पिछला भाग पढ़े:- जुड़वाँ दीदियों के साथ जिस्म की चाहत-15
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
गोवा में नेहा दीदी और पायल दीदी के साथ रहना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। वैसे तो कोटा में भी हम तीनों ही साथ रहते थे और वहाँ मैं उनके साथ जो चाहता था, कर सकता था। दोनों ने मुझे कभी किसी चीज़ के लिए ज्यादा रोका भी नहीं था। फिर भी मुझे इस छुट्टी की बहुत जरूरत थी। मेरे एग्जाम पास आ रहे थे और मैं जानता था कि गोवा से वापस जाने के बाद मुझे फिर से पढ़ाई में लग जाना है।
इसलिए उससे पहले मैं कुछ दिन माँ-पापा के साथ बिताना चाहता था। काफी समय बाद हम सब इस तरह एक साथ कहीं बाहर आए थे और मैं बस बिना किसी बात की टेंशन लिए उनके साथ अच्छा समय बिताना चाहता था।
ऊपर से क्रिसमस के दिन चल रहे थे और इस समय गोवा का माहौल भी बाकी दिनों से अलग था। दिन में तो हर जगह लोग दिखाई देते ही थे, लेकिन रात होते ही सड़कों पर भीड़ और ज्यादा बढ़ जाती थी। हर तरफ लाइट्स लगी हुई थी, कहीं गाने बज रहे थे तो कहीं लोग अपने दोस्तों और परिवार के साथ घूम रहे थे। रात में गोवा की सड़कों पर घूमना मुझे बहुत अच्छा लगता था।
इतनी भीड़ होने के बाद भी वहाँ घूमते हुए थकान नहीं होती थी। हर थोड़ी दूर पर कुछ नया देखने को मिल जाता था और इसी वजह से कमरे में वापस जाने का मन ही नहीं करता था।
उस सुबह मैं, नेहा दीदी, पायल दीदी, माँ-पापा सभी लोग एक साथ बैठे थे। सब सोच रहे थे कि आज कहाँ जाना है और क्या करना है। कोई बीच पर जाने की बात कर रहा था, तो कोई बाजार में घूमना चाहता था। काफी देर तक सब अपनी-अपनी बातें बताते रहे।
तभी पापा ने बताया कि उन्होंने शाम के लिए हम सभी की क्रूज़ की टिकटें ले ली थी। शाम को क्या करना था, यह तो अब तय हो गया था, लेकिन क्रूज़ पर जाने में अभी काफी समय बाकी था और तब तक होटल में बैठे रहने का भी कोई मतलब नहीं था।
कुछ देर बाद माँ-पापा और नेहा दीदी ने बाजार जाने का सोचा। उन्हें वहाँ थोड़ा घूमना था और कुछ सामान भी लेना था, लेकिन पायल दीदी का बाजार जाने का मन नहीं था। वह बीच पर जाना चाहती थी। जब तय नहीं हो पाया कि सब कहाँ जाएँ, तो हमने अलग-अलग जाने का फैसला किया। माँ-पापा और नेहा दीदी बाजार चले गए, और मैं पायल दीदी के साथ बीच की तरफ निकल गया। शाम को सबको फिर से मिलना था, इसलिए अलग-अलग जाने में कोई दिक्कत नहीं थी। थोड़ी देर में हम भी बीच की तरफ चल पड़े।
क्रिसमस का दिन होने के बाद भी उस समय बीच पर ज्यादा लोग नहीं थे। ज्यादातर लोग दिन में अपने होटल में आराम कर रहे थे, क्योंकि गोवा की असली मस्ती शाम को शुरू होती है। शायद इसी वजह से बीच लगभग खाली था। कुछ लोग ही दूर-दूर दिख रहे थे, बाकी जगह बस समुद्र और रेत थी। मैं और पायल दीदी आराम से किनारे पर चलते रहे। थोड़ी देर बाद हम वहाँ से भी आगे निकल गए जहाँ कुछ लोग थे। पायल दीदी समुद्र में तैरना चाहती थी, लेकिन लोगों के सामने उन्हें थोड़ा अजीब लग रहा था। इसलिए हम भीड़ से दूर जाने के लिए आगे बढ़ते रहे।
