पिछला भाग पढ़े:- काजल दीदी और मेरा प्यार-2
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
लोग हमेशा कहते हैं कि आधी रात में अगर एक लड़की और लड़का एक ही कमरे में हों, तो चीज़ें सही नहीं रहती… और उस दिन मुझे समझ आया कि लोग ऐसा क्यों कहते हैं। क्योंकि मेरे सामने जो लड़की थी… वो मेरी बहन थी। हां, वो मेरी सौतेली बहन थी, लेकिन फिर भी वो मेरी बहन थी… और मैं उसका भाई। यही बात उस पल को और भारी बना रही थी। दिमाग बार-बार यही याद दिला रहा था कि हमारे बीच एक रिश्ता है, एक सीमा है जिसे कभी पार नहीं किया जाना चाहिए।
तभी उसने धीरे से कहा, “अगर तुम सो नहीं रहे हो, तो क्या मैं अंदर आ सकती हूं?”
उसकी आवाज़ बहुत हल्की थी, जैसे वो खुद भी पूरी तरह यकीन में नहीं थी। मैं कुछ सेकंड तक चुप रहा, क्योंकि अभी-अभी मैं खुद सोच रहा था कि आधी रात में लड़की और लड़के के बीच चीज़ें सही नहीं रहती… फिर भी मैंने थोड़ा साइड होकर उसे अंदर आने का रास्ता दे दिया। वो धीरे-धीरे कमरे के अंदर आई, और उस पल में मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि मैंने उसे अंदर आने क्यों दिया। शायद सिर्फ इसलिए क्योंकि वो मेरे सामने खड़ी थी, और मैं मना नहीं कर पाया।
वो आकर बिस्तर पर बैठ गई। जैसे ही वो बैठी, बिस्तर के स्प्रिंग की वजह से उसका शरीर हल्का सा उछला। उस हल्के झटके के साथ उसके स्तन भी कपड़ों के अंदर हल्के से हिले जैसे कोई नरम चीज़ एक पल के लिए ऊपर-नीचे हुई हो और फिर धीरे से शांत हो गई हो।
मैंने धीरे से उसकी तरफ देखते हुए कहा, “तुम यहां क्या कर रही हो… काजल दीदी?”
उसने हल्का सा मेरी तरफ देखा और धीरे से कहा, “जैसा मैंने कहा… मैं यहां इसलिए आई हूं क्योंकि मुझे नींद नहीं आ रही… और मैं बोर भी हो रही थी।”
वो कुछ सेकंड तक चुप रही, फिर उसकी नजरें धीरे-धीरे पूरे कमरे में घूमने लगी। वो हर चीज़ को ध्यान से देख रही थी—मेरी टेबल, किताबें, दीवारें… जैसे पहली बार इस कमरे को महसूस कर रही हो। फिर उसकी नज़र मेरी दीवार पर जाकर रुक गई… जहां आलिया भट्ट की तस्वीर लगी थी, जिसमें वो बिकिनी में थी। वो कुछ पल तक उस पोस्टर को देखती रही, उसकी आँखें वहीं टिकी रही। फिर उसने धीरे से मेरी तरफ देखा… और उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
फिर उसने धीरे से कहा, “गोलू… मैं बहुत बोर हो रही हूं… क्या हम कुछ कर सकते हैं? या कोई छोटा सा गेम खेलें?”
मैंने थोड़ा सा हैरानी से उसकी तरफ देखा और धीमी आवाज़ में कहा, “गेम… वो भी आधी रात में?”
वो हल्का सा मुस्कुराई और बिना झिझक के बोली, “तो क्या हुआ… मज़ा आएगा, क्यों नहीं?”
मैं उसकी तरफ देख रहा था… मैं उसका चेहरा देखना चाहता था, लेकिन एक पल के लिए मेरी नज़र उसके लंबे गले वाली टी-शर्ट के अंदर दिख रही उसकी झलक पर अटक गई। उस पतले कपड़े के नीचे उसके स्तन साफ महसूस हो रहे थे। जैसे वो नरम हों, हल्के से भरे हुए… और मेरी नजर कुछ सेकंड के लिए वहीं अटक गई, इससे पहले कि मैं खुद को संभाल कर फिर से उसके चेहरे की तरफ देखता।
मैंने धीरे से कहा, “ठीक है दीदी… कौन सा गेम खेलना है?”
