पिछला भाग पढ़े:- साक्षी दीदी और मेरी सेक्स कहानी-3
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
सुबह मैं जल्दी उठ गया और सीधे किचन में चला गया ताकि कुछ खाना बना सकूं। आमतौर पर साक्षी दीदी और माँ ही सब बनाती थी, लेकिन आज साक्षी दीदी अपने कमरे में ही थी। उनके हाथ में प्लास्टर था और दवाई की वजह से भी उन्हें आराम करना था, इसलिए वह बिस्तर पर ही लेटी हुई थी। मैंने सोचा कि उनके लिए कुछ आसान सा बना दूं, तो मैंने ऑमलेट बना लिया। फिर मैंने उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दिया ताकि वह बिना ज्यादा हाथ हिलाए आसानी से खा सकें।
इसके बाद मैं प्लेट लेकर उनके कमरे में गया। कमरे में जाते ही देखा कि उनके बाल चेहरे पर बिखरे हुए थे। कुछ बाल उनके गालों से चिपके हुए थे, शायद पसीने की वजह से या क्योंकि वह काफी देर से वैसे ही लेटी थी। मैंने धीरे से प्लेट उनके बिस्तर के पास रख दी। फिर थोड़ा झुक कर मैंने धीरे से आवाज लगाई, “साक्षी दीदी, उठो।”
कुछ सेकंड बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोली। वह अभी भी थोड़ी सुस्त लग रही थी, जैसे दवाई का असर पूरी तरह गया नहीं हो। उन्होंने इधर-उधर देखा, फिर मेरी तरफ देखा। पिछली रात मैंने उनके चेहरे को साफ कर दिया था, जहाँ मेरा सफेद पानी लगा हुआ था, और उनके कपड़े भी ठीक से पहना दिए थे ताकि जब वह उठें तो उन्हें कुछ अजीब महसूस ना हो। और वही हुआ। जब वह उठीं तो उन्हें कुछ भी समझ नहीं आया कि रात में क्या हुआ था। उन्हें यह भी पता नहीं चला कि मैंने उनके स्तन और चेहरे के साथ क्या किया था।
मैंने हल्की आवाज में कहा, “मैंने आपके लिए ऑमलेट बनाया है, आराम से खा लेना।” उन्होंने धीरे से सिर हिलाया और थोड़ा उठने की कोशिश की। मैंने तुरंत प्लेट उनके पास खिसका दी ताकि उन्हें ज्यादा मेहनत ना करनी पड़े।
इसके बाद मैं नीचे चला गया और दूसरे काम करने लगा। मैंने घर की सफाई शुरू की, फिर बर्तन साफ किए। उसके बाद मैंने नहाने के लिए पानी गरम किया ताकि उन्हें आसानी रहे। लगभग एक घंटे बाद ऊपर से साक्षी दीदी की आवाज आई। उन्होंने आवाज लगाई, “मुझे नहाना है।”
मैंने बाथरूम में जाकर बाल्टी में गरम पानी डाला और उसमें थोड़ा ठंडा पानी मिलाया ताकि पानी सही हो जाए। वह प्लास्टर की वजह से शॉवर के नीचे नहीं नहा सकती थी, इसलिए मैंने सब पहले से तैयार कर दिया। फिर मैंने उन्हें आवाज लगा कर बताया कि वह आकर नहा सकती थी।उसके बाद मैं बाहर आकर सोफे पर बैठ गया। मैं इंतजार करने लगा क्योंकि उनके बाद मुझे भी नहाना था। थोड़ी देर बाद वह आई और सीधे बाथरूम के अंदर चली गई।
करीब पाँच मिनट बाद उन्होंने मेरा नाम लेकर आवाज लगाई, “गोलू, ज़रा यहाँ आओ।”
मैंने कहा, “हाँ दीदी,” और बाथरूम के पास जाकर दरवाज़ा खटखटाया।
उन्होंने अंदर से कहा, “खुला है, अंदर आ जाओ।”
मैं अंदर गया और एक पल के लिए मेरी सांस जैसे रुक गई। साक्षी दीदी मेरे सामने खड़ी थी। उन्होंने नीचे सिर्फ अपनी पैंटी पहनी हुई थी और उनका ब्रा उनके प्लास्टर में अटक गया था। वह उसे निकालने की कोशिश कर रही थी, लेकिन दर्द की वजह से नहीं कर पा रही थी।
वह लगभग पूरी तरह नंगी थी, सिर्फ उनका नीचे का हिस्सा ढका हुआ था। उनके चेहरे पर दर्द साफ दिख रहा था, आँखों में आँसू थे, लेकिन मेरी नज़र उनके स्तनों पर टिक गई। वही स्तन जिन्हें मैंने पिछली रात छुआ था, लेकिन उस समय वह गहरी नींद में थी। अब वह पूरी तरह जाग रही थी। उनके स्तन साफ और भरे हुए दिख रहे थे, हल्की सी सांसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।उनकी त्वचा पर हल्की नमी थी और रोशनी में उनका आकार और साफ दिख रहा था। वह जानती थी कि मैं उनकी तरफ देख रहा हूँ, और यह एहसास उस पल को और भी भारी बना रहा था।
