पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-14
फैमिली सेक्स कहानी अब आगे-
दिव्या और मम्मी समलिंगी चुदाई के लिए तैयार थी।
दिव्या मम्मी को कह रही थी, “मम्मी मेरी फुद्दी चोदते हुए कुछ-कुछ बोलती रहना। जैसे आप धीरज से चुदाई करवाते हुए बोलती हो। और बहुत मजा आएगा। पहली बार आप बोलना, फिर मैं भी बोलूंगी।”
जो कुछ मम्मी और दिव्या बोल रही थी, मेरी हैरानी की कोइ हद्द ही नहीं थी। मैं बस यही सोच रहा था, “ये दोनों मां-बेटी ही हैं?”
दिव्या की इस बात पर हंसती हुई मम्मी ने कमाल की बात की। मम्मी बोली, “मेरी बेटी, तुझे तो अपनी फुद्दी में लंड डलवाये, चुदाई शुरू करवाए चौबीस घंटे भी नहीं हुए। कितनी बार लंड लिया होगा फुद्दी में? चार बार? पांच बार? और दिव्या मैं चौबीस सालों से चुदाई करवा रही हूं। चौबीस सालों से लंड डलवा रही हूं अपनी फुद्दी में। चौदह हजार से ज्यादा बार लंड डलवा चुकी हूं अपनी फुद्दी में इन चौबीस सालों में।”
मम्मी बोल रही थी, “जब तक धीरज पैदा नहीं हुआ था, तीन-तीन चार-चार बार चोदते थे तुम्हारे पापा मुझे। पहले दो साल तो दिन में पांच-पांच बार भी चुदाई हो जाती थी। ये तो पिछले एक डेढ़ साल से ही तेरे पापा का लंड जवाब दे रहा है। डेढ़ साल पहले तक भी हममें मस्त चुदाई होती थी। और दिव्या तू तो मुझे ऐसे समझा रही है, जैसे मैं आज पहली बार चुदाई करवा रही हूं।”
दिव्या बोली, “अरे मम्मी ऐसी बात नहीं है। वो मैं इसलिए कह रही हूं कि अगर आपने सेक्स का, चुदाई का असली मजा लेना है तो ये भूलना पड़ेगा हम दोनों आपस में मम्मी-बेटी है।”
मम्मी बोली, “अच्छा तो ये बात है।”
और इसके बाद तो जब मम्मी ने बोलना शुरू किया, तो बस कमाल ही कर दिया।
मम्मी बोली, “अरे मेरी चुदक्कड़ रानी दिव्या, मेरी रखैल मादरचोद दिव्या, इतना मुझे भी मालूम है। चल तैयार हो जा तेरी फुद्दी फाड़ती हूं आज चोद-चोद कर। करती हूं तेरी फुद्दी के साथ-साथ गांड का भी कचरा आज। देखना ऐसे चोदूंगी तुझे जैसे एक कुत्ता कुतिया को चोदता है। (अपनी अगली टांगों में जकड़ कर) साली मादरचोद रंडी दिव्या, हिलने भी नहीं दूंगी तुझे। भोसड़ा ना बना दिया तेरी फुद्दी का चोद-चोद कर, साली चुदक्कड़ कहीं की।”
दिव्या हंसती हुए बोली, “वाह मम्मी आप तो दो कदम और भी आगे हो। अब ये भी बता दो, मैं फुद्दी चुदवाती हुई क्या बोलूं?”
