पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-20
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
माधवी की चुदाई हो चुकी थी। मस्त मजा लिया था माधवी ने भी – दिव्या की तरह ही।
जैसे ही माधवी जरा सी ढीली हुई, मैंने अपना लंड माधवी की फुद्दी में से निकाल लिया और सोफे पर बैठी दिव्या के पास चला गया। मैंने दिव्या से कहा, “चल दिव्या यहीं उल्टी हो जा सोफे पर, तेरी गांड चुदवाने की इच्छा आज पूरी करूं।”
दिव्या की गांड चुदाई-
दिव्या उल्टी हो कर चूतड़ ऊपर करके लेट गयी। मैं पापा की शराब वाली अलमारी के पास गया और उस दिन की ब्लैंन्डर प्राइड की खुली बोतल ले आया। आज मुझे इसकी जरूरत पड़ने वाली थी। मैंने अभी चार बार माधवी को मजा देना था और एक बार दिव्या की गांड और एक बार फुद्दी रगड़नी थी। बोतल में से मैंने नीट ही तीन घूंट चढ़ा लिए।
दिव्या के मुलायम चूतड़ देख कर मुझे तो मजा ही आ गया। मैंने दिव्या की चूतड़ खूब चूसे चाटे काटे। चूसने चाटने की मस्ती की बाद, मैंने जैल दिव्या की गांड के छेद के अंदर और अपने पूरी लंड पर लगा दी।
दो उंगलियों पर जैल लगा कर मैंने दोनों उंगलियां दिव्या की गांड में डाल दी। उस दिन जब दिव्या को चोदा था, उस दिन थूक लगी उंगलियां दिव्या की गांड में नहीं जा पाई थी। मगर जैल की चिकनाई ने अपना काम कर दिया और उंगलियां गांड में पूरी चली गयी।
इसके बाद तो बस लंड गांड में डालना था। मैंने लंड दिव्या की गांड की छेद पर रखा और अंदर धकेला। लंड थोड़ा गया तो सही, पर छेद टाइट ही था। मैं थोड़ा रुक गया और लंड को अपनी जगह बनाने दी। फिर मैंने लंड एक बार बाहर निकाला और जैल थोड़ी और लगा दी। इसके बाद फिर से लंड दिव्या की गांड की छेद पर रखा और अंदर धकेला। इस बार लंड आधा अंदर चला गया।
मैं एक बार और रुका और लंड को फिर से अपनी जगह बनाने दी। मैंने लंड बाहर निकाला। फिर से जैल क्रीम दिव्या की गांड पर लगाई और धीरे-धीरे पूरा लंड दिव्या की गांड में अंदर डाल दिया। लंड पूरा दिव्या की गांड में बैठ गया, टट्टों तक।
मैंने दिव्या से कहा, “ले दिव्या, लंड तो पूरा जा चुका गांड में।”
दिव्या ने सर पीछे करके कहा, “धीरज, सच में पूरा चला गया है?”
मैंने कहा, “दिव्या तो खुद हाथ लगा की देख ले टट्टों तक अंदर है लंड, नहीं तो माधवी को बुला कर पूछ ले।”
दिव्या ने हाथ पीछे करके लंड टटोला। दिव्या के हाथ में लंड नहीं टट्टे आये तो दिव्या बोली, “कमाल है धीरज, तेरा इतना लम्बा लंड गांड में पूरा चला गया? चल अब कर दे चुदाई गांड की, मैं अपनी फुद्दी का दाना रगड़ कर मजा लेती हूं।”
मैने दिव्या की कमर पकड़ी और दिव्या की गांड चोदनी शुरू कर दी। दिव्या की गांड चुदाई देखने माधवी भी उठ बिस्तर से कर आ गई और सोफे के पास ही खड़ी हो गयी।
माधवी बड़े गौर से मेरा का लंड दिव्या की गांड के अंदर-बाहर होते हुए देख रही थी। तभी माधवी ने अपनी एक उंगली और अंगूठे में लंड को हल्के से पकड़ लिया। जैल क्रीम के कारण लंड माधवी की उँगलियों में भी फिसल रहा था।
तभी माधवी, ने सिसकारियां लेनी शुरू कर दी, “आह धीरज ऐसा लग रहा है, तुम्हारा लंड मेरी गांड के अंदर बाहर हो रहा है, आह दिव्या, बड़ा मजा आ रहा है।” माधवी ने मेरा लंड छोड़ा और दिव्या के चूतड़ों के बीच हाथ फेरने लगी। माधवी चूतड़ों में हाथ भी फेरती जा रही थी साथ में आह आह भी करती जा रही थी।
तभी दिव्या ने पीछे की तरफ सर किया और माधवी के तरफ देखती हुई बोली, “क्या हुआ माधवी, फुद्दी फिर से गरम हो गयी क्या?”