उन्होंने दर्द भरी आवाज में कहा, “ज़रा मदद कर दो, हाथ में बहुत दर्द हो रहा है।”
मैं उनके बिल्कुल पास गया और देखा कि ब्रा का हुक प्लास्टर में फंसा हुआ था। मैंने धीरे-धीरे उसे निकालना शुरू किया। मैं बहुत संभल कर उसे प्लास्टर से अलग करने की कोशिश कर रहा था ताकि उन्हें ज्यादा दर्द ना हो। जैसे ही मैं थोड़ा सा खींचता, वह दर्द की वजह से हल्का सा हिल जाती थी।
जब वह हिलती थी, तो उनके शरीर के साथ उनके स्तन भी हल्के से हिलते थे। वह कोई तेज या अचानक हरकत नहीं थी, बल्कि बहुत नरम और धीमा सा मूवमेंट था। जैसे हल्की सी लहर उठती है और फिर वापस शांत हो जाती है, वैसे ही उनका शरीर हिलता और उसी के साथ उनके स्तन भी ऊपर-नीचे हल्के से झूलते और फिर अपनी जगह पर आकर ठहर जाते।
उनकी सांसें भी थोड़ी तेज हो रही थी, और हर सांस के साथ उनके स्तन बहुत हल्के से उठते और गिरते थे। मैं बार-बार रुक जाता और उन्हें देखता कि उन्हें ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा। वह खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी।
मैंने और भी धीरे काम करना शुरू किया। हुक को बहुत ध्यान से पकड़ कर, बिना झटका दिए, धीरे-धीरे बाहर निकालने लगा। आखिरकार धीरे-धीरे हुक प्लास्टर से निकल गया।
उन्होंने हल्की, थोड़ी शर्मीली आवाज में कहा, “थैंक यू गोलू।”
यह कहते हुए उन्होंने अपने बिना प्लास्टर वाले हाथ से खुद को ढकने की कोशिश की, लेकिन वह पूरी तरह से खुद को कवर नहीं कर पा रही थी।
मैंने धीरे से कहा, “कोई बात नहीं दीदी, आप आराम से नहा लो।”
मैं मुड़ कर बाहर जाने ही वाला था कि तभी उन्होंने धीरे से आवाज दी, “गोलू…”
मैं रुक गया और उनकी तरफ देखा। उन्होंने थोड़ा झिझकते हुए कहा, “क्या तुम मेरे साथ नहा सकते हो? मैं अकेले ठीक से नहीं कर पाऊँगी। हाथ की वजह से मुश्किल हो रही है। और तुमने भी अभी तक नहाया नहीं है ना…”
मैंने कहा।,”लेकिन दीदी… साथ में नहाना थोडा अजीब लगेगा…”
तभी उन्होंने मेरे चेहरे को देखा और हल्का सा मुस्कुराई। उन्होंने नरमी से कहा, “गोलू, हम बचपन में साथ में नहाते थे ना, तब तो कभी अजीब नहीं लगा। अब क्यों लग रहा है?”
मैं कहना चाहता था कि दीदी, उस समय हम बच्चे थे और मेरे मन में आपके लिए कोई भी भावना नहीं थी। लेकिन अब हम दोनों बड़े हो चुके हैं। और मेरे अंदर आपके लिए सोच बदल गई है क्योंकि अब मैं आपके स्तनों को चूसना चाहता हूँ, अपना लंड आपके मुंह में देना चाहता हूँ और आपकी चुत को चाटना चाहता हूँ। जब हम बच्चे थे तब मैं यह सब नहीं सोचता था, लेकिन अब मैं यह सब सोचता हूँ। और अगर मुझे मौका मिले तो मैं आपको चोदना चाहता हूँ। मैं यह सब कहना चाहता था, लेकिन मैंने कुछ भी नहीं कहा। मैंने अपने मन की सारी बातें अपने अंदर ही रख ली।
फिर मैंने बस इतना कहा, “ठीक है दीदी…।”
उसके बाद मैंने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारना शुरू किया। वह वहीं खड़ी थी और बस मुझे देख रही थी कि मैं क्या कर रहा था। मैंने पहले अपनी शर्ट उतारी, फिर धीरे से अपनी पैंट भी उतार दी। अब मैं साक्षी दीदी के सामने सिर्फ अपने अंडरवियर में खड़ा था, और वह चुप-चाप मुझे देख रही थी।
मैं थोड़ा झिझका और फिर धीरे से बोला, “दीदी… लेकिन आप भी तो अपनी पैंटी पहने हुए हो…”
वह हल्का सा मुस्कुराई और बोली, “मैं अभी भी इसे इसलिए पहने हुए हूं क्योंकि मैं खुद से इसे निकाल नहीं पा रही। क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो… और इसे हटा दोगे?”
