पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-11
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
थिएटर से वापस आते वक्त रात का माहौल अलग ही था। सड़कें हल्की रोशनी में चमक रही थी और हम तीनों चुप-चाप कैब में बैठे थे। इस बार एक छोटा सा बदलाव था— पायल दीदी मेरे पास नहीं बैठी थी, बल्कि नेहा दीदी मेरे बगल में आकर बैठ गई थी। कैब जैसे ही आगे बढ़ी, नेहा दीदी ने धीरे से अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। उनका सिर रखते ही मुझे एक अलग सा अहसास हुआ। मैं कुछ कह नहीं पाया, बस खिड़की के बाहर देखने लगा, लेकिन ध्यान कहीं और ही था। उनके बाल हल्के-हल्के मेरे गाल को लग रहे थे, और हर बार वो अहसास मुझे और बेचैन कर रहा था।
रास्ते में अचानक मैंने ड्राइवर से कहा कि गाड़ी थोड़ी देर के लिए रोक दे। सामने एक छोटी सी बेकरी थी, जिसकी रोशनी दूर से ही दिख रही थी। मैं उतर कर अंदर गया और एक केक खरीदा। मन में एक हल्की-सी खुशी थी, जैसे ये रात कुछ खास बनने वाली हो। जब मैं वापस कैब में आया, तो दोनों ने मेरी तरफ देखा—नेहा दीदी ने हल्की-सी मुस्कान दी, जो बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह रही थी।
कुछ देर बाद हम होटल पहुँच गए। रिसेप्शन पर मैंने केक के बारे में बताया, तो होटल स्टाफ ने तुरंत मदद करते हुए मुझे एक चाकू और कुछ प्लेट्स दे दी ताकि हम आराम से केक काट सकें।
हम तीनों मेरे कमरे में गए। दरवाज़ा बंद होते ही अंदर एक-दम शांति हो गई। मैंने केक को निकाल कर छोटी मेज़ पर रख दिया। फिर धीरे-धीरे डिब्बा खोलने लगा। जैसे ही डिब्बा खुला, अंदर चॉकलेट केक था। ऊपर साफ लिखा था — “मेरी प्यारी बहनों के लिए।”
मैंने पायल दीदी और नेहा दीदी के चेहरे को देखा और उसी पल मेरे दिमाग में वही ख्याल आया कि वह दोनों मुझे बहुत प्यारी लगती हैं, क्योंकि पायल दीदी ने एक बार मुझे अपने स्तन दिखाए थे और नेहा दीदी के साथ मैं इतना करीब आ चुका था कि मैंने उनको चोदा था और उन्हें भी वो पसंद आया।
मैं सोचने लगा कि हम सगे भाई-बहन नहीं हैं लेकिन फिर भी वह दोनों मेरे लिए सब कुछ करती हैं और मुझे खुश करने के लिए हर चीज़ करती हैं। मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि इसी वजह से वह दोनों मुझे इतनी प्यारी लगती हैं क्योंकि मैं इन्हें जब भी चाहूँ चोद सकता हूँ।
तभी पायल दीदी ने मुझे देखते हुए कहा, “क्या हुआ गोलू, हमें ऐसे क्यों देख रहे हो?”
मैं थोड़ा सा संभलते हुए बोला, “कुछ नहीं दीदी…”
फिर मैंने धीरे से केक के पास रखी मोमबत्ती उठाई और उसे जला दिया। कमरे की हल्की रोशनी में अब मोमबत्ती की लौ और भी साफ दिख रही थी। मैंने केक को थोड़ा आगे सरकाया और फिर चाकू उठा कर दोनों की तरफ बढ़ा दिया। मैंने उनके हाथों में चाकू देते हुए कहा कि वो दोनों मिलकर केक काटें। मेरी नज़र फिर से उनके चेहरे पर टिक गई, जैसे मैं उनके हर रिएक्शन को महसूस करना चाहता हूँ।
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और हल्की मुस्कान के साथ अपनी आँखें बंद कर ली। मैं उसी वक्त उनके सामने खड़ा होकर “हैप्पी बर्थडे टू यू…” गाने लगा। जैसे ही गाना खत्म होने के करीब आया, उन्होंने एक साथ मोमबत्ती बुझाई और फिर केक को काट दिया।
फिर दोनों ने केक का एक-एक पीस उठाया और मेरी तरफ बढ़ाया। पायल दीदी और नेहा दीदी हमेशा मुझे ही पहला बाइट देती हैं, ये उनका तरीका है मुझे दिखाने का कि वो मुझसे कितना प्यार करती हैं। मैंने उनके हाथों से केक खाना शुरू किया, लेकिन तभी अचानक पायल दीदी बहुत एक्साइटेड हो गई और उन्होंने केक मेरे चेहरे पर लगा दिया। देखते ही देखते मेरा पूरा चेहरा केक से भर गया। नेहा दीदी ये देख कर जोर से हंसने लगी और मुझे उसी हालत में देखकर मज़े लेने लगी।
मैंने चेहरा साफ करते हुए कहा, “हंसो मत नेहा दीदी…”
लेकिन वो ताली बजाते हुए हंस कर बोली, “अरे लेकिन तुम तो बहुत अच्छे लग रहे हो…!”