चलते-चलते हम करीब तीन किलोमीटर दूर आ गए थे। अब पीछे देखने पर लोग बहुत दूर और छोटे दिख रहे थे। हमारे आस-पास कोई नहीं था। बस मैं, पायल दीदी और सामने समुद्र था। हम बीच के आखिरी हिस्से के पास पहुँच गए थे, जहाँ चारों तरफ बिल्कुल सन्नाटा था। समुद्र की लहरों के अलावा कोई आवाज नहीं आ रही थी। हमने अपने बैग वहीं रेत पर रख दिए।
मैंने चारों तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “यहाँ तुम आराम से तैर सकती हो दीदी, यहाँ कोई नहीं है।”
पायल दीदी ने भी चारों तरफ नज़र दौड़ाई और हल्की मुस्कान के साथ बोली, “हाँ, यह जगह सच में अच्छी है गोलू।”
पायल दीदी ने मेरी तरफ देख कर एक छोटी-सी मुस्कान दी और अपने कपड़े उतारने लगी। उन्होंने सफेद टी-शर्ट और छोटे शॉर्ट्स पहने हुए थे। सबसे पहले उन्होंने अपनी टी-शर्ट उतार कर एक तरफ रख दी और फिर अपने शॉर्ट्स भी उतार दिए। अंदर उन्होंने लाल रंग की बिकिनी पहनी हुई थी, जो उनके शरीर से एक-दम कसकर चिपकी थी।
बिकिनी का ऊपरी हिस्सा काफी छोटा था और उसकी पतली डोरियां उनके भारी स्तनों को मुश्किल से संभाल पा रही थी। तंग कपड़े के भीतर उनके स्तनों का भराव और गोलाई साफ दिखाई दे रही थी, जिससे उनका फिगर और भी उभर कर सामने आ रहा था। नीचे का कपड़ा भी उनकी जांघों के बीच काफी कस गया था और उसके किनारों से कुछ बाल बाहर झांक रहे थे। उस लाल बिकिनी में उनके शरीर की बनावट पूरी तरह उभरकर दिखाई दे रही थी और वो बेहद हॉट लग रही थी।
मेरे मन में उस वक्त बस एक ही चीज़ चल रही थी—उनका नाजुक हिस्सा। वो लाल बिकिनी का नीचे वाला कपड़ा उनके उस हिस्से पर इतना ज्यादा कस गया था कि वहाँ का उभार पूरी तरह से साफ दिख रहा था। वह जगह इतनी भरी हुई और उभरी हुई थी कि साफ़ पता चल रहा था कि अंदर से वो कितनी गरम होंगी। बिकिनी के किनारों पर जो बाल थे, उन्हें देख मेरा मन कर रहा था कि मैं खुद अपने हाथों से उस कपड़े को एक तरफ खींच दूँ और उनकी उस नाज़ुक हिस्से की गहराई को अपनी आंखों से देखूँ।
वह इलास्टिक उनकी कमर के पास इतना टाइट था कि ऐसा लग रहा था जैसे वो उनके उस नाजुक हिस्से को बाहर की तरफ और उभार रहा हो। बस उस जगह को घूरते हुए मुझे ये अहसास हो रहा था कि वह कितनी कोमल और रसीली होगी, जिसे महसूस करने के लिए मेरी उंगलियां अभी से कांप रही थी।
पायल दीदी ने मेरी तरफ एक आखिरी बार देखा और फिर धीरे-धीरे समुद्र की ओर जाने लगी। जैसे ही वो पानी के पास पहुँची, उन्होंने पानी की गहराई को महसूस किया और फिर अंदर चली गई। वो पानी में बहुत अच्छे से तैर रही थी। उनकी तैरने की रफ़्तार बहुत शांत और एक लय में थी।
मैं वहीं किनारे पर गीली मिट्टी और रेत के पास बैठ कर उन्हें देख रहा था। उन्हें तैरते हुए देखना अच्छा लग रहा था; जिस तरह से वो पानी के बहाव के साथ खुद को आगे बढ़ा रही थी, वो काफी सुकून देने वाला था। मैं अपनी जगह से नहीं हिला, बस उन्हें ध्यान से देखता रहा। पानी की लहरें उनसे टकरा रही थी और वो बड़े आराम से उनके बीच से निकल रही थी।
करीब आधे घंटे बाद अचानक पायल दीदी दर्द से चिल्लाने लगी। वह पानी से बाहर की तरफ भागती हुई आई और अपने सीने को दोनों हाथों से जोर से पकड़े हुए थी। मैं तुरंत अपनी जगह से उठा और दौड़ कर उनके पास पहुँचा। वह दर्द से लगभग रो रही थी और काफी परेशान दिख रही थी। मैंने घबराते हुए पूछा, “क्या हुआ दीदी? सब ठीक तो है?”
