बाप बेटी की चुदाई – मालिनी अवस्थी की ज़ुबानी-24

पिछला भाग पढ़े:- बाप बेटी की चुदाई – मालिनी अवस्थी की ज़ुबानी-23

संदीप इलास्टिक की निक्कर वाला सेक्स टॉय दे गया था। इसमें सामने की तरफ सात इंच का लंड लगा हुआ था। अंदर पीछे की तरफ कोइ साढ़े छह इंच का लंड लगा हुआ था। इसको पहन कर लड़की सामने वाले लंड दूसरी लड़की चुदाई करती थी, और अंदर वाला लंड अपनी गांड में डाल लेती थी। ऐसे चुदाई में दोनों लड़कियों को मजा आता था। डाक्टर मालिनी और रागिनी दोनों ने इस नए खिलौने से बारी-बारी से एक-दूसरे की चुदाई की थी। अब आगे।

“जब मैं पीछे से रागनी की चुदाई कर रही थी, तो रागिनी ने चूत रगड़ाई के साथ-साथ गांड में भी लंड लिया। रागिनी की गांड में लंड फिसलता हुआ अंदर तक चला गया”।

“रागिनी ने बताया ही था कि उसको गांड चुदवाने का भी शौक है और आलोक से अक्सर गांड चुदवाया करती है, लगातार की गांड चुदाई से रागिनी की गांड का छेद थोड़ा खुल चुका था”।

“मैं कभी रागिनी की गांड में और कभी चूत में लंड डाल कर जोर-जोर से धक्के लगा रही थी। उधर रागिनी भी खूब चूतड़ घुमा झटका रही थी”।

“एक बात तो थी, इस लंड से पीछे से चुदाई करने का ज्यादा मजा आ रहा था। कम से कम लंड अंदर-बाहर होता तो दिखाई दे रहा था। और पीछे गांड में गया हुआ लंड तो हर धक्के के साथ मजा दे ही रहा था”।

“असल में ऊपर लेट कर चोदने वाली औरत जब इस रबड़ के लंड को नीचे लेटी हुई औरत की चूत में डालती है, तो उसे लंड चूत के अंदर जाने का पता ही नहीं चलता। जबकि जब वही औरत दूसरी औरत को पीछे से चोद रही होती है। उसे लंड अंदर बाहर होता हुआ साफ़ दिखाई देता है, असली लंड की तरह”।

“खैर इस एक दूसरी की चुदाई करते हुए, दुनिया भर की चूत चुदाई फुद्दी भोसड़ी जैसी बातें बोलते-बोलते पता नहीं कितनी बार झड़ गये हम दोनों”।

“रागिनी तो नीचे लेटी हुई, और पीछे से मस्त चुदाई करवा रही थी। उसे तो पता नहीं कोई थकान हुई थी या नहीं हुई थी, मगर मैं जो आलोक बना हुआ आधे घंटे से उसकी चुदाई कर रहा था, धक्के लगाते लगाते मेरी कमर का बैंड बज चुका था”।

“आखिर मैंने रागिनी से कह ही दिया, “बस रागिनी अब और धक्के नहीं लग रहे। थक गया मैं। तेरी चूत ठंडी हुई या अभी भी गरम ही है”?

“रागिनी बोली, “आलोक चूत तो मेरी कब की पानी छोड़ कर ठंडी हो चुकी है, मगर तुम चोदना बंद ही नहीं कर रहे हो। तुम्हें मजा देने के चक्कर में चूतड़ घुमाते-घुमाते मेरी कमर भी दुखने लग गयी है”।

“मैंने रागिनी की गांड में से लंड निकाला और हम आस-पास ही लेट गयी”।

“रागिनी ही बोली, “मालिनी जी एक बात है, चुदाई में इस गंदी बकवास-बाजी का मजा तो बहुत आता है। मुझे तो बड़ा मजा आया”।

मैंने कहा, “सही बोल रही हो रागिनी। मुझे तो बातें सोच-सोच कर अभी भी मस्ती आ रही है”।

