मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-2

पिछला भाग पढ़े:- मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-1

मामा जी काम के सिलसिले में महीने में तकरीबन एक बार लुधियाना आते ही थे। जब भी आते मामा जी के और कुलभूषण के हंसी मजाक शुरू हो जाते थे। हर बार के बाद मामा जी के आने के बाद जब कुलभूषण और मामा जी बोतल लेकर बैठ जाते। धीरे-धीरे उनकी बातों में सेक्स की बातें और ज्यादा होने लग गयी।”

“कुलभूषण तो हमेशा के तरह ही मजे ले रहा था – वैसे सच बोलूं, दोनों की बातों में मजा तो मुझे भी आने लगा था l बातों के दौरान मैं कुलभूषण से रात की होने वाली चुदाई का सोच-सोच कर ही मस्त हो जाती थी। यहां तक की उन दोनों की बातों के दौरान मेरी फुद्दी गीली भी होने लग गयी थी।”

“ऐसी ही एक दिन हम तीनों बैठे हुए थे। कुलभूषण ने मामा जी से पूछा, “मामा जी वैसे एक बात तो है, बड़ी छोटी उम्र में पटा लिया आपने शैली मामी को, और सब कुछ कर भी लिया उनके साथ? ऐसा कैसे, मामा जी बताओ तो सही।”

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