मेरे बचपन का प्यार रूबी – भाग 14 – रविवार की आखरी रात

मैंने रितु की टांगें थोड़ी और ऊपर की और चूतड़ खोल दिए। गांड का छेद मेरे सामने था। मैंने छेद पर जैसे ही जुबान फेरी रितु के मुंह से सिसकारी निकली “आअह”

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रजनी की चुदाई उसी की जुबानी भाग-23 – करनाल के आख़री दो दिन

थोड़ा दम ले कर संतोष ने बड़े ही प्यार से लंड मेरी फुद्दी से बाहर निकला। लेसदार मलाई से भरी चूत में से लंड फिसल कर बाहर निकल गया और आवाज आयी — बलप्प।

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रजनी की चुदाई उसीकी की जुबानी-2

पढ़िए कैसे मैंने अपने ही घर में मेरी माँ को किसी पराये मर्द से चुदते देखा जिससे मेरी चूत गीली हो गयी, और मुझे किसी ने देख लिया माँ की चुदाई देखते हुए।

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