वो थोड़ा सा सोचते हुए मेरी तरफ देखने लगी, जैसे अपने दिमाग में कुछ तय कर रही हो। फिर उसने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “हम्म… एक काम करते हैं… ट्रुथ या डेयर खेलें?”
मैंने धीरे से कहा, “ठीक है दीदी…” और फिर मैं उसके पास जाकर बिस्तर पर बैठ गया।
उसके पास बैठते ही मेरा ध्यान फिर से उसकी तरफ चला गया… उसके स्तन इतने भरे हुए लग रहे थे कि एक पल के लिए मन हुआ कि मैं उन्हें पकड़ लूँ… बस महसूस कर लूँ कि वो कितने नरम होंगे। लेकिन अगले ही पल मैंने खुद को रोक लिया। दिमाग ने तुरंत याद दिलाया कि वो मेरी दीदी है… और मैंने अपनी नज़र नीचे कर ली, खुद को संभालते हुए।
हमने ट्रुथ या डेयर खेलना शुरू किया। शुरू में सब कुछ मजेदार था। क्योंकि मुझे उसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था, और उसे भी मेरे बारे में ज्यादा नहीं पता था। तो ये जैसे पहली बार था जब हम दोनों एक-दूसरे के छोटे-छोटे राज जान रहे थे।
सबसे पहले वो सवाल पूछ रही थी… “तुम्हारी पहली गर्लफ्रेंड का नाम क्या था?” “कितनी बार किसी लड़की ने तुम्हारा दिल तोड़ा?” “तुम आगे क्या बनना चाहते हो?” मैं भी उसके सवालों के जवाब दे रहा था, और फिर मेरी बारी आती तो मैं भी उससे वैसे ही सवाल पूछता।
मेरे कुछ सवालों पर वो थोड़ी शर्मा जाती थी। उसका चेहरा हल्का सा लाल हो जाता, लेकिन वो फिर भी मुस्कुराते हुए जवाब देती थी। कभी-कभी वो खुद ही हँस पड़ती… जैसे उसे अपने जवाबों पर ही शर्म आ रही हो, लेकिन फिर भी वो सब कुछ बताती जा रही थी।
करीब आधे घंटे बाद, वो थोड़ी शांत हो गई। उसने मेरी तरफ देखा… और धीरे से पूछा, “क्या तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है?”
उसके मुँह से चोदा शब्द सुनते ही मेरी धड़कन जैसे एक पल के लिए रुक गई। मैं बस उसे देखता रह गया… दिमाग में यही चल रहा था कि इतनी सुंदर, इतनी सीधी दिखने वाली दीदी ऐसे शब्द कैसे बोल सकती है।
मैंने उसके सवाल का जवाब नहीं दिया। कुछ सेकंड तक चुप रहने के बाद मैंने हल्की आवाज़ में कहा, “मैं डेयर चुनता हूं…”
वो मुझे देखती रही, फिर उसके चेहरे पर हल्की सी शरारती मुस्कान आ गई। उसने कहा, “ठीक है… तो तुम्हारा डेयर है… मेरे लिए डांस करो।”
मैं थोड़ा चौंक गया, लेकिन फिर उठ कर खड़ा हो गया। मैंने डांस करना शुरू किया… लेकिन मैं डांस में बिल्कुल भी अच्छा नहीं था। मेरे स्टेप्स अजीब थे, हाथ-पैर सही से चल भी नहीं रहे थे। वो मुझे देख रही थी… और कुछ सेकंड बाद हँसने लगी। उसकी हँसी रुक ही नहीं रही थी। मैं और ज्यादा अजीब महसूस करने लगा… लेकिन फिर भी डांस करता रहा। उसकी हँसी सुन कर मैं थोड़ा शर्मिंदा हो गया… चेहरा गर्म हो गया, और मुझे खुद भी समझ आ रहा था कि मैं कितना खराब डांस कर रहा हूं।
जब मेरी बारी आई, तो मैंने उसी सवाल को थोड़ा अलग तरीके से पूछने का सोचा। मैं उसे ध्यान से देखते हुए मुस्कुराया और धीमे से बोला, “क्या तुमने कभी सेक्स किया है?”