माधवी बोली, “दिव्या मेरा तो गड चुदवाने का मन होने लगा है। मुझे भी गांड चुदवानी है।”
दिव्या बोली, “माधवी तो इसमें इतना क्या सोचने वाली बात है? तू भी ले ले धीरज का लंड अपनी गांड। हम दोनों ही चुदवायेंगी गांड। आजा तू भी मेरे पास ही लेट जा। तू भी लेले धीरज का लंड अपनी गांड में।”
माधवी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “धीरज लेट जाऊं? चोद दोगे अभी?”
मैंने कहा, “लेट जा मेरी जान माधवी, तू भी लेट जा चूतड़ उठा कर। दो दो कुत्तियां और एक कुत्ता मजा आ जाएगा गांड रगड़ाई का मुझे भी।”
माधवी ने भी देर नहीं की और दिव्या के साथ ही वो भी लेट गयी। दो-दो गोल-गोल मुलायम चूतड़, मेरा लंड एक-दम से और भी ज्यादा सख्त हो गया। मैंने दिव्या से कहा, “दिव्या निकलता हूं तेरी गांड में से लंड, तू भी ऐसे ही लेटी रहना, आज दोनों के गांड चोदूंगा।”
दिव्या बोली, “ठीक है धीरज डाल अपना लंड इस माधवी की टाइट गांड में, दे इसको भी मजा।”
दिव्या की साथ-साथ माधवी की भी गांड चुदाई-
मैंने लंड दिव्या की गांड में से निकाला और माधवी के पीछे चला गया। जो कुछ मैंने दिव्या की गांड चोदने से पहले दिव्या के साथ किया था। क्रीम लगा कर पहले एक उंगली डाली थी गांड में, फिर दो डाली थी, फिर लंड का टोपा बिठाया था फिर थोड़ा रुका था – मतलब जो भी मैंने दिव्या की गांड के साथ किया था, वही सब उसने माधवी की गांड के साथ किया और जल्दी ही उसका लंड माधवी की गांड में भी टट्टों तक बैठ गया।
मैंने माधवी को कहा, “ले मेरी कुतिया, ले लिया तूने भी मेरा लंड अपनी गांड में पूरा का पूरा। अब तैयार हो जाओ दोनों कुत्तियां चुदने के लिए।” मैं ये सब इस लिए बोल रहा था क्योंकि मुझे दिव्या ने कहा था कि चुदाई के दौरान ये सब बोलने, सुनने में उन्हें बड़ा मजा आता है।
माधवी ने सर पीछे किया और बोली, “चोद भी अब साले। आज तो हम आयी ही हैं तेरा लंड आगे, पीछे, मुंह में लेने के लिये।”
मम्मी और दिव्या तो बोलती ही थी, माधवी भी खूब बोल रहे थी। मैंने बारी-बारी से दिव्या और माधवी की मस्त गांड चुदाई की। दोनों ने अपनी फुद्दी में उंगली करके फुद्दी का मजा लिया। जब दोनों को मजा आ गया तो मैंने लंड गांड में से निकाला और बोला, “ले दिव्या, तुम्हारी दोनों की गांड चुदाई की इच्छा भी पूरी हो गयी। अब माधवी की फुद्दी में लंड का गर्म चिकना पानी डालने के बारी है।”
मैंने माधवी से कहा, चल माधवी एक बार और लेट जा बिस्तर पर, अब दूंगा तुझे जन्नत का मजा। अब डालूंगा तेरी फुद्दी में अपने लंड की मलाई।”
माधवी और दिव्या दोनों सीधी हो गयी। दिव्या माधवी से बोली, “जा माधवी, अब ले असली चुदाई का मजा, जिस मजे के लिए लड़कियां मरती हैं।”
माधवी उठी और बिस्तर पर लेट गयी और खुद ही अपने चूतड़ों के नीचे तकिया लगा लिया। लड़कियां अब चुदाई करवाने में उस्ताद हो चुकी थी – अब उनको पता था कैसे असली चुदाई का मजा आता है।
