पिछला भाग पढ़े:- सोनाली दीदी और मेरा सिक्रेट-7
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
कुछ दिनों बाद, आखिरकार सोनाली दीदी की कंपनी से वो मनाली के टिकट मिल ही गए जो हमने वैलेंटाइन डे पर जीते थे। जब दीदी ऑफिस से घर आई, तो उन्होंने मुझे वो टिकट दिखाए। हम दोनों इतने खुश थे कि उन्होंने मुझे गले लगा लिया। ये हम दोनों के लिए बहुत बड़ी बात थी।
अगले दिन हमारी शाम की फ्लाइट थी। पूरे दिन हम सामान पैक करने में लगे रहे। पांच दिन तक मनाली में रहने के लिए जो-जो चीजें चाहिए थी, वो सब हमने एक बड़े बैग में रख ली। दीदी अपने कपड़े रख रही थी और मैं बाकी जरूरी सामान चेक कर रहा था। घर में काफी भागदौड़ थी, लेकिन हम दोनों बहुत खुश थे।
शाम को हम एयरपोर्ट के लिए निकल गए। टैक्सी में बैठते ही ऐसा लग रहा था कि अब बस मनाली पहुँचने की देरी है। एयरपोर्ट पहुँच कर हमने अपना सामान जमा किया और अंदर की तरफ चले गए।
जब हम फ्लाइट के अंदर गए और अपनी सीट पर बैठे, तो सोनाली दीदी बहुत खुश दिख रही थी। उन्होंने खिड़की वाली सीट मुझे दे दी। फ्लाइट चालू हुई और धीरे-धीरे चलने लगी। दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और बोली, “आखिरकार हम चल दिए!”
यह ट्रिप मेरे और सोनाली दीदी के लिए बहुत बड़ी बात थी। मुंबई में हम साथ तो थे, पर वहां हमेशा डर लगा रहता था कि कोई हमें देख ना ले। हम हर वक्त ये सोचते थे कि लोग क्या कहेंगे। लेकिन इस नए शहर में हमें कोई नहीं जानता था, और इस बात से मैं बहुत खुश था कि हम पहली बार बिल्कुल आजाद होकर साथ थे।
सबसे ज्यादा खुशी मुझे इस बात से हुई कि सोनाली दीदी अब मेरे साथ पहले जैसा बर्ताव नहीं करती थी। जब वो पहली बार मुंबई आई थी, तब वो बहुत शर्माती थी और हमेशा खुद को अपने कपड़ों में छिपा कर रखती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं था।
अब वो घर में बहुत छोटे और ढीले कपड़े पहनती थी। उन कपड़ों में उनके स्तन का उभार साफ़ दिखता था, और उन्हें पता होता था कि मैं उन्हें देख रहा हूँ, फिर भी वो बिल्कुल नहीं घबराती थी। वो मेरे पास ऐसे बैठती थी जैसे अब मैं उनका छोटा भाई नहीं रहा।
वो अब मेरे साथ काफी करीब रहती थी। जैसे, एक बार वो नहा कर सिर्फ तौलिया लपेट कर बाहर आई। वो मुझे देख कर बिल्कुल नहीं शर्माई, बल्कि एक हल्की सी मुस्कान के साथ मेरे बगल में आकर बैठ गई। कभी बातें करते हुए वो अपना हाथ मेरे घुटने पर रख देती थी, या मेरे बहुत पास आकर बैठती थी, जैसे उन्हें मेरे साथ रहने में कोई परेशानी ना हो।
कभी-कभी जब हम टीवी देखते या सोफे पर बैठे होते, तो वो जान-बूझ कर मेरे कंधे पर अपना सिर रख देती और अपने शरीर को मेरे शरीर से सटा लेती थी। उस समय उनकी खुशबू मेरे पास आती थी और मैं महसूस कर पाता था कि वो मेरे होने से कितनी शांत और बेफिक्र हैं। वो कभी-कभी झुक कर कुछ बताती तो उनके कपड़ों के अंदर से उनके स्तन साफ नज़र आते थे, और वो बिना किसी शर्म के मेरे करीब आकर बैठती थी, जैसे वो चाहती हों कि मैं उनके इस खुलेपन को महसूस करूँ। उनका मेरे सामने इस तरह से अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाना मुझे बहुत अच्छा लगता था।
मनाली एयरपोर्ट पर हम देर रात पहुँचे। बाहर की ठंडी हवा चेहरे पर लग रही थी, जो बहुत सुखद थी, पर साथ ही काफी कंपकपाने वाली भी थी। हमने एक टैक्सी ली और होटल की तरफ निकल पड़े। होटल बहुत बड़ा और आलीशान था, जिसका पूरा खर्चा सोनाली दीदी की कंपनी ने उठाया था।
