काजल दीदी और मेरा प्यार-4

पिछला भाग पढ़े:- काजल दीदी और मेरा प्यार-3

भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-

घर में काजल दीदी के साथ रहना मेरे लिए धीरे-धीरे मुश्किल होता जा रहा था। यह कोई एक बड़ा पल नहीं था, बल्कि रोज़ की छोटी-छोटी बातें थी जो मेरे अंदर कुछ बदल रही थी। हर दिन कुछ ऐसा हो जाता कि मैं चाह कर भी उनसे नज़रें नहीं हटा पाता था।

सुबह जब वह बालकनी में पौधों में पानी देती, हल्की धूप उनके चेहरे और शरीर पर पड़ती। उनका दुपट्टा कभी थोड़ा खिसक जाता, और मेरी नज़र अनजाने में उनके स्तनों पर टिक जाती। मैं तुरंत नज़र हटाने की कोशिश करता, लेकिन कुछ सेकंड के लिए मैं वहीं अटक जाता था। दिल तेज़ धड़कने लगता, जैसे मैंने कुछ गलत देख लिया हो। कभी वह किचन में काम करती, थोड़ा झुक कर कुछ उठाती या रखती। उस वक्त मेरी नज़र खुद-ब-खुद उनके शरीर पर चली जाती। मैं खुद को रोकने की कोशिश करता, इधर-उधर देखने लगता। लेकिन फिर भी बार-बार वही ख्याल और वही नज़र वापस चली जाती।