पिछला भाग पढ़े:- मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-6
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
छह पेग पीने के बाद कुलभूषण ने सातवां पेग बनाया और उठ गया। कुलभूषण ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला, तू भी तो आजा मेरी जान।”
“मामा जी ये सुन कर मुस्कुरा दिए।”
“हम दोनों अंदर आ गए। कुलभूषण ने सातवां पेग पिया नहीं और गिलास मेज पर रख दिया। कुलभूषण ने अपने कपड़े उतार दिए और बोला, “आजा किरण आज मस्त मजा देदे।”
“मैंने हंसते हुए कहा, “कुलभूषण साले, मैं तो चुदाई के लिए हमेशा ही तैयार रहती हूं। आजा चोद मुझे, दे मजा और ले मजा।”
“कुलभूषण भी हंस दिया।”
“मैंने भी कपड़े उतार दिए और जा कर बिस्तर पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर बोली, “आजा कुलभूषण, मस्त चुदाई कर आज, दो दिन हो गए साले तेरा लंड नही गया मेरी फुद्दी में।”
“इतना सुनना ही था कि कुलभूषण आया और मेरे ऊपर लेट कर एक ही बार में लंड मेरी फुद्दी में डाल कर मेरी चुदाई शुरू कर दी। पहले तो मुझे महसूस हुआ कि कुलभूषण का लंड उतना सख्त नहीं था जितना हुआ करता था, मैंने सोचा हो सकता है ज्यादा शराब के वजह से ऐसा हो गया हो, लेकिन जल्दी ही कुलभूषण के लंड की सख्ती बढ़ गयी और फुद्दी में मस्त रगड़े लगने लगे।”
“कुलभूषण की चुदाई भी उस वक़्त कुछ अलग सी थी। कुलभूषण धक्के तो मस्त लगा ही रहा था, साथ ही बोलता भी जा रहा था, “मादरचोद किरण तेरे बिना में इतने दिन फॉरेन में रहूंगा कैसे। अगर मेरा बस चलता तो में जाता ही ना। मैं तो तुझे चोदे बिना एक दिन भी नही रहा।”
“कुलभूषण मस्त चुदाई कर रहा था। ज्यादातर मुझे दो बार मजा आता था और दूसरे मजे के साथ ही कुलभूषण का लंड भी पानी छोड़ देता था। मगर उस दिन ना तो कुलभूषण के लंड की सख्ती ही कम हो रही थी और ना ही कुलभूषण का लंड पानी ही छोड़ रहा था। मुझे मजे पर मजा आता जा रहा था और कुलभूषण रुक ही नहीं रहा था। कुलभूषण की इस जोरदार चुदाई से मैं तो अब थक से भी गयी थी।”
“आखिर मैंने ही कहा, “क्या हुआ कुलभूषण मजा अटक गया क्या? निकल नहीं रहा लंड का पानी? चूस कर निकाल दूं?”
“ये सुनते ही कुलभूषण ने लंड मेरी फुद्दी में से निकाला और बिस्तर पर लेट गया और बोला, “आजा किरण, आज चूस कर ही निकाल दे। साली तेरी तो चुसाई में भी जादू है।”
“कुलभूषण के इस बात पर मुझे हंसी आ गयी। मैं भी उठी और बैठ कुलभूषण का लंड चूसने लगी। ये मेरे लिए कोइ नई बात नहीं थी। पहले भी कई बार ऐसा हो चुका था। ड्रिंक ज्यादा होने के कारण लंड का मजा अटक जाता था और मैं लंड चूस कर कुलभूषण को मजा देती थी।”
“लेकिन उस दिन तो जैसे कुलभूषण का मजा कुछ ज्यादा ही अटक गया था। आधा घंटा हो गया था मुझे कुलभूषण का लंड चूसते हुए। कुलभूषण का लंड चूसते-चूसते मैं लंड की मुट्ठ भी मार रही थी। ना तो कुलभूषण का लंड ढीला ही हो रहा था ना ही पानी छोड़ रहा था। उधर मेरी फुद्दी में मामा जी के मोटे लंड की ख्यालों से ही आग लगी पड़ी थी।”
“लेकिन कुलभूषण था तो मेरा घरवाला ही। पूरी जिंदगी तो मैंने इसी के साथ रहना था, इसी का लंड लेना था फुद्दी में, इसी से चुदाई करवानी थी।”
