पिछला भाग पढ़े:- अंधेरे में मिले आदमी ने की गांड की चुदाई-1
मेरी पिछली गे सेक्स स्टोरी में आपने मेरे साथ जो सेक्स घटना हुई, वो पढ़ी थी। अब आगे-
उस घटना को हुए 2-3 हफ्ते हो गए। मैं फिर से उस सड़क से ट्यूशन जा रहा था, कि मेरी फिर से उस अंजान आदमी से रास्ते में मुलाकात हुई। पहले तो मैंने उसको पहचाना नहीं। पर जब वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराया, तो ठीक से पहचाना।
वैसे उसका नाम रवि है। तो मैं भी एक बार मुस्कुरा कर चले जाने ही वाला था, कि वो मेरे सामने आ कर रोड ब्लॉक करके खड़ा हो गया।
रवि: कहां जा रहे हो? मेरे साथ चलो, तुमको किसी से मिलना है।
मैंने तय किया कि मैं ट्यूशन नहीं जाऊंगा, और उसके साथ चला गई। वो मुझे उस गली के पास एक छोटे से घर में ले गया। घर मतलब सिर्फ एक कमरा था बहुत छोटा सा, एक खिड़की वाला। घर में सामान कुछ खास नहीं था, सिर्फ एक बिस्तर, दो प्लास्टिक की कुर्सियां, और एक छोटी सी टेबल।
वो घर थोड़ा गंदा भी था। घर के कोने में सिगरेट, और टेबल के नीचे ढेर सारी खाली दारू की बोतलें थी। मुझे उस घर में बैठने को बोल कर रवि कुछ देर के लिए चला गया। मैंने बाहर देखा तो पहले से ही अँधेरा था। 6 बजने वाले थे, और सर्दी का समय भी था, तो बाहर पूरा अँधेरा था।
मैं बैठा रहा वैसे ही, और आधा घंटा हो गया था। फिर जब बोर हो कर मैं बाहर जाने के लिए दरवाजा खोलने गया, तो मुझे एहसास हुआ कि दरवाजा बंद था। मैं डर गई, लेकिन रिएक्ट नहीं किया, और चुप-चाप बिस्तर में बैठ कर, बैग से फोन निकाल कर, फोन देखने लगा।
सात बजे लगे कि अचानक कुछ लोगों के आने की आवाज आई। मैंने तुरंत फोन स्विच ऑफ करके बैग में डाल दिया (ऐसे अंजान लोगों पर भरोसा नहीं कर सकते हम)। पहले रवि अंदर आया, पीछे और एक आदमी। वो रवि से थोड़ा लंबा था, उसका शरीर थोड़ा साँवला था।
रवि: इसे मिलो ये सुरेश दा है। वो वाली दुकान इसकी ही है। मेरे से 3-4 साल बड़ा है।
मैंने एक बार सुरेश को ऊपर से नीचे तक देख लिया।
रवि: असल में ये माल लाने में थोड़ा टाइम लग गया।
बोल कर कुछ चिप्स और तले हुए चना-दाल के पैकेट, कोल्ड ड्रिंक, और 4 ब्रांडेड और 3 लोकल दारू की बोतलें टेबल पर रखी।
रवि: असल में आज मार्केट की सारी दुकानें बंद हैं। एक वेंडर की मौत हो गई है, तो थोड़ा दूर से ये लाना पड़ा।
मैं इतनी दारू की बोतलें देख कर घबरा गया। मुझे लोगों का इरादा तो समझ आ रहा था, पर और लोग भी जुड़ेंगे तो मैं तो मर ही जाता। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
सुरेश ने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया, हाथ मिलाने के लिए। मैं थोड़ी हिचकिचाहट पर उसका हाथ पकड़ा। उसका हाथ बहुत गरम था। इस ठंड में उसका ये गरम हाथ छू कर मानो शरीर से करंट बह गया।
फ़िर वो जैकेट उतारने लगे। मैंने सोचा अभी शुरू हो जाएगा। पर नहीं, वो जैकेट उतार कर एक सिगरेट जलाया। रवि ने बिस्तर के नीचे से तीन ग्लास निकाले। दो में दारू और एक में कोल्ड ड्रिंक डाली, और एक प्लेट में चिप्स और चना दाल। फिर मेरे हाथ में कोल्ड ड्रिंक का गिलास देकर वो दारू पीने लगा।
सुरेश: ये लाइट ऑफ कर दो, अच्छा लगेगा।
रवि ने लाइट ऑफ कर दी। बाहर से थोड़ी-थोड़ी सड़क के पीले बल्ब की रोशनी आ रही थी। वो दारू पीने लगे, और आपस में बात करने लगे। 3-4 गिलास पीने के बाद मेरे ऊपर रवि की नज़र पड़ी।
रवि: तुम तो कुछ नहीं खा रहे हो। वो कोल्ड ड्रिंक भी अभी तक ख़तम नहीं हुई।
सुरेश: लगता है बाबू को दारू पीनी है। पहले कभी पिये हो दारू?