“मैंने लंड अपनी गांड में से निकाल कर निक्कर उतार ली और हम दोनों निढाल हो कर अगल-बगल ही लेट गयी”।

“थोड़ी देर के बाद हम दोनों उठी और बिना कपड़ों के ही सोफे पर जा कर बैठ गयी”।

“कुछ चुप रहने के बाद रागिनी बोली, “मालिनी जी मैंने तो आपसे वो आप जैसे खिलौने मंगवाने की बात करने वाली थी, मगर तो मुझे तो ये वाला भी बहुत बढ़िया मजा देने वाला लगा है”।

“जब आप संदीप से वो तीनों मंगवाएंगी तो साथ ही ये ऐसा वाला एक मंगवा देना मुझे। इससे तो सच में ही बड़ा मजा आता है। मैं प्रवीणा के साथ भी इस तरह की बातें बोलते-बोलते चुदाई करूंगी”।

“रागिनी बोल रही थी, “हस्पताल में कई भड़वे डाक्टर हैं जो हमे चोदते हुए यही कुछ बोलते रहते हैं। उन्हीं में से कोइ डाक्टर मैं बन जाऊंगी और प्रवीणा को चोदूंगी”।

“ये सब बोल कर रागिनी थोड़ा चुप हुई फिर बोली, “मलिनी जी आप मुझे संदीप का पता ही बता दीजिये, मैं ही जा कर ले लूंगी। बस आप एक फोन कर देना उसे। इसे बहाने में संदीप को देख भी लूंगी और अगर जम गया तो”।

“रागिनी ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी, मगर मैं समझ गयी चूत खोल कर लेटने वाली बात ही थी”।

“मैंने कहा, “रागिनी ये वाला तो तुम यही ले जाओ। मैंने दो क्या करने हैं। दूसरे खिलौनों के लिए मैं संदीप को फोन कर दूंगी, तुम मिल भी लेना और जांच-परख भी कर लेना। अगर चूत खोल कर उसके सामने लेटने का प्रोग्राम बन जाए, तो वो भी बना लेना”। ये कहते हुए में हंस दी।

“रागिनी भी हंसते हुए बोली, “अरे नहीं मालिनी जी वो तो मैं मजाक में कह रही थी। संदीप के शोरूम में कहां चुदाई-वुदाई का चक्कर चलेगा”।

“मैंने रागिनी के हाथ पर हाथ रख कर कहा, “ऐसी बात नहीं है रागिनी। जिस तरह संदीप यहां आ कर मेरी चूत की तरफ घूरता रहता है, मुझे तो पक्का चूत का पिस्सू लगता है”।

“रागिनी मेरी और देख रही थी”।

मैंने ही आगे कहा, “रागिनी एक बात बताओ, तुमने कभी घास काटने वाला घसियारा देखा है”?

“रागिनी हैरानी से मेरी तरफ देखते हुए हां में सर हिला दिया”।

“मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “उस घसियारे की कमर पर एक कपड़ा बंधा होता है जिसे कमरबंद कहते हैं। वो घसियारा उस कमरबंद में हर समय घास काटने वाला औजार रखता है। इस घास काटने वाले औजार को अंग्रेजी में सिकल, हिंदी में हंसिया या हंसली और पंजाबी में दरांती बोलते हैं। अब बताओ हर समय घास काटने का औजार कमरबंद में लटकाने की क्या जरूरत है”?