“मामा जी के साथ तो पहली चुदाई अनजाने में हो गयी और उसके बाद मामा जी के मोटे लम्बे लंड को मैं छोड़ ही नहीं पायी। उधर मामा जी को भी बैठे बिठाये एक और नई फुद्दी चोदने के लिए मिल रही थी और वो भी एक नई फुद्दी की चुदाई के मजे ले रहे थे।”
“उस रात भी मैं मामा जी का मोटा लंड एक बार फुद्दी में डलवाना चाहती थी, मगर जिस तरह से कुलभूषण का मजा अटका हुआ था मैंने उस रात मामा जी के पास जाने का इरादा छोड़ दिया और कुलभूषण को ही मजा देने लगी। जब बहुत चूसने के बाद भी कुलभूषण के लंड ने पानी नहीं छोड़ा तो मैं कुलभूषण के लंड पर बैठ गयी, और पूरा लंड फुद्दी में ले लिया।”
“मैं ऊपर नीचे होते हुए कुछ भी बोलने लगी, “कुलभूषण साले कैसा लंड है तेरा मादरचोद, ना बैठता है ना पानी छोड़ता है। कुलभूषण नशे में था मगर मैं तो होश में थी। मैं जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। आखिर को मेरी मेहनत रंग लाई और कुलभूषण के चूतड़ ऊपर नीचे होने लगे।
कुलभूषण बोलने लगा, “आह मेरे किरण निकलने वाला है मेरा, आह निकलेगा अब, आह ये निकला और कुलभूषण के लंड से ढेर सारा गरम-गरम पानी मेरी फुद्दी में चला गया।”
“एक बार मजा आने के बाद कुलभूषण का लंड ढीला हो गया।”
“मैं कुछ देर ऐसे ही कुलभूषण के ऊपर बैठी रही। फिर मैं जरा सी ऊपर हुई और कुलभूषण के लंड का पानी मेरी फुद्दी में से निकल कर कुलभूषण के लंड पर फ़ैल गया। मैं कुलभूषण के ऊपर से उतर गई और चाट चाट कर कुलभूषण का लंड पूरा साफ़ कर दिया।”
“कुलभूषण उठा और झूमता-झूमता बाहर बाथरूम की तरफ चल पड़ा। मैं भी नंगी ही उसके पीछे-पीछे चल पडी ये सोच कर के ये चूतिया नशे में कहीं गिर ही ना जाए।बाथरूम के अंदर भी मैं उसके साथ ही गई। पेशाब करवा कर मैंने कुलभूषण को कमरे में ला कर बिस्तर पर बिठा दिया।”
“कुलभूषण ने मेज से शराब का गिलास उठाया मगर बिना पिए ही गिलास मुझे पकड़ा दिया और बिस्तर पर ढेर हो गया। मैंने गिलास वापस मेज पर रख दिया। मैं समझ गयी कुलभूषण नशे में टल्ली हो चुका है और अब सुबह से पहले नहीं उठने वाला।”
“कुलभूषण मुझे चुदाई का पूरा मजा दे चुका था मगर आंखों के सामने दूसरे कमरे में लेटे मामा जी का लंड घूम रहा था। मेरी फुद्दी मामा जी का मोटा लंड अंदर लेने के लिए फड़क रही थी।”
“मैं कुछ देर वहीं कुलभूषण की बगल में लेटी रही। एक बार कुलभूषण को हिलाया, मगर कुलभूषण गहरी नींद में था। मैं समझ गई कि कुलभूषण अब सुबह ही उठेगा।”
“कुलभूषण से चुदवाने के बाद मैंने कपड़े तो अभी तक पहने ही नहीं थे मैं नंगी ही मामा जी के कमरे में चली गयी।”
“मामा जी भी नंगे ही लेटे हुए थे और मामा जी का लंड सीधा खड़ा था। मुझे देख मामा जी ने कहा, “किरण क्या हुआ बड़ा टाइम लग गया? मैं तो तेरी फुद्दी के ख्यालों में ही था, देखो मेरे लंड की हालत। तुम कुछ देर और ना आती तो मैं तो तुम्हारी फुद्दी का घ्यान करके मुट्ठ मार कर ही मजा निकालने वाला था।”
“मैं मामा जी के पास ही बैठ गयी और मामा जी का लंड पकड़ कर बोली, “मामा जी आती कैसे ना आपका लंड जब तक अच्छे से मेरी फुद्दी खोल कर मेरी फुद्दी की रगड़ाई नही करेगा मुझे नींद कैसे आएगी।”
“मामा जी ने पूछा, “मगर मेरी जान इतना टाइम कैसे लग गया? क्या कुलभूषण सो नहीं रहा था?”