मैंने अपना पूरा चेहरा अच्छे से साफ किया और फिर केक का एक छोटा सा टुकड़ा काट कर अपने हाथ में लिया। मैं पायल दीदी के पास गया और अपने हाथ से उन्हें एक बाइट खिलाने लगा। पायल दीदी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ी और मेरे हाथ से केक का बाइट ले लिया। उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी, जैसे उन्हें ये पल अच्छा लग रहा हो। फिर मैंने एक और टुकड़ा काटा और नेहा दीदी की तरफ बढ़ाया। लेकिन उन्होंने हल्के से सिर हिलाते हुए मना कर दिया।
वो बोली, “मैंने मूवी देखते वक्त इतना पॉपकॉर्न खा लिया है कि अब मेरा पेट भर गया है… मैं और नहीं खा सकती।”
मैंने वो टुकड़ा वापस टेबल पर रख दिया और उनकी तरफ देखते हुए कहा, “अब बताओ… तुम दोनों ने क्या विश मांगी?”
ये मेरी बचपन से आदत रही है—जब भी केक कटता है, मैं हमेशा उनसे पूछता हूँ कि उन्होंने क्या विश मांगी। मुझे ये जान कर अजीब सी खुशी मिलती है। और सबसे खास बात ये है कि पायल दीदी और नेहा दीदी ने कभी भी इसे बचकाना या अजीब नहीं समझा… वो हमेशा मुझे बताते हैं कि उन्होंने क्या विश मांगी।
पायल दीदी मेरे थोड़ा करीब आई और धीरे से मेरे कान के पास आकर फुसफुसाई, “मैंने विश मांगी है कि तुम एग्जाम पास कर जाओ।”
उस समय मुझे साफ समझ आया कि मैं पायल दीदी को नेहा दीदी से ज्यादा क्यों पसंद करता हूँ, क्योंकि वो बचपन से मेरी देख-भाल करती आई थी। इसी वजह से मैं एग्जाम पास करने के लिए बेताब था। क्योंकि उनके शरीर की बनावट, उनके स्तनों की नरमी और उनकी खूबसूरती को याद करके हर बार मेरा लंड सख्त हो जाता था। लेकिन जैसा उन्होंने कहा था, जब तक मैं एग्जाम पास नहीं करता, तब तक मैं उन्हें छू भी नहीं सकता।
इसलिए मैं हमेशा भगवान से यही कहता था कि किसी भी तरह मैं एग्जाम पास हो जाऊँ, क्योंकि मेरे मन में एक बहुत तेज चाहत थी। मैं बार-बार यही सोचता था कि अगर मैं पास हो गया, तो मैं पायल दीदी के साथ वो सब कर पाऊँगा जो मैं अंदर ही अंदर चाहता हूं। मैं साफ-साफ सोचता था कि मैं उन्हें चोदना चाहता हूँ, उनके स्तनों को पकड़ कर दबाना चाहता हूँ।
मैं ये भी सोचता था कि मैं उनके स्तनों को अपने मुँह से वैसे महसूस करूँ जैसे एक छोटा बच्चा करता है। मैं उनके होंठों को अपने दाँतों से काटने की सोचता था और उन्हें अपने पास खींचना चाहता था। साथ ही मैं ये भी सोचता था कि मैं अपना लंड उनके मुँह में डालूँ।
मेरे लिए ये सिर्फ सोच नहीं थी—मैं सच में मानता था कि अगर मैं एग्जाम पास कर गया, तो ये सब सच हो सकता है। इसलिए मैं बार-बार भगवान से यही कहता था कि वो मुझे पास करवा दें, ताकि मेरी ये सारी इच्छाएँ पूरी हो सकें।