रिसेप्शन पर हमें लगा कि दो अलग कमरे मिलेंगे, लेकिन उन्होंने हमें सिर्फ एक चाबी दी। पता चला कि कंपनी ने हमारे लिए एक ही कमरा बुक किया था क्योंकि हमने ‘वेलेंटाइन डे प्राइज’ जीता था। ऑफिस वालों को यह नहीं पता था कि मैं उनका भाई हूँ, और दीदी ने मुझे साथ सिर्फ इसलिए लिया था ताकि मैं उनके ‘फेक बॉयफ्रेंड’ का नाटक कर सकूँ।
जब हमें पता चला कि हमें एक ही कमरे में रात बितानी है, तो मैं हैरान रह गया। होटल के कमरे में पहुँचते ही दीदी ने अपना कोट उतार दिया। वो अपनी पतली टी-शर्ट में थी, जिसमें से उनके स्तन का उभार साफ़ दिख रहा था। वो बेड के किनारे इतने आराम से रिलैक्स होकर बैठ गई कि जैसे उन्हें मेरे साथ एक कमरे में रहने में कोई परेशानी ही ना हो। मैंने हाथ में चाबी ली और दीदी के पास जाकर उनसे पूछा, “दीदी, अब हम क्या करेंगे?”
दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर कहा, “परेशान मत हो गोलू, मुंबई में भी तो हम एक ही अपार्टमेंट में साथ रहते हैं, यहाँ भी हम एडजस्ट कर लेंगे।”
हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था और इतना लंबा सफर करने के बाद हम दोनों बहुत थक गए थे। इसलिए हमने एक ही बेड पर सोने का फैसला किया। उस दिन हम बहुत जल्दी सो गए क्योंकि हमें अगले दिन पूरी मनाली घूमनी थी।
अगली सुबह जब मेरी आँख खुली, तो सोनाली दीदी बाथरूम से बाहर आ रही थी। उन्होंने सिर्फ ब्लैक ब्रा और पैंटी पहनी थी, जो उनकी गोरी और चमकती त्वचा पर बहुत ही बोल्ड लग रही थी। उनके शरीर के हर कर्व और उभार को उन कपड़ों ने पूरी तरह से उभार रखा था। वो टॉवल से अपने गीले बाल सुखा रही थी, और उनके भीगे बालों से पानी की बूंदें रिसकर उनके उभरे हुए स्तनों के बीच की गहरी दरार में जा रही थी। कुछ गीली लटें उनके खुले गले और पसीने से भीगे हुए कंधों पर चिपकी हुई थी, जो उनके बदन की सुडौल बनावट को और भी कामुक दिखा रही थी।
जैसे ही उनकी नज़र मुझ पर पड़ी और उन्हें एहसास हुआ कि मैं जाग रहा हूँ, तो वो थोड़ी झिझक गई। शर्म के मारे उनका चेहरा लाल हो गया, लेकिन उन्होंने खुद को छुपाने की कोशिश नहीं की। वो बस तौलिये से अपने बाल पोंछने लगी और धीरे से बोली, “गुड मॉर्निंग गोलू।”
मैंने हल्की आवाज़ में कहा, “गुड मॉर्निंग दीदी।”
वो अभी भी तौलिये से अपने बाल सुखाने में मग्न थी। जैसे ही उन्होंने अपने हाथों को ऊपर उठा कर बालों को झटकना शुरू किया, उनके पूरे शरीर के लचकदार अंगों में एक थरथराहट सी दौड़ गई। उनकी इस हरकत से उनकी ब्रा के अंदर उनके भारी और सुडौल स्तन बुरी तरह से ऊपर-नीचे उछलने और हिलने लगे। उनकी पतली ब्लैक ब्रा उन स्तनों के भारीपन को संभाल नहीं पा रही थी, जिससे वो कप के अंदर बार-बार थिरक रहे थे।
मैं बिस्तर से उठा और बाथरूम में जाकर नहा लिया। जब मैं वापस कमरे में आया, तो सोनाली दीदी घूमने के लिए तैयार हो चुकी थी। उन्होंने भूरे रंग की फुल-स्लीव्स वाली टी-शर्ट पहनी थी, जो उनके शरीर पर बिल्कुल फिट थी और उनके फिगर को साफ़ दिखा रही थी। साथ में उन्होंने काली जींस और काले बूट्स पहने थे, जो उन पर बहुत अच्छे लग रहे थे। उनके लंबे बाल पीछे बंधे हुए थे, जिससे उनका चेहरा बहुत प्यारा लग रहा था। वो आईने के सामने खड़ी होकर बहुत ध्यान से अपने होंठों पर लाल लिपस्टिक लगा रही थी, और उन्हें उस हालत में देख कर मैं बस उन्हें देखता ही रह गया। वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।