“रागिनी ने इस अंदाज में मेरी तरफ देखा जैसे कह रही हो आप ही बताईये”।

“मैंने ही अपनी बात पूरी की, “वो इसलिए हर समय हंसिया या हंसली अपने पास रखता है कि क्या पता कब और कहां घास मिल जाये और उसे घास कटनी पड़ जाये”।

रागिनी बोली, “मैं समझ गयी मालिनी जी। घसियारे की तरह संदीप ने भी चुदाई का कुछ ऐसा ही इंतजाम करके रखा हुआ होगा। क्या पता कब कोई लड़की चुदाई करवाने आ जाये”।

“मैंने ही फिर बात पूरी की। मैंने कहा, “बिल्कुल रागिनी ठीक पकड़ा है तुमने। रागिनी ये संदीप जैसे चुदाई के शौक़ीन लोग भी उस घसियारे की तरह अपना पूरा इंतजाम करके रखते हैं, क्या पता कब कोइ लड़की चूत खोल कर सामने लेट जाए और चुदाई करनी पड़ जाए”।

“मेरी इस बात पर रागिनी भी हंस दी”।

“फिर कुछ रुक कर मैंने रागिनी से कहा, “एक बात और रागिनी, “ये प्रवीणा के चक्कर में अलोक से चुदाई मत भूल जाना”।

“रागिनी बोली, “अरे मालिनी जी, ऐसा कैसे हो सकता है? बार-बार एक ही गलती नहीं होगी। वैसे भी आलोक आज-कल हर दूसरे तीसरे दिन मेरी चुदाई कर रहा है। कभी चूत रगड़ता है तो कभी गांड”।

“ये सेक्स टॉयज तो हस्पताल में दूसरी नर्सों के साथ मस्ती के लिए रहेंगे और ये निक्कर वाला खिलौना तो हस्पताल में ख़ास प्रवीणा के साथ मस्ती के लिए रहेगा”।

“रागिनी कि आलोक की गांड रगड़ने वाली बात सुन कर मेरी अपनी गांड में कुछ-कुछ हुआ और मैंने अपने चूतड़ सोफे पर इधर-उधर किये”।

“रागिनी ने भी मुझे सोफे पर चूतड़ हिलाते हुए देखा, मगर बोली कुछ नहीं ”।

“कुछ देर रागिनी बैठी रही। फिर हम दोनों उठी और कपड़े पहन कर आगे वाले क्लिनिक में आ गयी। मैंने मानसी के साथ हुई सारी बात रागिनी को बता दी सिवाए इसके कि मानसी और मैं भी चूत रगड़ाई के मजे ले चुके हैं और मानसी मुझे अच्छी लगने लगी है”।

“रागिनी को मैंने रजत के बारे में भी सारा कुछ बता दिया और ये भी बता दिया कि रजत के पापा आलोक को जानते हैं”।

रागिनी ये सुन कर बड़ी खुश हुई और बोली, ”अरे मालिनी जे ये तो बड़ी अच्छी बात है। रजत को तो मैं भी जानती हूं। CA कर रहा है। मानसी से दो साल आगे है”।

“अगर मानसी की मर्जी हुई तो CA पूरी होते ही उनकी शादी भी तय कर देंगे। फिर मानसी के पास अपने मन-पसंद का लंड होगा, मन-पसंद की चुदाई”।

“मैंने कहा, “रागिनी शादी ब्याह अभी दूर की बात है। इतना मत सोचो। आज कल के लड़के-लड़कियां जितनी जल्दी दोस्ती करते हैं उतनी जल्दी दोस्ती तोड़ भी देते हैं। बस आज का सोचो कि मानसी खुश रहे और अलोक से उसे चुदाई के जरूरत ना पड़े”।

“रागिनी कुछ सोचते हुए बोली, “ये बात तो आपकी सोलह आने सही है। मानसी को ही उसके भविष्य का फैसला लेने देते है”।

“रागिनी, थोड़ा मुस्कुरा कर बोली, “आलोक से चुदाई का फैसला भी तो उसी का था। अच्छा मालिनी जी अलोक को कब भेजूं आपके पास? उसे भी तो मानसी के साथ हुई बात-चीत बतानी होगी आपको”।

“ये बोलते हुई रागिनी ने अपनी चूत तो खुजाई ही, साथ ही खड़ी हो कर अपने चूतड़ों में से साड़ी निकालने वाला एक्शन भी कर दिया, और साथ ही हंस भी दी”।