फिर मैं नेहा दीदी के पास गया। वो थोड़ा झुक गई ताकि मेरी ऊँचाई के बराबर आ सकें। उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और थोड़ी झिझक भी थी। वो मेरे कान के पास आई, थोड़ा रुकीं, फिर हल्की मुस्कान के साथ धीरे से बोली, “मैंने विश मांगी है… कि मेरी चूत थोड़ी बड़ी हो जाए… ताकि जब तुम मुझे चोदोगे तो मुझे दर्द ना हो।”
उनकी बात सुनते ही मेरा जबड़ा खुला रह गया, क्योंकि कुछ महीने पहले वो मुझसे प्यार से बात भी नहीं करती थी, और अब नेहा दीदी मेरे लिए ऐसी गंदी इच्छा कर रही थी। मैं ये देख कर हैरान था कि पहले वो मुझसे दूर रहती थी, लेकिन अब वो खुद मेरे पास आकर ऐसी बात बोल रही थी। मैं उन्हें कहना चाहता था कि मुझे उनकी चूत जैसी है वैसी ही पसंद है, मुझे फर्क नहीं पड़ता कि वो अभी कैसी है। लेकिन मैं कुछ भी नहीं बोल पाया, क्योंकि उस समय मुझे कोई शब्द ही याद नहीं आ रहे थे।
कुछ देर तक हम लोग बस सेलिब्रेशन करते रहे। फिर थोड़ी देर बाद नेहा दीदी और पायल दीदी अपने-अपने कमरे में चली गई, क्योंकि ये हमारा होटल में आखिरी दिन था। उन्हें आज रात अच्छे से सोना था, क्योंकि कल से फिर वही नॉर्मल लाइफ शुरू होने वाली थी—जहाँ हम पूरे दिन उस छोटे से फ्लैट में बैठ कर सिर्फ पढ़ाई करते रहते थे।
मैं अपने बेड पर बैठ गया। मेरा मन अभी भी वहीं अटका हुआ था जो कुछ अभी हुआ था। मैं इतना खोया हुआ था कि मैंने अपना चेहरा भी नहीं धोया। केक की क्रीम अभी भी मेरे चेहरे पर लगी हुई थी, लेकिन मुझे उसकी कोई परवाह नहीं थी।
करीब आधे घंटे बाद मेरे होटल के कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला। मैंने सामने देखा और एक पल के लिए मेरी सांस जैसे रुक गई। मेरे सामने नेहा दीदी खड़ी थी। लेकिन इस बार उनका शरीर सिर्फ एक तौलिये से ढका हुआ था। तौलिया उनके सीने के चारों तरफ कस कर लिपटा हुआ था, जिससे उनके स्तनों का पूरा आकार साफ दिखाई दे रहा था।
तौलिये के नीचे उनका उभरा हुआ रूप ऐसा लग रहा था जैसे कपड़ा उन्हें ढक तो रहा हो, लेकिन पूरी तरह छुपा नहीं पा रहा हो। उनके स्तन तौलिये के अंदर हल्के दबे हुए थे, जिससे उनका गोलपन और उभार और साफ दिख रहा था। तौलिये के ऊपरी किनारे से बीच में हल्की सी दरार जैसी रेखा दिख रही थी, जो नीचे की तरफ जाती हुई ध्यान खींच रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे तौलिया उन्हें एक साथ थामे हुए है और उसी वजह से उनका आकार और उभरकर सामने आ रहा है।
उनकी कॉलरबोन गहरी दिख रही थी, और उसके नीचे से शुरू होकर सीने का हिस्सा और भी ध्यान खींच रहा था। उनके गीले बाल कंधों से नीचे गिरते हुए उसी हिस्से के पास रुक रहे थे, जिससे वो और भी नज़र में आ रहा था। उनकी टांगें लंबी और साफ थी, और वो दरवाज़े पर खड़ी मुझे देख रही थी।
मैं धीरे से अपने बिस्तर से खड़ा हुआ। मेरा दिल तेज धड़क रहा था और मैं अभी भी उन्हें देखे जा रहा था। फिर मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए उनसे पूछा, “क्या हुआ दीदी… आप कपड़े क्यों नहीं पहने?”
