पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-15
हिंदी चुदाई की कहानी अब आगे से-
मैं दिव्या की फुद्दी चूसता जा रहा था और दिव्या की फुद्दी पानी छोड़ती जा रही थी। तभी दिव्या के चूतड़ हिलने लगे। लगता था दिव्या की फुद्दी फिर से गरम हो रही थी। मुझे मम्मी और दिव्या की फुद्दी के पानी में स्वाद और महक में फर्क भी साफ़ महसूस हो रहा रहा।
दिव्या बोली, “ये क्या धीरज तुमने मेरी फुद्दी को फिर से गरम कर दिया। मम्मी मेरी फुद्दी तो फिर तैयार हो गई है। धीरज डाल मेरी फुद्दी में लंड और एक चुदाई और कर दे। मैं खड़ा हुआ और दिव्या की फुद्दी में लंड डाल दिव्या की चुदाई शुरू कर दी।”
मैं अभी अभी मम्मी के फुद्दी में लंड डाल कर हटा था, और अब मेरा का लंड दिव्या की फुद्दी में था। दोनों फुद्दीयों का फर्क मुझे साफ़-साफ़ महसूस हो रहा था। मम्मी की फुद्दी के सामने दिव्या की फुद्दी बहुत ही ज्यादा टाइट थी। तभी मुझे मम्मी की वो बात याद आ गयी, जब मम्मी ने दिव्या से कहा थी, “दिव्या, तुझे चुदाई करवाए अभी चार घंटे भी नहीं हुए और मैं पिछले चौबीस सालों से चुदाई करवा रही हूं। तूने अब तक चार चुदाईयां ही करवाई हैं, और मेरी फुद्दी में चौदह हजार से ज्यादा बार लंड जा चुका है।”
मैं सोच रहा था कि मैं कितना किस्मत वाला हूं, जो मैंने एक पूरी तरह से कुंवारी लड़की के फुद्दी की सील तोड़ी है और ये ख्याल आते ही कि जल्दी ही मैं एक और कुंवारी लड़की की फुद्दी की सील तोडूंगा, मेरे लंड की सख्ती एक-दम बढ़ गयी।
दिव्या की चुदाई पूरी होने के बाद जब हम तीनो इकट्ठे बैठे तो मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी एक बात पूछूं?”
मम्मी बोली, “पूछो, इसमें कहने की क्या बात है?”
मैंने कहा, “मम्मी दिव्या की फुद्दी का पानी बहुत हल्का नमकीन है और उसमें महक भी हल्की-हल्की सी आती है, और खट्टा तो बिलकुल भी नहीं है। मगर मम्मी आपकी फुद्दी का पानी नमकीन भी ज्यादा है, खट्टा भी है और उसकी महक भी तीखी है। ऐसा क्यों?”
मम्मी बोली, “धीरज बेटा बात ये है कि दिव्या की फुद्दी से निकले चिकने पानी में पेशाब की एक बूंद भी नहीं होती, इसलिए उसकी फुद्दी के पानी में खट्टापन ना के बराबर है। मगर धीरज मेरी फुद्दी के पानी में पेशाब की बूंदे मिक्स हो जाती हैं, इसलिए फुद्दी के पानी में खट्टापन होता है। इसीलिए ये नमकीन भी ज्यादा होता है और महक भी तीखी उसी पेशाब के कारण ही होती है ये खट्टापन असल में पेशाब का स्वाद होता है।”
मम्मी बोलती जा रही थी, “धीरज दिव्या जानती होगी कि फुद्दी का छेद और पेशाब वाला छेद बिल्कुल पास-पास होते हैं।”
मम्मी ने ये कह कर दिव्या की तरफ देखा।
दिव्या बोली “हां मम्मी दोनों छेद ऊपर नीचे, बिलकुल पास-पास ही होते हैं।”