वह दर्द में सिसकते हुए मेरी तरफ मुड़ी और कांपती हुई आवाज़ में बोली, “गोलू, किसी चीज़ ने मुझे काट लिया है।”
उनकी हालत देख कर मैं घबरा गया था। उन्होंने जैसे ही अपना हाथ हटाया, मैंने देखा कि जहाँ उस चीज़ ने काटा था, वहाँ की त्वचा तेज़ी से लाल पड़ रही थी। उनके स्तन के ऊपरी हिस्से की त्वचा पर लाली बढ़ती जा रही थी और वह जगह सूज कर उभर आई थी। दर्द की वजह से उनकी साँसें बहुत तेज़ हो गई थी।
उन्होंने दर्द के मारे कराहते हुए कहा, “गोलू, लगता है किसी जेलीफ़िश ने काटा है। जल्दी कुछ कर, नहीं तो ये और फैल जाएगा!”
मैं पूरी तरह घबरा गया था और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करूँ। मैंने डरते हुए उनसे पूछा, “दीदी, मैं क्या करूँ? मुझे समझ नहीं आ रहा, मैं आपकी मदद कैसे करूँ?”
उन्होंने दर्द में छटपटाते हुए कहा, “गोलू, उस पर पेशाब कर दे। मैंने कहीं पढ़ा था कि इससे आराम मिलता है।”
मैं बिल्कुल सन्न रह गया। मुझे समझ नहीं आया कि मैं क्या बोलूँ। मैंने हकलाते हुए कहा, “लेकिन दीदी, ये… ये कैसे…”
उन्होंने गुस्से और दर्द भरी नज़रों से मेरी तरफ देखा और चिल्लाते हुए बोली, “मैंने कहा ना, जल्दी कर गोलू! बस उस पर पेशाब कर दे!”
मैंने कांपते हाथों से अपनी पैंट और अंडरवियर नीचे गिरा दी। अब मेरा लंड पूरी तरह बाहर था और उनकी आँखों के ठीक सामने झूल रहा था। वो दर्द से कराह रही थी, लेकिन जैसे ही उनकी नज़र मेरे लंड पर पड़ी, उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।
उनकी तरफ देखते हुए, आँखों में दर्द और एक अजीब सी बेताबी लिए उन्होंने कहा, “कम ऑन गोलू, जल्दी कर!”