मम्मी बोली, “तू बोलना, आजा मेरी फुद्दी के राजा, देख तेरे लंड की रानी, तेरी रंडी, तेरे सामने फुद्दी खोल के लेटी हुई है। आजा अब और मत तरसा, आजा चढ़ जा मेरे ऊपर और डाल दे अपना खूंटा मेरी कुंवारी फुद्दी में। तोड़ दे इसकी सील। फाड़ दे इस फुद्दी को। एक बार फुद्दी फड़वा लूं, फिर करूंगी अपनी गांड तेरे आगे। उसका भी आज कचरा करना है मेरे राजा आज। बस ये सोच ले मैं कुतिया हूं। पकड़ ले मुझे कमर से और हिलने मत देना मुझे। लाख कूं-कूं चूं-चूं करूं, छोड़ना मत मुझे, आजा अब घुस जा मेरी फुद्दी में, गांड भी चुदवाऊंगी तुझसे आज।”
मस्ती में मम्मी और दिव्या जिस बेशर्मी के साथ अजीब-अजीब बातें और हरकतें कर रही थी। ये तो बिलकुल भी नहीं लग रहा था कि दोनों मां-बेटी हैं। पक्की चुदक्कड़ लग रही थी।
मम्मी की बातें सुन कर मेरी और दिव्या, दोनों की हंसी छूट गयी।
दिव्या बोली, “मम्मी मैं और माधवी इतना कुछ नहीं बोलती। अब तो मैं माधवी के साथ भी यही बोला करूंगी। ये बोलने-सुनने में तो बड़ा ही मजा आता है।”
फिर दिव्या मुझसे बोली, “धीरज तुम भी ऐसा ही कुछ बोलना जब तुम मेरी चुदाई करोगे।”
मम्मी खड़ी हुई और दिव्या की टांगें थोड़ी और खोल कर फुद्दी के साथ फुद्दी रगड़ते हुए बोली, “दिव्या तेरी इस फुद्दी की साथ फुद्दी की चुदाई से फारिग हो कर आज अपने बेटे से गांड चुदवाऊंगी मैं, और उसके लंड की गरम-गरम मलाई अपनी गांड में डलवाऊंगी।”
मम्मी दिव्या से बोली, “मेरी मान मेरी चुदक्कड़ बिटिया, तू भी लेले एक बार धीरज का गधे के लंड जैसा लम्बा मोटा लंड अपनी गांड में, और मजे ले। साथ में जब माधवी आये तो उसके गांड भी फड़वा देना अपने भाई के लंड से। जब अपने भाई से चुदाई करवानी ही है, तो फिर पूरी तरह ही करवाओ। आगे, पीछे, मुंह में सब जगह डलवाओ अपने भाई का लंड।”
इसके बाद मम्मी अपनी कमर को आगे-पीछे करते हुए बोली, “ले मेरी रंडी दिव्या, मेरी कुतिया, तेरी मां का भोंसड़ा, साली मादरचोद चुदक्कड़ रंडी, आज तेरी फुद्दी का कचरा करके ही छोडूंगी तुझे, तेरी मां का भोंसड़ा। एक रखैल, एक रंडी की तरह चोदूंगी तुझे आज – फाड़ दूंगी तेरी फुद्दी। अपना मोटा लंड अभी तेरी गांड में डालती हूं, तेरी चीखें निकल दूंगी साली मादरचोद।”
मम्मी ने भी दिव्या की तरह मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बोली, “बेटा धीरज, याद कर ले ये सब, तू भी बोलना यही जब तू मेरी या दिव्या की गांड में लंड डालेगा।”
मम्मी की ऐसे बातें मुझे हैरान कर रही थी। मम्मी अब चुदाई में दिव्या के साथ भी यही कुछ बोलने को कह रही थी। मैंने हां में सर हिला दिया और सोचा, “यार अगर मम्मी और दिव्या को ये सब सुनने में इतना ही मजा आता है, तो फिर मैं ही क्यों शरमाऊं, मैं भी ये सब बोलने के क्यों ना मजे लूं? अब तो मुझे भी बोलना ही चाहिए, मम्मी को और दिव्या को तो इसमें बहुत मजा आता है।”
थोड़ी देर मम्मी ऐसे ही दिव्या की फुद्दी पर अपनी फुद्दी के धक्के लगाती रही।
फिर दिव्या बोली, “वाह मम्मी आप तो सच में है मेरी मम्मी हैं। बड़ा मजा आएगा आपके साथ इस फुद्दी चुदाई का चलो अब आप लेटो मैं आती हूं ऊपर और फाड़ती हूं आपकी फुद्दी चोद-चोद कर।”