उन्होंने पीछे मुड़ कर धीरे से दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी। फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली, “मैं नहाने जा रही थी… लेकिन अचानक केक खाने का मन कर गया।” वो थोड़ा और पास आई, हल्की सी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखते हुए बोली, “क्या मैं खा सकती हूँ?”
मैंने तुरंत कहा, “हाँ दीदी… खाइए।”
वो मेरे बेड के पास आई और बैठ गई। जैसे ही वो बैठीं, उन्होंने अपने पैर क्रॉस किए, और उसी समय तौलिया थोड़ा सा ऊपर उठ गया। उस पल मुझे उनकी जाँघों की एक झलक दिखाई दी। उनकी जाँघें साफ और चिकनी लग रही थी, और हल्की रोशनी में उनका रंग और भी उभर कर दिख रहा था। मैं एक पल के लिए वहीं रुक गया और मेरी नज़र वहीं टिक गई। वो बस आराम से बैठी थी, जैसे उन्हें इस बात का एहसास भी नहीं था कि तौलिया थोड़ा ऊपर उठ गया है।
मैंने केक का एक टुकड़ा काटा और उनकी तरफ बढ़ाया, फिर अपने लिए भी एक टुकड़ा ले लिया। मैं उनके सामने बैठ गया और हम दोनों केक खाने लगे। मैंने अपना टुकड़ा जल्दी खत्म कर लिया, लेकिन वो अभी भी धीरे-धीरे खा रही थी। मैं उन्हें देख रहा था, फिर मैंने कहा, “दीदी… मुझे लगता है ये केक इतना अच्छा नहीं है।”
उन्होंने अपने हाथ में पकड़े हुए केक के टुकड़े की तरफ देखा और पूछा, “क्यों?”
मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “क्योंकि इसमें मिठास नहीं है।”
वो कुछ पल के लिए चुप हो गई। उनकी आँखें थोड़ी देर के लिए नीचे गई, जैसे वो सच में सोच रही हों। मैं साफ देख पा रहा था कि वो मेरे शब्दों को समझने की कोशिश कर रही हैं। फिर अचानक उन्होंने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में हल्की सी चमक थी और होंठों पर एक धीमी मुस्कान आई।
वो थोड़ी सी आगे झुकीं और धीरे से बोली, “अगर तुम्हें लगता है कि ये मीठा नहीं है… तो मैं इसे मीठा बना सकती हूँ।”
मैं समझ नहीं पाया कि वो केक को कैसे मीठा बनाएंगी। मेरे दिमाग में सीधा यही चल रहा था कि केक तो पहले से मीठा होता है, फिर वो ऐसा क्यों कह रही थी। मैंने बिना ज्यादा सोचे सीधा कहा, “ठीक है दीदी… बना दीजिए।”
वो ये सुन कर हल्का सा मुस्कुराई और उनका चेहरा लाल हो गया। उनकी मुस्कान में साफ दिख रहा था कि वो कुछ करने वाली थी। मैं अभी भी समझ नहीं पा रहा था कि वो क्या करने वाली थी। उन्होंने अपने कंधे पर रखा तौलिया पकड़ा। पहले उसे थोड़ा सा ढीला किया, फिर एक ही बार में खोल कर उतार दिया और सीधे बिस्तर पर फेंक दिया।
उस पल मैं वहीं बैठा रह गया। जैसे ही तौलिया हटा, उनका पूरा सीना सामने आ गया। मेरे लिए वो एक-दम अचानक था, इसलिए मेरी नज़र वहीं रुक गई। उनके स्तन बिना किसी ढकाव के सामने थे। उनका आकार साफ दिख रहा था—गोल और उभरा हुआ। ऊपर से नीचे तक उनका पूरा रूप साफ नज़र आ रहा था। कोई कपड़ा नहीं था जो उन्हें छुपा सके, इसलिए हर छोटा डिटेल साफ दिख रहा था। उनका सीना हल्का सा ऊपर नीचे हो रहा था, जिससे उनके स्तनों में हल्की हरकत दिख रही थी। उनकी त्वचा साफ थी और रोशनी पड़ने पर उसका रंग और उभर कर दिख रहा था।
मैं बस उन्हें देख रहा था, बिना कुछ बोले। मेरे लिए ये सब अचानक था, इसलिए मैं समझ नहीं पा रहा था कि कैसे रिएक्ट करूँ। फिर उन्होंने प्लेट से क्रीम उठाई। उन्होंने उसे अपने हाथ में लिया और सीधे अपने स्तनों पर लगाना शुरू किया। उन्होंने क्रीम को ऊपर से नीचे की तरफ फैलाया, फिर हाथों से उसे पूरे हिस्से में रगड़ने लगी ताकि हर जगह लग जाए। उनके हाथ धीरे-धीरे चल रहे थे, लेकिन साफ था कि वो जान-बूझ कर ऐसा कर रही हैं।
