पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-19
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
अगले दिन जैसे ही कामवाली काम करके निकली, दिव्या मुझसे बोली, “चलें धीरज, माधवी से अब रहा नहीं जा रहा। रात को इतनी चुसाई करवाई फुद्दी की इसने कि क्या बताऊं। चिकने पानी से भरी पड़ी थी इसकी फुद्दी रात से ही।” फिर दिव्या अपने आप से बोली, “वैसे धीरज मेरे फुद्दी का भी वहीं हाल है।”
हम तीनों ही अपने के कमरे में आ गए। मम्मी-पापा का बेड कुछ ज्यादा ही बड़ा था। हम तो तीन ही थे, उस बेड पर तो चार लोगों की भी मस्त चुदाई हो सकती थी।
मेरी तो अपने लंड की हालत खराब थी, एक कुंवारी टाइट फुद्दी चोदने के बाद, एक और कुंवारी फुद्दी चुदने के लिए उतावली हो रही थी। मेरा लंड तो कामवाली के जाते ही माधवी की कुंवारी फुद्दी के बारे में सोच सोच कर ही खड़ा हो चुका था।
फिर मुझे कुछ याद आ गया। मैं बोला, “और दिव्या मैं वो जैल क्रीम भी ले आया हूं। आज फिर तेरी गांड में लंड डालने की ट्राई करूंगा और माधवी की फुद्दी भी जैल लगा कर चोदूंगा। एक-दम फिसल कर जाएगा बिना किसी तकलीफ के। माधवी की पहली ही चुदाई मस्त मजे से होगी।”
ये बोल कर मैंने अपने कपड़े उतार दिए और दिव्या और माधवी भी नंगी हो गयी। बीस साल की जवान लड़कियों के जिस्म क्या मस्त थे। मुझे तो लगा कहीं मेरा लंड फुद्दी में जाने से पहले ही ना झड़ जाये।
मैं अपने कमरे से जैल क्रीम लेने चला गया। जैल लेकर वापस आया तो मेरे हाथ से जैल की ट्यूब लेकर दिव्या बोली, “अरे ये तो बढ़िया रहेगा। धीरज अभी पहले एक चुदाई तुम माधवी की कर लो। माधवी को भी तो पता लगे जब हाथी की सूंड जैसा लंड फुद्दी में जाता है तो कैसा मजा आता है। फिर मेरी गांड में डालने की ट्राई कर लेना।”
शुक्र है दिव्या ने गधे के लंड जैसा लंड नहीं बोला। दिव्या भी खूब बातें कर रही थी, “धीरज मजा तो तुम्हें जल्दी आता नहीं, तुम्हारा लंड तो एक-एक दो-दो घंटे की चुदाई की बाद भी मलाई नहीं छोड़ता। माधवी को चोदने के बाद फिर मेरी गांड या फुद्दी, जो भी हो, चोद कर फिर से माधवी को चोद लेना – लेकिन आज तुम्हारे लंड की गर्म-गर्म मलाई माधवी की फुद्दी में ही डलनी है। उसके बाद देखेंगे और हमने और क्या-क्या करना है।”
ये बोल कर दिव्या हंस दी। मैं भी हंसा और बोला, “ठीक है मेरी जान, अब यह भी बता दे कि माधवी को चोदते हुए वही बातें भी बोलनी हैं, जो मैंने तुम्हें चोदते हुए बोली थी?”
