दोस्तों मेरा नाम केतन है। आज जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूं, यह कहानी तब की है, जब मैं मेरे दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए ट्रेन से सफर कर रहा था।
मुझे उस ट्रेन में 2 अंजान बहने मिली। मैंने कैसे उन दोनों के साथ मजे किये, यह मैं आपको इस कहानी में बताऊंगा। तो बिना किसी देरी के कहानी शुरु करते है।
मेरे दोस्त साहिल की शादी रविवार के दिन होनी थी। तो मैं 1 दिन पहले ही शाम को घर से निकल पड़ा। मेरी ट्रेन रात को 8 बजे की थी, तो मैंने अपना बैग पैक किया और स्टेशन पे 7:30 बजे ही पहुँच गया। 8 बजे ट्रेन आई। मुझे ट्रेन के जनरल डिब्बे में जाना था। मेरे पास कोई रिजर्वेशन नहीं था।
जैसे ही मैं ट्रेन में चढ़ा मैंने देखा कि ट्रेन में बहुत ज्यादा भीड़ थी, और उसमें पहले से ही सारी सीटें भरी होने के कारण कुछ लोग खड़े भी हुए थे।
मैं जल्दी से अंदर चला गया और बीच में जाकर एक सीट के सहारे खड़ा हो गया।
मेरे सामने ही 21 साल की एक लड़की खड़ी हुई थी और मेरे सामनेे वाली सीट पर बैठी एक लड़की से बात कर रही थी। जिस लड़की से वो बात कर रही थी, वो लड़की 25 साल की रही होगी और बहुत ही सेक्सी दिख रही थी।
मेरे सामने वाली लड़की दिखने में बहुत ही सुंदर थी। उसका फिगर 33-26-34 रहा होगा। वो मेरी तरफ मुंह करके खड़ी थी।
उसने काले रंग की टाइट पैंट और हल्के नीले रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। उसके ऊपर उसने स्वेटर पहना हुआ था।
उसने स्वेटर की चेन नहीं लगाई थी तो उसकी टी-शर्ट के ऊपर से उसके गोल-मटोल, रसीले स्तन का उपहार अच्छी तरह से दिख रहा था।
मैं तो देखता ही जा रहा था। इतने में उसने मेरी तरफ देखा तो हमारी नजरें एक-दूसरे से मिल गई। और वो समझ गई कि मैं उसके स्तनों को देख रहा था।
मैं एक-दम से थोड़ा घबरा गया, लेकिन उसने मुझे एक हल्की सी मुस्कान दी और उस मुस्कान के साथ “हैलो” बोला। मैंने भी “हैलो” बोला ऐसे ही हमारी बात-चीत शुरू हो गई। मैंने उसको अपना नाम और अपने बारे में कुछ बातें बताई।
वो बिल्कुल मेरे सामने खड़ी हुई थी और मैं उसके बिल्कुल सामने अपने एक हाथ से राइट में लगे पोल को पकड़े हुआ था और मेरा दूसरा हाथ लेफ्ट की तरफ की सीट पर रखा हुआ था। जिससे कि वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी।
मेरे बाद उसने भी अपने बारे में मुझे बताया। उसका नाम रिया था। उसने बी.कॉम. किया था और वो पूना में रहती थी।
उसने कहा: मैं अपनी बड़ी बहन के साथ कुछ दिन के लिए अपने मामा के घर जा रही हूं। मेरे मामा का घर उस ही गांव में है जहां आप शादी में जा रहे हैं।
उसकी ये बात सुन कर मैं बहुत खुश था। क्योंकि इस सफर में हम आखिरी तक एक-दूसरे के साथ रहने वाले थे। उसकी दीदी हमारी बाते सुन रही थी, तो रिया ने उसकी दीदी के साथ भी मेरी पहचान करवाई।
उसकी दीदी का नाम अनिता था और उसने काले रंग की सलवार और सफेद कुर्ती पहनी हुई थी। उसका फिगर 35-25-36 रहा होगा।
तब उसकी दीदी ने भी एक मुस्कान दी और “हैलो” बोला। मैंने भी उनको “हैलो” बोला। और मैं उनको देखता ही रह गया।
क्यूंकि जब वो आगे को झुकी, तो उसकी कुर्ती के अंदर बड़े बड़े, गोल-मटोल और एक-दम टाइट ब्रा से आगे कसे हुए बूब्स दिखे और दोनों चूचियों के बीच की लाइन साफ दिखाई दे रही थी।
रिया ने समझ लिया था कि मैं उसकी दीदी के स्तनों को देख रहा था। यह देख कर रिया हल्का सा हसने लगी। शायद मेरा ऐसे देखना उसको अच्छा लग रहा था। लगभग 9:30 बजे का टाइम था कि एक-दम से ट्रेन के डिब्बे की लाइटें बंद हो गयी।ट्रेन में पूरा अँधेरा हो गया था।