उन्हें आईने के सामने लिपस्टिक लगाते हुए देख कर मेरी नज़रें उन्हीं पर टिक गई। उनके होंठों की उस नजाकत को देख कर मेरे मन में बस एक ही ख्याल आया—काश मैं उस पल अपने होंठ उनके होंठों पर रख पाता। मैं सोचने लगा कि उनके वो नरम होंठ अगर मेरे लंड को छुएंगे, तो कैसा महसूस होगा। यह ख्याल आते ही मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल होने लगी और मैं बस उन्हें बिना पलक झपकाए देखता रहा।
लिपस्टिक लगाते-लगाते सोनाली दीदी की नज़र आईने में मुझ पर पड़ी। उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा, “क्या देख रहे हो गोलू?”
मैं थोड़ा सकपका गया और झट से अपनी नज़रें हटाते हुए बोला, “कुछ नहीं दीदी।”
मैंने अपनी घबराहट छुपाने के लिए तुरंत अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए। आधे घंटे बाद हम तैयार होकर कमरे से बाहर निकले। जैसे ही हम लॉबी में आए, बाहर की ठंडी हवा सीधे मेरी खाल से टकराई। कमरे के अंदर हीटर चल रहा था जिससे वहां गर्माहट थी, लेकिन लॉबी में बहुत ठंड थी। होटल पूरी तरह लोगों से भरा हुआ था। हर तरफ इतनी भीड़ थी कि चलना भी मुश्किल हो रहा था।
मैंने काउंटर पर जाकर रिसेप्शनिस्ट से पूछा, “भाई, आज होटल में इतनी भीड़ क्यों है? क्या ये सब घूमने आए हैं?”
रिसेप्शनिस्ट ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “नहीं सर, आज होटल के पीछे एक शादी है, और दूल्हा-दुल्हन ने होटल में रुके हुए सभी मेहमानों को भी शादी में बुलाया है, इसलिए इतनी भीड़ है।”
यह सुन कर मुझे और सोनाली दीदी को हैरानी हुई कि हमें भी उस शादी में जाने का मौका मिलेगा। वहां हर तरफ शोर हो रहा था, लोग अच्छे कपड़े पहन कर शादी की तैयारियों में लगे थे और उस ठंडी हवा के बीच भी होटल में रौनक थी।
होटल से बाहर निकलते ही मनाली की तेज ठंड ने हमारा स्वागत किया। हर तरफ बर्फ की मोटी सफेद चादर बिछी थी, जो दूर-दूर तक चमक रही थी। हमने एक टैक्सी पकड़ी और मनाली के मेन पॉइंट पर पहुँच गए, जहाँ चारों तरफ भीड़ ही भीड़ थी। बर्फ से ढके उस ऊँचे पहाड़ पर हम दोनों मस्ती के मूड में थे। हम बर्फ पर चलते हुए भागने लगे, जिससे हमारे जूते बर्फ में अंदर तक धंस रहे थे।
एक जगह रुक कर सोनाली दीदी और मैंने मिलकर बर्फ का एक बड़ा सा पुतला बनाना शुरू किया। हम दोनों उस काम में पूरी तरह डूबे हुए थे, लेकिन तभी सोनाली दीदी ने चुपके से जमीन से बर्फ उठाई और एक गोला बनाकर सीधे मेरे ऊपर दे मारा। उनके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी। मैं भी कहाँ पीछे हटने वाला था, मैंने भी झट से बर्फ का गोला बनाया और उन पर फेंक दिया। फिर तो हम दोनों एक-दूसरे पर बर्फ के गोले बरसाने लगे। दीदी की हंसी और उनकी वो मस्ती भरी हरकतें देख कर मेरा मन उनके करीब रहने को और भी ललचा रहा था, और हम दोनों ठंडी बर्फ के बीच छोटे बच्चों की तरह बिना किसी फिक्र के खेल रहे थे।
जब हम खेलते-खेलते थक गए, तो वहीं बर्फ पर बैठ गए। ठंड इतनी ज्यादा थी कि हमारी सांसें बाहर निकलते ही धुएं की तरह हवा में तैर रही थी। थोड़ी देर की शांति के बाद, सोनाली दीदी ने मेरी तरफ देखा और धीरे से पूछा, “गोलू, आज सुबह तू मुझे इतनी गौर से क्यों देख रहा था?”