असल में मैंने यह सवाल इसलिए पूछा था क्योंकि मुझे पूरा यकीन था कि वह इसका जवाब नहीं दे पाएगी। मुझे लगा वह या तो चुप हो जाएगी या फिर इस सवाल से बचने के लिए हार मान लेगी। मेरे दिमाग में पहले से ही चल रहा था कि अगर वह जवाब नहीं दे पाई, तो मुझे उसे कोई ऐसा डेयर देना चाहिए जो माहौल को और दिलचस्प बना दे।
मेरी बात सुन कर उसने हल्की सी शर्मीली मुस्कान दी और मेरी तरफ देखा। फिर उसने धीरे से कहा, “मैं ट्रुथ चुनती हूं।”
उसका ये जवाब सुनते ही मैं लगभग शॉक में आ गया। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि वह इतना सीधे ट्रुथ चुनेगी। मैं बस उसे देखता रह गया।
फिर उसने खुद ही आगे बोलना शुरू किया। “जब मैं फर्स्ट ईयर में थी ना…” उसने धीमी आवाज़ में कहा, “तब मुझे एक लड़का पसंद था…” वह थोड़ी देर रुकी, फिर बोली, “वो भी मुझे पसंद करता था… हम दोनों काफी क्लोज हो गए थे…”
उसने हल्की सी साँस ली और नज़रें झुकाकर कहा, “एक दिन मैं उसके घर गई थी। वहां हम दोनों अकेले थे…” फिर उसने मेरी तरफ देखा और धीरे से कहा, “और… मैंने उसके साथ सेक्स किया था…”
उस पल के बाद हमारे बीच का माहौल थोड़ा अजीब सा हो गया। कुछ सेकंड तक हम दोनों चुप रहे, जैसे समझ ही नहीं आ रहा था कि आगे क्या बोलें। ऐसा लग रहा था जैसे हम भूल ही गए हों कि हम बस एक फनी गेम खेल रहे थे।
मैंने हल्की सी हँसी के साथ माहौल हल्का करने की कोशिश की, लेकिन बात वहीं नहीं रुकी। धीरे-धीरे हमारी बातें उसी दिशा में जाने लगी—ऐसी बातें जो आमतौर पर कोई इतनी आसानी से नहीं करता।
मैंने भी हिम्मत करके उससे कुछ और पर्सनल सवाल पूछने शुरू किए। वह पहले थोड़ा झिझकी, लेकिन फिर उसने भी उसी तरह मुझे सवाल पूछने शुरू कर दिए। अब ये सिर्फ गेम नहीं रहा था—हम दोनों एक-दूसरे के बारे में ऐसी बातें जान रहे थे जो शायद हमने पहले कभी किसी से शेयर नहीं की थी। माहौल में एक अलग ही तरह की टेंशन और क्यूरियोसिटी थी, और हम दोनों उस पल में पूरी तरह डूब चुके थे।
कुछ मिनट बाद उसने मेरी तरफ देखा और बोली, “अब मेरी बारी है…”
मैंने कहा, “ठीक है, मैं ट्रुथ चुनता हूं।”
वह हल्का सा मुस्कुराई और सीधे पूछ दिया, “सच-सच बताओ… तुम्हारा लंड कितना बड़ा है, गोलू?”