यहां मेरे मुंह से “तुम्हें और मम्मी को चोदते हुए” निकलता-निकलता रह गया – नहीं तो पोपट ही हो जाना था।
दिव्या हंसते हुए बोली, “अरे धीरज, चाहो तो उससे भी आगे बोल देना। अब तो मैं और माधवी भी एक-दूसरी की फुद्दी चोदते हुए। वही सब – और उससे भी ज्यादा बोलने लग गयी है। माधवी को भी इसमें मजा आता है। अब तो ये भी खूब बोलती है जब से तुमसे चुदाई की बाद मैंने इसके साथ बोलना शुरू किया है।”
ये बोल कर दिव्या और माधवी दोनों ही फिस्स-फिस्स करके हंस दी।
माधवी बोली, “दिव्या मुझे जोर का पेशाब लग रहा है मैं पेशाब करके आती हूं।”
दिव्या बोली, “माधवी, पेशाब करने के बाद फुद्दी मत धोना। धीरज को फुद्दी चूसने चाटने का बड़ा शौक है, उसको पेशाब का टेस्ट बड़ा मजेदार लगता है।”
माधवी मेरी तरफ देख कर हंसते हुए बाथरूम में जाते हुए बोली, “क्यों दिव्या धीरज ने मेरा पेशाब नहीं टेस्ट करना क्या?”
ये सुन कर दिव्या हंस दी। जैसे ही माधवी बाथरूम में गयी दिव्या बोली, “धीरज मम्मी की अलमारी के ऊपर वाले खाने में एक वाईब्रेटर वाला मोटा लम्बा लंड पड़ा है, फुद्दी का मजा लेने के लिए, वो ले आओ।”
मैं फटाफट उठा और मम्मी की अलमारी से वाईब्रेटर ले आया और दिव्या को पकड़ा दिया।
दिव्या बोली, “धीरज मुझे लग रहा है कि मम्मी पिछले डेढ़ साल से, जब से पापा का लंड ढीला हुआ है, इसी वाईब्रेटर को ही अपनी फुद्दी में ले कर मजा लेती रही होगी। पिछली बार जब तुम हम दोनों की चुदाई करके कालेज गए ये, तब मम्मी ने मुझे भी इससे मजा दिया था। इसे फुद्दी में डाल कर वाईब्रेटर चालू करने से एक-दम ही फुद्दी पानी छोड़ देती है। तुम ये माधवी की फुद्दी में भी लगाना और मेरे फुद्दी में भी। मगर माधवी को ये मत बोलना की ये मम्मी का है। बोलना तुम लेकर आये हो, तुम्हारे किसी दोस्त का है।”
मैं क्या बोलता। मैंने बस इतना ही सोचा, “कमाल है।”
माधवी बाथरूम से मूत कर आयी और आते ही बोली, “बताओ धीरज कहां और कैसे लेटूं? कैसे चूसनी है मेरी फुद्दी? फुद्दी की धुलाई नहीं की है मैंने।”
माधवी तो लग रहा था चुदाई के मामले में कुछ ज्यादा ही बिंदास साबित होने वाली थी। मैं सोच रहा था इस कुंवारी माधवी को चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आने वाला था।
मैंने कहा, “बेड के साइड पर लेट जाओ, चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर – चूतड़ का छेद भी चाट लूंगा।” माधवी, जैसे मैंने कहा वैसे ही लेट गयी और टांगें उठा कर टांगें फैला दी। दिव्या की कुंवारी फुद्दी की तरह ही माधवी की फुद्दी बस एक लाइन सी ही थी।
फुद्दी दोनों फांकें आपस में जुड़ी हुई थी – बिल्कुल दिव्या की फुद्दी की तरह। मैं नीचे बैठ गया और दोनों हाथों के अंगूठों से फुद्दी खोल कर फुद्दी को चूसने-चाटने लगा। माधवी की फुद्दी नमकीन चिकने पानी से भरी पड़ी थी। लग रहा था खूब सारा पेशाब मिक्स था फुद्दी के पानीं में।