मैंने हल्के से सिर हिलाया और उनके पास गया। मैं उनके सामने जाकर घुटनों के बल बैठ गया, ठीक उनके पैरों के बीच। मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाए और उनकी पैंटी के किनारे को उंगलियों से पकड़ा। उसे हल्के से पकड़ कर नीचे खींचना शुरू किया। मैं धीरे-धीरे कर रहा था, बिना किसी जल्दी के, बस ध्यान से कि सब सही से हो। मैंने कपड़े को नीचे लाना शुरू किया, और हर मूवमेंट धीरे और साफ था।
जब कपड़ा पूरी तरह नीचे आ गया, मैं कुछ पल के लिए वहीं रुक गया। मेरे सामने उनका नाजुक हिस्सा था। पास से देखने पर वह साफ और खुला हुआ दिख रहा था। बीच में हल्की सी लाइन थी जो नीचे की तरफ जाकर धीरे-धीरे खुलती हुई लग रही थी। किनारे नरम थे, जैसे दो मुलायम परतें एक-दूसरे से लगी हों। ऊपर की तरफ थोड़ा सा उभरा हुआ हिस्सा था और नीचे की तरफ वह धीरे-धीरे अलग होता दिख रहा था। सब कुछ बहुत नरम लग रहा था, जैसे छूने पर तुरंत दब जाए।
मैं जितना देख रहा था, उतना मुझे उसकी बारीकियां समझ में आ रही थी। वह बिल्कुल वैसा नहीं था जैसा सिर्फ सोच में आता है, असल में उससे ज्यादा साफ और अलग लग रहा था।
मैं कुछ सेकंड तक बस उसे देखता रहा। मेरी सांस धीमी हो गई थी और मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था।
तभी वह धीरे से बोली, “गोलू… वहाँ मत देखो… मुझे शर्म आ रही है…”
मैं तुरंत संभल गया और नज़रें हटा ली। मैंने धीरे से कहा, “सॉरी दीदी…” और फिर मैं उठ कर खड़ा हो गया।
मैंने पास रखी बाल्टी की तरफ हाथ बढ़ाया। पानी भरा हुआ था और थोड़ा ठंडा हो रहा था। मैंने हाथ डाल कर पानी लेने की कोशिश की, तभी उन्होंने मुझे देखा और हल्के से बोली, “गोलू… तुम अभी भी अंडरवियर पहने हुए हो। पहले इसे निकालो। तभी तो आराम से नहा पाओगे।”
मैं थोड़ा झिझका और कहा, “लेकिन दीदी…”
उन्होंने तुरंत मेरी बात काट दी और हल्की मुस्कान के साथ बोली, “नहीं गोलू… पहले इसे निकालो।”
मैंने उनसे कोई बहस नहीं की। मैंने सीधा उनकी बात मानी। बाथरूम छोटा था और हम दोनों बहुत पास खड़े थे। मैंने बिना कुछ कहे अपना अंडरवियर नीचे किया और उतार दिया। अब हम दोनों कुछ सेकंड के लिए पूरी तरह नंगे खड़े थे। कोई बात नहीं हुई। सिर्फ हल्की साँसों की आवाज़ और पानी की टपक थी।
उनकी नज़र सीधी मेरे लंड पर गई और वहीं रुक गई। वह कुछ सेकंड तक उसे देखती रही। उनके चेहरे पर हल्का सा हैरानी का भाव था और ध्यान पूरी तरह वहीं था। फिर उन्होंने नज़र ऊपर उठाई और मेरे चेहरे की तरफ देखा। हमारी आँखें मिली। उन्होंने हल्की सी मुस्कान दी।
“तुम्हारा लंड कितना बड़ा है गोलू,” उन्होंने कहा।
उनके मुँह से “लंड” शब्द सुनना मेरे लिए अजीब था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वो ऐसा शब्द बोलेंगी। लेकिन अजीब लगने के साथ मुझे अच्छा भी लगा।
मैंने धीरे से कहा, “साक्षी दीदी, वो शब्द मत इस्तेमाल करो।”
उन्होंने हल्का सा सिर हिलाया और कहा, “तुम्हारा मतलब लंड से है गोलू? इसमें गलत क्या है? ”
उन्होंने मेरे चेहरे को देखते हुए मुस्कुराया, जैसे उनके लिए अपने छोटे भाई के लंड को देखना आम हो। मैंने कुछ नहीं कहा, बस बाल्टी उठाई और पानी उनके शरीर पर डालना शुरू किया। मैं ध्यान रख रहा था कि उनका घायल हाथ और प्लास्टर गीला ना हो। जब उनका शरीर पूरी तरह गीला हो गया, तब मैंने बिना कुछ बोले वही बाल्टी लेकर अपने ऊपर भी पानी डालना शुरू कर दिया। मैं धीरे-धीरे पानी अपने कंधों और शरीर पर डाल रहा था, बस उसी तरह जैसे अभी उनके ऊपर डाल रहा था।