मैंने ना बोला।
सुरेश: तो आज देख लो, कुछ नहीं होगा। ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा।
बोल कर मेरे ग्लास में दारू डाल दी। मैंने वो पी ली।
सुरेश: देख रवि, कुछ नहीं हुआ। ये कोल्ड ड्रिंक हटा, और इसे भी दारू दे।
सुरेश और रवि ने एक बोतल पहले ही पी ली थी। अब वो हमारे लोकल प्लास्टिक बोतल वाली दारू पीने लगे। दोनों के हाथ में एक-एक बोतल थी। गिलास में वो किंगफिशर वाली डाल के बाकी आधी बोतल मुझे दे दी।
सुरेश: ले साले, पूरी पी ले।
मैंने तुरंत पी ली।
रवि: इतनी दारू पी कर भी ठंड लग रही है। खिड़की बंद कर देता हूँ।
उसने खिड़की बंद करके एक ग्रीन नाइट लैंप जला दी। इस बीच सुरेश वो बोतल ख़त्म करके और एक बोतल से दारू पी रहा था। तभी रवि एक सिगरेट जला कर बाहर निकल गया। अब मैं और सुरेश अकेले अंदर थे।
अचानक मेरी नज़र उसकी आँखों पर पड़ी। वो हवस में चमक रहा था। मैं भी उसकी तरफ देख रहा था। क्लीन शेव्ड छेनी वाली जॉलाइन, घने काले बाल। अँधेरे में थोड़ा ज्यादा ही गर्म लग रहा था। लेकिन उसकी ऐसी कुछ खास बॉडी नहीं थी।
अचानक वो मेरी और आने लगा। पीछे जाते-जाते मेरी पीठ दीवार से टकराई। फ़िर वो मानो मेरे मुँह पर टूट पड़ा। उसके मुँह से दारू का स्वाद आ रहा था, और एक कड़वी सी महक। कुछ मिनट चूसने के बाद वो उसका मुँह हटाया और बोला-
सुरेश: क्या साले, चुम्मा-चाटी सिर्फ करनी है क्या? पैंट उतार।
अब मैंने पहली बार मुँह खोला: पहले और कुछ नहीं करना?
सुरेश: और कितना चूमू?
मैं: वो… ब्लोजॉब।
सुरेश: ब्लोजॉब, वो क्या है?
मैं: वो मुंह से।
सुरेश: ओह हां, रवि ने बोला था इस बारे में। असल में कभी किसी ने मेरा मुँह में नहीं लिया। बीवी को एक बार बोला था, तो वो मना कर दी।
सुरेश तुरंत पैंट उतार कर बिस्तर की साइड में बैठ गया। मैं भी बिस्तर से उतर कर उसके सामने घुटनों के बाल बैठा। मेरे सामने उसका आधा खड़ा लंड था। उसका लंड पूरा सीधा था, पर माथा थोड़ा सा घुमावदार था, और नसें पूरी दिख रही थी।
मैं उसको हाथ से सहलाने लगा, और मुंह में डाल लिया। वो ज़बरदस्त मुँह चोदने लगे। अब मेरे मुँह के अंदर उसके प्रीकम का स्वाद मिल रहा था। थोड़ी देर बाद वो बोला-
सुरेश: चल रंडी, अब वो टेबल को पकड़ कर खड़ी हो जा।
मैं गांड निकाल कर टेबल के बाल खड़ा हो गया। वो पीछे आ कर मेरी गांड पर दारू डाल कर चाटने लगा, और उंगली अंदर-बाहर करने लगा। फिर अचानक वो उसका पूरा लंड मेरे अंदर घुसा दिया। मैं चिल्ला उठा। अब वो मुझे जानवर की तरह चोदने लगा।
अचानक रवि अंदर घुसा और बोला: खेल शुरू हो गया है?
सुरेश: क्या माल मिली है तुम्हें। चल तू भी आजा।
रवि भी जल्दी नंगा हो कर मेरे सामने टेबल के ऊपर बैठा। अब सुरेश मुझे पीछे से पेल रहा था, और रवि मेरा मुँह चोद रहा था।
सुरेश: तुम्हारा लंड तो बड़ा साफ है, एक-दम बढ़िया ट्रिम किया हुआ है।
रवि: वो गर्लफ्रेंड को ज्यादा बाल पसंद नहीं।
सुरेश: हां औरतों की हजारो दिक्कतें हैं। पर हां तुम्हें एक अच्छी रंडी मिल गई हवस मिटाने के लिए।
रवि मुस्कुराया। मैं रवि का लौड़ा चूस रहा था, कि रवि ने और एक सिगरेट जलाई।
सुरेश: और है सिगरेट?
रवि: हां पर पैंट की पॉकेट में।
सुरेश: फिर तेरे वाली ही दे।
अब सुरेश सिगरेट फूंकते हुए मुझे पिलाने लगा। वो बहुत कठिन था। हर बार मानो मेरी गांड में एक लोहे का रॉड अंदर-बाहर हो रहा था। कुछ देर बाद वो मेरे अंदर ही निकल गया। फिर मेरे पीछे से गाल पर चूम कर बिस्तर पर गिर गया, और मिंटो में सो गया।
अब थी रवि की बारी। वो मुझे मिशनरी पोजीशन में लेटने को बोला, पर वो सुरेश से काफी सौम्य था। कुछ 10-20 मिनट बाद वो भी मेरे अंदर निकाल दिया, और फिर मेरा लंड भी हिला कर माल निकाल दिया। थक कर मैं वहीं सो गया।
गे सेक्स कहानी में आज इतना ही।