मैं पानी से भरी फुद्दी जुबान से चाटता था तो अजीब सी सपड़-सपड़ की आवाज आती थी। माधवी, “आह धीरज, उह धीरज, बड़ा ही मजा आ रहा है”, बोलती जा रही थी और उधर दिव्या सोफे पर बैठी अपनी फुद्दी में उंगली कर यही थी।
थोड़ी देर के बाद माधवी बोली, “बस धीरज हो गया। अब लंड चुसवाओ, और डालो लंड मेरी फुद्दी में, बिलकुल तैयार हो चुकी है अब चुदाई के लिए, अब रहा नहीं जा रहा यार।”
मैं उठ कर खड़ा हो गया और लंड माधवी के मुंह के आगे लहराने लगा। माधवी ने लंड मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। पांच मिनट की लंड चुसाई के बाद माधवी ने लंड मुंह से निकाला और बोली, “चलो धीरज, अब बताओ बिस्तर पर सीधा लेटूं? दिव्या कह रही थी बिस्तर पर सीधा लेट कर जब तुम ऊपर से चुदाई करोगे तो चुदाई मस्त होती है।
मतलब दिव्या ने सब कुछ ही बता दिया था माधवी को। मेरे जवाब का इंतजार किये बिना ही माधवी बिस्तर पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर टांगें चौड़ी कर ली। मैंने उंगली से जैल माधवी की फुद्दी में लगाई और लंड फुद्दी के ऊपर रख कर हल्का सा दबाया। माधवी की फुद्दी भी बिल्कुल दिव्या की फुद्दी की तरह ही टाइट थी।
जैसे ही मैंने लंड माधवी की फुद्दी में पूरा डाला, तो माधवी के मुंह से हल्की सी दर्द भरी चीख निकली, “आह धीरज बड़ा मोटा लंड है भाई तेरा तो, बड़ी जलन हुई है फुद्दी में।”
लंड डालते हुए मुझे भी महसूस हुआ था कि माधवी के फुद्दी का छेद भी दिव्या की फुद्दी के छेद की तरह ही टाइट है। एक बार तो मेरा मन तो किया कि माधवी से पूछे, “माधवी कोई प्रॉब्लम तो नहीं हो रही?”
मगर मैं माधवी से ये पूछते-पूछते रुक गया।
मगर मुझे दिव्या की बातें याद आ गयी, जब उसने यही सवाल दिव्या से किया था, और दिव्या ऊंचे आवाज में बोली थी, “भोसड़ी के धीरज, साले मादरचोद तू अभी भी यही सोच रहा है कि तू अपनी छोटी बहन को चोदने जा रहा है। अबे चूतिये, यहां मैं तेरा पूरा लंड अपनी फुद्दी में अंदर तक लेने के लिए मैं मरी जा रही हूं और तुझे मेरी प्रॉब्लम की पड़ी है? ऐसे चोद धीरज जैसे पैसे देकर एक रंडी को चोदने के लिए लाया है। चोद-चोद कर फाड़ मेरी फुद्दी, सुजा इसको, झाग निकाल फुद्दी में से चोद-चोद कर फुद्दी में से धीरज ज्यादा सोच-सोच मेरा दिमाग खराब मत कर, चोद मुझे अब।”
बस इसके बाद तो मैंने आव देखा ना ताव और लंड एक बार पूरा का पूरा माधवी के फुद्दी से बाहर निकाल कर एक झटके साथ लंड पूरा का पूरा माधवी की फुद्दी में बिठा दिया। माधवी जोर से चिल्लायी, “मर गयी दिव्या, ये तो बड़ा दर्द कर रहा है।”
दिव्या उठ कर आ गई और माधवी के गालों पर हाथ फेरती हुई बोली, “माधवी, बस एक-दो मिनट की ही बात है, उसके बाद मजा ही मजा है।”
जल्दी ही माधवी की टांगें मेरे पीछे थी और माधवी ने मझे अपनी टांगों में जकड़ा हुआ था और जोर-जोर से चूतड़ ऊपर-नीचे कर रही था। जैसे ही माधवी ने मस्ती में चूतड़ घुमाने शुरू किये दिव्या वापस सोफे पर चली गई और मम्मी का डिलडो – रबड़ का लंड अपनी फुद्दी में डाल लिया।