मम्मी ने बात जारी रखते हुए कहा, “अब होता क्या है धीरज, दिव्या जैसी जवान लड़की का अपने दोनों छेदों पर – चूत के छेद और पेशाब वाले छेद पर पूरा-पूरा कंट्रोल होता है। जब तक जवान लड़की ना चाहे उसके पेशाब वाला छेद बिलकुल टाइट बंद रहता है। इसीलिए चुदाई की मस्ती में जब जवान लड़की की फुद्दी जब पानी छोड़ती है, तब भी लड़की नहीं चाहती की पेशाब वाला छेद खुले, क्योंकि पेशाब तो उसने करना ही नहीं होता – और वो पेशाब वाला छेद नहीं खुलता।”
“धीरज बेटा अब यही कंट्रोल हमारी उम्र की औरतों में, जिनकी लगातार की चुदाई हुई होती है, कम हो जाता है और पेशाब वाला छेद थोड़ा ढीला हो कर हमेशा हल्का सा खुला ही रहता है। दूसरे चुदाई के ख्याल से ही जब हमारी चूतों में आग लगती है और चूतें पानी छोड़ती हैं, तब पेशाब वाला छेद ना चाहने पर भी थोड़ा सा और ज्यादा खुल ही जाता है और पेशाब की बूंदे टप-टप टप-टप कर चूत के पानी में मिक्स होने लगती हैं। ये उस पेशाब का ही स्वाद है।”
फिर मम्मी ने अपनी वही बात दोहरा दी, “अब देखो दिव्या अब तक कितनी चुदी है? चार बार। और मैं इन चौबीस सालों में चौदह हजार से ज्यादा बार तुम्हारे पापा का लंड अपनी चूत में ले चुकी हूं। यही वजह हैं कि मेरे फुद्दी के पानी में थोड़ा सा पेशाब भी मिला रहता है। इसीलिए मेरी फुद्दी के पानी में से तीखी महक आती है और उसमें खट्टापन भी होता है।”
मैंने फिर पूछा, “अच्छा मम्मी एक बात और बताओ। जब मैं आप दोनों के फुद्दीयां चूस रहा था, तब दिव्या के फुद्दी तो पानी छोड़ती जा रही थी। मगर आपकी फुद्दी का पानी थोड़ी चुसाई के बाद खत्म हो गया था।”
मम्मी बोली, “धीरज बेटा तुमने दिव्या की फुद्दी के पानी में एक चीज़ और नोट की है?”
मैंने पूछा, “क्या मम्मी?”
मम्मी बोली, “दिव्या की उम्र की लड़कियों की फुद्दी का ये पानी चिकनाहट या चिपचिपापन लिए भी होता है। ये कुदरत का एक तरीका है फुद्दी को चिकना रखने का। जवान लड़की की फुद्दी टाइट होती है, उसमें लंड आराम से जाए, बिना किसी तकलीफ से जाए। इसलिए उसकी फुद्दी में चिकनाहट या चिकनापन ज्यादा होना चाहिए जिससे लंड फुद्दी में जाते हुए लड़की कोइ परेशानी ना हो, कोइ तकलीफ ना हो, और लंड फुद्दी में जाने का मजा पूरा आये। चुदाई के दौरान फुद्दी चिकनी रहे, इसीलिए ही कुदरती जवान लड़की की फुद्दी पूरी चुदाई के दौरान चिकना पानी छोड़ती रहती है।”
मम्मी बोल रही थी, “मगर धीरज हमारी उम्र की औरतों की फुद्दी जो बहुत सारी चुदाईयों के बाद ढीली हो जाती है, उसे चुदाई के दौरान ज्यादा चिकनाहट की जरूरत नहीं होती। क्योंकि ऐसी ढीली फुद्दी में लंड वैसे ही आराम से चला जाता है, इसलिए इस तरह का चिकनाहट वाला पानी फुद्दी में से ना के बराबर ही निकलता है। ये सब एक तरह से कुदरत का करिश्मा है।”
मम्मी ने फिर कहा, “लेकिन मम्मी मुझे मजा तो आपकी फुद्दी का पानी चाटने में ज्यादा आया है, ज्यादा नमकीन, ज्यादा खट्टा, तीखी महक वाला। आपकी फुद्दी के खट्टे नमकीन पानी की महक से तो मेरा लंड फटने को हो रहा था। मन कर रहा था उठूं और तभी की तभी चोद दूं आपको।”
