पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-23
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
मौसी अपनी पहली रात की चुदाई की कहानी सुना रही थी।
“धीरज रात भर की ताबड़-तोड़ चुदाई से मेरा पूरा जिस्म दुःख रहा था। जिस तरीके से मैं चुप बैठी हुई थी, मेरी सास दो मिनट में समझ गयी कि रात को क्या हुआ होगा। मेरी सास ने तेरे मौसा की तरफ देखा और गुस्से से बोली, “मनोहर तूने शराब पी थी कल रात को?”
“तेरे मौसा की तो आवाज ही नहीं निकल रही थी। मेरे सास फिर वैसे ही गुस्से से तेरे मौसा को बोली, “शर्म आनी चाहिए तुझे, ये क्या कहीं भागी जा रही थी? जा बाहर।”
“तेरे मौसा बाहर चले गए। मेरी सास मुझसे बोली, “बेटा बहुत तंग किया क्या इसने? मैंने दबी आवाज में कहा, “नहीं मम्मी जी।”
मेरी सास समझ गई की मैं झूठ बोल रही हूं। मेरे सास बोली, “बेटा मैं तुझे एक गोली दे देती हूं, खा कर थोड़ी देर और सो जा।”
“मेरी सास बाहर गयी और दो गोलियां और एक क्रीम की ट्यूब ला कर मझे दी और गोलियां खिला कर दरवाजा बंद करके गयी चली गई। मैं समझ गयी की ट्यूब का क्या करना है। बाहर मेरी सास फिर से जोर-जोर से तेरे मौसा पर चिल्लाने लगी, “मनोहर तू पागल है क्या? पूरी जिंदगी यहीं रहना है उसने – तेरे पास। क्या सोच रही होगी तेरे बारे में वो, ये भी सोचा है? और फिर इस तरह पीते हैं?”
मौसी हंसते हुए बोली, “धीरज एक पल को तो मुझे लगा कहीं गुस्से में मेरी सास यही ना कह दे, “इस तरह पी कर चोदते हैं क्या अपनी बीवी को पहली रात में?”
“खैर, मैं बाथरूम गयी और क्रीम गांड के छेद पर लगा कर, और गोलियां खा कर फिर से सो गई। दोपहर दो बजे मैं सो कर उठी तो तबीयत कुछ ठीक थी। गांड का दर्द भी कम था। और नहा धो कर अपना हुलिया ठीक-ठाक करके कमरे से बाहर निकली। मेरी सास किचन में थी। सास को प्रणाम करके में मैं किचन में उनका हाथ बटाने लगी तो मेरी सास बोली, “बेटा उधर डाइनिंग टेबल पर बैठ जा और बारह दिन आराम कर।”
“रात हुई तो मैं डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी। खाना खा कर फिर कमरे में आ गयी और लेट गयी। थोड़ी देर के बाद तेरे मौसा आ गये और मेरे पास ही लेट गये। मुझसे बोले, “कौशल्या पीछे चूतड़ों का छेद दुःख रहा है क्या? जरा दिखाओ मुझे।”
“मैं जब नहीं हिली तो तेरे मौसा ने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और सलवार उतार दी। और फिर मुझे उठा कर मेरे बाकी कपड़े भी उतर दिए। इसके बाद तेरे मौसा खुद भी नंगे हो गये और मुझे उठा कर उलटा कर दिया और मेरे चूतड़ फैला कर कर चूतड़ों का छेद देखने लगे।”
तेरे मौसा मुझे से बोले, “कौशल्या ये तो सूजी हुई है। सॉरी कौशल्या, आगे से ऐसा नहीं होगा।”
मैं सीधी होने लगी तो तेरे मौसा बोले, “एक मिनट कौशल्या ऐसे ही लेटी रहो मैं क्रीम लगा देता हूं।”
तेरे मौसा अलमारी में से क्रीम ले आये तो मैंने धीरे से कहा, “मम्मी जी भी क्रीम दे गयी हैं।”
“जब उन्होंने पूछा कहां है तो मैंने कहा बाथरूम में है।”
“तेरे मौसा बाथरूम में से क्रीम ले आये। तेरे मौसा ने पहले तो मेरी गांड का छेद खूब चाटा। तेरे मौसा के गांड का छेद चाटने से मुझे बड़ा आराम मिला। फिर तेरे मौसा ने गांड के छेद के साइडों में और छेद के अंदर भी क्रीम लगा दी और मुझे लिटा दिया।”
“तेरे मौसा मेरे पास ही लेट गए और मेरे मम्मों और फुद्दी के साथ खिलवाड़ करने लगे। कुछ देर के बाद मैंने देखा तेरे मौसा का लंड खड़ा हो गया है। तेरे मौसा ने मेरे मम्मों के निप्पल मुंह में लिए और चूसने लगे। उन्होंने मुझ से पूछा, “कौशल्या फुद्दी की चुदाई करवानी है, लंड लेना है फुद्दी में?”
