पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-22
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
मौसी ने कमरे के पीछे वाला दरवाजा खुला ही छोड़ा हुआ था। मैं अंदर गया तो देखा मौसी सोफे पर बैठी थी – बिलकुल नंगी। मेरा अंदाजा बिलकुल सही था। मतलब अब एक और औरत अब मुझसे चुदाई करवाने के लिए तैयार थी।
मौसी का जिस्म भी एक-दम कड़क था – बिलकुल मम्मी के जिस्म की तरह। कमरे का माहौल बड़ा ही रोमांटिक बन रहा था। कमरे में पूरी लाइट थी और कड़क जिस्म वाली मेरी मौसी सोफे पर बैठी थी, बिना कपड़ों के – बिलकुल नंगी।
मौसी मम्मी से छोटी थी मगर मौसी का जिस्म मम्मी के जिस्म से ज्यादा भरा-भरा था – गदराया हुआ। मम्मी के मम्मों से बड़े बड़े मम्मे, मम्मी के चूतड़ों से बड़े-बड़े चूतड़। ऐसा जिस्म जिसे देख कर बड़े से बड़े ब्रह्मचारी का भी लंड खड़ा हो सकता था।
मौसी के इस तरह एक-दम से ही नंगा होने से मुझे बिलकुल भी हैरानी नहीं हुई। मम्मी की तरह मौसी की भी रगड़ाई वाली चुदाई नहीं हो रही थी और अब मौसी मम्मी, दिव्या और माधवी की चुदाई की कहानी सुन कर मुझसे चुदाई करवाना चाहती थी। मेरी चुदाई वाली कहानी सुनते-सुनते मौसी अपनी फुद्दी में उंगली तो कर ही चुकी थी – वो भी मेरे सामने।
समझ तो मैं गया ही था और तैयारी भी पूरे करके ही आया था, मगर फिर भी मैंने जल्दबाजी ना करते हुए नकली हैरानी के साथ पूछा, “मौसी आप और इस तरह? क्या बात है?”
मौसी बोली, “बात ये है धीरज, कि जो-जो भी तुमने जीजी, अपनी मम्मी की साथ किया अब वो मेरे साथ भी करो। अपना लंड मेरी फुद्दी में डालो और रगड़ो मेरी फुद्दी को दबा-दबा कर। मुझे भी जीजी की तरह की ही रगड़ाई वाली चुदाई चाहिए।”
फिर मौसी कुछ रुक कर बोली, “क्या बताऊं धीरज, साल भर से ऊपर हो चुका है जीजी की तरह मेरी भी साल भर से ढंग की चुदाई नहीं हो रही। जीजा जी की तरह तेरे मौसा का लंड खड़ा तो हो जाता है, फुद्दी में जाता भी है मगर सख्त नहीं हो पाता। फुद्दी की जो रगड़ाई के लिए लंड में जो सख्ती होनी चाहिए वो सख्ती लंड में होती ही नहीं और चुदाई का मजा ही नहीं आता। दूसरे धीरज बेटा मुझे गांड चुदवाने का भी शौक है – अब अगर लंड सख्त ही नहीं होगा तो गांड में जाएगा ही कैसे?”
“जीजा जी की तरह? जीजी की तरह मेरी भी साल भर से ढंग की चुदाई नहीं हो रही। जीजा जी की तरह तेरे मौसा का लंड खड़ा तो हो जाता है, फुद्दी में जाता भी है मगर सख्त नहीं हो पाता। फुद्दी की जो रगड़ाई के लिए लंड में जो सख्ती होनी चाहिए वो सख्ती लंड में होती ही नहीं और चुदाई का मजा ही नहीं आता।” मैं सोच रहा था मौसी को कैसे मालूम थी ये सारी बातें? क्या मम्मी ने बताई थी?