अब दिव्या की जगह मम्मी लेट गई और अपनी टांगें उठा कर टांगें चौड़ी कर दी। जब दिव्या लेटी थी और उसने अपनी टांगें चौड़ी की थी, तब दिव्या की कुंवारी फुद्दी की फांकें बंद ही रही थी। मगर मम्मी ने जैसे ही अपनी टांगें चौड़ी की, मम्मी की चौदह हजार से ज्यादा बार चुदी हुई फुद्दी की फाकें अपने आप ही थोड़ी सी खुल गयी और अंदर की गुलाबी फुद्दी दिखाई देने लगी। मस्ती के कारण मम्मी की फुद्दी चिकने पानी से भरी पड़ी थी और चमक सी रही थी। ये नजारा देख कर मेरा लंड एक-दम सख्त हो गया।
दिव्या ने मम्मी की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रखी और धक्के लगाने शुरू कर दिए। कुछ देर तो दिव्या कुछ नहीं बोली, बस मम्मी की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रगड़ती रही। मगर जैसे ही दिव्या की फुद्दी गर्म हुई, तो दिव्या धक्के लगाने के साथ-साथ बोलने लगी, “ले मेरी रंडी मम्मी, मेरी कुतिया, तेरी मां का भोंसड़ा, साली चौदह हजार बार लंड ले चुकी अपनी इस फुद्दी में, और कैसे चिल्ला रही है मादरचोद। जैसे कि पहली चुदाई हो रही इस कुतिया की।
मादरचोद चुदक्कड़ रंडी, देखती रह गांडू आज तेरी फुद्दी का कचरा करके ही छोडूंगी तुझे। साथ ही आज तेरी गांड भी नहीं छोडूंगी – साली तेरी मां का भोंसड़ा। ऐसे चोदूंगी जैसे कि कोइ किसी रंडी को भी क्या चोदता होगा। अभी अपना मोटा लंड अभी तेरी गांड में डालती हूं तेरी चीखें निकल दूंगी साली मादरचोद।”
नीचे से मम्मी बोल रही थे, “अरे भोंसड़ी वाले मादरचोद, साले, मैं तो पहले बोल चुकी हूं, मैं तो तेरे पास आयी ही अपनी मां चुदवाने, अपनी फुद्दी और गांड का कचरा करवाने। अब आजा मेरे राजा, देख तेरी रानी, तेरी रंडी, तेरे सामने फुद्दी खोल के लेटी हुई है। पूरे पैसे वसूल मझे चोद-चोद कर गांडू। आजा अब और मत तरसा, डाल दे अपना खूंटा मेरी फुद्दी में अब तो बस ये सोच ले मैं कुतिया हूं। पकड़ ले मुझे, हिलने मत देना मुझे जब तक मेरी फुद्दी की मां ना चुद जाए, आजा। लाख कूं-कूं चूं-चूं करूं, छोड़ना मत मुझे, आजा अब घुस जा मेरी फुद्दी मैं।”
मैं पहले ही हैरान था कि मम्मी ऐसा भी कुछ बोल सकती है – वो भी दिव्या के साथ – और अब तो दिव्या भी शुरू हो चुकी थी।
तभी मम्मी के चूतड़ जोर-जोर से हिलने लगे। मम्मी “वो” वाली बातें भूल गयी और दिव्या से बोली, “दिव्या बेटी मेरी तो फुद्दी तो फिर से तैयार होने लग गयी है। दिव्या जब धीरज यहां नहीं हुआ करेगा तो मैं और तुम दिन में ये किया करेंगी।
दिव्या ने एक बार फिर मेरी ओर देखा, मगर इस बार ना कुछ इशारा किया, ना ही कुछ बोली।
मम्मी की फुद्दी के ऊपर फुद्दी रगड़ते हुए दिव्या बोली, “मम्मी देखती जाओ, अभी और मजा आएगा। जब दोनों की फुद्दीयों का पानी बाहर तक आ जाएगा और दोनों फुद्दीयां गीली हो कर फच्च-फच्च की आवाजें करने लगेंगी।”
मम्मी चूतड़ घुमाने लगी और बोली, “आह दिव्या बेटी बड़ा मजा आ रहा है, मेरी फुद्दी तो लगता है पानी छोड़ने वाली है। ये तो बड़ा जल्दी मजा आ गया इस बार।” जब दिव्या को लगा मम्मी को सच में ही मजा आने वाला हो गया है तो दिव्या मेरी तरफ मुड़ी और बोली, “धीरज ये तो मम्मी को सच में ही मजा आने वाला हो गया भाई। आजा अपना मोटा लंड डाल मम्मी की फुद्दी में और मजा देदे इनको। मम्मी को असली मजा तो लंड फुद्दी की अंदर जाने पर ही आएगा।”