“मैंने धीरे से कहा, “पता नहीं।” ये एक तरह से मेरी हां ही थी। गांड में दर्द जरूर थी, मगर मुझे पिछली रात को फुद्दी की चुदाई में मजा तो आया ही था।”
“फिर तेरे मौसा उठे और अलमारी में से दारू की बोतल में से दारू की तीन-चार घूंट भरे और बोले, “कौशल जब तक गांड का छेद पूरी तरह थी नहीं हो जाता पीछे से ही चुदाई करेंगे। ऊपर से करेंगे तो चूतड़ों पर जोर पड़ेगा और गांड के छेद में दर्द होगा। मैंने धीरे से “हां” में सर हिला दिया।”
मौसी नीचे लेटी हुई मुझे बता रही थी, “धीरज इसके बाद तेरे मौसा ने मुझे बेड के किनारे पर चूतड़ों के नीचे दो तकिये लगा कर, मुझे पीछे की तरफ लिटा दिया और मेरे आराम के लिए मेरे सर के नीचे भी रख दिया। फिर तेरे मौसा ने मेरी टांगें ऊपर की और अपना लंड मेरी फुद्दी के छेद पर रक्खा और हो गए शुरू।”
“बारह दिनों की चुदाई ने हम दोनों के बीच की शर्म तो खत्म ही कर दी थी। चुदाई के दौरान तेरे मौसा बोलते, “आह मेरे जान कौशल्या, क्या मस्त फुद्दी है, एक-दम टाइट, चोदने का मजा ही आ जाता है। दिल करता है दिन रात चोदता ही रहूं।”
“उधर मैं भी बोलती , “क्या मस्त लौड़ा है जी आपका, चूत में पूरा अंदर तक जाता है, पूरी फुद्दी ही भर जाती है जी आपके लौड़े से।”
“बस ऐसे ही एक महीना गुज़र गया और मेरी गांड का छेद बिलकुल ठीक हो गया। अब मेरा फिर से गांड चुदवाने का मन होने लगा। एक दिन जब तेरे मौसा मुझे चोदने लगे तो मैंने कह ही दिया, “एक दिन पीछे भी डालो जी, बड़ा मन कर रहा है।”
“तेरे मौसा ने पूछा, “पीछे कहां कौशल्या? गांड में”
“मैंने कहा, “जी गांड में अब तो गांड का छेद ठीक हो गया लगता है।”
“तेरे मौसा ने कहा, “ठीक है कौशल्या, इधर सोफे पर आ कर चूतड़ ऊपर करके लेट जा, आज तुझे गांड चुदाई का पूरा मजा दूंगा। पूरा गांड की गहराई तक जाएगा लंड।”
“ये बोल कर तेरे मौसा ने अपने कपड़े उतार दिए और फिर से अलमारी की तरफ चले गए और शराब की बोतल में से चार घूंट लगा कर बोले, “अजा मेरी जान मेरी रानी मेरे लंड की मलिका मेरी कौशल्या, तेरी गांड चोदने की लिए मैं हो गया तैयार।”
“मैं भी मस्ती में थी। मैंने भी कहा, “आजा मेरी फुद्दी, मेरी गांड के राजा”, और हाथ पीछे करके मैंने चूतड़ फैला दिए लिए और बोली, “लो ये रही मेरी गांड जी, जो करना है करो इसका।”
“और धीरज क्या मस्त गांड चुदाई हुई उस दिन। हम दोनों को गांड चुदाई की आदत ही हो गयी। आठ दस दिनों के बाद गांड चुदाई होती ही होती थी। उसके बाद तो गांड चुदाई का ये सिलसिला जो चला, आज से साल भर पहले ही जा कर रुका जब तेरे मौसा का लंड सख्त होना ही बंद हो गया।”