मगर उस वक़्त मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। एक नंगी औरत सामने चुदाई के लिए तैयार बैठे थी और मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और खड़े लंड के साथ मौसी के सामने जा कर खड़ा हो गया।
मौसी ने मेरा खड़ा लंड पकड़ते हुए कहा, “क्या मस्त लंड है, कितना लम्बा और मोटा। बड़ी किस्मत वाली हैं जीजी, जिनकी ऐसे लंड से चुदाई होती है।”
यह बोल कर मौसी ने मेरा लंड पकड़ा, एक बार लंड का चुम्मा लिया और लंड को मुंह में डाल लिया। जैसे ही मौसी ले लंड मुंह में लिया मैंने मौसी का सर लंड पर दबा दिया।
मौसी ने भी मेरे चूतड़ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मौसी मेरा लंड चूसने लगी। मौसी का लंड चूसने का तरीका मस्त था। मौसी ने खाली लंड का टोपा की मुंह में लिया हुआ था और ऐसे चूस रही थी जैसे लड़का-लड़की के मम्मों के निप्पल चूसता है। चूसने के साथ-साथ मौसी लंड को बीच में से पकड़ कर लंड अगर-पीछे कर रही थी। मेरा लंड एक-दम से ही सख्त हो गया। मस्ती में मैंने मौसी से कहा, “मौसी आप चिंता मत करो, मेरा लंड लगाएगा रगड़े आपकी फुद्दी में आपकी गांड मैं। मैं करूंगा आपकी मस्त चुदाई – मम्मी की तरह।”
मौसी ने एक सेकंड के लिए मुंह से निकाला और बोली, “धीरज बड़ा सख्त है तेरा लंड। मस्त रगड़े लगेंगे फुद्दी में पूरे एक साल के बाद।” मौसी मस्ती फिर से लंड चूसने लगी।
मैंने मौसी से कहा, “बस मौसी, चुसाई का मजा आ गया, चलो अब अपनी फुद्दी चुसवाओ।”
मौसी खड़ी होते हुए बोली, “बेटा अगले सात दिन सब कुछ करवाऊंगी तुझसे। फुद्दी भी चुदवाऊंगी, गांड भी चुदवाऊंगी, मुँह में भी निकलवाऊंगी और तेरे चूतड़ों का छेद चाट कर तुझे ऐसा मजा दूंगी जैसा मजा आज तक तुझे किसी ने नहीं दिया होगा – जीजी ने भी नहीं।”
जैसे ही मैं खड़ा हुआ मौसी ने मुझे बांहों में ले कर अपना मुंह खोल कर मेरे मुंह के साथ लगा दिया। मम्मी के साथ ये करने के बाद मैं समझ चुका था कि मुझे क्या करना था।”
मैंने अपनी जुबान मौसी के मुंह में डाल दी। मौसी मेरी जुबान चूसने लगी। फिर मौसी ने मेरी जुबान आपने मुंह में से निकाली और अपनी जुबान मेरे मुंह में डाल दी। अब मैं मौसी की जुबान चूस रहा था। इसमें भी अपना ही मजा था।
कुछ देर के बाद मौसी हटी और बोली, “आजा धीरज, मस्त मजा देती हूं तुझे फुद्दी चुदाई का – याद रखेगा बेटा तू भी कि कोइ फुद्दी चोदी थी तूने। चल आजा अब तुझ से फुद्दी चुसवाऊं।”
मौसी एक कुशल और पक्की चुदक्कड़ की तरह बेड के किनारे पर लेट गयी और चूतड़ों के नीचे तकिया लगा कर टांगें चौड़ी करके अपनी फुद्दी कि फांकें खोल कर बोली, “आजा मेरे राजा, ये रही तेरी मौसी की फुद्दी, और तेरी मौसी के चूतड़। चूस चाट, चोद जो तेरा मन चाहे वो कर। बस तू ये समझ तू इस रंडी औरत को सात दिनों के लिए रगड़ने के लिए पैसे खर्च करके लाया है, अब तू चाहे उसकी फुद्दी चोद, गांड चोद। तीन दिनों के लिए तू इस रांड का मालिक है। अब आजा मेरे राजा – अब और मत तरसा – देख ये रंडी तेरा लंड लेने के लिए मरी जा रही है इंतज़ार कर रही है।”
