पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-21
चुदाई कहानी अब आगे-
आठ बजे खाना खा कर माधवी अपने कमरे में चली गयी। जाने से पहले “गुड नाईट मम्मी, गुड नाईट धीरज” बोलते हुए माधवी सलवार के ऊपर से अपनी फुद्दी पर हाथ फेरना नहीं भूली।
मौसी की पैनी नजरों से माधवी का मुझे देखते हुए फुद्दी छूना छुपा नहीं। मौसी ने तिरछी नज़र से मेरी तरफ देखा मगर बोली कुछ नहीं।
माधवी अब अपने कमरे में चली गयी थी। अब वो सुबह से पहले बाहर नहीं आने वाली थी। दिव्या भी ऐसा ही करती थी। एक बार खाना खा कर अपने कमरे में गयी तो सुबह ही बाहर आती थी।
माधवी के जाते ही हम दोनों – मैं और मौसी, खाना खा कर कॉफ़ी के मग लेकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। इस दौरान मौसी चुप ही रही। मौसी की ये चुप्पी मुझे परेशान सी करने लगी थी। मौसी बातूनी थी, इस तरह चुप रहने वालों में से वो नहीं थी।
कॉफ़ी पीते-पीते अचानक से मौसी ने मुझसे कहा, “धीरज एक बात पूछूं?”
मैंने कहा, “पूछिए मौसी।”
मौसी ने साफ़ ही पूछ लिया, “धीरज इस बार माधवी कुछ ज्यादा ही खुश है, गुडगांव कुछ अलग हुआ है क्या?”
मैं थोड़ा सकपकाया और बोला, “अलग मौसी? अलग क्या होना था?”
मौसी थोड़ी तल्खी के साथ बोली, “ये तो तुम बताओ धीरज, दिव्या और माधवी के अलावा तुम ही तो थी घर पर। ऐसा भी क्या हुआ है जो इस बार इतनी खुश है, चहक रही है? ऐसा कभी पहले तो नहीं हुआ।”
मैंने फिर कहा, “मौसी मैं क्या बताऊं? आप माधवी से ही पूछ लीजिये ना।”
मौसी बोली, “उससे भी पूछ लूंगी, पहले तुम तो बताओ।”
जब मैं चुप रहा और मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो पांच मिनट के बाद मौसी उठते हुए बोली, “धीरज मैं अभी आती हूं, मुझे एक फोन करना है।”
मौसी अपने कमरे में चली गयी और दरवाजा बंद कर लिया।
मौसी “अभी आती हूं” बोल कर गयी थी मगर पूरे आधे घंटे के बाद बाहर आयी। मैं भी सोच रहा था ऐसा भी मौसी ने कौन सा फोन करना था।
मौसी के आने तक मैं अपनी कॉफ़ी खत्म कर चुका था। मौसी ने आ कर और कॉफ़ी बनाई और एक मग मुझे दिया और एक खुद लेकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गयी।
कुछ देर चुप रहने के बाद मौसी बोली, “धीरज मैं सुधा जीजी से बात करके आयी हूं।”
मैंने बस इतना ही कहा, “मम्मी से?”
मौसी बोली, “हां, जीजी से।” ये बोल कर मौसी फिर चुप हो गयी।
मौसी बोली, “धीरज मौसी ने काफी कुछ मुझे बताया है, मगर ढके छुपे शब्दों में।”
मैंने हड़बड़ाते हुए पूछा, “तो मौसी मम्मी ने क्या बताया?”