जब हम दोनों पूरी तरह गीले हो गए, तब मुझे सबसे जरूरी काम करना था – उनके शरीर पर साबुन लगाना। मैंने साबुन उठाया, लेकिन मेरे हाथ रुक गए। मुझे हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उनके नंगे शरीर को छू सकूं।
उन्होंने मेरी झिझक देख ली और बोली, “क्या हुआ गोलू?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं दीदी,” और मैंने साबुन लगाना शुरू कर दिया।
सबसे पहले मैंने उनके हाथों पर साबुन लगाया, फिर पैरों पर, और फिर उनकी पीठ पर। मैं धीरे-धीरे ये सब कर रहा था। फिर मैं आगे बढ़ा और उनके जांघों, पेट और पिछवाड़े पर साबुन लगाना शुरू किया। मैं अब भी चुप था और बस वही कर रहा था जो करना था।
उन्होंने मेरे चेहरे की तरफ देखा और बोली, “तुम मेरे बूब्स मिस कर रहे हो गोलू”.
मेरे गाल गरम होने लगे, खून तेजी से दौड़ने लगा। उन शब्दों को सुन कर मेरे अंदर हलचल बढ़ गई, लेकिन मैंने खुद को शांत रखा।
मैंने धीरे और संभल कर कहा, “क्या मैं आपके बूब्स छू सकता हूँ?”
उन्होंने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “अगर तुम उन्हें छूओगे नहीं तो उन पर साबुन कैसे लगाओगे?”
मैं कुछ सेकंड के लिए रुका। फिर मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनके स्तन पर रखा। मैंने धीरे-धीरे उनके स्तन पर साबुन लगाना शुरू किया। उनके स्तन बहुत स्मूद और सॉफ्ट लग रहे थे, जैसे हाथ लगाते ही फिसल रहे हों। उनका हल्का उछाल महसूस हो रहा था, जैसे हर बार हाथ चलाने पर वो हल्के से हिल रहे हों।
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दूध से भरे गुब्बारे पर साबुन लगा रहा हूँ। मैं धीरे-धीरे साबुन लगाता रहा, फिर बीच-बीच में हल्का सा दबाव देता था। कभी मैं साबुन लगाता, फिर थोड़ा सा निचोड़ता, फिर दोबारा साबुन लगाता। मैं यही बार-बार दोहराता रहा—पहले साबुन लगाना, फिर हल्का सा दबाना। उन्होंने हल्का सा अपना निचला होंठ दबाया, लेकिन उन्होंने मुझे रोका नहीं।
इसी दौरान मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड सख्त होने लगा है। मैं खुद समझ नहीं पा रहा था कि इसे कैसे आम करूँ, क्योंकि मैं लगातार उनके शरीर को छू रहा था। यह अपने आप हो रहा था और मैं इसे रोक नहीं पा रहा था। मैंने अपनी नज़रें नीचे नहीं की और न ही कुछ कहा। मैं बस वही काम करता रहा, जैसे कुछ हुआ ही ना हो। उन्होंने भी इसे नोटिस किया, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। मैं चुपचाप अपना काम करता रहा, बिना कुछ बोले, बस जल्दी से सब खत्म करने पर ध्यान रखते हुए।
जब उनके स्तन पर साबुन अच्छी तरह फैल गया और झाग बन गया, तब मैंने बाल्टी उठाई। मैंने धीरे-धीरे पानी लिया और उनके शरीर पर डालना शुरू किया। पानी उनके सिर से बहता हुआ नीचे आने लगा। पहले उनके चेहरे पर से होकर फिसला, फिर गर्दन से नीचे आता हुआ उनके स्तन पर फैले झाग को अपने साथ बहाने लगा। झाग धीरे-धीरे हटने लगा और पानी की धार उनके शरीर पर नीचे की तरफ जाती रही।
मैं ध्यान से पानी डाल रहा था, ताकि उनका प्लास्टर सुरक्षित रहे। पानी उनके कंधों से होकर नीचे की तरफ बह रहा था, और मैं बस उसे देखते हुए धीरे-धीरे अपना काम कर रहा था।
जब मैंने पानी डालना रोका, तब उन्होंने मेरी तरफ देखकर कहा, “तुम बहुत सेंसिटिव हो गोलू।”
मैंने पूछा, “क्यों दीदी?”