मौसी की बातें भी मम्मी की बातों जैसी ही थीं। बोलने में मम्मी और मौसी एक जैसी थीं। मगर मौसी तो ये सब बोलने में कुछ जल्दी ही शुरू हो गयी थी।
जिस तरीके से मौसी चुदाई से पहले ही ये सब बातें कर रहे थी, मैं समझ गया कि मौसी की आज कि चुदाई भी मौसी की बातों की तरह खुल कर होने वाली है। मौसी को चोदने का मजा कुछ अलग ही आने वाला है – मम्मी, दिव्या और माधवी की चुदाई से भी ज्यादा। ये सोचते ही मेरा लंड फटने को हो गया।
मैं नीचे बैठ गया और मौसी की फुद्दी और चूतड़ों का छेद चूसने चाटने लगा। मौसी की बातों से मैं समझ चुका था कि यहां शर्म की कोई जगह नहीं है। फुद्दी चाटते-चाटते मैं बीच बीच में भी बेशर्मों की तरह बोल रहा था, “देखती जा मेरी चुदक्कड़ मौसी क्या हालत करता हूं तेरी फुद्दी और तेरी गांड की।”
मौसी की फुद्दी भी मम्मी की फुद्दी की तरह नमकीन, खट्टे पानी से भरी पड़ी थी। इतना पानी तो दिव्या और माधवी की फुद्दीयों ने ही छोड़ा था जितना मौसी की फुद्दी छोड़ रही थी। लग रहा था मौसी चुदाई की मस्ती में पागल हुई पड़ी थी। जब मैं मौसी की फुद्दी का खूब सारा पानी चाट गया तो मैं थोड़ा और नीचे हुआ और मौसी के चूतड़ों का गहरा भूरा छेद चाटने लगा।
गांड का छेद अक्सर गुलाबी रंग का होता है, मगर गांड चुदवा-चुदवा कर लंड के रगड़ों के वजह से गुलाबी से भूरा हो जाता है, और फिर अगर और भी ज्यादा गांड चुदाई हो तो गांड की छेद का रंग गहरा भूरा हो जाता है। मम्मी की गांड का छेद भी अब तक गुलाबी ही था क्योंकि मम्मी या तो चुदवाती नहीं थी या फिर बहुत कम चुदवाती थी और दिव्या और माधवी की तो गांड मैंने ही चोदी थी पहली बार थी। मौसी की गांड के छेद के रंग से लग रहा था मौसी खूब गांड चुदवाती थी।
मैंने मौसी से पूछा, “मौसी लगता है काफी गांड चुदवाती रही हैं आप?”
ये सुन कर मौसी ने कहा, “हां धीरज चुदवाती तो हूं। असल में तो मेरी गांड तेरे मौसा ने शादी की पहली रात को ही चोद दी थी। उसके बाद गांड चुदाई का ये सिलसिला अब तक चल रहा है।”
इसके बाद तो मौसी अपने आप ही अपनी पहली रात की चुदाई की कहानी सुनाने। मौसी ने अपनी पहली रात की चुदाई की जो कहानी सुनाई वो चुदाई क्या वो तो जैसे पूरी चुदाई की पिक्चर ही थी।
टांगें उठा कर बेड पर लेटी-लेटी मौसी बोली, “कुछ ना पूछ धीरज, क्या-क्या हुआ था मेरे साथ मेरी शादी की पहली रात को। बड़ा तंग किया था तेरे मौसा ने उस रात को। शराब पी कर आय थे। चुदाई करते-करते तेरे मौसा का लंड ना तो ढीला हो रहा था और ना ही पानी छोड़ रहा था। सात आठ बार तो मेरी फुद्दी चोदी। मैं तो थक ही गयी थी, मगर तेरे मौसा थे कि मुझे छोड़ ही नहीं रहे थे। आखिर मैंने बोल ही दिया, “बस करिये जी, मुझे तो नीचे अब दर्द होने लगा है।”
“तेरे मौसा बोले, “कौशल्या, बड़ा मजा देती है तू। मजा आ गया आज तेरी फुद्दी चोद कर। बस एक आख़री बार गांड और चुदवा ले।”