उसका ये सवाल सुन कर मैं बस उसे देखता रह गया। मेरे दिमाग में एक ही बात चल रही थी—क्या ये वही लड़की है जो कुछ दिन पहले मेरे सामने ठीक से बात करते हुए भी शर्माती थी? मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि वही लड़की अब मेरे सामने इतने खुले तरीके से “चोदना” और “लंड” जैसे शब्द इस्तेमाल कर रही थी। उसके बोलने का तरीका बदल चुका था, और उसके हर शब्द में एक अलग ही तरह की हिम्मत और खुलापन साफ दिख रहा था।
मैंने धीरे से उसकी तरफ देखा और थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहा, ” मैंने कभी अपना लंड नापा ही नहीं , दीदी…”
मेरी बात सुनते ही वह जोर से हँस पड़ी। उसने हँसते हुए कहा, “क्या? तुमने कभी अपना लंड नापा ही नहीं ?” वह हँसते-हँसते बोली, “अरे हर लड़का करता है ये… तुम कैसे नहीं जानते?”
मैं बस चुप रहा। मेरे चेहरे पर हल्की सी शर्मीली मुस्कान थी। वह मुझसे इतने पर्सनल सवाल पूछ रही थी कि मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था क्या जवाब दूं। मैं चाहकर भी सही से बोल नहीं पा रहा था। लेकिन अजीब बात ये थी कि मुझे उसका ये अंदाज़ अच्छा लग रहा था। जिस तरह वह मुझसे खुल कर बात कर रही थी, उसमें कुछ अलग ही था।
कुछ देर बाद फिर मेरी बारी आई। मैंने उसकी तरफ देखा और कहा, “अब तुम डेयर चुनो, दीदी…”
वह बिना सोचे मुस्कुरा कर बोली, “ठीक है… मैं डेयर चुनती हूं।”
मैंने हल्का सा गहरी साँस ली और उसे देखते हुए कहा, “दीदी… मैंने अपनी लाइफ में कभी सेक्स नहीं किया… मुझे ये भी ठीक से नहीं पता कि ये कैसे होता है…” मैं थोड़ा रुका, फिर धीमी आवाज़ में बोला, “क्या आप बता सकती हो… आपने पहली बार कैसे किया था?”
उसने मेरी तरफ छोटी आँखों से देखा और हल्का सा मुस्कुराकर बोली, “गोलू… तुम्हारी दीदी की सेक्स कहानी सुनना थोड़ा अजीब लग सकता है… शायद…”
मैंने उसकी बात सुन कर हल्की सी मुस्कान दी और धीरे से कहा, “लेकिन मैं सुनना चाहता हूं, दीदी…”
उसने एक गहरी सांस ली, होंठों पर हल्की मुस्कान थी और चेहरे पर साफ झिझक दिख रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और धीमी आवाज़ में बोली, “ठीक है गोलू… मैं बताती हूं।”
वो कुछ पल चुप रही, फिर नज़रें झुका कर धीरे-धीरे बोलना शुरू किया, “उस समय हम दोनों ही पहली बार ऐसे किसी अनुभव से गुजर रहे थे… हमें बिल्कुल भी समझ नहीं था कि क्या करना था, कैसे करना था। मैं उसके घर पढ़ाई के लिए गई थी… शुरू में हम सच में पढ़ाई ही कर रहे थे।” वो हल्का सा हँसी, फिर बोली, “लेकिन धीरे-धीरे सब बदलने लगा… कभी वो मेरा हाथ छू लेता, कभी मेरी तरफ अजीब तरीके से देखता… उसकी नजरें बार-बार मेरे सीने पर टिक जाती थी… और मुझे भी सब महसूस होने लगा था।”
उसकी आवाज़ अब और धीमी हो गई थी, “हम धीरे-धीरे एक-दूसरे के करीब आने लगे… पहले बस पास बैठना, फिर कंधे टकराना… और फिर एक पल ऐसा आया जब हम बहुत पास आ गए।”
“हमने धीरे-धीरे एक-दूसरे को छूना शुरू किया… फिर किस्स करना शुरू किया। पहले बहुत धीरे-धीरे, डर के साथ… लेकिन फिर वो सब थोड़ा तेज हो गया। उसने मेरे कपड़े उतार दिए… और मैंने भी उसके कपड़े उतार दिए।”