मैंने हंस कर कहा, “रागिनी, तुम बड़ी शरारती हो। अच्छा ऐसा करना, आलोक को बोलना मुझे फोन करे, फिर देखते हैं कब का प्रोग्राम बनता है”।

रागिनी मेरे नजदीक आ कर बोली, जैसे बड़े राज की बात बताने जा रही हो, “मालिनी जी अलोक का लंड इस बार भी गांड में जरूर लेना। लम्बा लंड गांड में बड़ा मजा देता है”।

“अब मैंने रागिनी गाल पर हल्की चपत लगाई और बोली, “मुझे मालूम है। अच्छा रागिनी चल अब मैं फोन करके तेरे लंडों का जुगाड़ कर दूं”।

“मैंने रागिनी के सामने ही मोबाइल फोन उठा और शोरूम के मालिक संदीप सोलंकी को फोन मिला दिया, और फोन को स्पीकर पर डाल दिया, जिससे रागिनी भी पूरी बातें सुन सके”।

“मैंने फोन मिलाया और जैसे ही संदीप ने फोन उठा कर हेलो कहा, मैंने संदीप की उसकी आवाज पहचान कर कहा, “हेलो संदीप, मालिनी बोल रही हूं”।

“संदीप हंसते हुए बोला, “आज तो कमाल हो गया। अगर में कहीं दस करोड़ की लॉटरी निकलने की बात सोच रहा होता तो मेरी लॉटरी भी निकल जानी थी। मैडम मैं आपके बारे में ही सोच रहा था”।

“मैंने रागिनी की तरफ देखा, संदीप की बात से वो भी मुस्कुरा रही थी”।

“मैंने हंसते हुए कहा, “मेरे बारे में क्या सोच रहा था संदीप, कुछ ख़ास था क्या”?

संदीप बोला, “नहीं जी बस ऐसे ही, एक नए मॉडल वाला टॉय आया था सोचा आपको बता दूं। पहली आप बताईये आपने आज कैसे याद कर लिया”?

“नए मॉडल की बात सुन कर मेरे चूत में झुरझुरी सी हुई। कैसे ही मैंने अपनी चूत पर हाथ ऊपर-नीचे किया, रागिनी ने भी अपनी चूत को खुजलाया”।

“मैंने संदीप से कहा, “नए मॉडल के बारे में बताने से पहले मेरी बात सुन। वो खिलौनों वाला एक सेट चाहिए था, जैसा मेरे पास है”।

संदीप ने पूछा, “मैडम आपने अपने वाले बदलने हैं?

मैने कहा , मालिनी बोली, “अरे भई संदीप मुझे नहीं, ये मेरी एक मित्र को चाहिये”।

संदीप बोला, “जी अच्छा, ये बताईये कौन से वाले चाहिये। आपके पास तो तीन हैं वो छोटा वाला चूसने वाला, आगे डालने वाला और आगे और पीछे दोनों में डालने वाला”।

मैंने कहा, “हां संदीप वही तीन का सेट। ऊपर वाला, आगे वाला और आगे-पीछे दोनों में जाने वाला, जो तू बता रहा है”।

उस तरफ फिर संदीप ने पूछा, “और साइज़ कौन सा मैडम”?

जिस पर मैंने बोली, “एक मिनट रुक बताती हूं”।

“मैंने फोन को अपने से दूर किया और धीमी आवाज में रागिनी से पूछा, “रागिनी किस साइज के चाहिए। मतलब कितने मोटे और लम्बे”।

रागिनी बोली, “वही मालिनी जो अपने पास है, मोटे वाला। बढ़िया फिट होता है चूत में। वैसे भी मालिनी जी लम्बा लंड तो मेरे पास पहले से ही है, आलोक का”।

“मैंने फिर फोन पर बोली, “वही संदीप जो पिछली से पिछली बार लिए थे दो इंच और साढ़े सात इंच वाले। अब बता क्या नया मॉडल आया है”?