“मगर अब तेरे मौसा मेरी फुद्दी और गांड में एक रबड़ का लंड डाल कर मजा देते हैं। मुझे उलटा लिटा कर तेरे मौसा ने मेरी गांड में रबड़ का लंड डाला होता है और खुद अपने लंड की मुठ मारते है और जब लंड पानी छोड़ने लगता है तो रबड़ का लंड निकल कर अपना लंड मेरी गांड के छेद पर टिका देते हैं। रबड़ के लंड के कारण गांड का छेद तो खुला ही होता है, तेरे मौसा के लंड का सारा पानी मेरी गांड में चला जाता है।”
“मौसी ये सुना कर चुप हो गयी। मेरा का लंड अब भी मौसी की फुद्दी के ऊपर ही था। मैं बोला, “मौसी आपकी गांड चुदाई की कहानी तो गज़ब की सेक्सी – कामुक थी। मेरा तो मन अभी के अभी आपके गांड चोदने का होने लगा है।”
मौसी बोली, “धीरज बेटा बस दो रात और सबर कर ले – आज की रात और कल की रात तो तू मेरी फुद्दी की एक साल से लगी हुई आग बुझा, कल के बाद, परसों से तुझसे मस्त गांड भी चुदवाऊंगी, और तेरे चूतड़ चाट कर ऐसा मजा दूंगी की तू भी याद रखेगा। उसके बाद चार पांच दिन तू मेरे साथ साथ माधवी को भी चोद लेना। उसे भी तो लंड चाहिए अब। तू यहां है, तेरे लंड की ख्याल से फुद्दी में उंगली डाल कर मजे ले रही होगी।”
मैंने कहा, “लेकिन मौसी मेरा तो यहां का तीन दिनों का ही प्रोग्राम है।”
मौसी बोली, “उसकी तू फ़िक्र मत कर। मैं कल सुबह ही जीजी से तेरे यहां सात आठ दिन रुकने के बारे में बात करूंगी।”
अपनी गांड चुदाई की कहानी कौशल्या ने लेटे-लेटे ही सुना डाली थी। मौसी अब मेरा का लंड लेने फुद्दी में लेने के लिए उतावली थी। मौसी बोली, “बेटा डाल भी अब फुद्दी में, क्यों देर कर रहा है। आग लगी पड़ी है मेरी फुद्दी में।”
मैंने मौसी की टांगें थोड़ी और चौड़ी की – मम्मी की फुद्दी की तरह ही मौसी की फुद्दी भी हल्की सी खुल गयी और फुद्दी के अंदर का गुलाबी नजारा दिखाई देने लगा। मैंने एक झटके के साथ लंड मौसी ही फुद्दी में डाला और चुदाई शुरू कर दी।
इसके बाद तो उस दिन जो चुदाई क्या चुदाईयां हुई, जो रात दो बजे तक चली। कोइ गिनती ही नहीं रही की कितनी बार मौसी की फुद्दी ने पानी छोड़ा, और तब तक मौसी ने मुझे रुकने को नहीं कहा, जब तक मेरे लंड का गर्मा-गर्म सफ़ेद शहद मौसी की फुद्दी में निकल नहीं गया।
मौसी मस्ती में बोली, “आअह धीरज मजा आ गया, कितना पानी निकलता है तेरे लंड में से, पूरी फुद्दी भर जाती है।”
ये बोल कर मौसी ने आखें बंद कर ली। मौसी लम्बे-लम्बे सांस ले रही थी। मौसी बड़े ही मादक अंदाज में बोली, “आह मेरे राजा, क्या मस्त मजा दिया तूने आज। मेरे राजा, कल का दिन भी ऐसे ही मजा देदे। बस फिर, समझ मैं तेरी रंडी और तू मेरा मालिक। जब कहेगा, कपड़े उतार कर तेरे सामने फुद्दी खोल कर लेट जाऊंगी।”