लाइट बंद होने से ज्यादा किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ा। हम भी थोड़ी-थोड़ी बात करते रहे। थोड़ी ही देर बाद जैसे ही अगला स्टेशन आया, ट्रेन में और पैसेंजर चढ़ने लगे। इसके कारण ट्रेन और पैक हो गई।पीछे धक्का-मुक्की होने लगी। किसी ने ट्रेन में अंदर आने के लिए पीछे वालों को धक्का दिया।
पीछे दिए धक्के की वजह से मेरे पीछे वाले लोगो का धक्का मुझे लगा, और मैं सीधा रिया के शरीर से चिपक गया। मेरे होंठ भी सीधे उसके कोमल, गुलाबी होंठों पर लग गए और मेरा एक हाथ उसकी चूचियों पर जा कर लगा, जिससे रिया की चूचियां दब गई।
उसने भी धक्का लगने के कारण मेरी कमर पर अपना एक हाथ रख कर मुझे सहारा देने की कोशिश की। इस हादसे में मेरे मेरा लंड उसकी चूत से टकराया। ट्रेन में बहुत अंधेरा था, और उस अंधेरे का फायदा उठाते हुए मैं रिया की चूचियों को हल्का मसलने लगा। रिया ने अपना दूसरा हाथ भी मेरी कमर में डाल कर मुझे कस लिया। शायद मेरा उसकी चूचियों को ऐसे मसलना उसको भी पसंद आ रहा था।
हम दोनों के मुँह एक-दूसरे के बहुत पास थे, इसलिए हम दोनों एक-दूसरे की गर्म सांसें अपने गालों पर महसूस कर पा रहे थे। रिया, अंधेरे की वजह से मेरे हाथ आई एक मस्त माल की तरह लग रही थी। अंधेरे उसका जिस्म ही मेरे अंदर वासना को जगा रहा था।
कुछ ही समय में हम दोनों ने एक-दूसरे की चुदास को समझ लिया। अब कुछ देर बाद मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को टी-शर्ट के ऊपर से ही धीरे-धीरे दबाना शुरू कर दिया था, तो रिया अह्ह्ह अह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आआउच आअह्ह्ह की सिसकारियां लेने लगी।
कुछ ही देर बाद ट्रेन के डिब्बे की लाइट एक बार जल कर बंद हुई। लाइट कुछ 5-10 सेकंड के लिए ही आई होगी, पर उसकी रोशनी में मुझे हमारी स्थिति समझ आई।
और इसलिए मैंने रिया से अलग होने की कोशिश की, तो रिया मेरे कान में कहा: ऐसे ही करते रहो, मुझे अच्छा लग रहा है।
ये बात सुन कर मैंने रिया से कहा-
मैं: तुम्हारी दीदी ने देख लिया तो?
रिया: अंधेरे में कैसे?
मैं: नहीं। पर एक-दम से लाइट आ गई और तब ही देख लिया तो?
रिया: देख लेने दो, कुछ नहीं होगा। भीड़ ही इतनी है तो क्या करे? मैं सब संभाल लूंगी, तुम चिंता मत करो केतन।
रिया की बात सुन कर मेरी भी हिम्मत बढ़ गई और मैं अपने दोनों हाथों से रिया की दोनों चूचियों को अच्छे से मसलने लगा।
रिया मेरे कान में बोली: केतन बहुत मजा आ रहा है आअहह यस आअहह ऐसे ही करते रहो।
मैंने कहा: हां रिया, मुझे भी बहुत मजा आ रहा है। क्या मस्त चूचियां हैं तेरी। दिल कर रहा है कि इन्हें चूस-चूस कर पूरा दूध पी लूं।
इस बात को सुन कर उसने मेरे कानों को अपने दांतों से हल्का सा काटा और कहा: तुम बहुत नटखट हो, अभी इसमें दूध कहां से आएगा! अभी तो सिर्फ चूसने का मजा लो। और मुझे भी दो।
नीचे मेरा लंड भी अब कड़क होने लगा था।मैंने अपने हाथों से रिया की टी-शर्ट को ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से ही उसके दोनों स्तनों को दबाने लगा। रिया आहें भरने लगी और हल्की हल्की सिसकारियां लेने लगी आआहह आह आअहह आआहह।
साथ ही में रिया अपनी कमर हिलाते हुए अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ती हुई बोली: केतन मुझे तुम्हारा लंड बहुत मोटा लग रहा है। नीचे मेरी चूत में चुभ रहा है।
मैंने कहा: तुम खुद हाथ लगा कर देख लो रिया।