मम्मी ने हंसते हुए बोली, “इसमें तुम्हारा कसूर नहीं है धीरज, सब मर्दों का – जानवरों यही हाल होता है। अब जानवरों को ही लेलो। सांड, घोड़ा, कुत्ता ये फुद्दी में लंड डालने से पहले फुद्दी चाटते है। जैसे ही ये – सांड, घोडा, कुत्ता फुद्दी चाटने लगते है, गाय, घोड़ी, कुतिया पेशाब ही कर देती है और इन्हे चोदने आये इनका सांड, घोड़ा, कुत्ता इनका पेशाब भी चाटने लगते हैं। यही हाल तुम मर्दों का भी होता है।”
मैंने मम्मी और दिव्या दोनों की फुद्दीयां चूसी थी। मगर मुझे मम्मी की फुद्दी चूसने में ज्यादा मजा आया। मम्मी की फुद्दी का पानी ज्यादा नमकीन और तीखी महक वाला था और इसमें खट्टापन भी था। उसे चूसने चाटने में ज्यादा मजा आ रहा था।
मैंने फिर कहा, “लेकिन मम्मी मुझे मजा तो आपकी फुद्दी का पानी चाटने में ज्यादा आया है, ज्यादा नमकीन, ज्यादा खट्टा, तीखी महक वाला। आपकी फुद्दी के खट्टे नमकीन पानी की महक से तो मेरा लंड फटने को हो रहा था। मन कर रहा था उठूं और तभी की तभी चोद दूं आपको।”
फिर मैं बोला, “मम्मी मैं भी एक बार आपका पेशाब चाटूंगा। एक बार और आपके पेशाब का टेस्ट करूंगा।”
मम्मी ने हंसते हुए कहा, “ठीक एक बार हम सब आज की चुदाई से फारिग हो जाएं, फिर आज ही चाट कर टेस्ट कर लेना मेरा पेशाब।”
दिव्या बोली, “धीरज मम्मी का ही क्यों, मेरा पेशाब भी टेस्ट करना पड़ेगा।”
मैंने भी कहा, “ठीक है दिव्या तेरा पेशाब भी चाट लूंगा, तेरा ही क्यों जब माधवी आएगी तो उसका पेशाब भी चाट लूंगा।”
दिव्या मस्ती से बोली, “वाह धीरज, ये हुई ना बात। खूब मजा रहेगा।”
मम्मी बता रही थी, “और वैसे भी मैंने तो इतनी चुदाई करवा ली है अब तो मेरी फुद्दी ने तो कई सालों से ही पानी छोड़ना बंद कर दिया था। जैसे दिव्या की फुद्दी लंड और चुदाई के ख्याल से ही गीली हो जाती है, मेरी फुद्दी अब इस तरह गीली नहीं होती – और कई बार तेरे पापा का खड़ा लंड देख कर भी फ़ुद्दी पानी नहीं छोड़ती थी।”
”बहुत बार तो ऐसा भी होता था कि मेरी फुद्दी बिलकुल सूखी ही रह जाती थी और तेरे पापा को लंड डालने से पहले फुद्दी में थूक डाल कर इसे चिकना करना पड़ता था। और अब तो पिछले एक डेढ़ साल से मेरी फुद्दी में लंड ढंग गया ही नहीं। मेरी ढंग से चुदाई ही नहीं हुई। ये तो जब मैंने धीरज का इतना बड़ा और सख्त लंड देखा तो ऐसे मस्त लंड से चुदाई करवाने के ख्याल से मेरी फुद्दी ने फुर्र से पानी छोड़ा दिया।”
फिर मम्मी बोली, “धीरज कई सालों के बाद मेरी फुद्दी ने इतना पानी छोड़ा है।”
मैंने मम्मी की फुद्दी में उंगली डालते हुए कहा, “मम्मी मैं अब आपकी फुद्दी को लंड के लिए नहीं तरसने दूंगा। जब भी आपका मन करेगा, जब भी आप कहेंगी आपकी फुद्दी में लंड ड़ालूंगा और आपको चोदूंगा।”