उस दिन के चुदाई हो चुकी थी। तीन घंटे बीत चुके थे। मैं उठा और पीछे के दरवाजे से अपने कमरे में आ गया। सुबह मेरी नींद जल्दी खुल गयी। मैं बाथरूम गया, नहा कर शेव वगैरह करके तैयार हो कर ही बाहर आया। साढ़े आठ बजे मैं नाश्ता करके फैक्ट्री के लिए निकल गया। उस दिन मैं बारह बजे ही फारिग हो गया। सात लाख के पेमेंट मेरे ब्रीफकेस में थी।
अकाउंटेंट उस दिन भी नहीं आया था।
ऑफिस में बैठा ऐसे ही इंतजार कर रहा था कि मौसा जी का फोन आ गया। इधर-उधर की बातें करते करते मौसा जी बोले, “धीरज बेटा कोई समस्या तो नहीं हो रही?”
मैंने कहा नहीं मौसा जी सब ठीक है। मैं कल और आज की पेमेंट की बात करने ही वाला था कि मौसा जी बोले, “वो छोड़ धीरज, वो मुझे मालूम है पार्टी पेमेंट करते ही मुझे भी फोन कर देती है। कल लास्ट पेमेंट होगी, उसके बाद दस बारह दिनों तक कोइ डिलीवरी नहीं जानी – तब तक मैं आ ही जाऊंगा। अकाउंटेंट का फोन आया थी, वो भी कल पहुंच जायेगा। अगर तूने गुडगाँव जाना हो तो कल चले जाना।”
मैंने कहा, “नहीं मौसा जी, मौसी कह रही थी तीन चार दिन और रुकने कि लिए। मैंने भी सोचा, इन दिनों में फैक्ट्री कि चक्कर लगा लूंगा, मुझे भी बहुत सी नई चीज़े देखने को मिल रही हैं, जो हमे इंजीनरिंग में नहीं पढ़ाई जाती।”
मौसा जी बोले, “ये हुई ना बात। मैं तो कहता हूं, जब तक तेरा रिजल्ट नहीं आ जाता तू यहीं रह और रोज़ फैक्ट्री जा।”
मैंने भी सोचा, “रोज़ दिन में फैक्ट्री जा और रोज़ रात मौसी की फुद्दी और गांड की चुदाई कर।”
मैंने हंसते हुए कहा, “ठीक है मौसा जी।”
एक बजे मैं घर के लिए रवाना हो गया।
घर पहुंच कर मैंने ब्रीफकेस मौसी को दिया और बोला, “मौसी ये साढ़े सात लाख की पेमेन्ट है।”
मौसी ने ब्रीफकेस डाइनिंग टेबल पर रख दिया और मुझे बाहों में लेकर बोली, “मां चुदा गए साढ़े सात लाख, तू इधर आ और मेरे फुद्दी चोद मेरे राजा। ये आज एक बजे से ही गरम हुई पड़ी है।”
मैंने हड़बड़ाते हुए पूछा, “एक बजे से? और मौसी माधवी?”
मौसी बोली, “माधवी की फ्रेंड शालिनी आयी थी तीन और लड़कियों के साथ – उसके साथ गयी है यूनिटी वन मॉल में। वहां घूमेंगे सवा तीन बजे का मूवी शो देखेंगे और शालिनी माधवी को आठ बजे तक यहां छोड़ेगी। मतलब मेरी फुद्दी के सरताज, आज पूरे पांच घंटे हैं हमारे पास। ये आज की लड़कियां, आठ बजे का बोल कर गयी हैं, नौ बजे से पहले नहीं आने वाली।”
अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-25