“मैंने कहा, “नहीं मामा जी, कुलभूषण की और मेरी आज मस्त जम कर चुदाई हुई है।” इसके बाद मैंने मामा जी को कुलभूषण के साथ हुई चुदाई की पूरी कहानी सुना दी।”
“मामा जी बोले, “कमाल है इतनी पीने के बाद भी ऐसी चुदाई कर लेता है कुलभूषण?”
“मैंने मामा जी के बात पर कोइ ध्यान नहीं दिया और मैं झुकी और मामा जी का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।
“कुछ देर लंड चूसने के बाद मैं उठी और बोली, “चलो मामा जी आ जाओ। आज पीछे से डालो फुद्दी में – पीछे से चोदो आज। आपसे पीछे से चुदवाने में बहुत मजा आता है।”
“मामा जी खड़े हो गए और मैं सोफे पर उल्टी हो कर चूतड़ उठा कर लेट गयी, मामा जी का लंड फुद्दी में लेने के लिए।”
“मामा जी मेरी पीछे आये, लंड मेरी फुद्दी में ऊपर नीचे किया, लंड को फुद्दी के छेद पर अटकाया, मेरी कमर पकड़ी और एक ही झटके में लंड पूरा फुद्दी मैं बिठा दिया। कुलभूषण के लंड का पानी अभी फुद्दी में ही था। चिकनी हुई पड़ी फुद्दी में लंड फिसल कर अंदर चला गया।”
मजा ही आ गया जिस तरह से एक झटके से लंड मेरी फुद्दी में डाला था और लंड मेरी फुद्दी को फैलाता हुआ जड़ तक फुद्दी में बैठ गया। लंड सच में ही फुद्दी के आख़री हिस्से को छू रहा था।”
“मैंने सर पीछे करके कहा, “मामा जी ये तो सच में ही जब आप पीछे से लंड झटके के साथ फुद्दी में डालते हो तो लंड फुद्दी को चौड़ा करता हुआ अंदर जाता है और फुद्दी के अंदर किसी चीज़ को जा कर छूता है?”
“वैसे किरण मैं एक बात बताऊं, लड़की को पीछे से लंड फुद्दी मैं डलवाने में वैसे ही बहुत मजा आता है। पूरा लंड फुद्दी के अंदर तक जाता है। मैं तो जब भी शैली और नाती को तो चोदता हूं, वो दोनों भी एक बार तो पीछे से लंड डलवाती ही डलवाती हैं।”
“मामा जी ने मुझे चोदना शुरू किया और इस बार भी वही हुआ। चार बार मेरी फुद्दी पानी छोड़ गयी तब जा कर मामा जी के लंड का गरम-गरम शहद मेरी फुद्दी में निकला। जैसे ही मामा जी के लंड का पानी निकलना शुरू हुआ, मामा जी जोर-जोर से लंड के धक्के लगाने लगे। तभी मामा जी जोर से चिल्लाये, “आह किरण निकल गया, मजा आ गया।”
“मामा जी रुक गए। जैसे ही मामा जी का लंड ढीला हुआ, मामा जी ने लंड फुद्दी में से बाहर निकाला और वहीं सोफे पर बैठ गए। मैं भी उठी और झुक कर मामा जी का लंड चाटने लगी।”
“मैं मामा जी का लंड चाट-चाट कर साफ़ करने के बाद मैं उठी और बोली, “चलती हूं मामा जी कल कुलभूषण की दिन की शिफ्ट है, सुबह जल्दी उठना पड़ेगा। कल दिन में मस्त चुदाई करेंगे, कल तो काम वाली ने भी नहीं आना।”
“मेरे इतना कहते ही मामा जी ने मुझे पकड़ कर उठाया और मेरे होंठ अपने होठों में लेते हुए बोले, “ठीक है मेरी जान, बस जाने से पहले लंड एक बार और थोड़ा सा चूस ले।”