उसने हल्का सा रुक कर मेरी तरफ देखा, जैसे कुछ सोच रही हो, फिर बोली, “वो पहली बार था जब मैंने किसी का लंड देखा… मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ। तो मैंने बस अपने हाथों से उसे छूना शुरू किया… धीरे-धीरे… जिससे वो और सख्त हो गया।”
उसने गहरी सांस ली और आगे बोली, “फिर मैं फर्श पर लेट गई… वो मेरे ऊपर आ गया… और उसने अपना लंड मेरी चूत में डालने की कोशिश की।”
उसकी आंखों में हल्की तकलीफ झलक रही थी, “क्योंकि वो पहली बार था… मेरी चूत बहुत टाइट थी… और उसका लंड बड़ा था… इसलिए जब उसने अंदर डालना शुरू किया तो मुझे बहुत दर्द हुआ। मैं बस लेटी रही… सहती रही। फिर उसने अपने लंड पर तेल लगाया… और दोबारा कोशिश की… इस बार वो धीरे-धीरे अंदर गया… लेकिन फिर भी दर्द हो रहा था… और फिर उसने मुझे चोदना शुरू किया।”
वो कुछ सेकंड चुप रही, फिर धीरे से बोली, “मैं बस फर्श पर पड़ी रही… दर्द के साथ… समझ नहीं आ रहा था ये सही है या गलत…” आखिर में उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “जब सब खत्म हुआ… तो मेरी चूत से थोड़ा खून निकला। उस समय मुझे समझ आया कि लोग जो कहते हैं कि ये बहुत अच्छा होता है, वो हमेशा सच नहीं होता… कभी-कभी ये बहुत दर्दनाक भी होता है।”
मैं बस उसे देखता रह गया… उसका शर्माया हुआ चेहरा, झुकी हुई नजरें। उसकी आवाज़ अभी भी मेरे कानों में गूंज रही थी। उस पल मेरे अंदर अजीब सा एहसास उठने लगा। दिल तेज धड़क रहा था… और मेरे शरीर में हलचल सी होने लगी। मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा लंड मेरी पैंट के अंदर सख्त होने लगा है। मेरे दिमाग में कई ख्याल एक साथ आ रहे थे।
मैं चाहता था कि उसे अपने करीब खींच लूँ। उसे पकड़ कर बिस्तर पर लिटा दूँ और सब कुछ भूल कर बस उसके साथ बह जाऊँ… लेकिन मैंने खुद को रोक लिया। मैं जानता था कि अगर मैंने खुद पर कंट्रोल नहीं किया… तो शायद सब कुछ बदल जाता। इसलिए मैं बस चुप रहा… अपने अंदर उठ रहे उस तूफान को दबाते हुए।
कुछ देर तक कमरे में सन्नाटा रहा। सिर्फ हमारी सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। वो अभी भी हल्का सा मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसकी आंखों में झिझक साफ दिख रही थी। फिर उसने धीरे से मेरी तरफ देखा, अपने बालों को कान के पीछे करते हुए बोली, “गोलू… अब मेरी बारी है।”
मैंने उसकी तरफ देखा, अभी भी थोड़ा संभलने की कोशिश कर रहा था। वो हल्का सा मुस्कुराई, फिर थोड़ी शरारती आवाज़ में बोली, “अब तुम चुनो… ट्रुथ या डेयर?”
मैंने हल्की आवाज़ में जवाब दिया, “ट्रुथ… काजल दीदी।”
उसने फिर से एक गहरी सांस ली। उसकी आंखों में हल्की झिझक और शरारत दोनों एक साथ थी। वो कुछ पल तक मुझे देखती रही, जैसे सोच रही हो कि क्या पूछे… और फिर, वो थोड़ा और करीब झुकी, उसकी आवाज़ और भी धीमी हो गई, “क्या तुमने कभी सोचा है… कि तुम मुझे चोदना चाहते हो?”