उनकी बात सुन कर मैं थोड़ा सकपका गया, पर मैंने हिम्मत जुटाई। मैंने धीरे से उनकी आँखों में देखते हुए कहा, “दीदी, क्योंकि आप आज सुबह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।”
मेरी बात सुन कर उन्होंने अपनी नज़रें शर्म से झुका ली। हम दोनों के बीच यह बात पूरी तरह साफ थी कि मेरा यह कहना सिर्फ एक भाई का अपनी बड़ी बहन के लिए नहीं था, बल्कि उस लड़की के लिए था जिसे मैं शुरू से ही पसंद करता आया हूँ।
शाम होते ही हम वापस होटल पहुँचे। होटल के गार्डन में दूधिया रोशनी जगमगा रही थी और शादी की रस्में पूरी रफ्तार से शुरू हो चुकी थी। मैं थकान की वजह से सीधा कमरे में जाकर आराम करना चाहता था, लेकिन जैसे ही मैंने मुड़ने की कोशिश की, सोनाली दीदी ने मेरा हाथ कस कर पकड़ लिया और मुझे खींचते हुए शादी के डेकोरेशन के बीच ले गई।
वहाँ का नज़ारा बहुत ही खूबसूरत था। दुल्हन ने एक शानदार सफेद गाउन पहन रखा था और दूल्हा काले ब्लेज़र में काफी स्मार्ट लग रहा था। कुछ देर बाद जब रस्में खत्म हुई, तो हम मंच की ओर गए। दीदी ने मुझे दूल्हा-दुल्हन से मिलवाया और फिर हम दोनों ने उनके साथ एक फोटो भी खिंचवाई।
इसके बाद हम उस मेज़ की तरफ बढ़े जहाँ खाने और ड्रिंक्स का इंतज़ाम था। मैंने अपने लिए प्लेट में कुछ खाना निकाला, लेकिन दीदी ने खाने के बजाय शराब की बोतल उठा ली। हम भीड़ से दूर एक कोने में रखी कुर्सियों पर जा बैठे। मैं अपना खाना खा रहा था और दीदी एक के बाद एक ड्रिंक्स ले रही थी। शराब के असर से उनके चेहरे पर धीरे-धीरे एक गहरी लाली छाने लगी और उनकी आँखें थोड़ी मदहोश सी होने लगी। वे पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत और निडर लग रही थी।
एक घंटे बाद जब हम अपने कमरे की ओर वापस लौट रहे थे, तो शराब के असर के कारण सोनाली दीदी के लिए सीधे खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा था। उनके कदमों की लड़खड़ाहट को थामने के लिए मैंने अपना सहारा दिया और धीरे-धीरे उन्हें संभालते हुए कमरे तक ले आया। कमरे में पहुँचते ही मैंने उन्हें बिस्तर पर आराम से लिटा दिया और उनके जूते उतार दिए ताकि उन्हें थोड़ी राहत महसूस हो, पर वे सोने के मूड में बिल्कुल नहीं थी।
उनकी बातों का सिलसिला लगातार चल रहा था। वे बिना रुके अपने काम के दबाव और इस ट्रिप के हर छोटे-बड़े लम्हे के बारे में बातें कर रही थी। पर उन बातों के बीच सबसे हैरान कर देने वाली बात यह थी कि वे बार-बार इस तरफ इशारा कर रही थी कि उन्हें मेरे मन की हर उलझन और मेरे उनके करीब आने की कोशिशों का पूरा अंदाज़ा है।