मैं गया और माधवी की फुद्दी में लंड डाल कर माधवी को चोदने लगा। माधवी को एक मजा आ गया और जैसे ही दूसरी बार माधवी की फुद्दी ने पानी छोड़ा, मेरे लंड का भी पानी निकल गया। जैसे ही मेरे लंड में से पानी निकल कर माधवी की फुद्दी में गया, माधवी जोर से बोली, “दिव्या निकला धीरज का भी – जा रहा है मेरी फुद्दी में। आह धीरज मजा ही आ गया।”
बस अगले दो हफ्ते तो दिव्या और माधवी की मस्त चुदाई हुई। दोनों खूब मजे लेती थी। मेरे लंड में से एक दिन में एक बार ही पानी निकलता था। बारी-बारी से मैं दिव्या और माधवी की फुद्दीयों मैं पानी निकालता था।
दिव्या और माधवी ने चुदाई में कोइ कसर नहीं छोड़ी। आगे, पीछे, मुंह में, सब जगह लंड लिया और सब जगह लंड का पानी भी छुड़ाया। दो-दो जवान फुद्दीयां चोदते-चोदते मेरी हालत तो ये थी कि मेरा लंड खड़ा सा ही रहता था। अगर मुझे रोज़ फुद्दी नहीं मिलती थी चोदने के लिए, तो मुझे नींद ही नहीं आती थी। लेकिन दिव्या और माधवी ने खूब साथ दिया मेरा। खूब चुदाई करवाई।
रात को चुदाई के बाद हम नंगें ही सो जाते थे। सुबह अगर मेरी नींद जल्दी खुल जाती थी तो दो-दो नंगी लड़कियों बगल में लेटे देख कर मेरा लंड एक-दम खड़ा हो जाता था। उस वक़्त चुदाई तो नहीं होती थी, मगर मैं जब तक दोनों कि फुद्दीयां चूस चाट नहीं लेता था, मुझे चैन नहीं आता था।
और ये दोनों मेरी बहने ही कौन से कम थी। दोनों को मेरे मुंह में अगल बगल खड़े हो कर पेशाब करने में मजा आता था। दोनों टांगें चौड़ी करके मेरे मुंह में पेशाब करती और एक-दूसरे के तरफ देखती हुई हंसती। सब से ज्यादा मजा उन्हें मेरे टट्टे चूसने में आता था। मेरे टट्टे पूरे मुंह में लेकर दस-दस मिनट तक चूसती रहती थी।
ये टट्टे चूसने वाला काम – ऐसा तो अब तक मम्मी ने भी नहीं किया था। तेरह दिन ऐसे ही मस्ती में गुजर गए। मम्मी पापा भी वापस आ गए। अब मुझे माधवी को रोहिणी छोड़ने जाना था। मौसा जी का भी फोन आया था कि उनका अकाउंटेंट छुट्टियों पर था और उनका साउथ का ट्रिप लगना था। उन्हें दिनों कुछ मॉल जाना था और उस मॉल की नकद पेमेंट आनी थी। मौसा जी चाहते थे कि मैं अकाउंटेंट के आने तक वहीं ही रूकूं और बवाना की फैक्ट्री में आने वाली पेमेंट लूं।
मुझे इसमें कोइ एतराज नहीं था। मेरी तो छुट्टियां ही चल रही थी। मैं माधवी को ले कर रोहिणी रवाना हो गया। पूरा रास्ता माधवी चहकती रही। माधवी कभी अपनी फुद्दी को हाथ लगाती और कभी मेरे लंड को। कम से कम दस बार तो माधवी ने बोला, “धीरज यार चुदाई का मजा आ गया।”
रोहिणी पहुंचे तो मौसा जी फैक्ट्री जा चुके थे। मौसी जी घर पर ही थी। माधवी तो जैसे चुदाई की मस्ती में खुशी से पागल ही हुई पड़ी थी। माधवी का चहकना बंद ही नहीं हो रहा था।
मौसी जी से रहा नहीं गया। मौसी जी बोली, “क्या बात है माधवी बड़ी खुश लग रही हो?”