मैं चुप ही था और मौसी के जवाब का इंतजार कर रहा था। इसके बाद तो मौसी ने जैसे बम्ब ही फोड़ दिया। मौसी साफ़ ही बोली, “धीरज मैंने जीजी से पूछा जीजी इस बार माधवी कुछ ज्यादा ही खुश है, गुडगाँव में कुछ अलग सा हुआ है क्या?धीरज, जब जीजी इस पर कुछ नहीं बोली तो मैंने साफ़ ही बोल दिया, “जीजी मुझे लग रहा है माधवी ने सेक्स किया है।”
“इस पर भी जब जीजी चुप रही तो मैंने कहा, “जीजी माधवी की सेक्स – चुदाई से कोइ एतराज नहीं। उसके उम्र की लडकियां सेक्स करती है। मैं सिर्फ इतना जानना चाहती हूं कि माधवी ने चुदाई किसके साथ की और क्या ये चुदाई माधवी की मर्जी से हुई – बिना किसी जोर जबरदस्ती के हुई? अगर ऐसा कुछ हुआ है तो मुझे बताओ?”
मौसी बोली, “धीरज जीजी ने बताया कौशल्या चुदाई तो दिव्या और माधवी दोनों की ही हुई है, वो भी मस्त बिना किसी दबाव के उनकी अपनी मर्जी से, और धीरज इस बारे में सब जनता है – तुम धीरज से बात करो।”
मौसी थोड़ी चुप हुई और फिर बोली, “धीरज अब तुम बताओ, ये सब चक्कर क्या है? जीजी क्यों मुझे कुछ बता नहीं रही? दिव्या की और माधवी की चुदाई हो गयी तो गयी। अब इसमें ऐसी कौन सी बात है जो जीजी मुझे नहीं बता रही और तुम मुझे बताओगे? अब तुम बताओ किसके साथ चुदाई है दोनों की?”
मैंने सोचा, बता तो मम्मी भी सकती थी, फिर उन्होंने बताया क्यों नहीं? मुझे इसका एक ही कारण समझ में आया। मैं इस वक़्त रोहिणी में था। अगर मम्मी कुछ बताती और मौसी मुझसे पूछती तो हो सकता था दोनों की – मेरी और मम्मी की बातें आपस में मेल ना खाती। और फिर बहुत सी बातें ऐसी थी जो मम्मी किसी को भी बताना नहीं चाहती थी – जैसे मेरी दिव्या और मम्मी कि इकट्ठे चुदाई। मम्मी का दिव्या के साथ समलैंगिकों वाला काम। इसलिए मम्मी ने सोचा होगा की मौसी को चुदाई का शक तो हो ही गया यही तो फिर मैं ही बताऊं तो ठीक रहेगा।
मैंने कहा, “मौसी दिव्या और माधवी की चुदाई हुई है और मेरे साथ हुई है। मगर मौसी ये एक-दम से नहीं हो गयी। एक लम्बी कहानी है, और ये समझ लीजिये कि हालात ही ऐसे बन गए कि मुझे इन दोनों को चोदना ही पड़ गया।”
मौसी बिना किसी हड़बड़ाहट कि बोली, “धीरज ये शक तो मुझे तभी हो गया था जब माधवी इतना चहक रही थी। तुम्हें देख-देख कर बार बार अपनी फुद्दी छू रही थी। मैं तो तभी समझा गई थी कि दोनों को चोदने वाले तुम हो। अब मुझे अपनी चुदाई की “लम्बी कहानी” सुनाओ, बिना कुछ छुपाये – बिना किसे लाग-लपेट के। ऐसा भी क्या हो गया की तुम्हें अपनी बहनों को चोदना ही पड़ गया? और ये “चोदना ही पड़ गया”, क्या मतलब है इसका?”
मौसी की इस बात से मैं इतना तो समझ गया की अब बात को और नहीं छुपाया जा सकता। मौसी का सवाल एक-दम सटीक था कि ऐसा भी क्या हो गया कि तुम्हें अपनी बहनो को चोदना ही पड़ गया?”