दिव्या के बुलाने से मैं उठा, लंड तो मेरा खड़ा ही था उठा, दिव्या मम्मी की फुद्दी से हट गयी और मैंने मम्मी की टांगें थोड़ी और ऊपर उठायी और मम्मी की फुद्दी को अपने लंड के सामने ले आया। मैंने लंड मम्मी की फुद्दी के छेद पर रक्खा और फचाक से लंड मम्मी की फुद्दी में डाल दिया मम्मी को चोदना शुरू कर दिया। मम्मी ने एक सेकंड के लिए मेरी तरफ देखा और फिर से आँखें बंद कर लीं।
दिव्या की फुद्दी चुदाई से मम्मी की गर्म हुए पड़ी फुद्दी तो मेरे लंड के बीस धक्के भी नहीं झेल पायी और मम्मी ने एक जोर की सिसकारी, “आह धीरज, आह दिव्या कैसी गर्म कर दी बेटा तुम लोगों ने मेरी फुद्दी।” बोलते हुए मम्मी ने जोर से चूतड़ घुमाये और मम्मी ढीली हो गयी। जब मम्मी का मजा उतरा तो मम्मी दिव्या की तरफ देखते हुए बोली, “दिव्या बेटी बहुत महीनों के बाद ऐसा मजा आया है।”
मम्मी को मजा आ चुका था, मगर मेरा लंड अभी भी खड़ा ही था। असल में तो मैं मम्मी के गांड चोदने के मूड में था, और मम्मी की गांड में ही लंड की पिचकारी डालना चाहता था।
जैसे ही मम्मी की फुद्दी का पानी निकलने लगा मम्मी ने आँखें बंद कर ली और मजा लेने लगी। मैं दिव्या से बोला, “दिव्या आजा मेरी बहन वापस आजा और फिर से मम्मी की फुद्दी पर अपनी फुद्दी रगड़। जब तुम दोनों की ये फुद्दी चुदाई खत्म हो जाएगी, तब मैं इनकी गांड में लंड डालूँगा। दिव्या आज मैंने मम्मी की गांड चोदनी ही चोदनी है। आज बिना मम्मी की गांड चोदे ना तो मेरा लंड ढीला होने वाला है, और ना ही मुझे नींद ही आने वाली है।”
दिव्या बोली, “समझ गई धीरज ” और दिव्या फिर से मम्मी की फुद्दी पर फुद्दी रगड़ने लगी। जल्दी ही मम्मी का मजा पूरा उतर गया और मम्मी दिव्या से बोली, “बस दिव्या बस मजा आ चुका मुझे।” मम्मी उठने लगी तो दिव्या बोली, “मम्मी अभी ऐसे ही लेटी रहो, मैं भी आ रही हूं। धीरज ने हम दोनों की फुद्दीयां चूसनी हैं, फिर आज धीरज आपकी गांड चोदेगा।”
फिर हंसती हुई दिव्या बोली, “मम्मी धीरज आज आपकी गांड चोदे बिना नहीं मानने वाला और ना ही धीरज का लंड आपकी गांड चोदे बिना ढीला ही होने वाला है, ना ही उसे आज नींद ही आने वाली है। दिव्या की बात सुन मम्मी फिर से वैसे ही लेट गयी और दुबारा से टांगें उठा कर टांगें चौड़ी कर दी।
दिव्या भी मम्मी के पास ही लेट गई और अपने चूतड़ों के नीचे तकिया सरका कर अपने चूतड़ उठा लिया और अपने टांगें खोल दी। मैं बारी-बारी से दोनों की फुद्दीयां चूसने-चाटने लगा।
मझे दोनों की फुद्दीयां चूसते हुए लग रहा था की मम्मी की फुद्दी मैं तो बहुत कम पानी था मगर दिव्या की फुद्दी पानी से भरी पड़ी थी। लेकिन मम्मी की फुद्दी में एक अलग बात थी। मम्मी की फुद्दी का पानी नमकीन और खट्टा था, मगर दिव्या की फुद्दी के पानी में ये खट्टापन बहुत ही कम था। मम्मी की फुद्दी के पानी में अजीब सी तीखी महक भी थी जो मेरे लंड को और भी सख्त कर रही थी। दिव्या की फुद्दी में ये महक बहुत कम थी।
[email protected]
अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-16