दिव्या बोली, “हां मम्मी धीरज तो यहां हमेशा नहीं रहता, मैं भी आपको फुद्दी के मजे के लिए तरसने नहीं दूंगी। दिन में जब पापा ऑफिस गए होंगे तो आपकी फुद्दी चूसा करूंगी, आपसे फुद्दी चुसवाया करूंगी और फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ कर आपको मजा दिया करूंगी।”
मम्मी ने मुझे और दिव्या, दोनों को बाहों में ले लिया और बोली, “मेरी अच्छे बच्चे।”
फिर मम्मी बोली, “चल बेटा धीरज चल अब डाल अपनी मम्मी की गांड में लंड और निकाल अपने लंड की गर्म मलाई अपनी मम्मी की गांड में, अब रहा नहीं जा रहा बेटा। मेरी गांड में कुछ-कुछ होने लगा है।”
ये कह कर मम्मी बेड से उतरी और जा कर सोफे पर उल्टी लेट गयी और अपने चूतड़ पीछे करके ऊपर उठाते हुए बोली, “आजा बेटा, देख तेरी मम्मी की गांड बुला रही है तुझे।”
मैं मम्मी के पीछे चला गया और चूतड़ खोल कर मम्मी की गांड का छेद चाटने लगा। गांड का छेद चाटने में बड़ा ही मजा आ रहा था। गांड का छेद चाटते-चाटते मैं मम्मी के चूतड़ों को हल्के से काट भी लेता था। मम्मी के चूतड़ बहुत ही मुलायम थे। ऐसे मुलायम चूतड़ों छेद देख कर मेरा लंड फटने को हो गया।
चूतड़ चाटने के बाद मैं अलमारी में से वैसलीन लाया और मम्मी की गांड के छेद पर लगा दी।
थोड़ी वैसलीन उंगली के साथ मम्मी की गांड के छेद के अंदर भी लगा दी और लंड का टोपा मम्मी की गांड के छेद पर रख कर लंड अंदर दबाने लगा। लंड फिसल कर अंदर जाने लगा। मैंने सोचा मम्मी तो कह रही थी कि मम्मी की गांड चुदाई बहुत ही कम हुई है, मगर मुझे तो ऐसा नहीं लगा।
मैंने मम्मी से पूछा, “मम्मी आप तो कह रही थी पापा आपकी गांड नहीं चोदते, पर मम्मी आप की गांड का छेद तो थोड़ा खुला हुआ। मेरा लंड आराम से अंदर जा रहा है।” इस पर मम्मी ने कोइ जवाब नहीं दिया और मैंने भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
मैं थोड़ा रुक-रुक कर मम्मी की गांड में लंड डालने लगा। दिव्या पास ही खड़े-खड़े मुझे मम्मी की गांड में लंड डालते देख रही थी। जब मुझे लगा कि लंड ने अपनी जगह बना ली है, तो मैंने थोड़ा जोर लगा कर अंदर धकेल दिया। लंड तकरीबन पूरा अंदर जा चुका था।
दिव्या जो मेरे पास ही खड़ी थी बोली, “धीरज तुम्हें इतनी देर क्यों लगाई मम्मी की गांड में लंड डालने में? क्या गांड में आराम से लंड नहीं जाता, क्या सभी गांडों के साथ क्या ऐसा ही होता है?”
मैंने कहा, “हां दिव्या, असल में फुद्दी के छेद की तरह गांड के छेद में लचीलापन नहीं होता, और फुद्दी की तरह गांड में से चिकना पानी भी नहीं निकलता। इसलिए पहली तीन चार चुदाईयों में लंड गांड के छेद में आराम से नहीं जाता। थोड़ी दिक्कत होती है। तीन-चार बार जब लंड गांड में चला जाता है, तब ही लंड गांड में जाना शुरू होता है। मगर दिव्या चिकनाहट के लिए क्रीम फिर भी लगाने ही पड़ती है और लंड भी धीरे-धीरे ही गांड में डालना पड़ता है।
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