मैं तो पूरी तरह सन्न था, मेरा गला सूख चुका था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं उन पर पेशाब कैसे करूँ, जबकि मेरा पूरा ध्यान बस उनके उस लाल बदन और बिकिनी पर टिका था। वो बार-बार दर्द से अपनी जांघों को सिकोड़ रही थी, जिससे उनका नाजुक हिस्सा और भी उभर कर सामने आ रहा था।
“दीदी, मुझे शर्म आ रही है, मैं… मैं कैसे करूँ?” मैंने हकलाते हुए पूछा।
वो झल्ला कर बोली, “गोलू, बकवास बंद कर और जल्दी कर! मुझे बहुत जलन हो रही है!” कहते हुए उन्होंने अपने हाथ से अपने स्तन को दबाया और मुझे और करीब आने का इशारा किया। उनकी वो हरकत देख कर मेरा लंड और भी सख्त हो गया, और मैं बस उनकी उन बेताब आँखों में खो गया।
मैंने अब और नहीं सोचा। मेरा सारा डर एक पल में गायब हो गया। मैंने अपना लंड सीधे उनकी छाती की तरफ कर दिया। उनकी लाल बिकिनी उनके स्तनों को मुश्किल से ढके हुए थी। जैसे ही मेरा लंड उनके स्तनों के पास पहुँचा, उनकी सांसें तेज़ हो गई।
मैंने धार छोड़ दी। जैसे ही गरम पेशाब उनकी छाती पर गिरा, वो एक ज़ोर की कराह के साथ पीछे की तरफ मुड़ गई। लाल बिकिनी तुरंत भीग गई और उनकी कोमल त्वचा पर वो गर्माहट साफ महसूस हो रही थी। धार उनके स्तनों से होती हुई नीचे बह रही थी। कुछ छींटें उनके गले और होंठों पर भी पड़ी। एक बूंद उनके होंठों के किनारे आकर रुकी, तो उन्होंने अपनी आँखें जोर से बंद कर ली। उनकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बस मुझ पर एक अजीब सा भरोसा था।
मैंने अभी भी धार नहीं रोकी थी। वो अपनी आँखें बंद किए, पूरी तरह उस पल में खोई हुई थी। तभी उन्होंने धीरे से अपना हाथ ऊपर उठाया और अपने गीले स्तनों पर हाथ फेरने लगी। मेरी धार जो उनके शरीर पर गिर रही थी, उसे वो अपने हाथों से पूरे सीने पर फैला रही थी।
उनकी आवाज़ अब धीमी और कांपती हुई थी। उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “गोलू, ये बहुत अच्छा लग रहा है… बिल्कुल मत रुकना।”
उनकी बातें सुन कर मेरा जोश और बढ़ गया। मैं बस उनकी उन बेताब आँखों में देख रहा था और उन पर लगातार अपनी धार छोड़ रहा था। उन्होंने अपने स्तनों को रगड़ते हुए अपना शरीर थोड़ा और ऊपर उठाया, जैसे वो चाह रही थी कि मेरी पेशाब की हर बूंद उनके जिस्म के हर हिस्से को छू ले।
कुछ मिनटों तक सब कुछ ऐसे ही चलता रहा, लेकिन फिर अचानक मेरा लंड खाली होने लगा और धार कम हो गई। मुझे महसूस हुआ कि मेरा ब्लैडर पूरी तरह खाली हो चुका था। मुझे उस पल बहुत पछतावा हुआ कि मैंने आज पानी कम पिया था, वरना ये मज़ा और लंबा चलता। मैंने जैसे ही रुकने की कोशिश की, उन्होंने अपनी आँखें खोल ली।
वो थोड़े हताश और उलझे हुए भाव से मुझे देखने लगी। उनकी सांसें अभी भी तेज़ थी और शरीर पेशाब से तर-बतर था। उन्होंने मायूस होकर मेरी तरफ देखा और धीमी आवाज़ में बोली, “क्या हुआ गोलू? रुक क्यों गए? अभी भी मुझे थोड़ा दर्द और जलन महसूस हो रही है, थोड़ा और करो ना।”
मैंने अपना सिर नीचे झुका लिया और हताश होकर बोला, “दीदी, अब और नहीं हो पाएगा, मेरा पेट पूरी तरह खाली हो चुका है।”
यह सुन कर वो थोड़ा उदास हो गई। उनकी आँखों की वो चमक धीमी पड़ गई। उन्होंने रेत को अपनी उंगलियों में कस कर भींचा और कुछ देर चुप रही, जैसे वो कुछ सोचने की कोशिश कर रही हो। दूर समुद्र की लहरों की आवाज़ आ रही थी और सन्नाटे में उनकी भारी सांसें साफ सुनाई दे रही थी।
फिर अचानक, उन्होंने बड़ी हिचकिचाहट के साथ मेरी तरफ देखा। उनकी आवाज़ धीमी और कांपती हुई थी, “गोलू… मैंने कहीं पढ़ा था कि… कि तुम्हारा रस भी इस जलन में आराम दिला सकता है। क्या… क्या तुम मुझ पर अपना पानी निकाल सकते हो?”