उनके बोलने का अंदाज़ ऐसा था जैसे वे जान-बूझ कर मेरे दिल की उन छिपी हुई भावनाओं को कुरेद रही हों जिन्हें हम दोनों अब तक अनकहा छोड़ आए थे। वह बिस्तर पर लेटी-लेटी मुझे अपनी गहरी नशीली नज़रों से देख रही थी। शराब का असर उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था और उनकी साँसों में एक अलग ही बेचैनी थी। फिर उन्होंने धीरे से अपनी आवाज़ में कहा, “गोलू, मुझे पता है कि तू मुझे पसंद करता है और तू मुझे चोदना चाहता है।”
शुरुआत में तो मैं बुरी तरह डर गया था और मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा था। लेकिन फिर मुझे ख्याल आया कि ये सब शायद शराब के नशे में कही गई बातें हैं, इसलिए मैंने चुप रहना ही बेहतर समझा। मेरी खामोशी देख कर वे आगे बोली, “गोलू, ऐसा मत कर, मैं तेरी बड़ी बहन हूँ और यह सब बहुत गलत है।”
उन्होंने एक लंबी सांस ली और फिर अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “अगर तू चाहता है, तो मैं तेरा लंड चूस सकती हूँ, पर इसके आगे कुछ और करने के बारे में सोचना बंद कर दे।”
मैंने उनसे कहा, “दीदी, ऐसी बातें मत करो, बस सोने की कोशिश करो।” मैं उन्हें आराम देने के लिए उनके करीब गया और उन पर कंबल ओढ़ाने की कोशिश करने लगा। लेकिन मेरी एक लापरवाही ने सब बदल दिया। जैसे ही मैं उनके पास पहुँचा, उन्होंने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे खींचकर अपने ऊपर गिरा लिया।
अब मैं पूरी तरह उनके शरीर के ऊपर था। हमारा फासला इतना कम था कि हमारे चेहरे आपस में लगभग टकरा रहे थे। उनकी नशीली और गर्म साँसें सीधे मेरे होंठों पर पड़ रही थी, जो मेरे होंठों को हर पल छूने के लिए बेताब थी। उनके होंठ मेरे होंठों से बस कुछ मिलीमीटर की दूरी पर थे। उस पल कमरे की हवा में एक गहरा तनाव था और उनके चेहरे की वह लालिमा और नज़दीकी मुझे पूरी तरह बेचैन कर रही थी। मेरा दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि मुझे डर था कि कहीं उन्हें मेरी धड़कनें सुनाई ना दे जाएँ।
उन्होंने अपनी नज़रों को मेरे चेहरे पर टिकाए रखा और फिर धीमी, लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा, “गोलू, मैं सच में तेरा लंड चूसना चाहती हूँ… क्या मैं ऐसा कर सकती हूँ?”