मैंने कहा, “ठीक है मौसी, कहानी लम्बी है लेकिन जब तक ये ना पता चले कि ये शुरू कैसे हुई, तब तक आपको बात समझ नहीं आएगी कि ये क्यों और कैसे हो गया।”
मौसी मेरी तरफ देखने लगी और मेरे आगे कि बात बताने का इंतज़ार करने लगी।
मैंने हिम्मत बटोरी और बोलना शुरू किया, “मौसी ये बात तब की है, जब कुछ महीने पहले हमारे कालेज पूरे सात दिनों के लिए बंद थे और दिव्या यहां आपके पास आयी हुई थी। पापा भी किसी काम से एक हफ्ते के लिए कहीं बाहर गए हुए थे।”
मैं मौसी को बता रहा था, “मौसी मेरा गुडगाँव में छुट्टियों का पहला ही दिन था। रात हुई तो खाना खा कर मैं ऊपर अपने कमरे में बैठा टीवी देख रहा था। मेरा कमरा मम्मी पापा के कमरे के साथ वाला है। मौसी तभी मम्मी आयी और ज़रा सा दरवाजा खोल कर बोली, “धीरज बेटा जरा बात सुनना।”
“मैं मम्मी के कमरे में चला गया। देखा तो मम्मी बिस्तर पर लेटी हुई थी – अजीब सी ड्रेस पहन कर। नीचे तो चलो सलवार थी, मगर ऊपर ढीली-ढाली छोटी सी कुर्ती। कुर्ती मम्मी का पूरा पेट भी नहीं ढक पा रही थी।”
“मुझे आया देख मम्मी बोली, “धीरज जरा मेरी पीठ की मालिश कर दे और जरा सी कमर दबा दे थोड़ी दुःख सी रही है।” ये बोल कर मम्मी उल्टी हो गयी और कुर्ती जरा सी ऊपर कर दी। मौसी मैं मम्मी के पास ही बिस्तर पर बैठ गया और हल्के हाथों से मम्मी की पीठ पर मालिश करने लगा।”
इसके बाद मेरे और मम्मी के बीच जो भी हुआ, जैसा भी हुआ – मम्मी कांधे चूतड़ और आधी फुद्दी नंगा करना। मुझे चुदाई के लिए उकसाना। मेरा मम्मी के चूतड़ों में और फुद्दी में उंगली करना। मम्मी का पापा का लंड सख्त ना होने की बात करना। मेरी और मम्मी की चुदाई होना और दिव्या का छुप कर मेरी और मम्मी की चुदाई होते हुए देख लेना। फिर दिव्या का मुहसे फुद्दी चुसवाना, मुझे अपनी चुदाई के लिए कहना – मैंने जस का तस जो-जो भी जैसे भी हुआ था सब कुछ मौसी को बता दिया।
मैं अगर कुछ नहीं बताया तो वो था मम्मी और दिव्या के बीच पनप चुका समलैंगिकों वाला रिश्ता और दिव्या और मेरी मम्मी की एक-दूसरे के सामने हो रही चुदाई।
सब कुछ बताने के बाद मैं बोला, “बस मौसी ये है पूरी कहानी। इसके बाद दिव्या और मेरी चुदाई हो गयी और दिव्या ने माधवी को भी मुझसे चुदवा दिया। मौसी अब सब कुछ आपके सामने है। अब आप ही बताएं मैं करता भी तो क्या करता? मम्मी की चुदाई से शुरू हुई ये कहानी दिव्या की चुदाई से होते हुए माधवी कि चुदाई तक पहुंच गयी।”
मौसी को सब साफ़-साफ़ बता कर मैंने कहा, “मौसी ये है पूरी कहानी। अब तो आपको अपने सवाल का जवाब मिल गया?”
तब तक पता नहीं मौसी कब अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर अपना हाथ सलवार के अंदर डाल चुकी थी। मेरी बात खत्म होते ही मौसी ने मेरे सामने ही सलवार में से अपना हाथ निकला नाड़ा बांधा और बड़े ही धीमी आवाज में बोली, “धीरज, जो प्रॉब्लम तेरे पापा – मतलब यश जीजा जी को है। वही प्रॉब्लम तेरे मौसा मनोहर की भी है। पिछले एक साल से वो भी मेरे साथ कुछ नहीं कर पा रहे।”
मुझे मौसी के बात पर हैरानी हुई और मैंने बस इतना ही कहा, “कमाल है मौसी जी – पापा को भी और मौसा जी को भी?”