माधवी की फुद्दी पूरी गरम हो चुकी थी। माधवी जोर-जोर से चूतड़ घुमाते हुए वो सब कुछ बोल रही थी जो मम्मी और दिव्या ने चुदाई करवाते हुए बोला था। कुतिया की तरह चोद मुझे, रंडी हूं मैं तेरी, फाड़ दे मेरी फुद्दी चोद-चोद कर, रगड़ मेरे फुद्दी धीरज, आह मुंह में भी लूंगी तेरा लंड, गांड में भी लूंगी, तेरे लंड का पानी भी पियूंगी।”
माधवी को इस तरह बोलते और चूतड़ घूमते देख दिव्या समझ गयी, माधवी को असली लंड की चुदाई का पहला मजा आने वाला था। वो उठ कर वापस बैड पर आ गयी और माधवी के गालों पर हाथ फेरने लगी।
माधवी ने जरा सी आँखें खोली और दिव्या से बोले, “दिव्या ये लंड तो बड़ा मजा देता है आज तो पूरी रात चुदवाऊंगी धीरज से। चूतड़ों में भी डलवाउंगी, मुंह में भी लूंगी।”
यही बातें दिव्या ने भी बोली थी जब मम्मी की सामने दिव्या ने मुझसे चुदाई करवाई थी।
तभी माधवी जोर के चूतड़ घुमाए और तेज़ आवाज में बोली, “आ गया, निकल गया। धीरज मजा आ गया मुझे। ओह माय गॉड धीरज क्या मजा आया है – अभी भी आ रहा है। बड़ा मजा आता ही लंड फुद्दी में लेने का आह, उफ्फ दिव्या मजा आ गया गया।”
इसके बाद माधवी चुप तो कर गयी, मगर मुझे अभी भी अपनी टांगों में जकड़ा ही हुआ था। दिव्या ने भी अपनी पहली चुदाई में यहीं किया था।
मैने दिव्या से कहा, “दिव्या इसका एक बार पानी और छुड़ा दूं, फिर तेरी गांड में डालूंगा। ये माधवी भी अपनी पहली चुदाई में, जब तक तीन-चार बार मजा नहीं ले लेगी, इसकी भी तसल्ली नहीं होने वाली।”
दिव्या हंसते हुए बोली, “तो धीरज मेरी भी कहां हुई थी। तेरे से पहली बार चुदाई में मैंने भी तो पांच बार मजा लिया था। और फिर छठी बार मजा तब था जब तूने मेरी चूत चोदी थी और तब तूने मलाई डाली थी मेरी फुद्दी में। और मैं तो वो मजा तो मैं ज़िंदगी भर नहीं भूल सकती जब तेरे लंड कप भर के गर्म गर्म शहद मेरी फुद्दी में गया था। अब ये माधवी कौन सी अलग है, इसने भी तो मेरी तरह कहां फुद्दी की सील तुड़वाई है – चोद इसे, एक मजा और देदे फिर आजा मेरी पास, बस ये याद रखना, अपने लंड की गर्म-गर्म मलाई इसकी फुद्दी में ही डालनी है आज तूने। पहली चुदाई है – मस्त होनी चाहिए। चल मेरी भाई, मस्त हो के चोद अपनी दोनों बहनों को। एक बार मेरे गांड चोद ले, फिर सारी रात के लिए माधवी तेरे पास रहेगी इसी बिस्तर पर और मैं मजे लूंगी तुम दोनों के चुदाई देख देख कर।”
और दिव्या हंसते-हंसते वापस सोफे पर चली गई और मम्मी का डिलडो अपनी फुद्दी में डाल लिया।
मैंने कहा, “दिव्या मेरी बहन देखती रह – इस माधवी को भी आज छह बार मजा आएगा और तुझे भी पूरा मजा दूंगा।”
दिव्या के जाते ही मैंने ने माधवी को फिर से चोदना शुरू कर दिया। पहली चुदाई के मजे की मस्ती में दूसरी बार की चुदाई माधवी दस मिनट भी नहीं झेल पायी और उसे फिर से मजा आ गया।
दिव्या की चुदाई की तरह जब माधवी को भी चार-पांच बार मजा आ गया, तब मैंने लंड माधवी की फुद्दी में से निकाला।
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