जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-12

पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-11

भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-

थिएटर से वापस आते वक्त रात का माहौल अलग ही था। सड़कें हल्की रोशनी में चमक रही थी और हम तीनों चुप-चाप कैब में बैठे थे। इस बार एक छोटा सा बदलाव था— पायल दीदी मेरे पास नहीं बैठी थी, बल्कि नेहा दीदी मेरे बगल में आकर बैठ गई थी। कैब जैसे ही आगे बढ़ी, नेहा दीदी ने धीरे से अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। उनका सिर रखते ही मुझे एक अलग सा अहसास हुआ। मैं कुछ कह नहीं पाया, बस खिड़की के बाहर देखने लगा, लेकिन ध्यान कहीं और ही था। उनके बाल हल्के-हल्के मेरे गाल को लग रहे थे, और हर बार वो अहसास मुझे और बेचैन कर रहा था।

रास्ते में अचानक मैंने ड्राइवर से कहा कि गाड़ी थोड़ी देर के लिए रोक दे। सामने एक छोटी सी बेकरी थी, जिसकी रोशनी दूर से ही दिख रही थी। मैं उतर कर अंदर गया और एक केक खरीदा। मन में एक हल्की-सी खुशी थी, जैसे ये रात कुछ खास बनने वाली हो। जब मैं वापस कैब में आया, तो दोनों ने मेरी तरफ देखा—नेहा दीदी ने हल्की-सी मुस्कान दी, जो बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह रही थी।

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