“मैं झुकी और मामा जी का लंड का लंड थोड़ा चूसने के बाद उठी और बोले, “बस मामा जी अब और नहीं, अगर फिर से कहीं फुद्दी गरम हो गयी तो डेढ़ दो घंटे चुदाई में और निकल जायेंगे। अब बाकी का काम कल दिन में करेंगे।”
“मामा जी ने मेरी फुद्दी दबाई और बोले, “ठीक है मेरी जान, पर कल पूरा दिन रगडूंगा तुझे – पूरा दिन। पूरा मजा लूंगा तेरी टाइट फुद्दी चोदने का।”
“मैं जाते-जाते पलटी और बोली, “मामा जी मैंने कब मना किया – जितना चाहो उतना चोदना, मुझे भी आपका लंड फुद्दी में ले कर बड़ा मजा आता है। आपका लंड गांड में नहीं जाता, नहीं तो मैं अब तक गांड भी चुदवा चुकी होती आपसे।”
“मामा जी बोले, “कोइ बात नहीं किरण तेरी गांड चुदाई की इच्छा भी पूरी हो जाएगी चैल में।”
“मैंने मामा जी के इस बात पर कोइ ख़ास ध्यान नहीं दिया और अपने कमरे में चली गयी।”
“अगली सुबह साढ़े आठ बजे कुलभूषण फैक्ट्री के लिए निकल गया। मामा जी कुलभूषण के सामने लुधियाना की कपड़े की होलसेल मार्किट में जाने के तैयारी कर रहे थे – जबकि उनको उस दिन मुझे चोदने के अलावा कोइ काम ही नहीं करना था। शायद कुलभूषण को दिखाने के लिए तैयारी कर रहे थे।”
“कुलभूषण गया और मैंने बाहर के दरवाजे की अंदर से कुंडी लगा दी, और आते ही कपड़े उतार कर बोली, “आ जाओ मामा जी, बोलो कैसे पीछे से या ऊपर लेट कर?”
मामा जी बोले, “किरण एक बार पीछे से लंड ले ले उसके बाद फिर तेरी मर्ज़ी चलेगी – जैसे तू कहेगी वैसे फुद्दी मरूंगा।”
“जैसे तू कहेगी वैसे फुद्दी मरूंगा। मेरी हंसी निकल गयी।”
“मामा जी की बात पर मैं मन ही मन हंस दी और जा कर मैं चूतड़ उठा कर उल्टी हो कर सोफे पर लेट गयी हुए बोली, “लो मामा जी ये रही मेरी फुद्दी और साथ ही मेरी गांड – डालो जहां डालना है। गांड फाड़नी हो तो फाड़ लो आज। आज मैं पूरी चुदाई की मूड में हूं।”
बीवियों की अदला बदली।
“मामा जी बोले तो कुछ नहीं, एक बार मेरी गांड का छेद चाटा, मेरे फुद्दी के छेद पर लंड रखा और अगले ही पल मामा जी का लम्बा मोटा लौड़ा मेरी फुद्दी में अंदर था। पूरे एक घंटा चोदा मामा जी ने मुझे।”
“मेरी पूरी तसल्ली हो चुकी थी। हम बिस्तर पर लेट गए। मामा जी का लंड खूंटे की तरह खड़ा था।”
“लेटे लेटे मुझे मामा जी की वो वाली बात याद आ गई जब मामा जी ने कहा था किरण एक ज़बरदस्त आईडिया है मेरे पास, मजा आ जाएगा तुम्हें चैल में – ऐसा मजा कि पूरी ज़िंदगी याद रहेगा तुम्हें।
मैंने मामा जी का लंड पकड़ा और से पूछा, “मामा जी, आप जो कह रहे थे किरण तुम चैल आओगी तो चैल में हम कुछ और भी प्रोग्राम बनाएंगे – ऐसा प्रोग्राम कि मजा आ जाएगा तुम्हें – ऐसा मजा की पूरी ज़िंदगी याद रहेगा तुम्हें, कैसे प्रोग्राम की बात कर रहे थे आप मामा जी?”
मामाजी जी बोले, “अरे किरण अभी क्यों, एक बार पहुंच तो जाओ चैल, फिर अपने आप पता चल जाएगा।”
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