इस बात पर रिया बोली: हां केतन, मैं भी तुम्हारा मोटा लंड अपने हाथ में लेना चाहती हूं।
इतना बोल कर रिया अपना एक हाथ नीचे लेकर गई और मेरे पैंट के ऊपर रख दिया। वो पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था, जब बो मेरे लंड को सहला रही थी। फ़िर उसने मेरे लंड को सहलाते हुए मेरे पैंट की चेन खोल दी और हाथ अंदर डाला मेरी चड्डी में तने हुए लंड को चड्डी के ऊपर से ही सहलाने लगी।
उस समय मुझे ऐसा लगा कि अब मेरा लंड चड्डी फाड़ कर बाहर आ जायेगा। इधर मैंने रिया की ब्रा को ऊपर करके उसकी चूचियों को आजाद कर दिया था। उसकी सेक्सी चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर चूसने लगा था। साथ में अपने हाथों से उसको जोर-जोर से दबा भी रहा था।
अब वो और इंतज़ार नहीं कर सकती थी, तो उसने मेरी चड्डी को मेरे पैंट के अंदर ही नीचे किया और चड्डी से लंड बाहर निकाल कर पूरा आज़ाद कर दिया। मेरा लंड रिया के कोमल हाथों में आते ही लोहे जैसा कड़क हो कर झूमने लगा था।
जैसा ही लंड बाहर आया, रिया अपने हाथ से उसके साइज का पता लगाने की कोशिश करने लगी। पर उसके एक हाथ में मेरा पूरा लंड नहीं आ रहा था। तो फिर उसने अपना दूसरा हाथ भी नीचे ले जा कर दोनों हाथों से मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे कान में बोली-
रिया: बाप रे। यार तुम्हारा कितना लंबा या मोटा लंड है केतन। इसे लेकर तो मैं मर ही जाऊंगी। मेरे बॉयफ्रेंड का तो इसका आधा भी नहीं है। अब तो इसको उजाले में ही अच्छे से देखना पड़ेगा।
ऐसा बोलते हुए रिया मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी और सिसकारियां लेने लगी। आआआ आआहाहा आआहह केतन आआआहहह।
इस तरह से भीड़ में ही हम दोनों एक-दूसरे को पूरे मजे दे रहे थे और हम दोनों एक दूसरे में ऐसे खोए हुए थे, जैसे कि हम एक-दूसरे को बहुत समय से जानते हो और ना हमें किसी की कोई परवाह हो ना कोई चिंता।
ऐसा लग रहा था जैसे कि सिर्फ हम दोनों ही ट्रेन में थे और कोई नहीं। दोनों तरफ से बराबर आग लगी हुई थी। दोनों पूरी तरह से गरम हो चुके थे। पर इतने में मैंने देखा कि रिया की दीदी ने अपना मोबाइल की लाइट जलाई और अपनी जगह से उठ कर खड़ी होने लगी थी।
मैंने सोचा कि शायद उसे हम दोनों पर कुछ शक हो गया था, तो मैंने झट से रिया की ब्रा को और टी-शर्ट को नीचे किया और उसके हाथों से लंड छुड़वा कर पैंट में अंदर डाला और पैंट की चेन लगा कर उसे अलग हो गया।
जल्दी-जल्दी मैंने लंड तो अंदर कर लिया था, पर चड्डी ऊपर करना भूल गया था। लंड पैंट के अंदर तो था, पर चड्डी से बाहर ही था।
रिया बोली: क्या हुआ केतन?
इतने में उसकी दीदी ने रिया को आवाज दी: अरे रिया, अब जरा तुम बैठो मेरी जगह। तुम इतनी देर से खड़ी हो पैरों में दर्द होने लगा होगा। अब बस एक घंटे का सफर बाकी है। तुम आराम से बैठ जाओ।
दीदी की इस बात से रिया इंकार नहीं कर सकती थी, तो थोड़े गुस्से में उसने दीदी से कहा-
रिया: ठीक है दीदी।
इतना बोल कर वो सीट पर बैठ गई।
और उसकी दीदी मेरे सामने खड़ी हो गई। उसकी दीदी मेरी तरफ अपनी गांड करके खड़ी हो गई। मैं अपने हाथों को दोनों तरफ की सीट पर रख कर खड़ा हुआ था। मेरा लंड पूरा तरह से खड़ा होने की वजह से दीदी की गांड से टकरा रहा था।
इसके आगे की कहानी अगले भाग में, मैंने दीदी और रिया को कैसे चोदा। अगर कहानी अच्छी लगे तो फीडबैक जरूर दे।और किसी लड़की को संपर्क करना है, तो वो मेरी मेल पे रिप्लाई दे सकती है। मेरी मेल आईडी है- [email protected]