उन्होंने जवाब दिया, “अपने लंड को देखो, सिर्फ मेरे बूब्स को छूने से ही सख्त हो रहा है।”
मैं कुछ सेकंड चुप रहा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोलूँ। मैंने नज़रें संभालकर रखी और खुद को शांत करने की कोशिश की। मैंने तौलिया उठाया ताकि मैं उनका शरीर सुखा सकूँ। मैं आगे बढ़ा ही था कि उन्होंने मुझे रोक दिया।
उन्होंने कहा, “तुम क्या कर रहे हो गोलू, अब तक तुम मेरे लिए सब कर रहे थे, अब मुझे भी थोड़ा तुम्हारी मदद करने दो।”
मैं वहीं रुक गया और उन्हें देखने लगा। उन्होंने अपने बिना प्लास्टर वाले हाथ से साबुन उठाया और सीधे मेरे लंड पर लगाना शुरू किया। जैसे ही झाग बनने लगा, उन्होंने साबुन वापस रख दिया। फिर उन्होंने अपने नंगे हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया। उनकी हथेली बहुत मुलायम थी और वो धीरे-धीरे मेरे लंड पर चल रही थी। झाग और पानी की वजह से सब कुछ ज्यादा फिसलन भरा लग रहा था।
उन्होंने मेरे लंड को पकड़ कर आगे-पीछे रगड़ना शुरू किया। मैं पहले से ही बहुत सख्त था, और अब खुद को संभालना मेरे लिए मुश्किल होता जा रहा था। मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था, बस खड़ा था और जो हो रहा था उसे महसूस कर रहा था।
उनका हाथ लगातार चलता रहा—आगे, फिर पीछे—एक ही तरीके से बार-बार। मैं अब बिल्कुल कंट्रोल में नहीं था। कुछ ही सेकंड बाद मेरे लंड से सफेद पानी निकलना शुरू हो गया। शुरू में कुछ बूंदें उनके कलाई पर गिरी, फिर धीरे-धीरे उनका पूरा हाथ सफेद पानी से भर गया।
कुछ पल बाद उन्होंने हल्का सा चेहरा बनाया और कहा, “ये क्या कर दिया गोलू? मैं तो बस मदद कर रही थी।”
मैंने तुरंत कहा, “सॉरी दीदी, ये गलती से हो गया… मैं कंट्रोल नहीं कर पाया।”
कुछ पल बाद उन्होंने हाथ धोने के लिए नल की तरफ बढ़ कर अपना हाथ धोया। वो चुप-चाप नल के नीचे हाथ साफ करती रहीं, और मैं वहीं खड़ा उन्हें देखता रहा। जब उन्होंने हाथ धो लिए, तब मैं फिर से तौलिया लेकर उनकी तरफ बढ़ा और धीरे-धीरे उनका शरीर सुखाने लगा।
जब मैं उनका शरीर सुखा चुका, वो बाहर जाने के लिए मुड़ी। दरवाज़े के पास पहुँच कर वो एक पल के लिए रुकी, फिर मेरी तरफ देखा और कहा, “गोलू, मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ, इसलिए अगली बार जब मैं तुम्हारे लंड को छू रही हूँ तो खुद पर कंट्रोल रखना, क्योंकि अपनी बहन के हाथ पर पानी बहाना अच्छी बात नहीं है।”
मैंने धीरे से कहा, “मैं याद रखूँगा दीदी।”
फिर वो बाहर चली गई और मुझे उस बाथरूम में अकेला छोड़ दिया। मैं वहीं खड़ा रह गया और सोचने लगा कि मेरे पास उनके साथ पूरा दिन था, और शायद इससे भी ज्यादा कुछ हमारे बीच हो सकता था।