उस वक्त मेरा दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि मुझे लग रहा था उन्हें भी सुनाई दे रहा होगा। मैंने एक गहरी सांस ली और धीरे से कहा, “हाँ दीदी, तुम कर सकती हो।”
यह सुन कर वे हल्की सी मुस्कुराई। मैं उनके ऊपर लेटा हुआ था, तो उन्होंने अपनी कमर घुमा कर करवट ली। जैसे ही वे घूमीं, मैं उनके ऊपर से हट कर बिस्तर पर सीधा लेट गया। उन्होंने बिल्कुल भी देर नहीं की; वे फुर्ती से नीचे की तरफ आई और मेरे पैरों के बीच में बैठ गई।
मैंने जगह बनाने के लिए अपने पैर थोड़े और फैला दिए। वे अब मेरे सामने थी और उनकी आँखों में एक अलग ही बेताबी थी। उन्होंने बहुत धीरे-धीरे मेरी पैंट के बटन खोले और उसे नीचे कर दिया। फिर उन्होंने मेरा अंडरवियर भी नीचे खींच दिया, जिससे मेरा लंड बाहर आ गया और पूरी तरह उनकी नज़रों के सामने था।
वे एक पल के लिए रुकी और उसे देखने लगी। उनका चेहरा थोड़ा लाल हो रहा था। उन्होंने अपने कांपते हाथों से धीरे से उसे छुआ। जैसे ही उनकी मुलायम उंगलियों का स्पर्श मेरी खाल पर हुआ, मुझे पूरे शरीर में एक झनझनाहट महसूस हुई।
उन्होंने उसे धीरे से पकड़ कर महसूस किया, जैसे उन्हें यकीन ही ना हो रहा हो। वे मेरी आँखों में देखते हुए धीमी आवाज़ में बोली, “गोलू, मुझे पता ही नहीं था कि तेरा लंड इतना बड़ा और गरम है।”
उनकी सांसें अब तेज़ हो रही थी। उन्होंने अपना हाथ और थोड़ा आगे बढ़ाया और मेरी पूरी लंबाई को अपनी मुट्ठी में थाम लिया। उनका स्पर्श इतना कोमल था कि मुझे लगा जैसे मैं होश खो बैठूँगा। उन्होंने उसे ऊपर-नीचे सहलाना शुरू किया। उनके नाखून हल्के से मेरी खाल पर लग रहे थे, जिससे मुझे और भी ज्यादा मज़ा आ रहा था।
वे मेरी आँखों में देख रही थी, उनकी अपनी आँखें आधी बंद थी और वे गहरी साँसें ले रही थी। उन्होंने धीरे से अपना सिर आगे बढ़ाया और एक पल के लिए उसे हल्का सा चूमा। उनकी गर्म साँसें मेरे लंड को छू रही थी। उन्होंने फिर से मुझे नीचे से ऊपर देखा और बोली, “गोलू, ये बहुत ही ज्यादा कड़क हो गया है… क्या मैं इसे अपने मुंह में ले सकती हूँ?”
उनकी इस बात ने मुझे पूरी तरह बेकाबू कर दिया। मेरी आवाज़ गले में ही अटक गई और मैंने बस अपना सिर हाँ में हिला दिया।
जब मैंने अपना सिर हिला कर उन्हें हाँ कहा, तो वे और भी बेताब हो गई। उन्होंने अपना सिर और नीचे झुकाया और बहुत ही आराम से मेरे लंड को अपने होंठों के बीच ले लिया।
जैसे ही उनकी गरम और गीली जीभ मुझे महसूस हुई, मेरा बदन एक झटके से खिंच गया। मैंने अपने दोनों हाथों से बिस्तर की चादर को इतनी जोर से पकड़ा कि मेरी उंगलियां सफेद पड़ गई। उन्होंने उसे बहुत ही धीरे से, धीरे-धीरे अपने मुँह के अंदर लेना शुरू किया। उनकी जीभ की हर छोटी हरकत, उनकी गरम सांसें जो मेरे लंड से टकरा रही थी, और उनके मुलायम होंठों का वह भीगा हुआ दबाव—ये सब मुझे एक अलग ही दुनिया में ले जा रहा था।
वे उसे बहुत ही प्यार से और लय में अंदर-बाहर करने लगी। जब भी वे उसे और गहराई तक लेती, तो मेरी कमर अपने आप ऊपर उठ जाती। वे बीच-बीच में रुक जाती और नीचे से ऊपर की ओर देखती, उनकी आँखें आधी बंद थी और वे गहरी सांसे ले रही थी, जैसे वे इस चीज़ का मज़ा ले रही हों कि उनके मुँह में मेरे लंड के जाने से मुझे कितना अच्छा लग रहा है। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी और वे पूरी तरह इस काम में खो चुकी थी।