“संदीप बोला, “मैडम इसकी खासियत ये है कि एक तो इसके आगे वाले हिस्से की गोलाई पीछे वाले हिस्से से थोड़ी बड़ी है और इस पर छोटे-छोटे दानों के साथ-साथ ऊपर की सतह पर बारीक सी झिल्ली अलग से लगी हुई है जो थोड़ा सा आगे-पीछे भी होती है”।

“संदीप बोलता जा रहा था, “इसके ऊपर छोटे-छोटे दाने हैं। ये कुछ-कुछ वैसा ही है जैसा मैंने आपको कुछ दिन पहले दिया था। मगर ऊपर झिल्ली लगी हुई है। इसे आगे डालो या पीछे डालो, ये झिल्ली अलग से रगड़े लगाती है। साइज तो शायद इसका वही है मगर आगे का हिस्सा अलग से बड़ा होने के कारण देखने में पहले वालों से कुछ बड़ा लगता है”।

“फिर संदीप कुछ रुक कर बोला, “बड़ी अच्छी रिपोर्ट है मैडम इसकी। मेरे तो लगभग सारे ग्राहक अपने पुराने डिज़ाइन वाले के बदले ये नया वाला ले रहे हैं। मजा आ जाएगा आपको”।

“संदीप उन सेक्स टॉयज कि बात कर रहा था जो मैंने मानसी के लिए मंगवाए थे। आगे के हिस्सा बड़ा होने से संदीप का मतलब था कि लंड के सुपाड़े की गोलाई लंड से बड़ी थी, और उसके ऊपर असली लंड की तरह की झिल्ली थी जो आगे-पीछे भी होती थी, और जब लंड को आगे-पीछे करते थे तो ये झिल्ली चूत में अलग से रगड़ा लगाती थी”।

“संदीप की इस बात पर मैंने ने कहा, “ऐसी बात है क्या? तमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया”?

“संदीप ने कहा, “मैडम इसी लिए तो मैं आपको याद कर रहा था। मैडम आप तो मेरे लिए बहुत ख़ास हैं, जब तक मेरे ग्राहकों के तरफ से किसी खिलौने की पूरी ठीक-ठाक रिपोर्ट ना आ जाये तब तक मैं आपको खिलौना नहीं देता। मैंने बोला ही मैडम आप मेरी लिए बहुत ख़ास है”।

“फिर संदीप थोड़ा रुक कर मुझसे पूछता हुआ बोला, “वर्ना मैडम आप ही बताईये, कभी ऐसा हो सकता है कि ऐसे मजे लेने वाली कोइ नई चीज आये और आप तक ना पहुंचे”?

“फोन तो स्पीकर पर था ही। संदीप के बातें सुन-सुन कर रागिनी हंस भी रही थी, और अपनी चूत भी खुजलाती जा रही थी। हालत तो मेरे भी कुछ ऐसी ही थी। सामने बैठा संदीप तो फिर भी साफ़ बात करते हुए हिचकिचाता था, मगर फोन पर तो कुछ ज्यादा ही साफ़ बोल रहा था”।

मैंने संदीप से कहा, “ठीक है ठीक है संदीप, अब ज्यादा चमचागिरी मत कर और मेरी बात सुन। मेरी दोस्त – रागिनी नाम है उसका – रागिनी मेरी बिल्कुल वैसी ही खास है जैसी ख़ास तू मुझे बता रहा है। जरा बढ़िया से बात-वात करना”।

“ये कहते हुए मैं हंस दी और कहा, “तो ठीक है संदीप रागिनी को एक सेट तीन टॉयज वाला दे देना, इस नए वाले मॉडल के साथ। और एक नया वाले मॉडल वाला मुझे भी दे देना”।

उधर से फिर संदीप बोला, “ठीक है मैडम वो आपके क्लिनिक में ले आऊंगा। मैडम कब आएगी आपकी खासम-खास मित्र”?

“मैंने कहा, “मैं उसे बोल दूंगी। वो आने से पहले तुझे फोन कर लेगी”।

“मैं कभी संदीप के शोरूम में नहीं गयी थी, इसलिए मुझे पता नही था कि संदीप कहां बैठता है। इसलिए मैंने संदीप से पूछा, “संदीप तुम कहां मिलोगे शोरूम में या तुम्हारा अलग से ऑफिस है”?

