होंठ दबा कर उस दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मेरी हर हरकत के साथ उनकी आहें और तेज हो रही थी। वह अपनी पूरी ताकत से बेडशीट को पकड़ कर खुद को थामे हुए थी, और उनके शरीर की हर हलचल मुझे साफ महसूस हो रही थी। उस कमरे में सिर्फ हमारी बढ़ती हुई धड़कनें और वो लगातार आ रही गीली आवाज़ें गूंज रही थी, जो मुझे एक अलग ही लेवल पर ले जा रही थी।
पर जब आखीरकार नेहा दीदी की तकलीफ़ कम हुई तो हम दोनों को उतना ही मजा आने लगा। उस रात हम दोनों ने सब कुछ भुला दिया था। नेहा दीदी और मैं, हम दोनों इस कदर एक-दूसरे में खोए हुए थे कि हमें ये भी याद नहीं रहा कि हम कौन हैं। उस वक्त हमारे लिए कुछ भी गलत नहीं था, हमें बस एक-दूसरे की जरूरत थी। हमें कल की कोई फिक्र नहीं थी, बस हम उस पल में जी रहे थे।
जब वो घुटनों के बल झुकीं और उन्होंने अपना पिछवाड़ा मेरी तरफ किया, तो वो नज़ारा बहुत ही तगड़ा था। मैंने बिना रुके अपने लंड को उनके अंदर डाला और पूरी गहराई तक महसूस किया। वो अपनी कमर को मेरी तरफ और जोर से धकेल रही थी ताकि मैं और अंदर जा सकूं। जब वो थक गई, तो वो मेरे ऊपर बैठ गई और खुद को ऊपर-नीचे करने लगी। उनके चेहरे के भाव और उनकी हरकतों से साफ़ था कि उन्हें मेरे लंड का एक-एक हिस्सा अंदर महसूस हो रहा है।
इसके बाद, वो बेड के कोने पर बैठ गई और मैंने अपने लंड को उनके मुंह में डाल दिया। वो उसे बहुत चाव से चूस रही थी और उनकी जीभ की हरकतें मुझे पागल कर रही थी। फिर मैंने उन्हें सीधे लिटाया और उनके पैरों को उठा कर अपने कंधों पर रख लिया। इस पोजीशन में मैं उनके सबसे ज्यादा करीब था और मैं उनके जिस्म के हर हिस्से का मज़ा ले रहा था। हम दोनों पसीने से भीग चुके थे और हर नए तरीके के साथ हमारी बेताबी और बढ़ती जा रही थी।
जब मेरा बदन कांपने लगा और मुझे लगा कि मैं अब खुद को नहीं रोक पाऊंगा, तो मैंने हांफते हुए उनसे कहा, “दीदी, बस मैं आने वाला हूँ।”
नेहा दीदी ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा, “गोलू, इसे मेरे मुंह में ही निकालो।”
मैंने फौरन अपना लंड उनके होंठों के बीच रख दिया और अपना पूरा सफ़ेद पानी उनके मुंह में छोड़ना शुरू कर दिया। वो उसे बहुत मजे से पी रही थी और एक-एक बूंद को अंदर ले रही थी। जब मेरा सफ़ेद पानी उनके होंठों के किनारों से बाहर निकलने लगा, तो उन्होंने अपनी जीभ से उसे साफ कर लिया।
उनकी जीभ की वो हरकत और मेरा सारा सफ़ेद पानी उनके मुंह में जाते देख, मैं पूरी तरह थक कर उनके ऊपर गिर गया। हम दोनों की सांसें अभी भी तेज़ थी और कमरे में बस हमारी धड़कनें सुनाई दे रही थी। उनका चेहरा मेरे सफ़ेद पानी से गीला था और वो उसे आराम से साफ कर रही थी, जैसे उस रात हमने जो किया वो सब कुछ था।