मैंने अपना एक हाथ उनके बालों में डाल दिया और उनके सिर को हल्का सा अपने पास दबाया ताकि वे और गहराई से उसे ले सकें। उनके मुँह से जो भीगी-भीगी आवाज़ें आ रही थी, उसने मुझे पूरी तरह पागल कर दिया था। वे अब और तेज़ी से, और भी ज्यादा जोश में उसे अपने मुँह में अंदर-बाहर कर रही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि अब मेरी धड़कनें बहुत तेज़ हो गई थी और मेरा शरीर उनके हर स्पर्श पर और ज़्यादा तड़प रहा है। उन्होंने रुक कर अपनी जीभ से मेरे लंड के निचले हिस्से को सहलाया और फिर से उसे पूरी गहराई तक अपने मुँह में ले लिया।
मैंने उनके बालों में हाथ फेरते हुए दबी और भारी आवाज़ में कहा, “दीदी, बहुत ही कमाल कर रही हो, बस ऐसे ही करती रह।”
मेरी बात सुन कर उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस अपना सिर और नीचे झुकाया और दोबारा अपनी जीभ से मेरे लंड के पूरे हिस्से को चाटा, फिर उसे पूरी गहराई तक अपने मुँह में ले लिया। वे अब बहुत ही जोश के साथ उसे चूसने लगी। उनकी जीभ की नोक बार-बार मेरे लंड के ऊपरी हिस्से पर रगड़ खा रही थी, जिससे मुझे बहुत ही तेज़ झनझनाहट महसूस हो रही थी।
उनकी ये तेज़ हरकतें मुझे पूरी तरह से पागल कर रही थी। उन्होंने अब अपने दोनों हाथों से मेरे लंड को जड़ से पकड़ लिया और उसे ऊपर-नीचे बहुत ही लय में खींचने लगी। मुझे लगा जैसे मेरी सारी नसों में एक करंट दौड़ रहा है। मैं बिस्तर पर अपनी पीठ को थोड़ा और ऊपर की तरफ मोड़ने लगा, क्योंकि उनका हर एक खिंचाव मुझे अपनी आखिरी हद के करीब ले जा रहा था। उन्होंने रुकने का नाम ही नहीं लिया, वे बस पूरी ताकत और जोश के साथ उसे अपने मुँह में अंदर-बाहर करती रहीं।
मैंने उनके बालों को कस कर पकड़ लिया और हाँफते हुए कहा, “दीदी, मैं बस अब आने वाला हूँ!”
अगले ही पल, मेरी कमर एक झटके के साथ ऊपर उठी और मेरे शरीर के अंदर से वह गर्मी महसूस हुई, जैसे मेरा सारा जोर उनके मुँह में बह रहा हो। मैंने महसूस किया कि कैसे मेरा सफ़ेद पानी उनकी जीभ और तालू से टकरा रहा था, और वे उसे रोकने की कोशिश के बिना पूरी तरह से अंदर लेती जा रही थी। उनका मुँह पूरी तरह भर चुका था, लेकिन वे उसे निगलने की कोशिश में जुटी रही।
वे उसे बड़ी गहराई से गले के नीचे उतारने लगी, जैसे वे उस मज़े का एक-एक कतरा लेना चाहती हों। उनके गले की हलचल साफ महसूस हो रही थी। कुछ बूँदें उनके होंठों के किनारों से बाहर निकल कर उनकी ठुड्डी पर फिसलने लगी। उन्होंने तुरंत अपनी उंगलियों से उन बूँदों को पोंछा और अपनी उंगलियों को चूस कर साफ कर दिया। फिर उन्होंने अपनी जीभ बाहर निकाली और अपने होंठों के चारों तरफ लगे बाकी सफ़ेद पानी को बड़े चाव से धीरे-धीरे साफ़ किया।
उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “ये बहुत ही टेस्टी था, गोलू।”
इतना कहते ही वे अपना सिर मेरे कंधे पर रखकर बिल्कुल मेरे पास आकर लेट गई। मैं उन्हें अपने पास लेटा देख बहुत खुश था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि आखिर सोनाली दीदी ने मेरे साथ ऐसा किया। मेरा मन खुशी से भर गया था, लेकिन उसी समय मेरे दिमाग में एक बात चल रही थी—मैं सोच रहा था कि कल सुबह जब उनका नशा उतरेगा और उन्हें याद आएगा कि उन्होंने क्या किया है, तो वे कैसा बर्ताव करेंगी? क्या वे इसे याद करके शर्म महसूस करेंगी या फिर सब कुछ पहले जैसा रहेगा?