माधवी वैसे ही चहकते-चहकते बोली, “हां मम्मी, इस बार खूब मजे किये मैंने और दिव्या ने।”
ये कहते-कहते माधवी ने अपनी फुद्दी पर हाथ फेर लिया। ये बात मुझसे छुपी नही रही – मौसी जी से भी नहीं छुपी रही होगी।
मौसी जी ने एक बार मेरी तरफ देखा और बोली, “अच्छा? खूब मजे किये तुमने और दिव्या ने? और धीरज भी तो था वहां।”
माधवी ने अजीब से नज़रों से मेरी तरफ देखा और बोली, “हां मम्मी धीरज भी था।”
और ये बोल कर माधवी हंस भी दी। तभी मुझे मम्मी की वो बात याद आ गयी जब उन्होंने कहा था कि लड़की अपनी पहली पहली चुदाई के बाद ऐसे चहकती है – ऐसे खुश होती है कि औरतें तो देखते ही जान जाती हैं कि लड़की मस्त चुदी है।
पक्की बात है जिस तरीके से माधवी उछल कूद कर रही थी खुश हो रही थी – चहक रही थी – मौसी भी समझ गई होगी कि माधवी की चुदाई हुई थी। बस इसके बाद तो मौसी सीरियस ही हो गयी।
मैंने मौसी से पूछा, “मौसी, मौसा कुछ बोल कर गए हैं?”
मौसी ने बड़े ही अनमने ढंग से कहा, “हां बोल रहे थे कि धीरज आये तो उसे फैक्ट्री भेज देना, माल की डिलीवरी देगा और पेमेंट ले लेगा।”
मैंने कहा, “ठीक है तो मौसी मैं चलता हूं।”
मौसी ने बस इतना ही कहा, “ठीक है तो मौसी चलता हूं।” साफ़ पता चल रहा था की मौसी का दिमाग कहीं और था।
इसके बाद मैं फैक्ट्री के लिए निकल गया। मौसा जी ने मुझे पेमेंट का सारा काम समझा दिया। काम कुछ ख़ास नहीं था। सब कुछ पहले से तय था। सुपरवाईज़र सब जानता था। बस मुझे डीलरों से नकदी लेनी थी और माल देना था।
शाम को हम घर के लिए रवाना हो गए। अगले दिन सुबह मौसा जी की फ्लाइट थी। घर पहुँच कर मौसा जी ने जाने की तैयारी की और हम जल्दी खाना खा कर सो गए।
अगली सुबह जब मैं उठा तो मौसा जी जा चुके थे।
दस बजे मैं तैयार हो कर फैक्ट्री के लिए रवाना हो गया। उस दिन दो पेमेंट होनी थी – कोइ दस लाख की। शाम को मैं घर लौटा और रुपयों से भरा बैग मौसी को दे दिया। मौसी अभी भी चुप-चुप ही थी। मुझे लग रहा था की मौसी को माधवी की चुदाई की हल्की से भनक तो हो गयी थी। माधवी जिस तरीके से उछल-कूद कर रही थी वो और दिनों से कुछ तो अलग था।
इसके बाद रात तक कोइ ख़ास बात नहीं हुई। मुझे लग रहा था मौसी मुझसे कुछ कहना चाहती थी, मगर माधवी के सामने कुछ कह नहीं पा रही थी।
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