“संदीप ने हंसते हुए कहां, “मैडम शोरूम में तो दिन में दो-तीन बार ही जाता हूं। अपने बैठने और बाकी के कामों के लिए बढ़िया ऑफिस प्राइवेट ऑफिस बनवाया हुआ है। सब कुछ वहीं से कंट्रोल करता हूं। ऑफिस में हर तरह की सुविधाएं हैं मैडम कोइ कमी नहीं है। ख़ास मेहमानों से तो मैं अपने ऑफिस में मिलता हूं। आप भी कभी दर्शन दीजिये”।

“मैंने संदीप की इस बात का जवाब ना देते हुए कहा, “तो ठीक है संदीप, तुझे फ़ोन करके मेरी फ्रेंड तुम्हारे ऑफिस वो तीनों खिलौने लेने आ जाएगी। फिर से बोल रही हूं मेरी ख़ास मित्र है, जरा ख्याल रखना। और वो मेरे वाला यही क्लिनिक में ले आना”।

संदीप बोला, “अरे मैडम कल ही मैं खुद लेकर आऊंगा”। इतना बोल कर संदीप ने फोन काट दिया।

मैंने सोचा, साला अब आएगा और मेरी चूत को घूरता रहेगा”।

“मैं सोच रही थी अगर ऐसे ही खिलौने बदलते रहे और संदीप आता रहा तो लगता है इसका लंड भी ले कर देखना ही पड़ेगा”।

“फोन बंद करके मैंने रागिनी से कहा, “रागिनी तुमने सारी बातें सुन ली। अब जब टाइम हो फोन करके संदीप के ऑफिस चली जाना”।

“फिर मैंने रागिनी का हाथ पकड़ कर कहा, “और रागिनी अगर संदीप के साथ मीटिंग बढ़िया रहे तो चूत खोल कर लेट जाना”।

“ये कह कर मैं हंस दी, मगर रागिनी थोड़ा सा शर्मा गयी, और बोली, “मालिनी जी मैं तो मजाक कर रही थी”। इसके साथ ही रागिनी ने अपनी चूत एक बार और खुजला दी”।

“रागिनी को मैंने पहली बार शर्माते हुए देखा था”।

“फिर मैंने, रागिनी की टांग पर हाथ मारते हुए कहां, “और अगर संदीप के साथ चुदाई हो जाये तो मुझे भी बताना, कुछ ख़ास है क्या उसकी चुदाई में? अगर कुछ ख़ास हुआ तो मैं भी चूत खोल कर उसके सामने लेट जाऊंगी”।

“मैंने एक कागज़ पर पता लिख कर देते हुए कहा, “तुमने सारी बातें तो सुन ही लीं हैं। सीधा संदीप के ऑफिस में जाना”।

“रागिनी हंसती हुई बोली,”मालिनी जी, देखते हैं संदीप कैसे पटाता है मुझे, कितना शौक़ीन है चुदाई का”।

“मैंने भी हंसते हुए कहा, “चुदाई का शौक़ीन तो लगता ही है। मुझे हमेशा ये रबड़ के लंड देने खुद आता है जबकि शोरूम में कम से कम पंद्रह काम करने वाले हैं। यहां आता है तो मेरी चूत जरूर घूरता है”।

“रागिनी उठते हुए बोले, “मालिनी जी आपका धन्यवाद। अगर मुझे इस नए लंड को इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत हुई तो आपके पास आऊंगी”।

“फिर मैंने रागिनी की टांग पर हाथ मार कर कहा, “तुम संदीप से लंड तो ले लो फिर जो भी तुम्हारी अगली छुट्टी आये, लेकर यहां मेरे पास आ जाना। एक बार और वही नए वाला लेकर मजे करेंगे”। ये कहते मैंने रागिनी की चूचियां दबा दी।

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