मौसी बोली, “हां धीरज, दोनों को एक ही तरह की समस्या है।”
मगर इससे भी ज्यादा मौसी का मेरी बातें सुनते-सुनते अपना हाथ सलवार में डालना और फिर मेरी बात खत्म होने पर मेरी सामने ही सलवार में हाथ निकलना और मेरी सामने ही नाड़ा बाँधना मुझे हैरान कर रहा था। मुझे लगा मम्मी की ही तरह अब मौसी भी मुझे चुदाई की लिए उकसा रही थी। मौसी भी मेरा लंड अपने फुद्दी में लेना चाहती थी।
इतना सोचना था कि मेरी लंड में भी हरकत शुरू हो गयी। मैंने लंड पायजामे में ठीक से बिठाते हुए पुछा, “तो फिर मौसी अब आप क्या करेंगी?”
मौसी उठते हुए बोली, “अब ये कि तुम पहले अपने कमरे के पिछले बालकनी की तरफ खुलने वाले दरवाजे से हमारे कमरे में आ जाओ, फिर मैं देखूंगी क्या करना है।”
ये बोल कर मौसी मेरा जवाब सुने बिना उठी और अपने कमरे में चली गयी। अब आगे चलने से पहले, मौसा के घर का भूगोल समझना जरूरी है।
मौसा के घर में कुल आठ कमरे हैं। चार कमरे और किचन ऊपर की मंजिल पर है, चार कमरे और एक बड़ा सा स्टोर नीचे के मंजिल पर हैं। नीचे तो कमरों के आगे-पीछे बरामदा है – ऊपर के कमरों के आगे बरामदे हैं और पीछे के तरफ दो बालकनियां हैं। एक बालकनी तो माधवी के कमरे और ड्राईंग रूम के पीछे है, और दूसरी बालकनी दूसरे दो कमरों के पीछे है, जिनमें एक कमरा मौसा मौसी का है और दूसरा एक तरह का गेस्ट रूम है जिसमें मैं रुका हुआ था। इन सब कमरों के पीछे का दरवाजा बालकनी में खुलता है। मतलब माधवी पीछे के दरवाजे से ड्राईंग रूम में जा सकती है और गेस्टरूम और मौसी के कमरों के पीछे एक दरवाजों में से एक दूसरे के कमरों में आया जाया जा सकता है।
जब मौसी बोली, “अब ये कि तुम पहले अपने कमरे के पिछले बालकनी की तरफ खुलने वाले दरवाजे से हमारे कमरे में आ जाओ, फिर मैं देखूंगी क्या करना है”, तो मैं तभी समझ गया कि अब क्या होने वाला था – मतलब अब एक और औरत अब मुझसे चुदाई करवाने के लिए तैयार थी। मेरी मम्मी की छोटी बहन – मेरी कौशल्या मौसी।
मैंने चुदाई की पूरी तैयारी कर ली। मैंने अपना कुरता पायजामा उतार कर अंडरवियर और बनियान उतार दिए और कुर्ता पायजामा वापस पहन कर मैं पीछे के दरवाजे से मौसी के कमरे के तरफ चल पड़ा।
मौसी ने कमरे का दरवाजा खुला ही छोड़ा हुआ था। मैं अंदर गया तो देखा मौसी सोफे पर बैठी थी – बिलकुल नंगी। मेरा अंदाजा बिलकुल सही था। मतलब अब एक और औरत अब मेरा लंड अपनी फुद्दी में लेने की लिया – मुझसे चुदाई करवाने के लिए तैयार थी।
मौसी का जिस्म भी एक दम कड़क था – बिलकुल मम्मी के जिस्म की तरह।
कमरे का माहौल बड़ा ही रोमांटिक बन रहा था। कमरे में पूरी लाइट थी और कड़क जिस्म वाली औरत सोफे पर बैठी थी बिलकुल नंगी।
[email protected]
अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-23