उसका सवाल सुनते ही जैसे समय रुक गया। मेरे अंदर तुरंत जवाब था… सच्चा जवाब। मैंने उसे पहली बार देखा था उसी दिन से मेरे मन में उसके लिए वैसे ख्याल आने लगे थे… हर दिन… बार-बार… मैं उसके बारे में सोचता था… उसे चोदना चाहता था। लेकिन हर बार खुद को रोक लेता था। क्योंकि वो मेरी सौतेली बहन थी… और मैं अपनी हद पार नहीं कर सकता था। ये बात मैं उससे कभी कह नहीं सकता था। मैं कुछ पल चुप रहा… गहरी सांस ली… और अपने अंदर के सारे सच को दबा दिया।
फिर मैंने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “नहीं काजल दीदी… मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा।”
मेरे जवाब के बाद उसने बस हल्के से “ओह…” कहा। उसके चेहरे पर एक हल्की सी उदासी आ गई थी, जैसे उसे मेरे जवाब की उम्मीद कुछ और थी। वो कुछ सेकंड तक चुप रही, नज़रें झुकी हुई थी।
तभी खिड़की से हल्की सुबह की रोशनी कमरे में आने लगी। रात कब बीत गई, हमें पता ही नहीं चला था। माहौल बदल चुका था—अब उसमें पहले जैसा तनाव नहीं था, बल्कि एक अजीब सी खामोशी थी। वो धीरे से खड़ी हुई, अपने कपड़ों को ठीक किया और बिना मेरी तरफ देखे दरवाजे की ओर बढ़ने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे वो अब इस कमरे में और रुकना नहीं चाहती।
जैसे ही वो दरवाजे के पास पहुंची। मैंने अचानक उसे रोकते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “काजल दीदी… क्या मैं आपसे एक और सवाल पूछ सकता हूं?”
वो रुक गई… पीछे मुड़ी… और धीमी आवाज़ में बोली, “हां गोलू… तुम पूछ सकते हो।”
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए धीरे से कहा, “अगर मैं डेयर देता कि मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं… तो तुम क्या करती?”
वो मेरी तरफ ध्यान से देखने लगी… उसकी आंखें हल्की सी सिकुड़ी हुई थी, जैसे वो मेरे चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही हो। कुछ सेकंड तक वो बिना कुछ बोले मुझे देखती रही। उसकी नजरें सीधी मेरी आंखों में थी, और उस पल मुझे लग रहा था जैसे वो मेरे अंदर के सारे ख्याल समझ रही हो।
फिर उसने धीरे से एक गहरी सांस ली… और बहुत धीमी आवाज़ में कहा, “तो मैं कहती… कि मेरा भाई मुझे जितना चाहे उतना चोद सकता है।”
वो दरवाज़ा बंद करके बाहर चली गई… और मैं बस बिस्तर पर बैठा रह गया, बिल्कुल चुप। मैं वहीं बैठा सोचता रहा कि काश हालात अलग होते… काश काजल दीदी मेरी बहन नहीं होती। अगर वो कोई और लड़की होती, तो शायद मैं उसके बारे में बिना रुके सोच सकता था, बिना खुद को रोके।
उसकी खूबसूरती बार-बार मेरे दिमाग में आ रही थी… उसका चेहरा, उसकी मुस्कान… और उसके स्तन। वो एक बहुत खूबसूरत लड़की थी… और मैं ये बात नजरअंदाज नहीं कर पा रहा था।
मेरे अंदर ख्याल उठ रहे थे… ऐसे ख्याल जिन्हें मैं समझ भी रहा था और रोक भी रहा था। मैं जानता था कि अगर हालात अलग होते, तो शायद मैं उसे अपने करीब लाने के बारे में सोचता… शायद उसे चोदना चाहता… लेकिन हकीकत अलग थी। मैं खुद को रोक रहा था। क्योंकि वो मेरी सौतेली बहन थी। यही सोच मुझे बार-बार रोक रही थी। मैं वहीं बैठा रहा… अपने ही ख्यालों में उलझा हुआ… और खुद को काबू में रखने की कोशिश करता हुआ।
अगला भाग पढ़े:- काजल दीदी और मेरा प्यार-4