“धीरज, मेरी हां ना का तो सवाल ही नहीं था। हम हिंदुस्तानी लड़कियों को यही सिखाया जाता है कि मर्द ने जो कह दिया उसके लिए ना नहीं करने चाहिए, और फिर हमारा तो और भी पुराना जमाना था। मैं कुछ नहीं बोली, बस लेटी रही। तेरे मौसा ने ही मुझे उठा कर सोफे पर उल्टा लिटा दिया। मेरे चूतड़ पीछे की तरफ थे। फिर उन्होंने मेरे चूतड़ चौड़े करके पहले मेरे चूतड़ चाटे फिर चूतड़ों के छेद के आस-पास और अंदर उंगली डाल कर कुछ लगाया और लंड गांड के छेद पर रख अंदर धकेल दिया। मुझे बहुत दर्द हुई। मेरी चीख निकल गई और मैं रोने लगी। मगर तेरे मौसा पर तो जैसे गांड चुदाई का भूत सवार था।”
मौसी अपनी शादी की पहली रात का किसा मुझे सुना रही थी, “धीरज मेरी फुद्दी की तरह ही मेरी गांड की रगड़ाई शुरू हो गयी। दर्द के मारे मैं मरी जा रही थी। मगर तेरे मौसा ने मेरी कमर इतने कस कर पकड़ी हुई थी जैसे एक बड़ा कुत्ता एक कुतिया को अपनी अगली टांगों में जकड़ लेता है और दीन-दुनिया से बेखबर कुतिया की फुद्दी में अपने दस इंच लम्बे लंड के ज़बरदस्त धक्के लगाता रहता है। कुत्ते को उस समय इस बात की कोइ परवाह नहीं होती की नीचे कुतिया के क्या हालत हो रही होगी। कुतिया की फुद्दी फट रही होंगे या उसमें से खून निकल रहा होगा। यही हाल मेरा भी था। नीचे लेटी मैं हिल भी नहीं पा रही थी। आधे घंटे के गांड चुदाई के बाद तेरे मौसा ने एक जोर की दहाड़ लगाई, “आह कौशल्य, मेरे जान, मेरी रानी, कौशल्या निकला मेरी जान, मजा आ गया। कौशल्या आह कौशल्या मस्त चुदाई हुई। आह आह आह कौशल्या मेरी जान मजा आ गया।”
“और इसके साथ ही तेरे मौसा के लंड के गर्म-गर्म पानी से मेरी गांड भर गयी। जैसे ही तेरे मौसा का लंड थोड़ा ढीला हुआ, उन्होंने लंड मेरी गांड में से निकाला। फार कपड़े भी नहीं पहने और वहीं बिस्तर पर लुढ़क गए। अगले ही पल वो खर्राटे भरने लगे। मैं भी बिस्तर पर लेट गयी। एक तो मेरी पहली गांड चुदाई। दूसरे तेरे मौसा ने नशे में बुरे तरीके से मेरी गांड चुदाई की थी। मेरी गांड में बहुत जलन हो रही थी। कुछ देर बाद मैंने हिम्मत की और मैं बाथरूम चली गयी। एक तो मेरी चुदाई देर रात तक हुई थी। ऊपर से गांड में हो रहे दर्द के कारण नींद भी नहीं आ रही थी, पता नहीं कितने बजे सोई मैं।”
“सुबह में देर से उठी तो तेरे मौसा नहा-धो कर कपड़े बदल कर सोफे पर बैठे हुए थे। मुझे जागा हुआ देख कर वो बाहर चले गए। थोड़ी ही देर में मेरी सास मेरे लिए चाय ले कर आ गयी और बिस्तर पर मेरे साथ ही बैठ गयी। पीछे तकिये के तरफ देखा तो उस पर खून लगा हुआ था। मेरी सास ने बिना कुछ कहे तकिये का कवर उतार लिया और लपेट कर अपने पास रख लिया।”
“जिस तरीके से मैं चुप बैठी हुई थी, मेरी सास दो मिनट में समझ गयी कि रात को क्या हुआ होगा। तेरे मौसा ने शराब पी कर मेरी चुदाई की थी और मुझे कुछ तकलीफ थी। मेरी सास ने तेरे मौसा की तरफ देखा और गुस्से से बोली, “मनोहर तूने शराब पी थी कल रात को?”
“तेरे मौसा की तो आवाज ही नहीं निकल रही थी। मेरी सास फिर वैसे ही गुस्से से तेरे मौसा को बोली, “शर्म आनी चाहिए तुझे, ये क्या कहीं भागी जा रही थी? जा बाहर।”
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