उन्होंने एक बार नहीं, कई बार क्रीम उठाई और पूरे सीने पर फैलायी। क्रीम लगने से उनका सीना और भी साफ दिखने लगा, क्योंकि अब उस पर एक परत बन गई थी जो हर जगह फैल रही थी। जब वो अपने हाथों से क्रीम फैला रही थी, तो उनके स्तनों का आकार और मूवमेंट साफ दिख रहा था। उनके हाथों के साथ-साथ उनका सीना भी हल्का सा हिल रहा था। वो ये सब करते हुए बीच-बीच में मेरी तरफ देख रही थी, जैसे वो जानना चाहती हों कि मैं क्या देख रहा था और क्या सोच रहा था।
उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, “अब आओ… चखो।”
मैं धीरे-धीरे उनके पास गया। मेरा दिल तेज धड़क रहा था। मैं उनके सामने बैठा था और समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ। फिर मैं नीचे झुका और क्रीम चखना शुरू किया। मेरे होंठ क्रीम को छू रहे थे और मैं उसे धीरे-धीरे हटाने लगा। क्रीम ठंडी थी, और उस पल में सब कुछ बहुत साफ महसूस हो रहा था। मैं धीरे-धीरे क्रीम हटाता गया। हर बार जब मैं पास जाता, मेरे होंठ उनके स्तनों को छूते और मैं क्रीम को हटाता जाता। क्रीम की परत हटने के साथ-साथ नीचे की त्वचा फिर से साफ दिखने लगती। वो हल्के-हल्के साँस ले रही थी। उनके मुँह से हल्की आवाज़ निकल रही थी, जैसे वो उस पल को महसूस कर रही हों।
उन्होंने मेरे बालों को बिखेरते हुए कहा, “अब कैसा लग रहा है गोलू?”
मैंने कहा, “जितना सोचा था उससे भी ज्यादा मीठा है, दीदी।”
मैं फिर से उनके स्तनों के पास गया और अपने होंठों से उनके स्तनों को चाटने लगा। लेकिन इस बार मैं सिर्फ उन्हें चाट ही नहीं रहा था। मैंने उनके स्तनों को चूसना शुरू किया जैसे उनका दूध पीने की कोशिश कर रहा था।
मैंने महसूस किया कि उनके स्तन पूरी तरह चॉकलेट क्रीम से ढके हुए थे। जैसे ही मेरे होंठ उन पर टिके, एक मीठा स्वाद मेरी ज़ुबान पर फैल गया। वो स्वाद अचानक से पूरे एहसास को और गहरा बना रहा था। मेरी ज़ुबान पर उस मिठास की परत धीरे-धीरे घुल रही थी, और हर बार जब मैं उसे महसूस करता, वो स्वाद और भी साफ और गाढ़ा लगता। ऐसा लग रहा था जैसे उस पल में सिर्फ वही मिठास और उनका साथ ही रह गया हो।
उन्होंने धीरे हौले से कहा, “मैं भी इस मीठे केक का स्वाद लेना चाहती हूँ, गोलू।”
और फिर मैं कुछ समझ पाता उससे पहले ही उन्होंने मुझे हल्के से बिस्तर पर धक्का दिया और मैं उनकी तरफ देखते हुए बिस्तर पर लेट गया। उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया था, लेकिन वो वहीं नहीं रुकीं। उन्होंने धीरे-धीरे मेरी पैंट उतारी, फिर मेरा अंडरवियर भी उतार दिया। मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था, और मैं बस उनकी तरफ देखता रह गया।
उन्होंने केक का एक टुकड़ा उठाया और धीरे-धीरे मेरे लंड पर लगाना शुरू किया। क्रीम की ठंडी मिठास मेरे पूरे लंड पर फैलती जा रही थी, और हर स्पर्श के साथ मेरा एहसास और गहरा होता जा रहा था।
वो बहुत ध्यान से पूरे लंड को क्रीम से ढक रही थी, जैसे वो हर हिस्से को महसूस करना चाहती हों।
उनकी उंगलियों की हर हलचल मुझे साफ महसूस हो रही थी, और मैं उसी एहसास में डूबता जा रहा था। उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थी, और उनका चेहरा अभी भी हल्का लाल था, लेकिन उनके हाथ रुक नहीं रहे थे। वो धीरे-धीरे पूरे लंड पर क्रीम फैलाती रहीं, जब तक कि वो पूरी तरह से मीठी परत में ढक नहीं गया।