उनकी ये बात सुन कर मेरे होश उड़ गए। मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो इस खुले बीच पर ऐसा कुछ कहेंगी। मैं बस उन्हें एक टक देखता रह गया। वो अपनी नज़रें चुरा रही थी, उनके चेहरे पर शर्म के साथ-साथ एक अजीब सी उम्मीद थी कि मैं उनकी बात मान लूँगा।
मैंने अपना लंड अपने हाथ में पकड़ा ही था कि उसे रगड़ कर अपना पानी निकालने की कोशिश करूँ, लेकिन तभी वो तेज़ी से खिसक कर और मेरे करीब आ गई। उनके शरीर की गर्माहट सीधे मुझ तक पहुँच रही थी। उन्होंने मेरा हाथ धीरे से हटा दिया और मेरी आँखों में देखते हुए बोली, “नहीं गोलू, मैं करूँगी।”
इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, उन्होंने अपने होंठ मेरे लंड के आगे वाले हिस्से पर रखे और उसे चूमना शुरू कर दिया। उनके होंठों का वो नर्म स्पर्श और उनकी गर्म सांसें सीधे मेरे दिमाग पर असर कर रही थी। रेत पर खड़े-खड़े मेरा शरीर एक झटके से तना गया। उनकी वो हरकत बिल्कुल उम्मीद से परे थी—मैंने कभी नहीं सोचा था कि बीच के किनारे वो मेरे साथ इस तरह पेश आएंगी।
वो अपने होंठों से मेरे लंड को साफ करने लगीं। उनकी जीभ की एक-एक हरकत मुझे पागल कर रही थी। उनकी जीभ का वो गीलापन और उनके नर्म होंठों का अहसास मेरे लंड पर किसी जादुई अहसास की तरह था। समुद्र की लहरों के शोर में, मैं खड़ा-खड़ा बस उनकी इन हरकतों में पूरी तरह खो गया था।
वो धीरे-धीरे अपना मुंह और खोलने लगी। मैं बस उन्हें देख रहा था कि कैसे उन्होंने मेरा पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया। उनके मुंह की वो गर्माहट और उनके होंठों की पकड़ इतनी जबरदस्त थी कि मेरी सांसें अटक गई। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गया था। उनके गले के अंदर मेरे लंड का जाना और उनका उसे चूसना, सब कुछ इतना असली और तीव्र था कि मैंने अपने हाथों को उनके बालों में फंसा लिया और उन्हें और अपने करीब खींचने लगा।
वह धीरे-धीरे मेरा लंड अपने मुंह में लेती और फिर उसे वापस बाहर निकालती, जिससे उनकी जीभ की लस मेरे लंड पर एक चमक सी छोड़ जाती। उनके मुंह की जबरदस्त गर्माहट और होंठों की कसावट मुझे पागल कर रही थी। वह रुक-रुक कर अपने होंठों से उसे सहला रही थी। हर बार जब वह अपनी जीभ की नोक से उसे छूती, तो मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती।
मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थी और बस उनके सिर के दबाव को महसूस कर रहा था। वह बिल्कुल भी जल्दी नहीं कर रही थी, मानो वो जानती थी कि मुझे किस तरह तड़पाना है। उनकी वो मेहनत और उनके मुंह के अंदर की गहराई मुझे अपनी हदों के पार ले जा रही थी। मैंने अपने हाथों से उनके बालों को और जोर से जकड़ लिया और उन्हें अपने पास खींचने लगा, ताकि वो मुझे और भी गहराई से महसूस कर सकें।
जैसे ही मैंने उन्हें थोड़ा और जोर से खींचा, उन्होंने भी अपना तरीका बदल लिया। वो धीरे से ऊपर की ओर देखती हुई मुस्कुराई और फिर एक अजीब सी बेताबी के साथ उन्होंने अपनी गति बढ़ा दी। अब वो धीरे-धीरे नहीं, बल्कि बहुत तेज़ी से अपना मुंह चलाने लगी। उनके होंठ और जीभ इतनी फुर्ती से मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रहे थे कि मेरी सांसे उखड़ने लगी। वो एक लय में काम कर रही थी—उनका सिर किसी मशीन की तरह तेज़ रफ्तार से चलने लगा था।
उनके मुंह के अंदर की हलचल अब और भी ज्यादा सख्त और गरम महसूस हो रही थी। वो मेरे लंड को अपनी जीभ से इस तरह रगड़ रही थी कि मेरा शरीर झटके लेने लगा। हर एक झटके के साथ, उनके गले से निकलने वाली आवाज़ें साफ़ सुनाई दे रही थी।
उनकी तेज़ रफ़्तार और उनके मुंह की वो जबरदस्त गरमाहट मुझे बर्दाश्त की आखिरी हद तक ले आई थी। मेरी धड़कने अब मेरे कानों में साफ़ सुनाई दे रही थी और मेरा पूरा शरीर तनाव से कांप रहा था। मैंने अपना एक हाथ उनके कंधे पर रखा और उन्हें हल्का सा थामते हुए हकला कर कहा, “दीदी… बस… मैं… मैं अब छूटने वाला हूँ!”
उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपनी गति इतनी बढ़ा दी कि मुझे लगा मेरा दम निकल जाएगा। उनके मुंह की वो जबरदस्त हलचल और उनकी जीभ की फुर्ती ने मुझे रोक पाना नामुमकिन कर दिया।
कुछ ही सेकंड्स में, मेरा शरीर झटके लेने लगा और सफेद पानी की पहली कुछ बूंदें सीधे उनके मुंह के अंदर चली गई। मैंने तुरंत अपना लंड उनके मुंह से बाहर निकाला और अपना रुख उनके सीने की तरफ मोड़ दिया। बाकी का ‘सफेद पानी’ उनके स्तनों पर फैल गया। उन्होंने फौरन अपने हाथों का इस्तेमाल किया और उस सफेद पानी को अपने स्तनों पर पूरी तरह मलना शुरू कर दिया। उनकी उंगलियां अब पूरी तरह से उस सफेद पानी से लथपथ थी। वो बड़े चाव से अपने स्तनों को रगड़ रही थी।
जब मेरे सफेद पानी से उनका पूरा सीना भर गया था। उन्होंने एक पल के लिए नीचे देखा, जहाँ वो चमक रहा था। फिर, उन्होंने बिना कोई देरी किए अपनी उन उंगलियों को अपने मुंह में डाल लिया जो पूरी तरह से उस ‘सफेद पानी’ से सनी हुई थी। वो बड़ी बेताबी से अपनी उंगलियों को चूसने लगी, मानो वो उस स्वाद को पूरी तरह चखना चाहती हों। एक-एक करके उन्होंने अपनी उंगलियों को साफ किया।
थोड़ी देर बाद, जब उन्होंने खुद को पूरा साफ कर लिया, तो वो सीधे खड़ी हो गई। उनकी सांसें अभी भी तेज़ थी, लेकिन उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। उन्होंने मेरी आँखों में देखा, हल्का सा मुस्कुराते हुए मेरा हाथ पकड़ लिया और बहुत प्यार से बोली, “थैंक यू, गोलू।”
उस पल के बाद, वो बिना कुछ कहे वापस समुद्र के पानी में उतर गई। वो करीब एक घंटे तक लहरों के बीच तैरती रही। मैं किनारे पर ही बैठ कर उन्हें देखता रहा। धीरे-धीरे सूरज ढलने लगा और आसमान का रंग नारंगी-लाल होने लगा। शाम गहराने लगी थी, तो वो पानी से बाहर आई। उन्होंने अपने पूरे कपड़े पहने और हम वापस होटल की तरफ चल दिए।