उन्होंने हल्के से मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और धीरे से कहा, “तुम्हारा लंड तो बहुत अच्छा लग रहा है, गोलू।”
मैंने उनकी आँखों में देखते हुए धीमे से कहा, “तो चख लो, नेहा दीदी।”
वो धीरे-धीरे मेरे पैरों के बीच आकर बैठ गई, अपने घुटनों के सहारे। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था और उनकी तरफ देख रहा था। उन्होंने झुक कर धीरे-धीरे मेरे लंड के पास अपना चेहरा लाया। पहले उन्होंने हल्के से अपने होंठ लगाए, जैसे वो उसका एहसास लेना चाहती हों। फिर धीरे-धीरे अपनी ज़ुबान से उसे चाटना शुरू किया।
क्रीम की मिठास उनकी हर हरकत के साथ और फैलती जा रही थी। वो बिना जल्द-बाज़ी के, धीरे-धीरे मेरे लंड को अपने होंठों और ज़ुबान से महसूस कर रही थी। फिर उन्होंने उसे अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू किया। उनका हर मूवमेंट धीरे और लगातार था। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ बस उन्हें महसूस कर रहा था।
मैंने धीरे से कहा, “नेहा दीदी, आपके होंठ बहुत अच्छे हैं…”
उन्होंने मेरी बात सुन कर हल्के से मुस्कुराया और कुछ पल के लिए मेरी तरफ देखती रही। कमरे में वही मीठी खुशबू और हमारी धीमी सांसों की आवाज़ थी।
उन्होंने धीरे से कहा, “और तुम्हारा लंड भी बहुत मीठा लग रहा है, गोलू।”
उन्होंने फिर से अपना मुँह मेरे लंड पर रख दिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। इस बार उनका तरीका पहले जैसा नहीं था। इस बार वो बहुत तेज और लगातार कर रही थी, जैसे रुकने का कोई इरादा ही नहीं था। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था और हर पल को महसूस कर रहा था। उनका मूवमेंट इतना तेज था कि मेरे अंदर की हर भावना और तेज हो रही थी। मुझे साफ महसूस हो रहा था कि मेरा लंड पूरी तरह उनकी पकड़ और उनकी हर हरकत के साथ जुड़ गया है।
कुछ ही पलों में मुझे ऐसा महसूस होने लगा कि उनका मुँह पूरी तरह मुझ पर टिका हुआ था, और उनकी हर हरकत पहले से ज्यादा गहरी होती जा रही थी। हर सेकंड के साथ मुझे लग रहा था कि मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। उनका तरीका इतना लगातार और गहरा था कि मुझे साफ महसूस हो रहा था कि मैं अब उस आखिरी पल के बहुत करीब पहुँच चुका था।
मैंने धीरे से कहा, “नेहा दीदी, मैं अब आने वाला हूँ।”
उन्होंने मेरी तरफ देखा और हल्के से सिर हिलाया, जैसे वो मुझे इजाज़त दे रही हों कि मैं उनके मुँह के अंदर ही सब निकाल दूं। मुझे साफ महसूस हो रहा था कि मेरा लंड पूरी तरह उनके मुँह के अंदर जा रहा है, और हर बार उसकी गहराई पहले से ज्यादा महसूस हो रही थी। कुछ ही सेकंड में वो एहसास इतना तेज हो गया कि मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैंने उसी पल उनके मुँह के अंदर ही सफेद पानी निकलना शुरू कर दिया। उनका मुँह पूरी तरह सफेद पानी से भर गया था। उन्होंने अपने होंठ कस कर बंद कर लिए, जैसे वो एक भी बूंद बाहर नहीं जाने देना चाहती हों।
उन्होंने हल्के से अपने होंठों को साफ किया। कुछ बूंदें नीचे की तरफ आई, जिन्हें उन्होंने उंगलियों से पोंछ लिया। फिर हल्की सी मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखते हुए बोली, “ये तो केक से भी ज्यादा मीठा था, गोलू”
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